झारखंड के Children Shelter बन गए ‘यातना गृह’

7 अप्रैल को एक सामाजिक कार्यकर्ता ने आयोग में मेल के जरिए शिकायत की थी।(IANS)
7 अप्रैल को एक सामाजिक कार्यकर्ता ने आयोग में मेल के जरिए शिकायत की थी।(IANS)

झारखंड(Jharkhand) के चिल्ड्रेन शेल्टर होम(Children Shelter) और रिमांड होम(Remand Home) 'यातना गृह' में तब्दील हो गये हैं। हाल की कई घटनाएं इसकी गवाही दे रही हैं। मारपीट, यौन शोषण, हिंसा, नशाखोरी, संघर्ष के मामले लगातार आ रहे हैं।

राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) के चेयरपर्सन प्रियंक कानूनगो ने खुद इसका संज्ञान लिया है। रांची(Ranchi) के एक शेल्टर होम में एक बच्चे से यौन हिंसा की गंभीर शिकायत के बाद एनसीपीसीआर चेयर पर्सन 26 अप्रैल को खुद दिल्ली से यहां पहुंचे। उन्होंने इस घटना को लेकर खुद यह ट्वीट किया, "आज रांची झारखंड में हूं, यहां एक चिल्ड्रन होम में बच्चे के साथ स्टाफ द्वारा यौन हिंसा और उसके बाद उसको दबाने का मामला प्रकाश में आया है। बालगृह उसी रसूखदार पूर्व नौकरशाह से संबंधित संस्था का है जहां बच्चों का उपयोग धरना, प्रदर्शन व अराजक गतिविधियों में करते हैं।"

सबसे हैरत की बात यह कि एनसीपीसीआर चेयरपर्सन के हस्तक्षेप के बावजूद रांची पुलिस ने इस मामले में एफआईआर दर्ज करने में भारी आनाकानी की। इसे लेकर उन्होंने झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन को टैग करते हुए एक और ट्वीट किया, "शर्मनाक बात है कि पिछले चार घंटे से झारखंड पुलिस बच्चे के यौन शोषण के संज्ञेय अपराध में भी एफआईआर दर्ज करने, परिजन को फरियादी बनाने को बुलाने की जि़द पर अड़ी है, न तो स्वयं से मुकदमा बना रही, न ही एनसीपीसीआर को फरियादी बना रही है। किसका दबाव है?"

बाद में आयोग की अध्यक्ष की उपस्थिति मैजिस्ट्रेट को बुलाकर पीड़ित नाबालिग का बयान दर्ज किया गया। संबंधित थाने को एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया गया। इसके साथ पीड़िता को दूसरे शेल्टर होम में शिफ्ट किया गया। इस मामले को लेकर कि बीते 7 अप्रैल को एक सामाजिक कार्यकर्ता ने आयोग में मेल के जरिए शिकायत की थी। शिकायत के मुताबिक रांची के धुर्वा थाना क्षेत्र में रेनबो फाउंडेशन इंडिया की ओर से संचालित रेनबो चिल्ड्रेन होम में एक बच्ची का वहीं के गार्ड ने यौन उत्पीड़न किया। इस मामले में बच्ची को न्याय दिलाने की बजाय चिल्ड्रन होम के मैनेजर ने इस घटना को दबाने की कोशिश की।

सांकेतिक फ़ोटो(Wikimedia Commons)
सांकेतिक फ़ोटो(Wikimedia Commons)

इसके पहले बीते अक्टूबर महीने में रांची में बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) की ओर से संचालित रांची के हेहल स्थित बाल आश्रय गृह में 12 वर्षीय बच्चे का सुरक्षा गार्ड ने एक महीने तक अप्राकृतिक यौन शोषण किया। पीड़ित बच्चे ने शेल्टर होम के अधीक्षक से इसकी शिकायत की, तब गार्ड शंभू प्रसाद लोहरा को गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद इस शेल्टर होम को बंद कर बच्चों को अन्यत्र शिफ्ट कर दिया गया।

जमशेदपुर में बाल आश्रय गृह में कुछ महीने पहले दो नाबालिग लड़कियों से यौन शोषण का मामला सामने आया था। इस मामले में पुलिस ने पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया था। आरोपियों में 'मदर टेरेसा वेलफेयर ट्रस्ट' के संचालक हरपाल सिंह थापर, जिला बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष पुष्पा रानी तिर्की, वार्डन गीता देवी, उसके पुत्र आदित्य सिंह और टोनी डेविड शामिल थे।

रांची के डुमरदगा स्थित बाल सुधार गृह (रिमांड होम) में पिछले तीन महीने के दौरान मारपीट और हिंसा की कम से कम चार घटनाएं हुई हैं। बीते 18 अप्रैल की शामबाल बंदियों के दो गुटों में जमकर मारपीट हुई। दोनों ओर से लाठी, डंडे, बेल्ट और रॉड तक चले। इसमें तीन बाल बंदी गंभीर रूप से घायल हो गये, जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। इसके पहले 22 फरवरी की सुबह लगभग पांच बजे बंदियों के दो गुटों के बीच जमकर हुई मारपीट में आधा दर्जन से ज्यादा बंदी गंभीर रूप से घायल हो गये थे। इन्हें इलाज के लिए रिम्स भेजा गया था। यहां पुलिस की छापेमारी में कई बार नशीले पदार्थ, चाकू, रॉड और घातक हथियार बरामद किये गये हैं। बाल सुधार गृह के नोडल सुरक्षा पदाधिकारी कर्नल जेके सिंह का कहना है कि ऐसी घटनाएं दोबारा ना हों, इसके लिए जरूरी कदम उठाये गये हैं।

आईएएनएस(DS)

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