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देश

कैबिनेट ने राष्ट्रीय भर्ती एजेंसी के गठन को मंजूरी दी

केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा- नौकरी चाहने वाले युवाओं को इसका लाभ मिलेगा।

सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर। ( PIB)

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को कॉमन एलिजिबिलिटी टेस्ट (सीईटी) कराने के लिए राष्ट्रीय भर्ती एजेंसी (नेशनल रिक्रूटमेंट एजेंसी) के गठन को मंजूरी दी। केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि नौकरी चाहने वाले युवाओं को इसका लाभ मिलेगा। कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग के सचिव सी. चंद्रमौली ने एजेंसी के लाभों के बारे में बताते हुए कहा, केंद्र सरकार में 20 से अधिक भर्ती एजेंसियां हैं, हालांकि हम अभी केवल तीन एजेंसियों की परीक्षाओं को कामन बना रहे हैं। कुछ ही समय में हम सभी भर्ती एजेंसियों के लिए एक कॉमन एलिजिबिलिटी टेस्ट कराने में सक्षम होंगे।

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मोदी सरकार द्वारा इस वर्ष के केंद्रीय बजट में राष्ट्रीय भर्ती एजेंसी (एनआरए) का प्रस्ताव किया गया था। एजेंसी को एक स्वतंत्र संगठन बनाया जाना है, जो सरकारी नौकरियों में चयन के लिए एक कॉमन एलिजिबिलिटी टेस्ट आयोजित करेगी।

वर्तमान में सरकारी भर्ती के उद्देश्य के लिए लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) और कर्मचारी चयन आयोग (एसएससी) द्वारा परीक्षा आयोजित की जाती है। सरकार को भरोसा है कि यह नया निकाय केवल उम्मीदवारों के लिए ही नहीं, बल्कि सरकार के लिए भी मामले को आसान बनाएगा।

इसके अलावा नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली कैबिनेट ने गन्ने के लिए उचित और लाभकारी मूल्य को मंजूरी देने का फैसला किया है।

केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर (Wikimedia Commons)

सरकार ने गन्ने का उचित एवं लाभकारी दाम बढ़ाकर 285 रुपये प्रति क्विंटल करने को मंजूरी दी है। गन्ने की यह कीमत 2020-21 के चीनी सीजन या नए खरीद सत्र के लिए तय की गई है। यह कीमत 10 फीसदी रिकवरी के आधार पर है।(IANS)

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प्रमुख हिंदू नेता और श्री नारायण धर्म परिपालन योगम के महासचिव वेल्लापल्ली नतेसन (wikimedia commons)

हमारे देश में लव जिहाद के जब मामले आते है , तब इस मुद्दे पर चर्चा जोर पकड़ती है और देश कई नेता और जनता अपनी-अपनी राय को वयक्त करते है । एसे में एक प्रमुख हिंदू नेता और श्री नारायण धर्म परिपालन योगम के महासचिव वेल्लापल्ली नतेसन ने सोमवार को एक बयान दिया जिसमें उन्होनें कहा कि यह मुस्लिम समुदाय नहीं बल्कि ईसाई हैं जो देश में धर्मांतरण और लव जिहाद में सबसे आगे हैं।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार एनडीए के सहयोगी और भारत धर्म जन सेना के संरक्षक वेल्लापल्ली नतेसन नें एक कैथोलिक पादरी द्वारा लगाए गए आरोपों पर प्रतिक्रिया दी , जिसमे कहा गया था हिंदू पुरुषों द्वारा ईसाई धर्म महिलाओं को लालच दिया जा रहा है। नतेसन नें पाला बिशप जोसेफ कल्लारंगट की एक टिप्पणी जो कि विवादास्पद "लव जिहाद" और "मादक जिहाद" की भी जमकर आलोचना की और यह कहा कि इस मुद्दे पर "मुस्लिम समुदाय को निशाना बनाना सही नहीं है"।

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महंत नरेंद्र गिरि (Wikimedia Commons)

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि की सोमवार को संदिग्ध हालात में मौत हो गई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि को बाघंबरी मठ स्थित उनके आवास पर श्रद्धांजलि दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि दोषियों को जांच के बाद सजा दी जाएगी। उन्होंने कहा ''यह एक दुखद घटना है और इसी लिए अपने संत समाज की तरफ से, प्रदेश सरकार की ओर से उनके प्रति श्रद्धांजलि व्यक्त करने के लिए में स्वयं यहाँ उपस्थित हुआ हूँ। अखाड़ा परिषद और संत समाज की उन्होंने सेवा की है। नरेंद्र गिरि प्रयागराज के विकास को लेकर तत्पर रहते थे। साधु समाज, मठ-मंदिर की समस्याओं को लेकर उनका सहयोग प्राप्त होता था। उनके संकल्पों को पूरा करने की शक्ति उनके अनुयायियों को मिले''

योगी आदित्यनाथ ने कहा '' कुंभ के सफल आयोजन में नरेंद्र गिरि का बड़ा योगदान था। एक-एक घटना के पर्दाफाश होगा और दोषी अवश्य सजा पाएगा। मेरी अपील है सभी लोगों से की इस समय अनावश्यक बयानबाजी से बचे। जांच एजेंसी को निष्पक्ष रूप से कार्यक्रम को आगे बढ़ाने दे। और जो भी इसके लिए जिम्मेदार होगा उसको कानून की तहत कड़ी से कड़ी सजा भी दिलवाई जाएगी।

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By: कम्मी ठाकुर, स्वतंत्र पत्रकार एवं स्तम्भकार, हरियाणा

केजरीवाल सरकार की झूठ, फरेब, धूर्तता और भ्रष्टाचार की पोल खोलता 'बोल रे दिल्ली बोल' गीतरुपी शब्दभेदी बाण एकदम सटीक निशाने पर लगा है। सुभाष, आजाद, भगतसिंह जैसे आजादी के अमर शहीद क्रांतिकारियों के नाम व चेहरों को सामने रखकर जनता को बेवकूफ बना सुशासन ईमानदारी और पारदर्शिता का सब्जबाग दिखाकर सत्ता पर काबिज हुए अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी सरकार आज पूरी तरह से मुस्लिम तुष्टिकरण, भ्रष्टाचार, कुशासन एवं कुव्यवस्था के दल-दल में धंस चुकी है। आज केजरीवाल का चाल, चरित्र और चेहरा पूरी तरह से बेनकाब हो चुका है। दिल्ली में कोविड-19 के दौरान डॉक्टरों सहित सैकड़ों विभिन्न धर्म-संप्रदाय के मेडिकल स्टाफ के लोगों ने बतौर कोरोना योद्धा अपनी जाने गंवाई थी। लेकिन उन सब में केजरीवाल के चश्मे में केवल मुस्लिम डॉक्टर ही नजर आया, जिसके परिजनों को 'आप सरकार' ने एक करोड़ की धनराशि का चेक भेंट किया। किंतु बाकी किसी को नहीं बतौर मुख्यमंत्री यह मुस्लिम तुष्टिकरण, असंगति, पक्षपात आखिर क्यों ?

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