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राजनीति

‘जनता दरबार’ से खोई जमीन तलाशने में जुटे नीतीश!

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का जनता दरबार एकबार फिर चर्चा में है। पिछले साल हुए विधानसभा चुनाव में राजग को बहुमत मिलने के बाद करीब पांच साल के अंतराल पर सोमवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जनता दरबार लगाया, जिसमें फरियादियों ने अपनी समस्स्याएं रखीं

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (wikimedia commons)

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का जनता दरबार एकबार फिर चर्चा में है। पिछले साल हुए विधानसभा चुनाव में राजग को बहुमत मिलने के बाद करीब पांच साल के अंतराल पर सोमवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जनता दरबार लगाया, जिसमें फरियादियों ने अपनी समस्स्याएं रखीं। वैसे, पिछले जनता दरबार की तुलना में यह जनता दरबार कई मायने में अलग दिखा, इस कारण चर्चा प्रारंभ हो गई। कहा जा रहा है कि पिछले चुनाव में राज्य में जनता दल (युनाइटेड) के तीसरी नंबर की पार्टी बनने के बाद नीतीश जनता दरबार के जरिए फिर से अपनी खोई जमीन तलाशने में जुटे हैं। सोमवार को लगे जनता दरबार में मुख्यमंत्री ने कई विभागों की समस्याएं सुनी और तत्काल इसके समाधन को लेकर अधिकारियों को निर्देशित किया।

पांच साल बाद मुख्यमंत्री को फिर से जनता दरबार लगाए जाने पर सवाल भी उठाए जाने लगे हैं कि आखिर क्या कारण है कि नीतीश को फिर से जनता दरबार लगाना पड़ रहा है।


बिहार कांग्रेस के मीडिया विभाग के चेयरमैन राजेश राठौड़ कहते हैं कि मुख्यमंत्री जनता दरबार के माध्यम से बिहार की भोली भाली जनता को ठगने का काम करते हैं। उन्होंने कहा, “वर्ष 2005 में सरकार बनने के बाद से लेकर 2015 तक लगातार जनता दरबार का आयोजन करने वाले नीतीश कुमार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि जनता दरबार में अब तक कितने आवेदनकर्ता आए, कितने फरियादियों को न्याय मिला और कितने मामले अब तक निष्पादित हुए।”

प्रधानमंत्री मोदी का स्वागत करते हुए बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (wikimedia commons)

राठौड़ आगे कहते हैं, “नीतीश कुमार जनता दरबार लगाकर केवल लोकप्रियता प्राप्त करने की जुगत भीड़ा रहे हैं। जनता दरबार की जगह उन्हें जनता के दरबार में जाना चाहिए न कि जनता को अपने दरबार में बुलाना चाहिए। 2016 में जनता दरबार बंद करने वाले मुख्यमंत्री अपनी गिरती लोकप्रियता को बचाने के लिए 2021 में फिर से जनता दरबार का ढोंग शुरू किए हैं।”

इधर, जदयू के प्रवक्ता और विधान पार्षद नीरज कुमार कहते हैं कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पहचान अलग प्रकार की राजनीति रही है। वे राजनीति के साथ समाज सुधार को भी प्राथमिकता में रखते हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने लोगों से सीधे संवाद के लिए कई कार्यक्रम प्रारंभ किए। जनता दरबार के जरिए मुख्यमंत्री एकबार फिर लोगों से सीधा संवाद प्रारंभ कर रहे हैं।

राजनीतिक विश्लेषक मणिकांत ठाकुर कहते हैं कि नीतीश कुमार के पूर्व में लगाए गए ‘जनता दरबार में मुख्यमंत्री’ में समस्याएं तो आती थीं, लेकिन समाधान नहीं निकलने पर इसको लेकर सरकार की आलोचना होने लगी। सरकार की विफलता उभरकर सामने आने लगी, इस कारण यह कार्यक्रम ही बंद कर दिया गया।

अब एकबार फिर से जब इसकी शुरुआत हुई है, तो यह पूर्व नियंत्रित है। इसमें उसी सवाल को स्थान दिया जाएगा, जो अधिकारी पास कर भेज रहे हैं। उन्होंने कहा कि पहले जनता दरबार में पत्रकारों के कवरेज की छूट थी इस बार मनाही है।

उन्होंने कहा, “नीतीष का कार्य प्रारंभ से ही अधिकारियों द्वारा परोसकर दिया जाता रहा है। नीतीष कभी लोगों के बीच सीधे तौर पर नहीं पहुंच सके हैं। पहले लोग जनता दरबार में खुद आते थे और इस बार सब-कुछ प्रशासन के जिम्मे है।”

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ठाकुर कहते हैं, “पिछले जनता दरबार के अनुभव के आधार पर इस जनता दरबार से लोगों के भला होने की उम्मीद नहीं है। मेरे विचार से इससे मुख्यमंत्री को भी बहुत फायदा होगा, इसमें शक है। हां, कुछ प्रश्नों से प्रखंड और जिला में हो रही कार्यप्रणाली का अंदाजा मुख्यमंत्री को जरूर लग जाएगा।” (आईएएनएस-PS)

