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स्वास्थ्य

वायरस अटैक के बीच श्रद्धानंद को भा गई सब्जी की जैविक खेती

गोरखपुर के श्रद्धानंद तिवारी अपनी खेती-बाड़ी को उचाईयों तक ले जाने का प्रयास कर रहे हैं। लेकिन आपदा के रूप में कोरोना का अटैक हुआ तो वो जैविक सब्जियों की खेती करने में लग गए हैं।

By: विवेक त्रिपाठी


रासायनिक खाद और कीटनाशकों की वजह से बीमारियां बढ़ रही हैं। लोग अस्वस्थता के शिकार होते जा रहे हैं। ऐसे ही परिस्थितियों के बीच गोरखपुर के श्रद्धानंद तिवारी अपनी खेती-बाड़ी को उचाईयों तक ले जाने का प्रयास कर रहे हैं। लेकिन आपदा के रूप में कोरोना का अटैक हुआ तो वो जैविक सब्जियों की खेती करने में लग गए हैं। अब उन्हें इस सब्जी के माध्यम से धन वर्षा का इंतजार है।

वैश्विक महामारी कोराना के दौरान धंधा मंदा पड़ा। रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यनूटी), बेहतर स्वास्थ्य के बारे में हर कोई चर्चा करने लगा। इसी समय श्रद्धानंद तिवारी ने तय किया कि वो खुद सब्जियों की जैविक खेती करेंगे। वहां रेलवे स्टेशन रोड पर उनकी कृषि निवेशों (खाद-बीज, कीटनाशक) की अच्छी खासी दुकान है। सीजन में खरीदने और सलाह लेने वालों की भीड़ लगी रहती है। खुद की दुकान होने के नाते कृषि निवेशों की कोई चिंता करनी नहीं थी। महराजगंज के निचलौल-सिसवा रोड पर तीन किलोमीटर दूर रायपुर गांव में करीब छह एकड़ जमीन थी। जमीन जंगल के किनारे थी। जंगली जानवरों से सुरक्षा के लिए उनकी कटीले तारों से बाड़बंदी और सिंचाई के लिए बोरिंग कराई। समतलीकरण के बाद नवंबर तक उनका खेत बोआई के लिए तैयार हो गया। दिसंबर में तीन एकड़ खेत में भिंडी लग गई। जमता (जर्मीनेशन) करीब 100 फीसद रहा। ठंड के नाते बढ़वार कम रही। अब मौसम के साथ बढ़वार में तेजी आयी है।

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फरवरी के अंत में उसमें फल आने लगेंगे। 2़5 एकड़ खेत में गर्मी की गोभी लग चुकी है। अप्रैल में वह भी तैयार हो जाएगी। बाड़ का उपयोग हो इसके लिए नेनुआ और करेले की नर्सरी तैयार है। मेड़ पर लगाई गयी मूली बाजार में जाने लगी है। आज उनके खेत में करीब 25 लोगों को रोज रोजगार मिल रहा है। फसल की जरूरत के अनुसार इसमें लगातार वृद्घि होगी। फसल तैयार होने पर उसकी पैकिंग, ग्रेडिंग और बाजार तक ले जाने में ट्रांसपोरटेशन लोडिंग एवं अनलोडिंग में और लोगों को भी रोजगार मिलेगा।

बकौल श्रद्घानंद तिवारी, उनका परिवार लंबे समय से कृषि निवेशों के कारोबार से जुड़ा है। पीएम मोदी और सीएम योगी से लगातार सुनता रहा कि वर्ष 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करनी है। कृषि विविधीकरण के जरिए ही यह संभव है। लिहाजा शुरुआत कर दी। जिस तरह से कोरोना के नाते लोगों की सेहत के प्रति जागरूकता बढ़ी है, ऐसे में उम्मीद है कि जैविक उत्पाद के दाम भी अच्छे मिलेंगे। जमीन के साथ लोगों की सेहत भी सलामत रहेगी। उन्होंने यह भी बताया कि स्थानीय किसानों को भी जरूरत के अनुसार अपनी नर्सरी से पौधे उपलब्ध कराएंगे। साथ ही उनसे अपने अनुभव भी साझा करेंगे।(आईएएनएस-Sh.M)

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आईपीयू की 143वीं असेम्बली बैठक में भारत की दिया कुमारी ने रखा भारत का पक्ष।(सांकेतिक चित्र, Pixabay)

अंतर-संसदीय संघ आईपीयू की 143वीं असेम्बली बैठक में बाल यौन शोषण और दुर्व्यवहार से जुड़े मुद्दे पर भारतीय महिला संसदों के दल ने हिस्सा लिया। स्पेन के मैड्रिड में आईपीयू की 143वीं असेंबली के दौरान आयोजित महिला सांसद पूनम बेन मादाम और दीयाकुमारी के फोरम के 32वें सत्र को संबोधित किया।

इस दौरान सांसद दीयाकुमारी ने कहा कि जहां सूचना और संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) अवसरों के नए रास्ते खोलती है, वहीं वे बच्चों के यौन शोषण और दुर्व्यवहार सहित चुनौतियों, खतरों और हिंसा के नए रूपों को भी जन्म देती हैं। भारत में ऑनलाइन बाल यौन शोषण और दुर्व्यवहार से निपटने के लिए कड़े उपाय हैं।

