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केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने सीबीएसई  ( CBSE ) स्कूलों के शिक्षकों और छात्रों द्वारा बनाई गई 100 से अधिक कॉमिक पुस्तकें लॉन्च कीं। इन कॉमिक्स को दीक्षा वेब पोर्टल पर ऑनलाइन एक्सेस किया जा सकता है। एनसीईआरटी ( NCERT ) द्वारा इन कॉमिक्स को स्वीकृति दी गई है। किसी भी स्मार्ट फोन पर दीक्षा ऐप के माध्यम से भी कॉमिक्स को एक्सेस किया जा सकता है। इसके अलावा व्हाट्सएप संचालित चैटबोट के माध्यम से भी इन्हे एक्सेस किया जा सकता है। चैटबोट डिजिटल सीखने के दायरे का विस्तार करने के लिए एक अनूठा अवसर प्रस्तुत करता है।

इस दौरान, केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने सीबीएसई आधारित शिक्षा परियोजना के भाग के रूप में विज्ञान, गणित और अंग्रेजी कक्षाओं के लिए सीबीएसई मूल्यांकन फ्रेमवर्क भी लॉन्च किया।


इस अवसर पर निशंक ने कहा कि स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग ने छात्रों को समग्र शिक्षा प्रदान करने के लिए नई शिक्षा नीति 2020 में परिकल्पित ²ष्टि की शुरूआत की है। इस प्रयास में एनसीईआरटी  ( NCERT )  पाठ्य पुस्तकों के अध्यायों से जुड़ी कॉमिक पुस्तकें लॉन्च की गई हैं।
 

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उन्होंने आगे कहा कि यह अभिनव पहल ज्ञान प्रदान करते हुए हमारे बच्चों में सांस्कृतिक और सामाजिक संवेदनशीलता को बढ़ाने में मदद करेगी। मंत्री ने रचनात्मक और अभिनव शिक्षकों को विभिन्न स्कूलों से और इस रचनात्मक कार्य के लिए बधाई दी।

इन कॉमिक्स में कक्षा 3 से कक्षा 12 तक के 12 विषयों को सम्मिलित किया गया है। इन शैक्षणिक सामग्री का पुन निर्माण करते समय अन्य जीवन कौशलों के साथ-साथ लैंगिक संवेदनशीलता, महिला सशक्तिकरण, नैतिक शिक्षा की बारीकियों को जोड़ने पर भी ध्यान दिया गया है।

केंद्रीय शिक्षा मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने इससे पहले भी 13 राज्यों के केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के 50 स्कूलों द्वारा 120 ग्राफिक कॉमिक्स का विमोचन किया था। ( AK आईएएनएस )
 

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देश भर से जमा की गई 2 लाख से अधिक ईंटें। (IANS)

राम भक्तों द्वारा दी गई और विश्व हिंदू परिषद (विहिप) (Vishwa Hindu Parishad) द्वारा तीन दशक लंबे मंदिर आंदोलन के दौरान देश भर से जमा की गई 2 लाख से अधिक ईंटों का इस्तेमाल अब राम जन्मभूमि स्थल पर भव्य मंदिर का निर्माण के लिए किया जाएगा।

मंदिर ट्रस्ट के सदस्य अनिल मिश्रा ने कहा, "1989 के 'शिलान्यास' के दौरान कारसेवकों द्वारा राम जन्मभूमि पर एक लाख पत्थर रखे गए थे। कम से कम, 2 लाख पुरानी कार्यशाला में रह गए हैं, जिन्हें अब निर्माण स्थल पर स्थानांतरित कर दिया जाएगा। ईंटों पर भगवान राम का नाम लिखा है और यह करोड़ों भारतीयों की आस्था का प्रमाण है।

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कर्नाटक राज्य में मंदिर विध्वंस अभियान पर विराम लगा दिया है। (wikimedia commons)

हिंदू संगठनों की ओर से आलोचना झेल रही कर्नाटक की भाजपा सरकार नें कर्नाटक में मंदिर विध्वंस के मुद्दे पर फिलहाल राज्य विधानसभा में एक कानून पारित कर पुरे कर्नाटक राज्य में मंदिर विध्वंस अभियान पर विराम लगा दिया है। सत्ताधारी पार्टी भाजपा और विपक्षी दल कांग्रेस इन दोनों के बीच मंगलवार को तीखी बहस के बीच प्रस्तावित कर्नाटक धार्मिक संरचना (संरक्षण) विधेयक 2021 को पारित कर दिया गया।

