
एक मजबूत प्रतिभा आधार विकसित करने के महत्व पर प्रकाश डालते हुए, केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (आईएसएम) का एक प्रमुख उद्देश्य कुशल पेशेवरों की एक ग्लोबल पाइपलाइन तैयार करना है।
गुजरात के साणंद में सीजी पावर की भारत की पहली एंड-टू-एंड सेमीकंडक्टर ओएसएटी पायलट लाइन सुविधा के शुभारंभ के अवसर पर केंद्रीय मंत्री वैष्णव ने कहा कि इस पायलट लाइन का उद्घाटन सेमीकंडक्टर डिजाइन, निर्माण और डाउनस्ट्रीम क्षमताओं को विकसित करने के भारत के सपने को पूरा करने की दिशा में एक निर्णायक कदम है और गुजरात इस परिवर्तन में एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में उभर रहा है।
केंद्रीय मंत्री वैष्णव ने ओएसएटी पायलट लाइन की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि यहां निर्मित चिप्स का इस्तेमाल कस्टमर क्वालिफिकेशन के लिए किया जाएगा। इन चिप्स के स्वीकृत हो जाने के बाद, कमर्शियल प्लांट के लिए क्वालिफाइड प्रोडक्ट्स का पूर्ण पैमाने पर उत्पादन शुरू करना बहुत आसान हो जाएगा।
उन्होंने जोर देकर कहा कि यह उद्घाटन इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन के तहत हासिल की गई सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में से एक है, जिसके तहत अब तक 10 परियोजनाओं को मंजूरी मिल चुकी है।
सरकार ने 270 विश्वविद्यालयों के साथ साझेदारी की है और उन्हें स्टेट-ऑफ-द-आर्ट सेमीकंडक्टर डिजाइन टूल्स से सुसज्जित किया है। 2025 में, इन उपकरणों का 1.2 करोड़ से अधिक बार उपयोग किया गया। इसके प्रत्यक्ष परिणाम के रूप में, 17 संस्थानों द्वारा डिजाइन की गई 20 चिप्स का निर्माण सेमीकंडक्टर प्रयोगशाला (एससीएल), मोहाली में सफलतापूर्वक किया जा चुका है।
केंद्रीय मंत्री (Union Minister) ने कहा कि दुनिया में बहुत कम देश छात्रों को ऐसे एडवांस्ड टूल्स तक पहुंच प्रदान करते हैं। उन्होंने आगे कहा कि यह पहल भारत के युवाओं को सशक्त बनाएगी, टेक्निकल इकोसिस्टम को मजबूत करेगी और देश को सेमीकंडक्टर टैलेंट के ग्लोबल हब के रूप में स्थापित करेगी।
साणंद स्थित सीजी सेमी सुविधा चिप असेंबली, पैकेजिंग, परीक्षण और पोस्ट-टेस्ट सर्विस के लिए संपूर्ण समाधान प्रदान करती है, जिसमें ट्रेडिशनल और एडवांस्ड पैकेजिंग तकनीकें शामिल हैं।
यह भारत की सेमीकंडक्टर क्षमताओं (Semiconductor Capabilities) को मजबूत करने और वैश्विक बाजारों की सेवा करते हुए आत्मनिर्भर बनने के देश के लक्ष्य को समर्थन देने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
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