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 वैज्ञानिकों की एक टीम ने एक नई पोर्टेबल, पॉकेट-साइज मशीन विकसित की है, जो सार्स-सीओवी-2 की महज 15 मिनट में पहचान कर सकती है, जो कि कोविड-19 वायरस का कारण बनता है। विश्व स्तर पर अभी तक लगभग 12.9 करोड़ लोग कोविड-19 से संक्रमित हो चुके हैं, जबकि इस खतरनाक संक्रमण की वजह से 28.1 लाख लोग अपनी जान गंवा चुके हैं।

नया परीक्षण-निरवाना वास्तविक समय में कोविड-19 ( COVID 19 ) , इन्फ्लूएंजा ए, मानव एडेनोवायरस और गैर-सार्स-सीओवी-2 मानव कोरोनावायरस के 96 नमूनों के पॉजिटिव और नेगेटिव परिणाम उत्पन्न कर सकता है।


जर्नल मेड में प्रकाशित अध्ययन से पता चला है कि इसके अलावा यह तीन घंटों के भीतर ही ब्रिटेन में पहचाने गए बी.1.1.7 जैसे नए वेरिएंट को भी ट्रैक कर सकता है।

निरवाना परीक्षण एक जीन-डिटेक्शन दृष्टिकोण का उपयोग करता है, जिसे इसोथर्मल रीकॉम्बिनेज पोलीमरेज एंपलिफिकेशन (आरपीए) कहा जाता है, जो रियल टाइम नैनोपोर सिक्वेंसिंग के साथ मिलकर होता है। यह वर्तमान कोविड-19 परीक्षण पीसीआर की तुलना में सस्ता और अधिक पोर्टेबल है।

यह भी पढ़ें: कश्मीर में सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए सरकार के प्रयास जारी : अमेरिकी रिपोर्ट
 

कोरोना का पीसीआर परीक्षण । (  ( Unsplash )

पीसीआर ( PCR ) परीक्षण जहां कम और उच्च तापमान के माध्यम से डीएनए स्ट्रैंड को अलग करने और उन्हें कॉपी करने पर आधारित है, वहीं आरपीए इन्हीं चीजों के लिए प्रोटीन का उपयोग करते हुए केवल 20 मिनट में काम पूरा करता है। इसके अलावा, पीसीआर परीक्षण को अन्य वायरस का पता लगाने के लिए महंगी अगली पीढ़ी के जीन-अनुक्रमण मशीन की जरूरत होती है, लेकिन आरपीएस एक ही समय में कई जीन्स की पहचान कर सकता है।

सऊदी अरब में किंग अब्दुल्ला यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी में बायोसाइंस के सहायक प्रोफेसर मो ली के अनुसार, “हमें हाल ही में पता चला कि हम इस तकनीक का इस्तेमाल न केवल सार्स-सीओवी-2 का पता लगाने में कर सकते हैं, बल्कि इसी समय में दूसरे वायरस के लिए भी कर सकते हैं।”

शोधकर्ताओं ने सुझाव दिया कि डिवाइस कोविड-19 वायरस का तेजी से पता लगाने के लिए स्कूलों, हवाईअड्डों या बंदरगाहों पर स्थापित किया जा सकता है। ( AK आईएएनएस )
 

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देश भर से जमा की गई 2 लाख से अधिक ईंटें। (IANS)

राम भक्तों द्वारा दी गई और विश्व हिंदू परिषद (विहिप) (Vishwa Hindu Parishad) द्वारा तीन दशक लंबे मंदिर आंदोलन के दौरान देश भर से जमा की गई 2 लाख से अधिक ईंटों का इस्तेमाल अब राम जन्मभूमि स्थल पर भव्य मंदिर का निर्माण के लिए किया जाएगा।

मंदिर ट्रस्ट के सदस्य अनिल मिश्रा ने कहा, "1989 के 'शिलान्यास' के दौरान कारसेवकों द्वारा राम जन्मभूमि पर एक लाख पत्थर रखे गए थे। कम से कम, 2 लाख पुरानी कार्यशाला में रह गए हैं, जिन्हें अब निर्माण स्थल पर स्थानांतरित कर दिया जाएगा। ईंटों पर भगवान राम का नाम लिखा है और यह करोड़ों भारतीयों की आस्था का प्रमाण है।

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कर्नाटक राज्य में मंदिर विध्वंस अभियान पर विराम लगा दिया है। (wikimedia commons)

