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एनएमसीजी का अगला लक्ष्य अगले पांच वर्षों में गंगा की सहायक नदियों में सफाई करना है

"हमारी नदियों के सबसे प्रदूषित हिस्सों की पहचान केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा की जा चुकी है और उन पर नजर रखी जा रही है।"- जल शक्ति सचिव पंकज कुमार

एनएमसीजी का अगला लक्ष्य अगले पांच वर्षों में गंगा की सहायक नदियों में सफाई करना है।(Wikimedia Commons)

जल शक्ति सचिव पंकज कुमार ने शनिवार को आईटीओ के छठ घाट पर जल शक्ति मंत्रालय और वैपकोस द्वारा स्वच्छता अभियान के दौरान कहा, ''राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) का अगला लक्ष्य अगले पांच वर्षों में गंगा की सहायक नदियों में सफाई प्रक्रिया को तेज करना है। एनएमसीजी में 'गंगा प्रहरी' (गंगा के संरक्षक) और 'गंगा दूत' जैसे कैडर हैं। वे प्रशिक्षित वॉलेंटियर्स हैं, जो स्थानीय समुदायों के बीच काम करते हैं, ताकि लोगों में जागरूकता पैदा की जा सके कि नदी को जीवित रखने के लिए इसकी सफाई कितनी महत्वपूर्ण है।"

कुमार ने कहा, "हमारी नदियों के सबसे प्रदूषित हिस्सों की पहचान केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा की जा चुकी है और उन पर नजर रखी जा रही है।"


दरअसल जल शक्ति मंत्रालय एक जन जागरूकता अभियान बनाने के तहत ग्राम पंचायतों और गांवों में जल और स्वच्छता समितियों को लक्षित कर रहा है।

ganga river, clean india mission जल शक्ति मंत्रालय गंगा नदी के बाद उसकी सहायक नदियों की सफाई पर भी जोर देगा [wikimedia commons]

उत्तराखंड के बाद अपने अगले लक्ष्य के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा, "उत्तराखंड में गंगा के ऊपरी हिस्से को पहले ही साफ कर दिया गया है। अब उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल में काम चल रहा है। इस प्रक्रिया में हम प्रमुख शहरों के 'घाटों' को आधुनिक बनाने के लिए उन्हें भी लक्षित कर रहे हैं। इन सबके लिए एक जन आंदोलन की आवश्यकता होगी, क्योंकि नदियों और उनके आस-पास को जनता की मदद के बिना साफ नहीं रखा जा सकता है, इसलिए इस सब के बारे में जन जागरूकता फैलाना हमारा एक और फोकस है।"

यह भी पढ़ें : हिंदू माता-पिता अपने बच्चों को धर्म के प्रति जागृत कर रोक सकते हैं धर्मांतरण!

'स्वच्छ भारत मिशन 1.0' के बारे में आईएएनएस से बातचीत में कुमार ने कहा, "यदि आप स्वच्छ भारत मिशन 1.0 देखें, तो हमने 10 करोड़ से अधिक शौचालयों का निर्माण करके और व्यापक व्यवहार परिवर्तन लाकर अपने लक्ष्य को पर्याप्त रूप से प्राप्त किया है। अंतर्राष्ट्रीय एजेंसियों द्वारा भी नोट किया गया है। इसलिए बहुत प्रगति हुई है और यह लोगों की व्यापक भागीदारी के कारण ही संभव हुआ है और स्वच्छ भारत 2.0 के लिए हमारा दृष्टिकोण यही होगा।"

Input: IANS ; Edited By: Manisha Singh

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