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बारे में बात करते हुए योगी ने तारीफ की (wikimedia commons )

हमारा देश भारत अनेकता में एकता वाला देश है । हमारे यंहा कई धर्म जाती के लोग एक साथ रहते है , जो इसे दुनिया में सबसे अलग श्रेणी में ला कर खड़ा करता है । योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं । उन्होंने एक बयान में कहा कि नई थ्योरी में पता चला है कि पूरे देश का डीएनए एक है। यहां आर्य-द्रविण का विवाद झूठा और बेबुनियाद रहा है। भारत का डीएनए एक है इसलिए भारत एक है। साथ ही उन्होंने कहा की दुनिया की तमाम जातियां अपने मूल में ही धीरे धीरे समाप्त होती जा रही हैं , जबकि हमारे भारत देश में फलफूल रही हैं। भारत ने ही पूरी दुनिया को वसुधैव कुटुंबकम का भाव दिया है इसलिए हमारा देश श्रेष्ठ है। आप को बता दे कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शनिवार को युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ की व राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ की पुण्यतिथि पर आयोजित एक श्रद्धांजलि समारोह का शुरुआत करने गये थे। आयोजन के पहले दिन मुख्यमंत्री ने कहा कि कोई भी ऐसा भारतीय नहीं होगा जिसे अपने पवित्र ग्रन्थों वेद, पुराण, उपनिषद, रामायण, महाभारत आदि की जानकारी न हो। हर भारतीय परम्परागत रूप से इन कथाओं ,कहनियोंको सुनते हुए, समझते हए और उनसे प्रेरित होते हुए आगे बढ़ता है।

साथ ही मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे यंहा के कोई भी वेद पुराण हो या ग्रंथ हो इनमे कही भी नहीं कहा गया की हम बहार से आये थे । हमारे ऐतिहासिक ग्रन्थों में जो आर्य शब्द है वह श्रेष्ठ के लिए और अनार्य शब्द का प्रयोग दुराचारी के लिए कहा गया है। मुख्यमंत्री योगी ने रामायण का उदाहरण भी दिया योगी ने कहा कि रामायण में माता सीता ने प्रभु श्रीराम की आर्यपुत्र कहकर संबोधित किया है। लेकिन , कुटिल अंग्रेजों ने और कई वामपंथी इतिहासकारों के माध्यम से हमारे इतिहास की किताबो में यह लिखवाया गया कि आर्य बाहर से आए थे । ऐसे ज्ञान से नागरिकों को सच केसे मालूम चलेगा और ईसका परिणाम देश लंबे समय से भुगतता रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बारे में बात करते हुए योगी ने कहा कि , आज इसी वजह से मोदी जी को एक भारत-श्रेष्ठ भारत का आह्वान करना पड़ा। आज मोदी जी के विरोध के पीछे एक ही बात है। साथ ही वो विपक्ष पर जम के बरसे। उन्होंने मोदी जी के बारे में आगे कहा कि उनके नेतृत्व में अयोध्या में पांच सौ वर्ष पुराने विवाद का समाधान हुआ है। यह विवाद खत्म होने से जिनके खाने-कमाने का जरिया बंद हो गया है तो उन्हें अच्छा कैसे लगेगा।

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अल्जाइमर रोग एक मानसिक विकार है। (unsplash)

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कर्टिन हेल्थ इनोवेशन रिसर्च इंस्टीट्यूट के निदेशक प्रमुख जांचकर्ता प्रोफेसर जॉन मामो ने कहा "जबकि हम पहले जानते थे कि अल्जाइमर रोग से पीड़ित लोगों की पहचान विशेषता बीटा-एमिलॉयड नामक मस्तिष्क के भीतर जहरीले प्रोटीन जमा का प्रगतिशील संचय था, शोधकर्ताओं को यह नहीं पता था कि एमिलॉयड कहां से उत्पन्न हुआ, या यह मस्तिष्क में क्यों जमा हुआ," शोध से पता चलता है कि अल्जाइमर रोग से पीड़ित लोगों के दिमाग में जहरीले प्रोटीन बनते हैं, जो रक्त में वसा ले जाने वाले कणों से मस्तिष्क में रिसाव की संभावना रखते हैं। इसे लिपोप्रोटीन कहा जाता है।

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इसके अलावा, पीएम मोदी ने विश्व के नेताओं से यह सुनिश्चित करने का आह्वान किया कि मानवीय सहायता अफगानिस्तान तक निर्बाध रूप से पहुंचे। मोदी ने कहा, "अगर हम इतिहास में पीछे मुड़कर देखें, तो हम पाएंगे कि मध्य एशिया उदारवादी, प्रगतिशील संस्कृतियों और मूल्यों का केंद्र रहा है।
"भारत इन देशों के साथ अपनी कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है और हम मानते हैं कि भूमि से घिरे मध्य एशियाई देश भारत के विशाल बाजार से जुड़कर अत्यधिक लाभ उठा सकते हैं"

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