Tuesday, May 11, 2021
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Oxygen concentrator: कोविड रोगियों के लिए कितना मददगार है ऑक्सीजन कान्सेंट्रेटर?

ऑक्सीजन कॉन्सेंट्रेटर क्या होते हैं, उनकी कब आवश्यकता होती है और उनका उपयोग कैसे किया जाता है और क्या सावधानियां बरतनी चाहिए? जानते हैं इसके दिशा निर्देश।

देश में कोरोना संक्रमितों की बढ़ती संख्या और ऑक्सीजन संकट के बीच Oxygen concentrator की मांग बढ़ी है। विदेशों से भी इस तरह के उपकरण मंगाए जा रहे हैं। आखिर, ऑक्सीजन कॉन्सेंट्रेटर क्या होते हैं, उनकी कब आवश्यकता होती है और उनका उपयोग कैसे किया जाता है और क्या सावधानियां बरतनी चाहिए? इस बारे में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय व प्रेस इंफार्मेशन ब्यूरो ने जरूरी जानकारी साझा की है।

दरअसल, COVID-19 हमारे फेफड़ों को प्रभावित करता है और जिससे शरीर में oxygen की मात्रा खतरनाक स्तर तक गिर सकती है। ऐसी स्थिति में शरीर में oxygen के स्तर को स्वीकार्य स्तर तक बढ़ाने के लिए हमें ऑक्सीजन का उपयोग करके चिकित्सकीय ऑक्सीजन थेरेपी देने की जरूरत पड़ती है।

शरीर में ऑक्सीजन का स्तर ‘ऑक्सीजन सेचूरेशन’ के रूप में मापा जाता है जिसे संक्षेप में ‘एसपीओ-टू’ कहते हैं। यह रक्त में ऑक्सीजन ले जाने वाले हीमोग्लोबिन की मात्रा का माप है। सामान्य फेफड़ों वाले एक स्वस्थ व्यक्ति की धमनी में oxygen saturation 95 से 100 प्रतिशत होता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के pulse oximeter पर बनाए गये प्रशिक्षण मैनुअल के अनुसार यदि ऑक्सीजन सेचूरेशन 94 प्रतिशत या उससे कम हो तो रोगी को जल्द इलाज की जरूरत होती है। यदि सेचूरेशन 90 प्रतिशत से कम हो जाय तो वह चिकित्सकीय आपात स्थिति मानी जाती है।

pulse oximeter in india corona virus pandemic in india
कोरोना मरीजों के लिए पल्स ऑक्सीमीटर भी बन गई है जरूरत।(Pixabay)

स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय की नई गाइडलाइंस के मुताबिक, कमरे की हवा पर 93 प्रतिशत या उससे कम ऑक्सीजन सेचूरेशन हो तो मरीज को अस्पताल में भर्ती करने की आवश्यकता होती है, जबकि 90 प्रतिशत से कम सेचूरेशन की हालत में मरीज को आईसीयू में रखा जाना लाजमी है। ऐसे में महामारी की दूसरी लहर के कारण पैदा हुए हालात को देखते हुए, हमें क्लिनिकल प्रबंधन प्रोटोकॉल के अनुसार अस्पताल में प्रवेश में देरी या असमर्थता की स्थिति में मरीज के ऑक्सीजन स्तर को बनाए रखने के लिए जो कुछ भी हमसे सर्वश्रेष्ठ हो सकता है वह करना चाहिए।

यह भी पढ़ें: Pulse Oximeter: क्या है पल्स ऑक्सीमीटर और क्या है इसका इस्तेमाल?

ऑक्सीजन कॉन्सेंट्रेटर कैसे काम करता है?

दरअसल, वायुमंडल की हवा में लगभग 78 प्रतिशत नाइट्रोजन और 21 प्रतिशत ऑक्सीजन होती है। ऑक्सीजन कॉन्सेंट्रेटर एक सरल उपकरण हैं जो ठीक वही करता हैं जो इसके नाम से व्यक्त होता है। ये उपकरण वायुमंडल से वायु को लेते हैं और उसमें से नाइट्रोजन को छानकर फेंक देते हैं तथा ऑक्सीजन को घना करके बढ़ा देते हैं।(आईएएनएस-SHM)

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न्यूज़ग्राम डेस्क
संवाददाता, न्यूज़ग्राम हिन्दी

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