Never miss a story

Get subscribed to our newsletter


×
देश

स्कूल खोले जाने का फैसला अभी नहीं, छात्रों को रेडियो देने की सलाह

बैठक में मौजूद एक सांसद ने कहा, "शिक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि 2020 शून्य शिक्षा का वर्ष नहीं होगा, छात्रों को शिक्षा प्रदान की जाएगी। फिलहाल परीक्षाएं केवल उच्च शिक्षा के लिए होंगी।"

रमेश पोखरियाल निशंक, केन्द्रीय शिक्षा मंत्री(फ़ाइल फोटो, पीआईबी)

2020 शून्य शिक्षा वर्ष नहीं होगा, साथ ही अभी पूरे देश में स्कूल खोले जाने को लेकर भी कोई निर्णय नहीं लिया गया है। यह जानकारी सोमवार को शिक्षा मंत्रालय की संसदीय समिति की बैठक में सामने आई। कक्षा 4 और उससे बड़ी कक्षाओं के लिए ऑनलाइन क्लास भी जारी रहेगी। राज्य सभा सांसद विनय सहस्रबुद्धे की अध्यक्षता में शिक्षा मंत्रालय संबंधी संसद की स्थायी समिति ने कोरोनोवायरस महामारी के बीच शिक्षा और छात्रों की स्थिति पर चर्चा की। सहस्रबुद्धे के अध्यक्ष के रूप में कार्यभार संभालने के बाद से यह समिति की पहली बैठक थी। बैठक में स्कूल शिक्षा और उच्च शिक्षा के सचिव, यूजीसी के अध्यक्ष, एआईसीटीई और सीबीएसई के अधिकारी शामिल हुए।

सभी छात्रों को लैपटॉप और मोबाइल फोन देना संभव नहीं है, इसलिए सांसदों ने जरूरतमंद छात्रों को ट्रांजिस्टर देने की सलाह दी है। सांसदों के मुताबिक यह कदम लागत प्रभावी होगा और इसे ग्रामीण क्षेत्रों में भी आसानी से लागू किया जा सकता है।


मास्क लगा कर लैपटाप का किया जा रहा इस्तेमाल (सांकेतिक तस्वीर) (Pixabay)

बैठक में मौजूद एक सांसद ने कहा, “शिक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि 2020 शून्य शिक्षा का वर्ष नहीं होगा, छात्रों को शिक्षा प्रदान की जाएगी। फिलहाल परीक्षाएं केवल उच्च शिक्षा के लिए होंगी।” कई सांसदों ने बैठक में अधिकारियों को बच्चों के लिए ऑनलाइन कक्षाएं संचालित करने की व्यवहार्यता के बारे में बताया।

यह भी पढ़ें: बिहार में कोरोना मरीजों के लिए बना ‘कोविड नाव एंबुलेंस’, देखें तस्वीर

इस दौरान शिक्षा में सुधारों पर भी चर्चा हुई। परीक्षा के दौरान किसी छात्र की प्रगति का आंकलन करने के लिए प्रश्न बैंक को अपनाने की प्रणाली के उपयोग पर भी बात की गई।

वहीं सोमवार को ही एक कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा, “2020 की नई शिक्षा नीति 21वीं सदी की पहली शिक्षा नीति है जो कि 34 साल बाद आई है। नई शिक्षा नीति के जरिए भारत को 21वीं सदी में नए युग की चुनौतियों से लड़ने के लिए तैयार करने का लक्ष्य है। नई शिक्षा नीति को सुव्यवस्थित और गहन विचार विमर्श के बाद तैयार किया गया है।”

यह भी पढ़ें: शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल ने नई शिक्षा नीति से जुड़े हर सवाल का दिया जवाब, पढ़ें

इस नीति में शिक्षा के माध्यम की भाषा को लेकर उठ रहे विवाद पर अपनी बात रखते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा, “हम सब ये अच्छी तरह से जानते हैं कि 8 साल से कम उम्र के बच्चे भाषाएं ज्यादा तेजी से सीखते हैं और भाषा सीखना बच्चे के संज्ञानात्मक विकास का बेहद अहम पहलू है। इसलिए इस अवस्था में बहुत-सी भाषाएं या कम से कम तीन भाषाएं सिखाई जाएं।” (आईएएनएस)

Popular

बॉलीवुड स्टार आयुष्मान खुराना (Ayushmann Khurrana) [Wikimedia Commons]

बॉलीवुड स्टार आयुष्मान खुराना (Ayushmann Khurrana) ने लोकप्रिय स्पेनिश सीरीज 'मनी हाइस्ट' के लिए अपने प्यार को कबूल कर लिया है और सर्जियो माक्र्विना द्वारा निभाए गए अपने पसंदीदा चरित्र 'प्रोफेसर' को ट्रिब्यूट दिया है। एक मजेदार टेक में, स्टार ने प्रसिद्ध 'प्रोफेसर' चरित्र को ट्रिब्यूट दी, हैशटैग इंडियाबेलाचाओ फैन प्रतियोगिता की शुरूआत करते हुए प्रशंसकों को श्रृंखला के लिए अपने प्यार को दिखाने और साझा करने की अनुमति दी। आयुष्मान पियानो पर क्लासिक 'बेला चाओ' का अपना गायन भी गाते हुए दिखाई देते हैं।

Keep Reading Show less

पंकज त्रिपाठी, अभिनेता [wikimedia commons]

अभिनेता पंकज त्रिपाठी कई विज्ञापन को साइन करने के लिए तैयार हैं। मगर साथ ही अभिनेता ने लापरवाही से सौदों पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया है, क्योंकि उन्हें लगता है कि उनके प्रशंसकों और समाज के प्रति उनकी नैतिक जिम्मेदारी है। त्रिपाठी जी के कालीन भैया ('मिजार्पुर'), सुल्तान ('गैंग्स ऑफ वासेपुर'), रुद्र ('स्त्री') और कई अन्य उनके किरदार दर्शकों को बेहद पसंद आए हैं।

Mirzapur, amazon prime video, web series अभिनेता पंकज त्रिपाठी ने मिर्जापुर वेब सीरीज में अपने पात्र कालीन भैया के लिए काफी प्रशंसा बटोरी । (Pankaj Tripathi , Facebook)

Keep Reading Show less

सुशील मोदी, भाजपा के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद [twitter]

भाजपा के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद सुशील कुमार (Sushil modi) मोदी ने नीति आयोग की ताजा रिपोर्ट को चुनौती दी है, जिसमें बिहार को सभी मानकों में सबसे निचले पायदान पर रखा गया है। मोदी ने दावा किया है कि आयोग संबंधित राज्य सरकारों से परामर्श किए बिना रिपोर्ट तैयार करता है। इसलिए यह जमीनी हकीकत पर आधारित नहीं है।

नीतीश कुमार के करीबी मोदी ने कहा, "नीति आयोग ने किसी तरह शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क के बुनियादी ढांचे से संबंधित रिपोर्ट तैयार की और बिहार को सबसे नीचे रखा। इसके अधिकारियों ने गलत चीजों का मूल्यांकन करने के लिए एक पुराने तंत्र का विकल्प चुना है। उन्हें संबंधित राज्य सरकारों से परामर्श करना चाहिए और सुविधाओं का मूल्यांकन करना चाहिए। पिछले 10 से 15 वर्षों के विकास को ध्यान में रखें।"

Keep reading... Show less