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खेल

ओलंपिक क्वालीफिकेशन अवधि बढ़ना खिलाड़ियों के लिए अच्छा : गोपीचंद

भारतीय राष्ट्रीय बैडमिटन टीम के मुख्य कोच पुलेला गोपीचंद ने ओलंपिक क्वालीफिकेशन की अवधि बढ़ने के फैसले का स्वागत करते हुए कहा है कि यह खिलाड़ियों के लिए अच्छा है।

भारतीय राष्ट्रीय बैडमिटन टीम के मुख्य कोच पुलेला गोपीचंद ने ओलंपिक क्वालीफिकेशन की अवधि बढ़ने के फैसले का स्वागत करते हुए कहा है कि यह खिलाड़ियों के लिए अच्छा है।

बैडमिंटन वल्र्ड फेडरेशन (बीडब्ल्यूएफ) ने शुक्रवार को ओलंपिक क्वालीफिकेशन की अवधि 15 जून तक बढ़ाने की घोषणा की है।


गोपीचंद ने शुक्रवार को आईएएनएस से कहा, “सभी के लिए यह एक जैसा है। इस दृष्टिकोण से यह अच्छा है। इससे खिलाड़ियों को टूर्नामेंटों के लिए थोड़ा समय मिलेगा।”

मलेशियन ओपन सुपर 750 और सिंगापुर ओपन सुपर 500 टूनामेंट्स के स्थगित होने के बाद यह फैसला किया गया है। दोनों टूर्नामेंट्स को क्वालीफाईंग आयोजन के रूप में सूचीबद्ध किया गया था। मलेशियन ओपन का आयोजन 25 से 30 मई और सिंगापुर ओपन का आयोजन एक से छह जून तक होना था।

ओलंपिक क्वालीफिकेशन पीरियड पहले इंडियन ओपन के साथ समाप्त होने वाला था, जिसे 11 से 16 मई तक नई दिल्ली में होना है।
 

भारतीय राष्ट्रीय बैडमिटन टीम के मुख्य कोच पुलेला गोपीचंद ।  ( Wikimedia commons) 

गोपीचंद ने कहा, “मेरे ख्याल से सभी खिलाड़ी इस फैसले का स्वागत करेंगे। इससे कम से कम भारतीय खिलाड़ियों को तो फायदा होगा। यह अच्छा है कि हमारे पास टूर्नामेंट के बीच समय रहेगा, जिससे हम ट्रेनिंग करके और बेहतर तैयारी कर सकेंगे।”

टोक्यो ओलंपिक का आयोजन पिछले साल 24 जुलाई से नौ अगस्त तक होना था, लेकिन वैश्विक महामारी बन चुके कोरोना वायरस के कारण इसे 2021 तक स्थगित किया था। टोक्यो ओलंपिक का आयोजन इस साल 23 जुलाई से आठ अगस्त तक किया जाएगा।

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भारतीय खिलाड़ियों के अब तक टूर्नामेंटों में किए गए प्रदर्शन पर गोपीचंद ने कहा, “कुछ थोड़े रूखे रहे लेकिन कुछ खिलाड़ियों ने बेहतर किया। अभी कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी। हमें किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले कुछ और टूर्नामेंटों का इंतजार करना होगा।”

उन्होंने कहा, “एक तथ्य यह भी है कि जापान और चीन जैसे दो बड़े देशों ने टूर्नामेंटों में भाग नहीं लिया है। इसलिए अभी हमने इन नतीजों का आकलन नहीं किया है।”

गोपीचंद ने कहा कि खिलाड़ी और कोचिंग स्टाफ ओलंपिक के लिए कैलेंडर में बदलाव या अनिश्चितता को लेकर कोई फिक्र नहीं करने की कोशिश कर रहे हैं।

उन्होंने कहा, “मेरे ख्याल से हम सभी के लिए यह जरुरी है कि हम वहीं से शुरुआत करें, जहां हम पिछले साल थे। पिछले साल हमारा कोई टूर्नामेंट नहीं हुआ। इसकी तुलना में इस साल हमें फिलहाल कुछ टूर्नामेंट खेलने के लिए मिले। खिलाड़ी खुश हैं कि वह ऐसे माहौल में हैं जहां उन्हें टूर्नामेंटों में खेलने का मौका मिलेगा।”

गोपीचंद ने कहा, “अनिश्चितता है लेकिन वैक्सीन के आने से आने वाले कुछ महीनों में और भी टूर्नामेंटों के होने की संभावना बढ़ गई है। इसलिए मैं नकारात्मक की तुलना में सकारात्मक होने के लिए बहुत अधिक सोचता हूं। हमें बस तैयारी करनी है। खिलाड़ियों ने पिछले एक साल से खुद को सकारात्मक रखने के लिए काफी मेहनत की है।” (आईएएनएस)

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डब्ल्यूएचओ यानीं विश्व स्वास्थ्य संगठन का मुख्यालय (wikimedia commons)