यह प्रस्तावित अधिनियम जिसका नाम 'कर्नाटक धार्मिक संरचना (संरक्षण) विधेयक-2021' है, इसका मुख्य उद्देश्य सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार राज्य में धार्मिक संरचनाओं के विध्वंस को रोकना है।

यह अधिनियम में कहा गया है कि 'कर्नाटक धार्मिक संरचना संरक्षण अधिनियम -2021' के लागू होने की तारीख से, कानूनों के कानूनी प्रावधान और अदालतों, न्यायशास्त्र और अधिकारियों के आदेशों या दिशानिदेशरें के बावजूद, सरकार धार्मिक केंद्रों की रक्षा करेगी।

सार्वजनिक संपत्तियों पर बने धार्मिक केंद्रों को खाली करने, स्थानांतरित करने और ध्वस्त करने की प्रक्रिया को रोक दिया जाएगा। इस अधिनियम के लागू होने और विधान परिषद में पारित होने के बाद से ही ।

इसी बीच विपक्ष के नेता सिद्धारमैया ने कर्नाटक सरकार पर आरोप लगाया कि हिंदू जागरण वेदिक और हिंदू महासभा की आलोचना का सामना करने के बाद भाजपा यह कानून लाई है। मैसूर में मंदिर तोड़े जाने के बाद बीजेपी पुनर्निर्माण के लिए नया कानून ला रही है, यह भी आरोप लगायें हैं उन्होंने भाजपा पार्टी के खिलाफ । इसके बाद कांग्रेस के एक और विधायक और पूर्व मंत्री औरयू.टी. खादर ने बीजेपी पर हमला बोलते हुए कहा कि छात्र पाठ्यपुस्तकों में पढ़ने जा रहे हैं कि भाजपा ने भारत में आक्रमणकारियों की तरह मंदिरों को ध्वस्त कर दिया।

\u0915\u0930\u094d\u0928\u093e\u091f\u0915 \u0930\u093e\u091c\u094d\u092f कर्नाटक राज्य का नक्शा सांकेतिक इमेज (wikimedia commons)

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डब्ल्यूएचओ यानीं विश्व स्वास्थ्य संगठन का मुख्यालय (wikimedia commons)

पूरी दुनिया एक बार फिर कोरोना वायरस अपना पांव पसार रहा है । डब्ल्यूएचओ यानीं विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा है कि कोरोना वायरस का जो डेल्टा कोविड वैरिएंट संक्रामक वायरस का वर्तमान में प्रमुख प्रकार है, अब यह दुनिया भर में इसका फैलाव हो चूका है । इसकी मौजूदगी 185 देशों में दर्ज की गई है। मंगलवार को अपने साप्ताहिक महामारी विज्ञान अपडेट में वैश्विक स्वास्थ्य एजेंसी ने कहा, डेल्टा वैरिएंट में अब सेम्पल इकट्ठा करने की डेट जो कि 15 जून -15 सितंबर, 2021 के बीच रहेंगीं । जीआईएसएआईडी, जो एवियन इन्फ्लुएंजा डेटा साझा करने पर वैश्विक पहल के लिए है, एक ओपन-एक्सेस डेटाबेस है।

मारिया वान केरखोव जो विश्व स्वास्थ्य संगठन में कोविड-19 पर तकनीकी के नेतृत्व प्रभारी हैं , उन्होंने डब्ल्यूएचओ सोशल मीडिया लाइव से बातचीत करते हुए कहा कि , वर्तमान में कोरोना के अलग अलग टाइप अल्फा, बीटा और गामा का प्रतिशत एक से भी कम चल रहा है। इसका मतलब यह है कि वास्तव में अब दुनिया भर में कोरोना का डेल्टा वैरिएंट ही चल रहा है।

\u0915\u094b\u0930\u094b\u0928\u093e \u0935\u093e\u092f\u0930\u0938 कोरोना का डेल्टा वैरिएंट हाल के दिनों में दुनियाभर में कहर बरपाया है (pixabay)

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