चुनावी बांड रद्द, फिर भी चंदा बटोरने के मामले में बीजेपी नंबर वन, 9 ट्रस्टों ने छप्पर फाड़कर लुटाए इतने करोड़ रुपए

चुनावी बॉन्ड को सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिया है लेकिन एक रिपोर्ट सामने आई है जिसमे यह पता चला है कि किन-किन पार्टियों को सबसे ज्यादा चंदा मिला है। नंबर 1 पर बीजेपी है और 9 चुनावी ट्रस्टों ने इस पार्टी पर छप्पर फाड़कर रुपए लुटाए हैं।
तस्वीर में एक तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, दूसरी तरफ पैसा
चुनावी ट्रस्ट से चंदा बटोरने के मामले में बीजेपी नंबर वन X
Reviewed By :
Published on
Updated on
5 min read

Summary

  • 2024–25 में बीजेपी को ₹6,000 करोड़ से ज़्यादा का चंदा मिला, जो कुल राजनीतिक फंडिंग का सबसे बड़ा हिस्सा है।

  • चुनावी ट्रस्टों से मिले चंदे का 60–82 प्रतिशत अकेले बीजेपी के खाते में गया।

  • कांग्रेस समेत विपक्षी दलों को मिला चंदा बीजेपी की तुलना में कई गुना कम रहा।

भारत में जब-जब चुनाव आता है, तो राजनीतिक दलों के दिल की धड़कने बढ़ जाती है। इसके साथ ही एक चीज जो है वो काफी चर्चा में आ जाता है और वो है चुनावी बॉन्ड (Electoral Bond)। लोकतंत्र की वो प्रक्रिया जहाँ जनता जनार्दन होती है, लेकिन इस प्रक्रिया में चंदा राजनीतिक दलों की ज़रूरत माना जाता है। हालांकि, कई बार ऐसा हुआ है, जब इसके स्रोत और पारदर्शिता पर लगातार सवाल उठे हैं।

ये चंदा कौन देता है? कितना देता है और चंदा देने वाला बदले में क्या उम्मीद रखता है। देश में जब भी चुनाव होते हैं, तो ये सवाल उठते ही हैं। पिछले कुछ सालों में चुनावी चंदे से जुड़े नियमों, चुनावी बॉन्ड और कॉर्पोरेट फंडिंग ने राजनीतिक बहस को और तेज़ कर दिया है। चुनावी चंदा अब सिर्फ पैसा नहीं, बल्कि लोकतंत्र की सेहत से जुड़ा मुद्दा बन चुका है।

चुनावी बॉन्ड (Electoral Bond) को सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिया है लेकिन एक रिपोर्ट सामने आई है जिसमे यह पता चला है कि किन-किन पार्टियों को सबसे ज्यादा चंदा मिला है। आपको यह जानकर हैरानी होगी कि नंबर 1 पर बीजेपी है और 9 चुनावी ट्रस्टों ने इस पार्टी पर छप्पर फाड़कर रुपए लुटाए हैं।

बीजेपी को मिला सबसे ज्यादा चंदा

भारत में चुनावी बॉन्ड (Electoral Bond) की प्रक्रिया खत्म हो गई है लेकिन बावजूद इसके साल 2024–25 में बीजेपी को मिलने वाले राजनीतिक चंदे में तेज़ बढ़ोतरी दर्ज की गई है। चुनाव आयोग द्वारा दिए गए जानकारी के अनुसार बीजेपी को ₹6,088 करोड़ से लेकर ₹6,654.93 करोड़ तक का चंदा मिला। यह राशि 2023–24 में मिले ₹3,967 करोड़ की तुलना में 50 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी को दिखाती है।

यह जानकारी ₹20,000 से अधिक के चंदे पर आधारित है और इसमें 2024 के लोकसभा चुनाव तथा कई राज्यों के विधानसभा चुनावों का समय शामिल है। कुल चुनावी चंदे का लगभग 85 प्रतिशत हिस्सा अकेले बीजेपी को मिला, जो विपक्षी दलों की कुल राशि से कई गुना अधिक है। वहीं, विपक्षी दलों को कुल मिलाकर ₹1,343 करोड़ का चंदा मिला, जो बीजेपी को मिले चंदे से करीब साढ़े चार गुना कम है।

2024–25 में कहाँ-कहाँ से मिला चुनावी चंदा?