हिंदू संगठनों की ओर से आलोचना झेल रही कर्नाटक की भाजपा सरकार नें कर्नाटक में मंदिर विध्वंस के मुद्दे पर फिलहाल राज्य विधानसभा में एक कानून पारित कर पुरे कर्नाटक राज्य में मंदिर विध्वंस अभियान पर विराम लगा दिया है। सत्ताधारी पार्टी भाजपा और विपक्षी दल कांग्रेस इन दोनों के बीच मंगलवार को तीखी बहस के बीच प्रस्तावित कर्नाटक धार्मिक संरचना (संरक्षण) विधेयक 2021 को पारित कर दिया गया।

यह प्रस्तावित अधिनियम जिसका नाम 'कर्नाटक धार्मिक संरचना (संरक्षण) विधेयक-2021' है, इसका मुख्य उद्देश्य सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार राज्य में धार्मिक संरचनाओं के विध्वंस को रोकना है।

यह अधिनियम में कहा गया है कि 'कर्नाटक धार्मिक संरचना संरक्षण अधिनियम -2021' के लागू होने की तारीख से, कानूनों के कानूनी प्रावधान और अदालतों, न्यायशास्त्र और अधिकारियों के आदेशों या दिशानिदेशरें के बावजूद, सरकार धार्मिक केंद्रों की रक्षा करेगी।

सार्वजनिक संपत्तियों पर बने धार्मिक केंद्रों को खाली करने, स्थानांतरित करने और ध्वस्त करने की प्रक्रिया को रोक दिया जाएगा। इस अधिनियम के लागू होने और विधान परिषद में पारित होने के बाद से ही ।

इसी बीच विपक्ष के नेता सिद्धारमैया ने कर्नाटक सरकार पर आरोप लगाया कि हिंदू जागरण वेदिक और हिंदू महासभा की आलोचना का सामना करने के बाद भाजपा यह कानून लाई है। मैसूर में मंदिर तोड़े जाने के बाद बीजेपी पुनर्निर्माण के लिए नया कानून ला रही है, यह भी आरोप लगायें हैं उन्होंने भाजपा पार्टी के खिलाफ । इसके बाद कांग्रेस के एक और विधायक और पूर्व मंत्री औरयू.टी. खादर ने बीजेपी पर हमला बोलते हुए कहा कि छात्र पाठ्यपुस्तकों में पढ़ने जा रहे हैं कि भाजपा ने भारत में आक्रमणकारियों की तरह मंदिरों को ध्वस्त कर दिया।

\u0915\u0930\u094d\u0928\u093e\u091f\u0915 \u0930\u093e\u091c\u094d\u092f कर्नाटक राज्य का नक्शा सांकेतिक इमेज (wikimedia commons)

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डब्ल्यूएचओ यानीं विश्व स्वास्थ्य संगठन का मुख्यालय (wikimedia commons)

पूरी दुनिया एक बार फिर कोरोना वायरस अपना पांव पसार रहा है । डब्ल्यूएचओ यानीं विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा है कि कोरोना वायरस का जो डेल्टा कोविड वैरिएंट संक्रामक वायरस का वर्तमान में प्रमुख प्रकार है, अब यह दुनिया भर में इसका फैलाव हो चूका है । इसकी मौजूदगी 185 देशों में दर्ज की गई है। मंगलवार को अपने साप्ताहिक महामारी विज्ञान अपडेट में वैश्विक स्वास्थ्य एजेंसी ने कहा, डेल्टा वैरिएंट में अब सेम्पल इकट्ठा करने की डेट जो कि 15 जून -15 सितंबर, 2021 के बीच रहेंगीं । जीआईएसएआईडी, जो एवियन इन्फ्लुएंजा डेटा साझा करने पर वैश्विक पहल के लिए है, एक ओपन-एक्सेस डेटाबेस है।

मारिया वान केरखोव जो विश्व स्वास्थ्य संगठन में कोविड-19 पर तकनीकी के नेतृत्व प्रभारी हैं , उन्होंने डब्ल्यूएचओ सोशल मीडिया लाइव से बातचीत करते हुए कहा कि , वर्तमान में कोरोना के अलग अलग टाइप अल्फा, बीटा और गामा का प्रतिशत एक से भी कम चल रहा है। इसका मतलब यह है कि वास्तव में अब दुनिया भर में कोरोना का डेल्टा वैरिएंट ही चल रहा है।

\u0915\u094b\u0930\u094b\u0928\u093e \u0935\u093e\u092f\u0930\u0938 कोरोना का डेल्टा वैरिएंट हाल के दिनों में दुनियाभर में कहर बरपाया है (pixabay)

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