Never miss a story

Get subscribed to our newsletter


×
थोड़ा हट के

यूएई में प्रवासी भारतीय ने बनाया सबसे बड़ा ग्रीटिंग कार्ड, रिकॉर्ड कायम

दुबई स्थित एक प्रवासी भारतीय ने शनिवार को सबसे बड़े ‘पॉप अप ग्रीटिंग्स कार्ड’ के विश्व रिकॉर्ड को तोड़ दिया है। मीडिया रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई। गल्फ न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, रामकुमार सारंगपााणि वर्तमान में संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में सबसे अधिक गिनीज वल्र्ड रिकॉर्ड धारक हैं और यह उनका 19वां विश्व

दुबई स्थित एक प्रवासी भारतीय ने शनिवार को सबसे बड़े ‘पॉप अप ग्रीटिंग्स कार्ड’ के विश्व रिकॉर्ड को तोड़ दिया है। मीडिया रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई। गल्फ न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, रामकुमार सारंगपााणि वर्तमान में संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में सबसे अधिक गिनीज वल्र्ड रिकॉर्ड धारक हैं और यह उनका 19वां विश्व रिकॉर्ड है।

सारंगपााणि का ग्रीटिंग कार्ड आम पॉप अप ग्रीटिंग कार्ड से 100 गुना बड़ा है और इसमें यूएई के उप-राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के साथ ही दुबई के शासक शेख मोहम्मद बिन राशिद अल मकतौम के चित्रों का एक कोलाज भी है, जो दुबई स्थित कलाकार अकबर साहेब का बनाया हुआ है।


यह भी पढ़ें : ट्विटर पर छाए योगी, ट्रेंड करता रहा ‘योगीजी नंबर 01

इसका 8.20 वर्ग मीटर का क्लोजड सरफेस एरिया है, जबकि इससे पहले यह रिकॉर्ड हांगकांग निवासी का था, जिन्होंने 6.729 वर्ग मीटर क्लोजड सरफेस एरिया में ग्रीटिंग बनाकर रिकॉर्ड बनाया था। अब भारतीय मूल के यूएई निवासी ने इस रिकॉर्ड को तोड़ दिया है।

कार्ड को नुमिसबिंग आर्ट गैलरी, दोहा केंद्र, अल मकतूम रोड पर प्रदर्शित किया जाएगा और इसके साथ ही सबसे बड़ा इलेक्ट्रॉनिक ग्रीटिंग्स कार्ड भी प्रदर्शित किया जाएगा, जिसे यूएई के 49वें राष्ट्रीय दिवस के अवसर पर आयोजित किया जा रहा है। यह प्रदर्शनी 4 से 18 जनवरी तक 15 दिनों के लिए होगी। (आईएएनएस)

Popular

अल्जाइमर रोग एक मानसिक विकार है। (unsplash)

ऑस्ट्रेलिया के शोधकर्ताओं ने एक अभूतपूर्व अध्ययन में 'ब्लड-टू-ब्रेन पाथवे' की पहचान की है जो अल्जाइमर रोग का कारण बन सकता है। कर्टिन विश्वविद्यालय जो कि ऑस्ट्रेलिया के पर्थ शहर में है, वहाँ माउस मॉडल पर परीक्षण किया गया था, इससे पता चला कि अल्जाइमर रोग का एक संभावित कारण विषाक्त प्रोटीन को ले जाने वाले वसा वाले कणों के रक्त से मस्तिष्क में रिसाव था।

कर्टिन हेल्थ इनोवेशन रिसर्च इंस्टीट्यूट के निदेशक प्रमुख जांचकर्ता प्रोफेसर जॉन मामो ने कहा "जबकि हम पहले जानते थे कि अल्जाइमर रोग से पीड़ित लोगों की पहचान विशेषता बीटा-एमिलॉयड नामक मस्तिष्क के भीतर जहरीले प्रोटीन जमा का प्रगतिशील संचय था, शोधकर्ताओं को यह नहीं पता था कि एमिलॉयड कहां से उत्पन्न हुआ, या यह मस्तिष्क में क्यों जमा हुआ," शोध से पता चलता है कि अल्जाइमर रोग से पीड़ित लोगों के दिमाग में जहरीले प्रोटीन बनते हैं, जो रक्त में वसा ले जाने वाले कणों से मस्तिष्क में रिसाव की संभावना रखते हैं। इसे लिपोप्रोटीन कहा जाता है।

Keep Reading Show less

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Wikimedia Commons)

शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) सम्मेलन को संम्बोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चरमपंथ और कट्टरपंथ की चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए एससीओ द्वारा एक खाका विकसित करने का आह्वान किया। 21वीं बैठक को संम्बोधित करते हुए उन्होंने कहा कि मध्य एशिया में अमन के लिए सबसे बड़ी चुनौती है विश्वास की कमी।

इसके अलावा, पीएम मोदी ने विश्व के नेताओं से यह सुनिश्चित करने का आह्वान किया कि मानवीय सहायता अफगानिस्तान तक निर्बाध रूप से पहुंचे। मोदी ने कहा, "अगर हम इतिहास में पीछे मुड़कर देखें, तो हम पाएंगे कि मध्य एशिया उदारवादी, प्रगतिशील संस्कृतियों और मूल्यों का केंद्र रहा है।
"भारत इन देशों के साथ अपनी कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है और हम मानते हैं कि भूमि से घिरे मध्य एशियाई देश भारत के विशाल बाजार से जुड़कर अत्यधिक लाभ उठा सकते हैं"

Keep Reading Show less

क्रांतिकारी दुर्गावती देवी (wikimedia commons)

हिंदुस्तान की भूमि पर कई साहसी और निडर लोगों का जन्म हुआ जिन्होने भारत की आजादी में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया था। लेकिन दुःख की बात यह है कि इनका नाम इतिहास के पन्नों में इतनी बार दर्ज नहीं हुआ जितना होना चाहिए था। ऐसी ही एक वीरांगना का नाम है दुर्गावती देवी। इन्हें दुर्गा भाभी के नाम से भी जाना जाता है। यह उन महिलाओं में से एक थी जिन्होंने ब्रिटिश राज के खिलाफ क्रांति में भाग लिया था।

दुर्गा भाभी का जन्म 7 अक्टूबर 1907 में उत्तर प्रदेश के कौशांबी जिले में हुआ था। इनका जन्म छोटी उम्र में ही भगवती वोहरा जी के साथ हुआ। भगवती वोहरा का परिवार लाहौर का प्रतिष्ठित परिवार था। दुर्गावती के पति भी क्रांति में पुरजोर तरीके से भाग लेना चाहते थे। लेकिन पिता के दबाव के कारण ऐसा कर नहीं पा रहे थे। पिता का देहांत होने के बाद भगवती जी ने भी क्रांति में भाग लिया था।

Keep reading... Show less