पूरी दुनिया एक बार फिर कोरोना वायरस अपना पांव पसार रहा है । डब्ल्यूएचओ यानीं विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा है कि कोरोना वायरस का जो डेल्टा कोविड वैरिएंट संक्रामक वायरस का वर्तमान में प्रमुख प्रकार है, अब यह दुनिया भर में इसका फैलाव हो चूका है । इसकी मौजूदगी 185 देशों में दर्ज की गई है। मंगलवार को अपने साप्ताहिक महामारी विज्ञान अपडेट में वैश्विक स्वास्थ्य एजेंसी ने कहा, डेल्टा वैरिएंट में अब सेम्पल इकट्ठा करने की डेट जो कि 15 जून -15 सितंबर, 2021 के बीच रहेंगीं । जीआईएसएआईडी, जो एवियन इन्फ्लुएंजा डेटा साझा करने पर वैश्विक पहल के लिए है, एक ओपन-एक्सेस डेटाबेस है।

मारिया वान केरखोव जो विश्व स्वास्थ्य संगठन में कोविड-19 पर तकनीकी के नेतृत्व प्रभारी हैं , उन्होंने डब्ल्यूएचओ सोशल मीडिया लाइव से बातचीत करते हुए कहा कि , वर्तमान में कोरोना के अलग अलग टाइप अल्फा, बीटा और गामा का प्रतिशत एक से भी कम चल रहा है। इसका मतलब यह है कि वास्तव में अब दुनिया भर में कोरोना का डेल्टा वैरिएंट ही चल रहा है।

\u0915\u094b\u0930\u094b\u0928\u093e \u0935\u093e\u092f\u0930\u0938 कोरोना का डेल्टा वैरिएंट हाल के दिनों में दुनियाभर में कहर बरपाया है (pixabay)

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ऑस्ट्रेलिया का नक्शा (Wikimedia Commons)

ऑस्ट्रेलिया की शार्क प्रजातियों पर एक खतरा आ गया है। वहाँ 10 प्रतिशत से अधिक शार्क प्रजाति विलुप्त होने ही वाली है। समाचार एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रीय पर्यावरण विज्ञान कार्यक्रम (एनईएसपी) समुद्री जैव विविधता हब ने सभी ऑस्ट्रेलियाई शार्क, किरणों और घोस्ट शार्क (चिमेरा) के विलुप्त होने का मूल्यांकन प्रकाशित किया है।


ऑस्ट्रेलिया दुनिया की कार्टिलाजिनस मछली प्रजातियों के एक चौथाई से अधिक का घर है, इसमें 182 शार्क, 132 किरणें और 14 चिमेरे ऑस्ट्रेलियाई जलमार्ग में हैं। पीटर काइन जो चार्ल्स डार्विन विश्वविद्यालय (सीडीयू) के एक वरिष्ठ शोधकर्ता है और रिपोर्ट के प्रमुख लेखक है उन्होंने कहा कि तुरंत कार्रवाई की जरूरत है। पीटर काइन कहा, "ऑस्ट्रेलिया का जोखिम 37 प्रतिशत के वैश्विक स्तर से काफी कम है। यह उन 39 ऑस्ट्रेलियाई प्रजातियों के लिए चिंता का विषय है, जिनके विलुप्त होने का खतरा बढ़ गया है।"

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ब्रिटेन में पढ़ने के लिए राज्य छात्रवृत्ति मिली 6 आदिवासी छात्रों को।(Unsplash)

भारत के झारखंड राज्य में कुछ छात्रों का भविष्य उज्व्वल होने जा रहा है । क्योंकि झारखंड राज्य में छह छात्रों को राज्य के छात्रवृत्ति कार्यक्रम के तहत विदेश में मुफ्त उच्च शिक्षा मिलने जा रही है। राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और कल्याण मंत्री चंपई सोरेन राजधानी रांची में गुरुवार कोआयोजित होने वाले एक कार्यक्रम में छात्रवृत्ति योजना मारंग गोमके जयपाल सिंह मुंडा के तहत लाभार्थियों छात्रोंऔर उनके अभिभावकों को सम्मानित करने जा रहे है।

आप को बता दे की यह योजना राज्य सरकार द्वारा यूके और आयरलैंड में उच्च अध्ययन करने हेतु अनुसूचित जनजातियों के छात्रों के लिए शुरू की गई है। छात्रवृत्ति के पुरस्कार प्राप्त करने वाले छात्रों को विविध खर्चो के साथ-साथ ट्यूशन फीस भी पूरी तरह मिलेगी । इस योजना के अनुसार झारखंड राज्य में हर साल अनुसूचित जनजाति से 10 छात्रों का चयन किया जाएगा।

सितंबर में ब्रिटेन के 5 विभिन्न विश्वविद्यालयों में अपना अध्ययन कार्यक्रम शुरू करंगे 6 छात्र जिनको को चुना गया हैं।

अगर बात करे चयनित छात्रों की सूचि के बारे में तो इसमें से हरक्यूलिस सिंह मुंडा जो कि "यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन " के "स्कूल ऑफ ओरिएंटल एंड अफ्रीकन स्टडीज" से एमए करने जा रहे हैं। "मुर्मू यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ लंदन" से छात्र अजितेश आर्किटेक्चर में एमए करने जा रहे हैं। और वंहीआकांक्षा मेरी "लॉफबोरो विश्वविद्यालय" में जलवायु परिवर्तन, विज्ञान और प्रबंधन में एमएससी करेंगी, जबकि दिनेश भगत ससेक्स विश्वविद्यालय में जलवायु परिवर्तन, विकास और नीति में एमएससी करेंगे।

\u0938\u094d\u091f\u0942\u0921\u0947\u0902\u091f विश्वविद्यालय में पढ़ते हुए छात्र (pixabay)

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