VIP प्रोटोकॉल, Z+ सुरक्षा और PMO टैग...जानिए कैसे किरण पटेल ने पूरे सिस्टम को चूना लगाया?

यदा कदा ही ऐसे किस्से सुनने को मिलते हैं कि कोई सिस्टम को ही चूना लगा गया हो। जी हाँ, ऐसा ही एक व्यक्ति है किरण पटेल जिसने फर्जी पीएमओ अधिकारी बन सरकार को बेवकूफ बना दिया।
तस्वीर में एक तरफ किरण पटेल, दूसरी ओर पीएम मोदी
फर्जी पीएमओ अधिकारी बन सिस्टम को चूना लगाने वाला किरण पटेल X
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Summary

  • किरण पटेल ने खुद को पीएमओ का अधिकारी बताकर चार सालों तक धोखाधड़ी की।

  • मार्च 2023 में श्रीनगर के होटल ललित से दिल्ली पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया।

  • उस पर IPC की धाराएं 420, 467, 468, 471 सहित कई आरोप लगे हैं।

साल 2005 में अभिषेक बच्चन और रानी मुखर्जी की एक फिल्म आई थी, नाम था बंटी और बबली। इस फिल्म में एक डायलॉग है "रिस्क तो स्पाइसी होता है।" असल जीवन में भी ऐसा लगता है कि लोगों ने इसे गंभीरता से लेना शुरू कर दिया है। कुछ लोग ऐसे हैं, जो सीधे सिस्टम से ही पंगा लेना शुरू कर देते हैं और उन्हीं में से एक हैं किरण पटेल (Kiran Patel), जिन्होंने पूरे सिस्टम को ही चूना लगा दिया।

हैरानी की बात ये है कि उन्होंने ना तो सरकार के खिलाफ कोई मोर्चा खोला, ना कोई चोरी की और ना ही डकैती। उन्होंने सीधा बड़ा हाथ मारा। खुद को पीएमओ (Prime Minister Office) जिसे अब 'सेवा तीर्थ' कहा जाता है, उसका अधिकारी तक बता दिया। क्या है इसके पीछे की पूरी कहानी, आइये समझते हैं।

सिस्टम को चूना लगाने वाला कौन है किरण पटेल?

यदा कदा ही ऐसे किस्से सुनने को मिलते हैं कि कोई सिस्टम को ही चूना लगा गया हो। जी हाँ, ऐसा ही एक व्यक्ति है किरण पटेल (Kiran Patel), जो कथित रूप से गुजरात का रहने वाला है। वो खुद को पीएमओ (Prime Minister Office) का वरिष्ठ अधिकारी बताकर लोगों और प्रशासन को गुमराह कर रहा था। पटेल का दावा था कि वो पीएम मोदी के काफी करीब है और देश की सुरक्षा व नीति से जुड़े अहम कामों को देखता है।

हैरानी की बात यह है कि किरण पटेल (Kiran Patel) बुलेटप्रूफ गाड़ियों में चलता था, पुलिस के साथ नज़र आता था और Z-प्लस सुरक्षा के साथ दिखता था, तो लोगों ने उसका भरोसा भी कर लिया। उसका कहना था कि वो रूस गया था और यूक्रेन युद्ध को लेकर वहां की सैन्य स्थिति का आकलन कर रहा है। पटेल ने खुद को अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ वर्जीनिया से पीएचडी धारक बताया, PMO के नाम से फर्जी विज़िटिंग कार्ड छपवाए, बड़े-बड़े दावे किये लेकिन सब झूठे निकले।

धीरे-धीरे उसकी जीवनशैली में बड़ा बदलाव आया। वह पहले साधारण जिंदगी जीता था, लेकिन बाद में महंगी गाड़ियों में घूमने लगा। गुजरात में उसके खिलाफ पहले से पुलिस शिकायतें दर्ज थीं, फिर भी वह खुलेआम लोगों को धोखा देता रहा। हालांकि, उसकी पोल आखिरकार खुली और ये कैसे खुली? इसे आगे समझते हैं।

कैसे पकड़ा गया किरण पटेल?

अब समझते हैं कि किरण पटेल (Kiran Patel) आखिर पकड़ा कैसे गया? दरअसल, हुआ ये कि एक शक की वजह से पटेल पकड़ा गया। विश्व हिंदू परिषद (VHP) के सदस्य अतुल वैद्य को उसकी गतिविधियों पर शक हुआ। सोशल मीडया पर आरोपी पुलिस और सुरक्षा बलों के साथ, बुलेटप्रूफ गाड़ियों में और संवेदनशील इलाकों में दिखता था लेकिन वहां वो किस सरकारी काम से गया है, वो यह नहीं बताता था।

इसके बाद अतुल वैद्य ने पीएमओ (Prime Minister Office) में इसकी शिकायत की। इसी बीच एक मुलाकात में किरण पटेल ने एक काम के नाम पर 25 लाख रुपये मांगे। जब उससे पूछा गया कि वह सच में PMO से जुड़ा है या नहीं, तो वह नाराज हो गया। उसने 15 लाख रुपये वापस कर दिए और बाकी पैसे को लेकर झूठ बोलता रहा।