2024–25 में चुनावी ट्रस्ट ने बीजेपी की चांदी करवा दी। कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक ट्रस्ट से मिलने वाले कुल चंदे का 60 से 82 प्रतिशत हिस्सा बीजेपी को ही मिला है। कुल मिलाकर इस साल चुनावी ट्रस्टों ने बीजेपी को ₹3,100 करोड़ से ज़्यादा का चंदा दिया। वहीं कांग्रेस को ट्रस्टों से 8 प्रतिशत से भी कम चंदा मिला।

प्रूडेंट इलेक्टोरल ट्रस्ट (Prudent Electoral Trust) ने सबसे ज्यादा चंदा दिया। इस ट्रस्ट ने बीजेपी को करीब ₹2,180 करोड़ दिए। इस ट्रस्ट को जिन कंपनियों ने चंदा दिया, उसमे जिंदल स्टील एंड पावर, मेघा इंजीनियरिंग, भारती एयरटेल, ऑरोबिंदो फार्मा और टोरेंट फार्मा का नाम शामिल हैं। लार्सन एंड टुब्रो (L&T) ने इस ट्रस्ट को ₹500 करोड़ का चंदा दिया, जो सबसे ज्यादा है। गौर करने वाली बात यह है कि 17 दिसंबर 2025 को L&T ने बताया कि उसे मध्य प्रदेश और असम दोनों बीजेपी शासित राज्यों में ₹2,500 से ₹5,000 करोड़ के सरकारी निर्माण के प्रोजेक्ट मिले।

वहीं, टाटा ग्रुप ने प्रोग्रेसिव इलेक्टोरल ट्रस्ट (Progressive Electoral Trust) में ₹750 करोड़ से अधिक का योगदान दिया। वहीं महिंद्रा समूह के न्यू डेमोक्रेटिक इलेक्टोरल ट्रस्ट ने करीब ₹150 करोड़ का चंदा दिया जबकि ट्रायम्फ और हार्मनी जैसे अन्य ट्रस्टों ने भी मोटी रकम बीजेपी तक पहुँचाई।

बता दें कि चुनावी ट्रस्ट कंपनियों और अन्य लोगों को मिलाकर चंदा देने की सुविधा देते हैं, जिसे बाद में राजनीतिक दलों में बाँटा जाता है और इसकी जानकारी चुनाव आयोग को दी जाती है। इसे चुनावी बॉन्ड (Electoral Bond) की तरह गुप्त नहीं रखा जाता।

हालांकि, उम्मीद थी कि चुनावी बॉन्ड (Electoral Bond) जैसे ही रद्द होगा, उसके बाद राजनीतिक दलों को जो चंदा मिलता है, उसमे कमी आएगी लेकिन हुआ इसका ठीक उल्टा। 2024–25 में 9 चुनावी ट्रस्टों ने कुल ₹3,811 करोड़ का चंदा दिया, जो पिछले साल की तुलना में तीन गुना से भी ज़्यादा है। इसमें से अकेले बीजेपी को ही 3,112.50 करोड़ चंदा मिला है।

व्यक्तिगत तौर पर भी बीजेपी को चंदा मिला

चुनावी ट्रस्टों के अलावा बीजेपी को कंपनियों और व्यक्तिगत तौर पर भी चंदा मिला। जैसे -सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने ₹100 करोड़, रुंगटा संस ने ₹95 करोड़ और वेदांता ने ₹65 से ₹67 करोड़ तक का चंदा दिया। चंदा देने की लिस्ट में मैक्रोटेक डेवलपर्स, आईटीसी लिमिटेड, डिराइव इन्वेस्टमेंट्स, बजाज समूह की फर्में, हीरो समूह की कंपनियाँ, मैनकाइंड फार्मा और हिंदुस्तान जिंक जैसी कंपनियों का नाम भी शामिल है।