सांसद दीया ने कहा कि भारत ने वर्ष 2000 में सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम बनाया था और समय-समय पर इसमें संशोधन किया है। यह अश्लील सामग्री को इलेक्ट्रॉनिक रूप में प्रकाशित करने और प्रसारित करने पर रोक लगाता है और अधिनियम के विभिन्न वर्गों में उल्लंघन के लिए दंडात्मक प्रावधान भी निर्धारित करता है। उन्होंने आईटी इंटरमीडियरीज गाइडलाइंस रूल्स, 2011 के साथ-साथ पॉक्सो एक्ट पर भी विचार व्यक्त किये। भारतीय दल ने कहा कि केवल कानूनी प्रावधान और उनका सख्ती से क्रियान्वयन ही काफी नहीं है, ऑनलाइन यौन शोषण से बच्चों को बचाने के लिए विशेष नीतियों की आवश्यकता है।

अंतर-संसदीय संघ आईपीयू की 143वीं असेम्बली में भारत का दल।(IANS)

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भारत ने रूस और चीन से कहा कि अफगान क्षेत्र का इस्तेमाल आतंकी गतिविधियों के लिए नहीं किया जाना चाहिए।(IANS)

भारत ने रूस और चीन से कहा कि लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे पाकिस्तान स्थित आतंकवादी समूहों द्वारा अफगान क्षेत्र का इस्तेमाल आतंकी गतिविधियों के लिए नहीं किया जाना चाहिए। RIC Meeting त्रिपक्षीय ढांचे की 18 वीं बैठक की अध्यक्षता के दौरान रखा, जो शुक्रवार को वीडियो कांफ्रेंसिंग पर हुई, जिसमें रूस और चीन के विदेश मंत्रियों सेर्गेई लावरोव और वांग यी ने भी भाग लिया।

जयशंकर ने अफगानिस्तान में समावेशी और प्रतिनिधि सरकार होने पर भारत के रुख को दोहराते हुए कहा, "RIC देशों के लिए आतंकवाद, कट्टरपंथ, मादक पदार्थों की तस्करी आदि के खतरों पर संबंधित दृष्टिकोणों का समन्वय करना आवश्यक है।" मंत्री ने मास्को और बीजिंग के अपने दो समकक्षों को बताया कि, अफगान लोगों की भलाई के लिए भारत की प्रतिबद्धता के अनुरूप, नई दिल्ली ने देश में सूखे की स्थिति से निपटने के लिए अफगानिस्तान को 50,000 मीट्रिक टन गेहूं की आपूर्ति की पेशकश की थी।

हालांकि, मानवीय पहल में रुकावट आ गई थी, क्योंकि बुधवार तक पाकिस्तान इस खेप को अपने क्षेत्र से गुजरने की अनुमति देने के लिए प्रतिबद्ध नहीं था। जयशंकर ने आज कहा, "RIC देशों को यह सुनिश्चित करने के लिए मिलकर काम करने की जरूरत है कि मानवीय सहायता बिना किसी रुकावट और राजनीतिकरण के अफगान लोगों तक पहुंचे। एक निकट पड़ोसी और अफगानिस्तान के लंबे समय से साथी के रूप में, भारत उस देश में हाल के घटनाक्रमों, विशेष रूप से अफगान लोगों की पीड़ा के बारे में चिंतित है।"

तीनों मंत्रियों ने इस बात पर सहमति जताई कि आरआईसी देशों के बीच सहयोग न केवल उनके अपने विकास में बल्कि वैश्विक शांति, सुरक्षा, स्थिरता में भी योगदान देगा। जयशंकर ने अपने संबोधन में, आरआईसी तंत्र के तहत यूरेशियन क्षेत्र के तीन सबसे बड़े देशों के बीच घनिष्ठ संवाद और सहयोग को बढ़ावा देने के लिए भारत की निरंतर प्रतिबद्धता की भी पुष्टि की। उन्होंने कहा, "मेरा मानना है कि व्यापार, निवेश, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, विज्ञान और प्रौद्योगिकी और राजनीति आदि क्षेत्रों में हमारा सहयोग वैश्विक विकास, शांति और स्थिरता में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।"

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वैज्ञानिको के अनुसार कोरोना का यह नया वैरिएंट डेल्टा वैरिएंट से भी ज़्यादा खतरनाक है। (Wikimedia Commons)

कोरोना(Corona) के कारण लगभग 18 से 20 महीने झूझने और घरों में बंद रहने के बाद दुनिया में अब ज़िन्दगी पटरी पर लौट रही है लेकिन अब दक्षिण अफ्रीका में पाए गए कोरोना के नए वैरिएंट ने अब दुनिया के कई देशों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। नए वैरिएंट का नाम बी.1.1.1.529 है। इस वैरिएंट के आने से वैज्ञानिको के बीच चिंता बढ़ गई है क्योंकि उनकी माने तो यह वैरिएंट डेल्टा प्लस वैरिएंट(Delta Plus Variant) से भी ज़्यादा खतरनाक है।

दक्षिण अफ्रीका(South Africa) में इस वैरिएंट के अब 100 मामले सामने आए हैं और अब यह धीरे-धीरे तेज़ी से फैलता जा रहा है।

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