Never miss a story

Get subscribed to our newsletter


×
देश

अब सबके मोबाइल में होगी सूचना विभाग की डायरी : मुख्यमंत्री योगी

मकर संक्रांति के पावन पर्व पर गोरखनाथ मंदिर से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जनता को एक और सौगात दी। मुख्यमंत्री ने सूचना विभाग की डिजिटल डायरी और एप का लोकार्पण किया, जिसके जरिये राज्य के जनप्रतिनिधियों, विभागों और अधिकारियों तक जन-जन की पहुंच और आसान हो सकेगी। इस डायरी में इन सबका नाम, पता, पद

 मकर संक्रांति के पावन पर्व पर गोरखनाथ मंदिर से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जनता को एक और सौगात दी। मुख्यमंत्री ने सूचना विभाग की डिजिटल डायरी और एप का लोकार्पण किया, जिसके जरिये राज्य के जनप्रतिनिधियों, विभागों और अधिकारियों तक जन-जन की पहुंच और आसान हो सकेगी। इस डायरी में इन सबका नाम, पता, पद और मोबाइल नंबर होगा, साथ ही केंद्रीय मंत्रियों के बारे में भी जानकारी होगी। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने डाक विभाग द्वारा तैयार खिचड़ी मेले के विशेष आवरण का भी अनावरण किया। गोरखनाथ मन्दिर में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि, “आज जमाना तकनीकी का है। इसके प्रयोग से हम हर क्षेत्र में व्यापक सुधार ला सकते हैं। अच्छी बात यह है कि हम भी जमाने के साथ बदल रहे हैं। सूचना विभाग ने डिजिटल डायरी-एप के जरिये एक अभिनव पहल की है। अब मोबाइल ही डायरी होगा। लोग निशुल्क इस एप को अपने मोबाइल में डाउनलोड कर राज्य के हर विभाग से संपर्क स्थापित कर सकेंगे।”

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि, “तकनीकी के माध्यम से ही हम कोरोना संक्रमण के दौर में आमजन को बेहतरीन सेवाएं देने में सफल हो सके। जनधन खातों में सहायता राशि, पेंशन, भरण पोषण भत्ता, छात्रवृत्ति आदि लोगों को घर बैठे मिल सकी। तकनीकी के जरिये ही 2.35 करोड़ किसानों के खातों में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि और 44 लाख प्रवासियों को भरण पोषण भत्ता दिया जा सका। इस सबके पीछे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मार्गदर्शन था।”


क्या हैं डिजिटल डायरी-एप ?

अपर मुख्य सचिव सूचना नवनीत सहगल ने मुख्यमंत्री का स्वागत करने के साथ ही सूचना विभाग की डिजिटल डायरी-एप के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि, “कोरोना काल में इसकी प्रेरणा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ही दी। देश में सूचना विभाग की पहली बार इस तरह की डिजिटल डायरी बनी है। कोई भी व्यक्ति अपने मोबाइल में प्लेस्टोर से एप को निशुल्क डाउनलोड कर सकता है। अभी तक मैनुअल होने के नाते सूचना विभाग की डायरी सभी को नहीं मिल पाती थी, लेकिन एप के रूप में इसकी पहुंच सभी तक हो जाएगी। उसमें सभी जनप्रतिनिधियों, विभागों, अधिकारियों और मीडिया के लोगों के नाम, फोन नम्बर और ईमेल एड्रेस दर्ज हैं। सर्च ऑप्शन में जाकर किसी के बारे में पता किया जा सकता है।”

यह भी पढ़ें : भारत और कजाकिस्तान के रिश्ते को इस साक्षात्कार से जानें

सहगल ने कहा कि, “मकर संक्रांति एक श्रेष्ठतम अवसर है और वह खुद को सौभाग्यशाली मानते हैं कि इस अवसर पर उन्हें शिवावतारी बाबा गोरखनाथ का दर्शन करने और सूचना विभाग की ओर से मुख्यमंत्री के हाथों डिजिटल डायरी के लोकार्पण कराने का सुअवसर प्राप्त हुआ।”

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने डाक विभाग के विशेष आवरण का भी अनावरण किया। खिचड़ी मेले पर विशेष आवरण ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ की स्मृति को समर्पित है। इसके पहले 2016 में डाक विभाग ने ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ की पहली पुण्यतिथि पर डाक टिकट जारी किया था। उसी को इस बार विशेष आवरण के रूप में जारी किया गया है।इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि, “डाक विभाग का यह प्रयास हमारी विरासत और परम्परा को आगे बढ़ाने में मददगार होगा। भविष्य की पीढ़ी अपने पूर्वजों के बारे में अवगत हो सकेगी।” आवरण के बारे में विस्तार से जानकारी पोस्ट मास्टर जनरल आकाशदीप चक्रवर्ती ने दी। (आईएएनएस)

