लिपिकार: ईशान धर दुबे
लिपिकार: ईशान धर दुबे

शिव और शक्ति का अर्धनारीश्वर रूप इस बात का प्रमाण है... - ईशान धर दुबे

लिपिकार (Lipikar) में हम आज पढ़ेंगे MBBS के छात्र ईशान धर दुबे (Ishan Dhar Dubey) के बारे में जो साहित्य, किताबों और लेखकों में खासी रखते हैं।

ईशान धर दुबे

गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज एंड ई.एस.आइ. हॉस्पिटल, कोइम्बटोर से एम बी बी एस की पढ़ाई कर रहे हैं।

Q

आपकी पसंदीदा लेखन शैली क्या है?

A

संस्मरण, गैर-काल्पनिक, आत्मकथाएँ, आध्यात्मिकता, जासूसी कथा, फैंटेसी और बहुत कुछ

Q

आपके पसंदीदा लेखक/लेखिका कौन हैं?

A

रामधारी सिंह 'दिनकर', महादेवी वर्मा, मुंशी प्रेमचंद, हारुकी मुराकामी, मानव कौल, फ्योडोर

दोस्तोवेस्की, जे.के. राउलिंग, सर आर्थर कॉनन डॉयल

Q

आपकी पसंदीदा पुस्तक कौन सी है?

A

रश्मिरथी, गिल्लू, गबन, अंतिमा, किनारे पर काफ्का, हैरी पॉटर संग्रह, एटॉमिक हैबिट्स, डेथ, शर्लक होम्स, प्राइड एंड प्रेज्यूडिस

Q

आपके द्वारा लिखा गया पहला लेख?

A

वह एक कविता थी जो इस वक़्त मेरे पास नहीं है।

Q

आपको लिखने के लिए क्या प्रेरित करता है?

A

मेरे अपने जीवन के अनुभव, चीजों को व्यक्त करने और कभी-कभी उनके पीछे छिपने की मेरी इच्छा और ब्रह्माण्ड में घटित होने वाली छोटी-छोटी घटनाएं।

Q

आपका पसंदीदा उद्धरण क्या है?

A

'ब्रह्माण्ड की सारी शक्तियां पहले से हमारी हैं, वो हम ही हैं जो अपनी आंखो पर हाथ रख लेते है और फिर रोते हैं कि कितना अंधकार है' - स्वामी विवेकानंद

Q

आपके द्वारा लिखी गई सबसे अच्छी पंक्ति

A

वह वास्तविक सम्पूर्णता इन सबसे अलग है?

मैं: वास्तविक सम्पूर्णता ही वह अनंत गति है, जिसे थामने का प्रयास हमारा अचेतन मन करता रहता है, क्योंकि मेरे विचार में वास्तविक रूप में वही सम्पूर्ण है, जिसे एकरूपता का भान है, हम जगत की विभिन्नताएं सीख कर अंत में यह एकरूपता ही तो समाहित करने आये हैं। द्वैत से अद्वैत की यात्रा का भान है वास्तविक सम्पूर्णता । लिंग भेद के परे है वास्तविक सम्पूर्णता ।

शिव और शक्ति का अर्धनारीश्वर रूप इस बात का प्रमाण है कि मनुष्य को सम्पूर्ण होने हेतु स्त्रैण एवं पौरुष का बराबर संगम होना अनिवार्य है।

प्रेम जो इस सृष्टि का निर्माणकर्ता, उस कास्मिक रहस्य का मूल अर्थ समझने का निरर्थक प्रयास छोड़, उसकी पवित्रता का सार लेकर, उसकी अनुभूति करके, उसकी असीमिता को एक परमाणु में समाहित करना, जिस से डाल्टन की औलादों को एक नया रीसर्च का विषय मिल जाए, उसकी नवीनता को जीवित रखना,

उसके अपने मायने बनाना ही वास्तविक सम्पूर्णता की ओर बढ़ाया गया सबसे सार्थक कदम है।

वह: और प्रेम के तुम्हारे लिए क्या मायने हैं?

मैं: तुम!

Q

आपका पाठकों के लिए कोई संदेश?

A

जितना हो सके उतना पढ़ो। हर किताब आपको कुछ न कुछ सिखाएगी।

Q

यदि आप भूतकाल में जाकर अपने 18 वर्षीय स्वंय से बात कर सकें, तो आप उससे क्या कहेंगे?

A

मैं अपने 18 वर्षीय स्वंय से कहूंगा कि आप सही रास्ते पर हैं, इस रास्ते को कभी न छोड़ें और अपने बुनियादी मूल्यों को साथ रखने के साथ-साथ सीखते रहें, वह सब कुछ जो आपके रास्ते में आता है।

Q

आप सबसे अधिक किसका आदर करते हैं?

A

मैं अपने सबसे पूर्ण और सर्वोच्च रूप, शिव की ओर देखता हूँ।

Q

अगर आपको एक सुपर पावर दी जाए तो वह क्या होगी ?

A

काश मैं टेलीपोर्ट कर पाता। मैं अपने घर और अपने लोगों से दूर पढ़ाई कर रहा हूं। मैं उनसे मिलना चाहता हूं और हर रोज़ अपने घर पर रहना चाहता हूं

Q

आपके अनुसार आधुनिक साहित्य में कौन सी चीजें बदल गई हैं?

A

आधुनिक साहित्य अपनी अधिक प्रासंगिकता के कारण अधिक पाठकों, विशेषकर युवाओं को आकर्षित करने में सफल रहा है। लेखन विकल्प के रूप में यह वरदान और अभिशाप दोनों ही है।

Q

अगर आपको मौका मिले तो आप क्या बदलाव करना चाहेंगे?

A

मैं लेखन को भाव प्रधान रखना चाहूँगा भले ही भाषा प्रधान में थोड़ी कमी हो।

Q

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस युग में, क्या आपको लगता है कि AI लेखकों के करियर पर कब्ज़ा कर सकता है?

A

नहीं

Q

नए लेखकों को आप क्या संदेश देना चाहेंगे?

A

अपने दिल की बात और अनुभवों को खुलकर जाहिर करते रहें। भगवान हमेशा आपका अच्छा ही चाहेगा।

लिपिकार/ईशान धर दुबे/PS

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