UGC के नए नियम से क्यों मचा है बवाल? सवर्ण बनाम SC/ST-OBC का मुद्दा फिर गरमाया

यूजीसी (UGC) ने जातिगत भेदभाव से सम्बंधित मामलों पर नियंत्रण पाने के लिए काफी विचार विमर्श करके नया नियम बनाया है।
तस्वीर में विरोध करता आदमी देखा जा सकता है।
UGC के नए नियम से क्यों मचा है बवाल? सवर्ण बनाम SC/ST-OBC का मुद्दा फिर गरमाया X
Reviewed By :
Published on
Updated on
4 min read

यूजीसी ने जातिगत भेदभाव से सम्बंधित मामलों पर नियंत्रण पाने के लिए काफी विचार विमर्श करके नया नियम बनाया है। जब से यह नियम प्रकाश में आया है, विवाद बढ़ता हुआ दिखाई दे रहा है। हालांकि, यूजीसी ने यह नियम उच्च शिक्षण संस्थानों में जाति के आधार पर भेदभाव को कम करने के लिए ओ बी सी (OBC), एस सी (SC), एस टी (ST) छात्रों के हितों को ध्यान में रखकर बनाया गया है। वहीं, समाज का दूसरा तबका जो जनरल श्रेणी (General Category) में आता है, ने इस नियम का विरोध करना शुरू कर दिया है। विरोध के स्वर बढ़ते जा रहे हैं। उनका मानना है कि इससे समाज का बंटवारा होगा और समाज के लिए यह हानिकारक है। 

क्या है यूजीसी का नया नियम? 

यूजीसी (UGC) के नए नियम के अनुसार ओबीसी (OBC), एस सी (SC), एस टी (ST) छात्रों के साथ उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव को रोकने के लिए हर प्रकार के उच्च शिक्षण संस्थानों में सामान अवसर केंद्र((Equal Opportunity Centre - EOC) और समानता समितियों (Equality Committee) की स्थापना किया जाना अनिवार्य कर दिया गया है।

नए नियम के मुताबिक विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों में यदि किसी ओबीसी (OBC) एस सी(SC), एस टी (ST) छात्र को उसके जाति के आधार के पर उसके साथ भेदभाव किया जाता है तो इसकी जांच सामान अवसर केंद्र की तरफ से की जाएगी। सामानता समितियों में ओबीसी (OBC), एस सी (SC), एस टी (ST), दिव्यांग और महिलाओं को शामिल करना अनिवार्य है। यूजीसी के नए नियम के मुताबिक नियमों का उल्लंघन करने वाले विश्वविद्यालयों की मान्यता भी रद्द की जा सकती है।

क्यों हो रहा विरोध ? 

जब से यह नियम प्रकाश में आया है कुछ संगठनों, छात्र समुदायों की तरफ से विरोध शुरू हो गया है। विरोध में छात्रों और अन्य सवर्ण संगठनों की तरफ से यह कहा जा रहा है कि यूजीसी (UGC) के नियम 3(C) ही विवाद की असली जड़ है। सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है। याचिका में यह कहा गया है कि यह प्रावधान संविधान में दिए गए समानता, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और व्यक्तिगत स्वतंत्रता जैसे मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है। विरोध करने वालों में ज्यादा संख्या सवर्ण छात्रों की है, उनका कहना है कि इस नियम का गलत उपयोग किया जा सकता है। यह सवर्ण छात्रों के लिए भविष्य में एक खतरा बन सकता है। 

क्यों लाया गया है यह बिल ? 

बता दें कि यूजीसी ने यह नियम सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर लाया है। सुप्रीम कोर्ट ने हैदराबाद विश्वविद्यालय के रोहित वेमुला और मुंबई मेडिकल कॉलेज की पायल तड़वी से संबंधित केस की सुनवाई के दौरान यह आदेश दिया था कि यूजीसी अपने पुराने नियमों का नवीनीकरण करे और जातिगत भेदभाव को रोकने के लिए सख़्त नियम बनाये। 

बता दें कि रोहित वेमुला हैदराबाद विश्वविद्यालय में पीएचडी (Ph.D) के छात्र थे। साल 2016 में रोहित वेमुला ने आत्महत्या कर ली थी। रोहित वेमुला की चिट्ठी से यही प्रतीत हुआ और आरोप लगाए गए कि जाति के आधार पर उसके साथ भेदभाव हुआ अंततः रोहित ने आत्महत्या कर ली। 

दूसरी घटना पायल तड़वी से सम्बंधित है जो कि मुंबई के बी.जे. मेडिकल कॉलेज (B.J.Medical College) में स्त्री रोग विशेषज्ञ की पढ़ाई कर रही थी। पायल को उसके सीनियर डाक्टरों के द्वारा उसे जातिगत शब्दों से सम्बोधित करके नीचा दिखने का प्रयास किया गया और आदिवासी पहचान को लेकर उसे ताने दिए जाते थे, जिससे परेशान होकर पायल तड़वी ने 22 मई 2019 को  मुंबई के नायर अस्पताल के हॉस्टल में आत्महत्या कर ली। 

यूजीसी (UGC) ने सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) को एक रिपोर्ट सौंपी , जिसमें यह उजागर हुआ था कि विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों में जाति आधारित भेदभाव की शिकायतों की संख्या साल 2017 में 173 थीं। वहीं साल 2025 तक जाति आधारित भेदभाव से सम्बंधित मामलों की संख्या में बढ़ोत्तरी होकर 378 हो गयी।

यह भी पढ़ें :UGC ने दी सलाह इन संस्थानों में ना ले दाखिला

विरोध और राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं

मामले को लेकर सवर्ण छात्रों और छात्र संगठनों द्वारा काफी विरोध जताया जा रहा है। करणी सेना की तरफ से बिल के विरोध में यह कहा जा रहा है कि यह बिल वापस नहीं होता है तो फिर आंदोलन और उग्र हो सकता है। वहीं उत्तर प्रदेश के बरेली सिटी मजिस्ट्रेट (City Magistrate) अलंकार अग्निहोत्री ने नए नियम के विरोध  में अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया है। सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने यह कहते हुए इस्तीफ़ा दिया है कि यह नियम एक काला कानून है।   

उत्तर प्रदेश भाजपा सरकार में डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य (Deputy CM Keshav Prasad Mourya) ने कहा है कि ऐतिहासिक रूप से पिछड़े समाज को मुख्या धरा में लाने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। यूजीसी (UGC) के नए नियम से कोई सवर्ण समाज नाराज नहीं है। उत्तर प्रदेश की मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी ने UGC के नए नियमों को अपना खुला समर्थन दिया है। नगीना से लोकसभा सांसद चंद्रशेखर ने भी नियमों का स्वागत करते हुए कहा है कि समाज ने रोहित वेमुला और पायल तड़वी को खो दिया, ऐसे नियमों को बहुत पहले ही बना देना चाहिए था। उन्होंने कहा , जाति के आधार पर कब तक भेदभाव को बर्दाश्त किया जाएगा।

[Rh/PY]     

तस्वीर में विरोध करता आदमी देखा जा सकता है।
कौन है मौलाना आजाद जिनकी वजह से IIT और UGC की स्थापना हुई

Related Stories

No stories found.
logo
www.newsgram.in