Popular

अल्जाइमर रोग एक मानसिक विकार है। (unsplash)

ऑस्ट्रेलिया के शोधकर्ताओं ने एक अभूतपूर्व अध्ययन में 'ब्लड-टू-ब्रेन पाथवे' की पहचान की है जो अल्जाइमर रोग का कारण बन सकता है। कर्टिन विश्वविद्यालय जो कि ऑस्ट्रेलिया के पर्थ शहर में है, वहाँ माउस मॉडल पर परीक्षण किया गया था, इससे पता चला कि अल्जाइमर रोग का एक संभावित कारण विषाक्त प्रोटीन को ले जाने वाले वसा वाले कणों के रक्त से मस्तिष्क में रिसाव था।

कर्टिन हेल्थ इनोवेशन रिसर्च इंस्टीट्यूट के निदेशक प्रमुख जांचकर्ता प्रोफेसर जॉन मामो ने कहा "जबकि हम पहले जानते थे कि अल्जाइमर रोग से पीड़ित लोगों की पहचान विशेषता बीटा-एमिलॉयड नामक मस्तिष्क के भीतर जहरीले प्रोटीन जमा का प्रगतिशील संचय था, शोधकर्ताओं को यह नहीं पता था कि एमिलॉयड कहां से उत्पन्न हुआ, या यह मस्तिष्क में क्यों जमा हुआ," शोध से पता चलता है कि अल्जाइमर रोग से पीड़ित लोगों के दिमाग में जहरीले प्रोटीन बनते हैं, जो रक्त में वसा ले जाने वाले कणों से मस्तिष्क में रिसाव की संभावना रखते हैं। इसे लिपोप्रोटीन कहा जाता है।

Keep Reading Show less

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Wikimedia Commons)

शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) सम्मेलन को संम्बोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चरमपंथ और कट्टरपंथ की चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए एससीओ द्वारा एक खाका विकसित करने का आह्वान किया। 21वीं बैठक को संम्बोधित करते हुए उन्होंने कहा कि मध्य एशिया में अमन के लिए सबसे बड़ी चुनौती है विश्वास की कमी।

इसके अलावा, पीएम मोदी ने विश्व के नेताओं से यह सुनिश्चित करने का आह्वान किया कि मानवीय सहायता अफगानिस्तान तक निर्बाध रूप से पहुंचे। मोदी ने कहा, "अगर हम इतिहास में पीछे मुड़कर देखें, तो हम पाएंगे कि मध्य एशिया उदारवादी, प्रगतिशील संस्कृतियों और मूल्यों का केंद्र रहा है।
"भारत इन देशों के साथ अपनी कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है और हम मानते हैं कि भूमि से घिरे मध्य एशियाई देश भारत के विशाल बाजार से जुड़कर अत्यधिक लाभ उठा सकते हैं"

Keep Reading Show less

क्रांतिकारी दुर्गावती देवी (wikimedia commons)

हिंदुस्तान की भूमि पर कई साहसी और निडर लोगों का जन्म हुआ जिन्होने भारत की आजादी में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया था। लेकिन दुःख की बात यह है कि इनका नाम इतिहास के पन्नों में इतनी बार दर्ज नहीं हुआ जितना होना चाहिए था। ऐसी ही एक वीरांगना का नाम है दुर्गावती देवी। इन्हें दुर्गा भाभी के नाम से भी जाना जाता है। यह उन महिलाओं में से एक थी जिन्होंने ब्रिटिश राज के खिलाफ क्रांति में भाग लिया था।

दुर्गा भाभी का जन्म 7 अक्टूबर 1907 में उत्तर प्रदेश के कौशांबी जिले में हुआ था। इनका जन्म छोटी उम्र में ही भगवती वोहरा जी के साथ हुआ। भगवती वोहरा का परिवार लाहौर का प्रतिष्ठित परिवार था। दुर्गावती के पति भी क्रांति में पुरजोर तरीके से भाग लेना चाहते थे। लेकिन पिता के दबाव के कारण ऐसा कर नहीं पा रहे थे। पिता का देहांत होने के बाद भगवती जी ने भी क्रांति में भाग लिया था।

Keep reading... Show less