फिर जब वैद्य ने दोबारा संपर्क करने की कोशिश की, तब किरण ने कहा कि वो सरकारी काम से जम्मू-कश्मीर में है और उसे Z-प्लस सुरक्षा मिली हुई है। उसने व्हाट्सएप पर बुलेटप्रूफ गाड़ियों की तस्वीरें भी भेजीं। ये सारी बातें गुजरात के क्राइम रिपोर्टर बंकिम पटेल ने बताई।

वैद्य ने चतुराई दिखाई और इसकी सुचना तुरंत दिल्ली पुलिस को दी। फिर पुलिस ने तुंरत जाँच की और सोशल मीडिया के जरिये लोकेशन ट्रैक करते हुए, आरोपी किरण को मार्च 2023 में श्रीनगर के होटल ललित से गिरफ्तार कर लिया। जांच में साफ हो गया कि वह फर्जी अधिकारी बनकर लोगों और प्रशासन को धोखा दे रहा था। बता दें कि किरण पटेल के धोखाधड़ी और फर्जीवाड़े के मामले 2019 से 2023 तक यानी लगभग 4 सालों तक चले।

झूठ बोलने में था उस्ताद

किरण पटेल (Kiran Patel) के बारे में यह भी बात सामने आई कि वो झूठ बोलने में उस्ताद था। 2020 में उसने अफवाह फैलाई कि पीएम मोदी और गुजरात के तत्कालीन सीएम विजय रूपाणी के बीच अनबन चल रही है और उसे मदद के लिए भेजा गया है। उसने झूठी कहानियां बनाईं कि उसने लोगों को ऑक्सीजन, एम्बुलेंस और दवाइयां दिलवाई हैं। उसने RSS के सेवा कार्यों की तारीफ करने का कोई मौका नहीं छोड़ा। व्हाट्सएप उसका मुख्य हथियार था।

यहाँ तक कि जब पीएम मोदी की मां का निधन हुआ था, तब उसने मोदी की सादगी की तारीफ की और उनकी तुलना सरदार वल्लभभाई पटेल से की। इसके साथ ही वो राहुल गांधी से लेकर उर्फी जावेद तक सब पर तंज कसता था लेकिन कभी भी RSS, पीएम मोदी या वीर सावरकर के खिलाफ कुछ नहीं बोलता था।

वहीं, पटेल की रईसी इतनी बढ़ी थी कि वो पोर्श कार चलाने लगा था जबकि कभी वो पड़ोसियों से स्कूटर मांगने लगा था।

कौन-कौन सी धाराएं लगी हैं?

किरण पटेल (Kiran Patel) पर मुख्य रूप से ठगी (धोखाधड़ी), फर्जीवाड़ा, धोखा देकर सरकारी सुरक्षा का दुरुपयोग और फर्जी दस्तावेज बनाने के आरोपों में आरोपी बनाया गया है। गुजरात के कई थानों में उसके खिलाफ केस दर्ज हैं, जैसे कि रावपुरा, नरोडा और बयाड पुलिस स्टेशन में।

पटेल पर पुलिस ने भारतीय दंड संहिता (IPC) की धाराएं लगाई हैं, जिनमें 420 (ठगी), 467 (फर्जी दस्तावेज बनाने), 468 (धोखाधड़ी के लिए फर्जी दस्तावेज का इस्तेमाल) और 471 (फर्जी दस्तावेज के उपयोग) शामिल हैं। इसके अलावा, सुरक्षा नियमों का उल्लंघन करने और झूठे दावे करने के भी मामले शामिल हैं।

फिलहाल, किरण पटेल पुलिस हिरासत में है और उसकी जांच चल रही है। पुलिस और अन्य जांच एजेंसियां यह पता लगाने में लगी हैं कि उसके पीछे और कौन लोग हैं और उसने यह सब धोखाधड़ी कैसे की?

वकील और पत्नी ने क्या कहा?

किरण पटेल (Kiran Patel) की जब गिरफ्तारी हुई, तब उनकी पत्नी और वकील उसके बचाव में उतरे। उसके वकील निसार वोरा ने कहा था कि कश्मीर मामले में अभी पूरी जानकरी नहीं है लेकिन उसका एक दोस्त कश्मीर में रहता है, जिसे Z+ सुरक्षा मिली हुई है, जिसके साथ वह यात्रा करता था।

वहीं, आरोपी पटेल की पत्नी ने कहा कि मैं एक डॉक्टर हूँ और मेरे पति इंजीनियर। वो कश्मीर कास कार्य के लिए गए थे, और कुछ नहीं। मेरे पति कुछ गलत नहीं कर सकते। हमारे वकील इस मामले को देख रहे हैं।

खैर, अब देखना होगा कि किरण पटेल (Kiran Patel) को क्या सजा मिलती है क्योंकि मामला अभी अदालत में चल रहा है।

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