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थोड़ा हट के

इंदौर की नई कहानी, गंदे पानी की जगह क्रिकेट और फुटबॉल

इंदौर में जहां कभी नाला हुआ करता था और जो जगह गंदगी से भरी रहती थी, उन स्थानों को अब मैदान में बदल दिया गया है और वहां क्रिकेट व फुटबॉल के मैच खेले जाने लगे हैं।

By: संदीप पौराणिक


वैसे तो इंदौर की देश में साफ सुथरे शहर की पहचान है, यही कारण है कि इस शहर को चार बार देश के सबसे स्वच्छ शहर का खिताब मिल चुका है। अब यह शहर नई कहानियां लिख रहा है। जहां कभी नाला हुआ करता था और जो जगह गंदगी से भरी रहती थी, उन स्थानों को अब मैदान में बदल दिया गया है और वहां क्रिकेट व फुटबॉल के मैच खेले जाने लगे हैं।

स्वच्छता के मामले में इंदौर नित नए कीर्तिमान बनाने की कोशिश में है। यहां कचरे के संग्रहण से लेकर उसके निष्पादन तक की प्रक्रिया को नया आयाम दिया गया है। आमजन में स्वच्छता के प्रति जागृति लाई गई है, उसी का नतीजा रहा कि इंदौर ने अपनी नई पहचान बनाई है। उसी क्रम में जल निकासी का नया मॉडल बनाकर नालों को मैदान में बदला जा रहा है।

यहां के नालों का स्वरुप बदला जा रहा है। यहां के सिरपुर धार रोड से होकर आम वाली पुलिया तक होते हुए चंदन नगर में मिलने वाले नाले में लगभग 655 रहवासियों तथा 156 बड़े आउटफाल से सीवरेज व ड्रेनेज लाईन से गंदा व सीवरेज का पानी जाता था। निगम द्वारा नदी-नाला आउटफाल टेपिंग कार्य के अंतर्गत रहवासियों व बड़े आउटफाल को चिन्हांकित किया गया तथा सीवरेज लाईन डालकर इन्हें ट्रेप करने के उपरांत शहर की प्रायमरी सीवरेज लाइन में गिरने वाले सीवरेज को रोककर प्रायमरी सीवरेज लाईन में जोड़ा गया, जिससे नाले में गिरने वाला सीवरेज अब सीधे सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट में जाएगा।

गन्दा पानी सीधा ट्रीटमेंट के लिए जाएगा।(Unsplash)

निगम द्वारा नाला ट्रेपिंग के साथ-साथ नाले के दोनों ओर शहर की सुंदरता व पर्यावरण की ²ष्टि से वृक्षारोपण का कार्य वृहत स्तर पर किया जा रहा है। निगम द्वारा कान्ह-सरस्वती नदी व नाला शुद्धिकरण के किये गये इन प्रयासों से चंदन नगर स्थित नाला पूरी तरह से सूख गया, इसी तरह शिव नगर से कैलाश चौधरी पार्क नगर, विराट नगर, उद्योग नगर, खातीपुरा, आजाद नगर से होकर कान्ह नदी में मिलता है। वह नाला भी सूख चुका है। एक जगह जहां फुटबॉल मैच खेला गया तो वहीं क्रिकेट मैच खेला गया।

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नगर निगम की आयुक्त प्रतिभा पाल ने बताया कि इंदौर ऐसा पहला शहर है जहां पर कभी नाले में गंदा और सीवरेज का पानी बहा करता था, उस स्थान को नदी-नाला स्वच्छता अभियान के अंतर्गत किये गये नाला ट्रेपिंग के परिणाम स्वरूप पूरा नाला सूख गया और जहां कभी इन नालों के पास बदबू और गंदगी के कारण खड़ा रहना संभव नही था, वहां पर विगत दिनों नाला क्रिकेट मैच का आयोजन किया गया।

अधीक्षण यंत्री महेश शर्मा व संस्था बेसिक्स के गोपाल जगताप ने बताया कि हमारा नाला हमारा अभियान चलाया जा रहा है जिसके तहत नाले सूख रहे हैं और रहवासियों द्वारा फुटबाल व बच्चों द्वारा क्रिकेट खेला जा रहा है। चंदननगर में रहवासियों द्वारा स्वच्छता के साथ ही नाले में किसी भी प्रकार का कचरा व गंदगी नहीं डालने के संबंध में शपथ भी ली गई।(आईएएनएस)

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आईपीयू की 143वीं असेम्बली बैठक में भारत की दिया कुमारी ने रखा भारत का पक्ष।(सांकेतिक चित्र, Pixabay)

अंतर-संसदीय संघ आईपीयू की 143वीं असेम्बली बैठक में बाल यौन शोषण और दुर्व्यवहार से जुड़े मुद्दे पर भारतीय महिला संसदों के दल ने हिस्सा लिया। स्पेन के मैड्रिड में आईपीयू की 143वीं असेंबली के दौरान आयोजित महिला सांसद पूनम बेन मादाम और दीयाकुमारी के फोरम के 32वें सत्र को संबोधित किया।

इस दौरान सांसद दीयाकुमारी ने कहा कि जहां सूचना और संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) अवसरों के नए रास्ते खोलती है, वहीं वे बच्चों के यौन शोषण और दुर्व्यवहार सहित चुनौतियों, खतरों और हिंसा के नए रूपों को भी जन्म देती हैं। भारत में ऑनलाइन बाल यौन शोषण और दुर्व्यवहार से निपटने के लिए कड़े उपाय हैं।