साथ ही पार्टी नेताओं और पदाधिकारियों द्वारा भी चंदा दिया गया है। इसकी भी जानकारी चुनाव आयोग ने दी है। अहम नामों में असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा, जिन्होंने ₹3 लाख दिए, असम के मंत्री पीयूष हज़ारिका ने ₹2.75 लाख, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने ₹1 लाख और ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने ₹5 लाख का योगदान दिया।

विपक्षी दलों को कितना चंदा मिला

अब सवाल यहाँ यह है कि अगर चुनाव है, तो सिर्फ बीजेपी को तो चंदा नहीं मिलेगा क्योंकि इस मैदान में अन्य पार्टियां भी होती है। इस बात की जानकरी भी चुनाव आयोग द्वारा दी गई है। चुनाव आयोग की रिपोर्ट के अनुसार बीजेपी के बाद कांग्रेस ऐसी पार्टी है जिसे सबसे ज्यादा चंदा मिला है। कांग्रेस को 8 प्रतिशत यानी 299 करोड़ रुपये का चंदा मिला है। वहीं, दलों की बात करें तो सबको मिलकर ये रकम करीब 400 करोड़ तक हो जाती है। हालांकि, बीजेपी के मुकाबले इनका चंदा काफी कम रहा। फंडिंग का रुख साफ तौर पर सत्तारूढ़ पार्टी के पक्ष में ही झुका रहा।

सुप्रीम कोर्ट ने चुनावी बॉन्ड को बताया असंवैधानिक

गौरतलब है कि फरवरी 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने चुनावी बॉन्ड (Electoral Bond) को रद्द करते हुए, इसे असंवैधानिक करार दिया था। साल 2018 में जब केंद्र की मोदी सरकार इसे लेकर आई थी, उसके बाद से राजनीतिक दलों को ₹16,000 करोड़ से ज़्यादा का गुप्त चंदा मिला था और इसमें बीजेपी को ज्यादा फायदा पहुंचा था। वहीं, कोर्ट ने जब ये फैसला दिया था, उसके बाद लगा था कि चंदा देने के मामले में कमी आएगी लेकिन हुआ ठीक इसका उल्टा। चुनावी ट्रस्टों और बैंक के ज़रिये खुले तौर पर चंदा दिया गया और इसका फायदा बीजेपी को हुआ।

कुल मिलाकर बड़े राजनीतिक दलों को मिलने वाला चंदा लगभग ₹7,000 करोड़ के आसपास ही रहा, लेकिन इसमें बीजेपी की हिस्सेदारी काफी बढ़ गई। कांग्रेस को ₹522.13 करोड़ का चंदा मिला, जो पिछले साल के मुकाबले करीब 43 प्रतिशत कम है। तृणमूल कांग्रेस, भारत राष्ट्र समिति, तेलुगु देशम पार्टी और बीजू जनता दल को भी चंदे में बड़ी गिरावट देखने को मिली। वहीं आम आदमी पार्टी के चंदे में हल्की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

क्या था चुनावी बॉन्ड?

चुनावी बॉन्ड (Electoral Bond) एक ऐसी योजना थी जिसे मोदी सरकार ने साल 2018 में शुरू किया था। इसके तहत कोई भी व्यक्ति या कंपनी बैंक से चुनावी बॉन्ड खरीदकर किसी भी राजनीतिक पार्टी को दान दे सकती थी। इन बॉन्ड के ज़रिये दिया गया चंदा पूरी तरह गुप्त रहता था, यानी यह जानकारी सार्वजनिक नहीं होती थी कि किसने किस पार्टी को पैसा दिया।

सरकार ने उस समय कहा था कि इससे काले धन पर रोक लगेगी, लेकिन विपक्ष और सामाजिक संगठनों ने इसे पारदर्शिता के खिलाफ बताया। उनका कहना था कि इससे बड़ी कंपनियाँ गुप्त रूप से राजनीतिक दलों को पैसा दे सकती हैं।

Related Stories

No stories found.
logo
hindi.newsgram.com