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खेल

सबसे वृद्ध जीवित ओलंपिक चैम्पियन क्लेटी ने अपना 100वां जन्मदिन मनाया

पांच स्वर्ण सहित 10 ओलंपिक पदक जीतने वाली सबसे वृद्ध जीवित ओलंपिक चैम्पियन और हंगरी की पूर्व महिला जिम्नास्ट एग्नेस क्लेटी ने शनिवार को अपना 100वां जन्मदिन मनाया। वर्ष 1921 में जन्मीं हंगरी की सबसे सफल ओलंपियन क्लेटी ने जिम्नास्टिक में अपने करियर में 10 पदक जीते थे, जिसमें पांच स्वर्ण पदक भी शामिल है।

पांच स्वर्ण सहित 10 ओलंपिक पदक जीतने वाली सबसे वृद्ध जीवित ओलंपिक चैम्पियन और हंगरी की पूर्व महिला जिम्नास्ट एग्नेस क्लेटी ने शनिवार को अपना 100वां जन्मदिन मनाया। वर्ष 1921 में जन्मीं हंगरी की सबसे सफल ओलंपियन क्लेटी ने जिम्नास्टिक में अपने करियर में 10 पदक जीते थे, जिसमें पांच स्वर्ण पदक भी शामिल है। उन्होंने 1952 हेलिंस्की ओलंपिक और 1956 मेलबर्न ओलंपिक में स्वर्ण पदक पदक जीते थे। क्लेटी शनिवार को अपना 100वां जन्मदिन मना रही है और उन्हें दुनियाभर से उनके जन्मदिन की बधाई भी मिल रही है।

अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक समिति (आईओसी) के अध्यक्ष थॉमस बाक ने क्लेटी को उनके जन्मदिन पर बधाई देते हुए कहा, ” आपको जन्मदिन की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं। आपकी कहानी वास्तव में प्रेरणादायक है। आपने त्रासदी को दूर करने के लिए संकल्प और साहस की शक्ति का परिचय दिया है। ये एक महान ओलंपिक चैंपियन की कहानी हैं। एक ओलंपियन के रूप में आपके 10 पदक, उनमें से पांच स्वर्ण, वास्तव में आश्चर्यजनक हैं। मुझे यकीन है कि अगर 1948 लंदन ओलंपिक खेलों प्रतिस्पर्धा करती तो आप और भी अधिक पदक जीत सकती थीं।” क्लेटी को हंगरी की सबसे सफल महिला ओलंपिक माना जाता है। उनके अलावा केवल तीन दिग्गज पुरुषों (अलादेर गेरेविच, पाल कोवक्स और रुडोल्फ कोर्पटी) ने तलवारबाजी में हंगरी के लिए अधिक ओलंपिक स्वर्ण पदक जीते हैं।


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क्लेटी 1940 और 1944 ओलंपिक के द्वीतीय विश्व युद्ध के कारण रद्द होने से इसमें नहीं खेल पाई थीं। अगर वो इन खेलों में खेलती तो और भी पदक जीत सकती थी। उन्होंने 31 साल की उम्र में 1952 हेलिंस्की खेलों से ओलंपिक में अपना पदार्पण किया था और इसके बाद 35 साल की उम्र में वह जिमनास्टिक के इतिहास में सबसे उम्रदराज स्वर्ण पदकधारी बनी थीं।

1956 मेलबर्न ओलंपिक के बाद क्लेटी ने आस्ट्रेलिया में ही राजनीतिक शरण प्राप्त कर ली। इवेंट के दौरान ही सोवियत संघ ने हंगरी पर आक्रमण कर दिया था और वह अंतत: इजरायल चली गईं, जहां उन्होंने फिर से शादी की और उसके दो बच्चे थे। बाद में वह ओर्डे विंगेट इंस्टीट्यूट में शारीरिक शिक्षा पढ़ाने लगीं और फिर इजरायल में महिला जिम्नास्टिक कोच बन गईं। क्लेटी को 2002 में अंतर्राष्ट्रीय जिम्नास्टिक हॉल ऑफ फेम में शामिल किया गया था और इजरायल में खेलों में योगदान देने के लिए 2017 में उन्हें इजरायल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। (आईएएनएस)