सांसद दीया ने कहा कि भारत ने वर्ष 2000 में सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम बनाया था और समय-समय पर इसमें संशोधन किया है। यह अश्लील सामग्री को इलेक्ट्रॉनिक रूप में प्रकाशित करने और प्रसारित करने पर रोक लगाता है और अधिनियम के विभिन्न वर्गों में उल्लंघन के लिए दंडात्मक प्रावधान भी निर्धारित करता है। उन्होंने आईटी इंटरमीडियरीज गाइडलाइंस रूल्स, 2011 के साथ-साथ पॉक्सो एक्ट पर भी विचार व्यक्त किये। भारतीय दल ने कहा कि केवल कानूनी प्रावधान और उनका सख्ती से क्रियान्वयन ही काफी नहीं है, ऑनलाइन यौन शोषण से बच्चों को बचाने के लिए विशेष नीतियों की आवश्यकता है।

अंतर-संसदीय संघ आईपीयू की 143वीं असेम्बली में भारत का दल।(IANS)

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भारत ने रूस और चीन से कहा कि अफगान क्षेत्र का इस्तेमाल आतंकी गतिविधियों के लिए नहीं किया जाना चाहिए।(IANS)

भारत ने रूस और चीन से कहा कि लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे पाकिस्तान स्थित आतंकवादी समूहों द्वारा अफगान क्षेत्र का इस्तेमाल आतंकी गतिविधियों के लिए नहीं किया जाना चाहिए। RIC Meeting त्रिपक्षीय ढांचे की 18 वीं बैठक की अध्यक्षता के दौरान रखा, जो शुक्रवार को वीडियो कांफ्रेंसिंग पर हुई, जिसमें रूस और चीन के विदेश मंत्रियों सेर्गेई लावरोव और वांग यी ने भी भाग लिया।

जयशंकर ने अफगानिस्तान में समावेशी और प्रतिनिधि सरकार होने पर भारत के रुख को दोहराते हुए कहा, "RIC देशों के लिए आतंकवाद, कट्टरपंथ, मादक पदार्थों की तस्करी आदि के खतरों पर संबंधित दृष्टिकोणों का समन्वय करना आवश्यक है।" मंत्री ने मास्को और बीजिंग के अपने दो समकक्षों को बताया कि, अफगान लोगों की भलाई के लिए भारत की प्रतिबद्धता के अनुरूप, नई दिल्ली ने देश में सूखे की स्थिति से निपटने के लिए अफगानिस्तान को 50,000 मीट्रिक टन गेहूं की आपूर्ति की पेशकश की थी।

हालांकि, मानवीय पहल में रुकावट आ गई थी, क्योंकि बुधवार तक पाकिस्तान इस खेप को अपने क्षेत्र से गुजरने की अनुमति देने के लिए प्रतिबद्ध नहीं था। जयशंकर ने आज कहा, "RIC देशों को यह सुनिश्चित करने के लिए मिलकर काम करने की जरूरत है कि मानवीय सहायता बिना किसी रुकावट और राजनीतिकरण के अफगान लोगों तक पहुंचे। एक निकट पड़ोसी और अफगानिस्तान के लंबे समय से साथी के रूप में, भारत उस देश में हाल के घटनाक्रमों, विशेष रूप से अफगान लोगों की पीड़ा के बारे में चिंतित है।"

तीनों मंत्रियों ने इस बात पर सहमति जताई कि आरआईसी देशों के बीच सहयोग न केवल उनके अपने विकास में बल्कि वैश्विक शांति, सुरक्षा, स्थिरता में भी योगदान देगा। जयशंकर ने अपने संबोधन में, आरआईसी तंत्र के तहत यूरेशियन क्षेत्र के तीन सबसे बड़े देशों के बीच घनिष्ठ संवाद और सहयोग को बढ़ावा देने के लिए भारत की निरंतर प्रतिबद्धता की भी पुष्टि की। उन्होंने कहा, "मेरा मानना है कि व्यापार, निवेश, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, विज्ञान और प्रौद्योगिकी और राजनीति आदि क्षेत्रों में हमारा सहयोग वैश्विक विकास, शांति और स्थिरता में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।"

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वैज्ञानिको के अनुसार कोरोना का यह नया वैरिएंट डेल्टा वैरिएंट से भी ज़्यादा खतरनाक है। (Wikimedia Commons)

कोरोना(Corona) के कारण लगभग 18 से 20 महीने झूझने और घरों में बंद रहने के बाद दुनिया में अब ज़िन्दगी पटरी पर लौट रही है लेकिन अब दक्षिण अफ्रीका में पाए गए कोरोना के नए वैरिएंट ने अब दुनिया के कई देशों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। नए वैरिएंट का नाम बी.1.1.1.529 है। इस वैरिएंट के आने से वैज्ञानिको के बीच चिंता बढ़ गई है क्योंकि उनकी माने तो यह वैरिएंट डेल्टा प्लस वैरिएंट(Delta Plus Variant) से भी ज़्यादा खतरनाक है।

दक्षिण अफ्रीका(South Africa) में इस वैरिएंट के अब 100 मामले सामने आए हैं और अब यह धीरे-धीरे तेज़ी से फैलता जा रहा है।

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