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अल्जाइमर रोग एक मानसिक विकार है। (unsplash)

ऑस्ट्रेलिया के शोधकर्ताओं ने एक अभूतपूर्व अध्ययन में 'ब्लड-टू-ब्रेन पाथवे' की पहचान की है जो अल्जाइमर रोग का कारण बन सकता है। कर्टिन विश्वविद्यालय जो कि ऑस्ट्रेलिया के पर्थ शहर में है, वहाँ माउस मॉडल पर परीक्षण किया गया था, इससे पता चला कि अल्जाइमर रोग का एक संभावित कारण विषाक्त प्रोटीन को ले जाने वाले वसा वाले कणों के रक्त से मस्तिष्क में रिसाव था।

कर्टिन हेल्थ इनोवेशन रिसर्च इंस्टीट्यूट के निदेशक प्रमुख जांचकर्ता प्रोफेसर जॉन मामो ने कहा "जबकि हम पहले जानते थे कि अल्जाइमर रोग से पीड़ित लोगों की पहचान विशेषता बीटा-एमिलॉयड नामक मस्तिष्क के भीतर जहरीले प्रोटीन जमा का प्रगतिशील संचय था, शोधकर्ताओं को यह नहीं पता था कि एमिलॉयड कहां से उत्पन्न हुआ, या यह मस्तिष्क में क्यों जमा हुआ," शोध से पता चलता है कि अल्जाइमर रोग से पीड़ित लोगों के दिमाग में जहरीले प्रोटीन बनते हैं, जो रक्त में वसा ले जाने वाले कणों से मस्तिष्क में रिसाव की संभावना रखते हैं। इसे लिपोप्रोटीन कहा जाता है।

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Wikimedia Commons)

शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) सम्मेलन को संम्बोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चरमपंथ और कट्टरपंथ की चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए एससीओ द्वारा एक खाका विकसित करने का आह्वान किया। 21वीं बैठक को संम्बोधित करते हुए उन्होंने कहा कि मध्य एशिया में अमन के लिए सबसे बड़ी चुनौती है विश्वास की कमी।

इसके अलावा, पीएम मोदी ने विश्व के नेताओं से यह सुनिश्चित करने का आह्वान किया कि मानवीय सहायता अफगानिस्तान तक निर्बाध रूप से पहुंचे। मोदी ने कहा, "अगर हम इतिहास में पीछे मुड़कर देखें, तो हम पाएंगे कि मध्य एशिया उदारवादी, प्रगतिशील संस्कृतियों और मूल्यों का केंद्र रहा है।
"भारत इन देशों के साथ अपनी कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है और हम मानते हैं कि भूमि से घिरे मध्य एशियाई देश भारत के विशाल बाजार से जुड़कर अत्यधिक लाभ उठा सकते हैं"

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क्रांतिकारी दुर्गावती देवी (wikimedia commons)

हिंदुस्तान की भूमि पर कई साहसी और निडर लोगों का जन्म हुआ जिन्होने भारत की आजादी में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया था। लेकिन दुःख की बात यह है कि इनका नाम इतिहास के पन्नों में इतनी बार दर्ज नहीं हुआ जितना होना चाहिए था। ऐसी ही एक वीरांगना का नाम है दुर्गावती देवी। इन्हें दुर्गा भाभी के नाम से भी जाना जाता है। यह उन महिलाओं में से एक थी जिन्होंने ब्रिटिश राज के खिलाफ क्रांति में भाग लिया था।

दुर्गा भाभी का जन्म 7 अक्टूबर 1907 में उत्तर प्रदेश के कौशांबी जिले में हुआ था। इनका जन्म छोटी उम्र में ही भगवती वोहरा जी के साथ हुआ। भगवती वोहरा का परिवार लाहौर का प्रतिष्ठित परिवार था। दुर्गावती के पति भी क्रांति में पुरजोर तरीके से भाग लेना चाहते थे। लेकिन पिता के दबाव के कारण ऐसा कर नहीं पा रहे थे। पिता का देहांत होने के बाद भगवती जी ने भी क्रांति में भाग लिया था।

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