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जम्मू-कश्मीर के विभाजन को लेकर चल रही सुगबुगाहट पर बौखलाया पाकिस्तान

भारत की ओर से जम्मू-कश्मीर का एक बार फिर से विभाजन और भौगोलिक स्थिति में परिवर्तन किए जाने की खबरों के बीच, पाकिस्तान बुरी तरह से भड़क गया है।

पाकिस्तान भारत के अभिन्न अंग जम्मू एवं कश्मीर को अवैध रूप से कब्जे वाला जम्मू-कश्मीर कहता है। (Wikimedia Commons)

भारत की ओर से जम्मू-कश्मीर (Jammu and Kashmir) का एक बार फिर से विभाजन और भौगोलिक स्थिति में परिवर्तन किए जाने की खबरों के बीच, पाकिस्तान बुरी तरह से भड़क गया है।

पाकिस्तान ने भारत को अवैध रूप से कब्जे वाले जम्मू एवं कश्मीर (आईआईओजेके) में अपने अवैध कब्जे को बनाए रखने के लिए जनसांख्यिकीय परिवर्तन करने के किसी भी प्रयास के खिलाफ नई दिल्ली को चेतावनी दी है। बता दें कि पाकिस्तान भारत के अभिन्न अंग जम्मू एवं कश्मीर को अवैध रूप से कब्जे वाला जम्मू-कश्मीर कहता है।


पाकिस्तान (Pakistan) के विदेश कार्यालय की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है, कब्जे के किसी भी नए साधन का कोई कानूनी प्रभाव नहीं होगा। भारत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) (UNSC) के प्रस्तावों में निहित आईआईओजेके की विवादित स्थिति को नहीं बदल सकता है और न ही वह पाकिस्तान और जम्मू-कश्मीर के लोगों को अवैध बात मानने के लिए बाध्य कर सकता है।

हालांकि पाकिस्तान के विदेश कार्यालय ने यह उल्लेख नहीं किया कि भारत सरकार द्वारा जम्मू एवं कश्मीर में कौन से नए बदलाव लाए जा रहे हैं।

बयान ने निश्चित रूप से संवाद की उन उम्मीदों को फीका कर दिया है, जिसे हाल ही में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान (Pakistani Prime Minister Imran Khan) ने साझा किया था, जिन्होंने कहा था कि पाकिस्तान नई दिल्ली से बातचीत करने के लिए तैयार है लेकिन उससे पहले भारत को जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद-370 हटाने को लेकर रोडमैप देना होगा।

नियंत्रण रेखा (एलओसी) (LOC) पर हाल ही में संघर्षविराम की बहाली ने दो परमाणु शक्ति वाले देशों के बीच तनाव को कुछ कम जरूर किया है, जो कुछ समय से एक-दूसरे के खिलाफ नजरें गड़ाए हुए थे।

नियंत्रण रेखा (एलओसी) (LOC) पर हाल ही में संघर्षविराम की बहाली ने दो परमाणु शक्ति वाले देशों के बीच तनाव को कुछ कम जरूर किया है, जो कुछ समय से एक-दूसरे के खिलाफ नजरें गड़ाए हुए थे। (Wikimedia Commons)

खान का हालिया बयान भी दोनों देशों के बीच बातचीत की ओर उम्मीदों को आगे बढ़ाता हुआ प्रतीत होता है। हालांकि, विदेश कार्यालय के बयान ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत-पाक संबंधों में किसी भी सकारात्मक प्रगति की उम्मीदें उम्मीद के रूप में ही रह सकती हैं।

पाकिस्तान के विदेश कार्यालय के बयान में कहा गया है, हम भारत से उसके गैरकानूनी और अस्थिर करने वाले कार्यों को उलटने, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों का पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित करने और दक्षिण एशिया में क्षेत्रीय शांति एवं सुरक्षा को खतरे में डालने वाले किसी भी कदम से परहेज करने का आग्रह करते हैं।

बयान में यह भी कहा गया है, हम संयुक्त राष्ट्र, वैश्विक संसदों, अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकारों और मानवीय संगठनों एवं वैश्विक मीडिया सहित अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से स्थिति का तत्काल संज्ञान लेने का आह्वान करते हैं। भारत को कब्जे वाले क्षेत्र में आगे किसी भी अवैध कार्रवाई से रोका जाना चाहिए।

यह भी पढ़ें :- #Northeast Matters: पूर्वोत्तर भारत के इतिहास से अछूता “NCERT”

गौरतलब है कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली भारत सरकार ने 5 अगस्त, 2019 को जम्मू एवं कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 और 35ए को निरस्त कर दिया था, जिसके बाद से पाकिस्तान बौखलाया हुआ है। पाकिस्तान आए दिन किसी न किसी राष्ट्रीय या अंतर्राष्ट्रीय मंच पर इस मुद्दे को उठाता रहता है और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से गुजारिश करता रहता है कि वह इस पर संज्ञान ले। हालांकि भारत यह स्पष्ट कर चुका है कि यह उसके देश का अंदरूनी मामला है, जिस पर उसे फैसला लेने की पूरी स्वतंत्रता है।

पाकिस्तान ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक भारत इस मुद्दे की समीक्षा नहीं करता और 5 अगस्त, 2019 के अपने फैसले को उलट नहीं देता, तब तक कोई बातचीत नहीं हो सकती है। (आईएएनएस-SM)

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डब्ल्यूएचओ यानीं विश्व स्वास्थ्य संगठन का मुख्यालय (wikimedia commons)

पूरी दुनिया एक बार फिर कोरोना वायरस अपना पांव पसार रहा है । डब्ल्यूएचओ यानीं विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा है कि कोरोना वायरस का जो डेल्टा कोविड वैरिएंट संक्रामक वायरस का वर्तमान में प्रमुख प्रकार है, अब यह दुनिया भर में इसका फैलाव हो चूका है । इसकी मौजूदगी 185 देशों में दर्ज की गई है। मंगलवार को अपने साप्ताहिक महामारी विज्ञान अपडेट में वैश्विक स्वास्थ्य एजेंसी ने कहा, डेल्टा वैरिएंट में अब सेम्पल इकट्ठा करने की डेट जो कि 15 जून -15 सितंबर, 2021 के बीच रहेंगीं । जीआईएसएआईडी, जो एवियन इन्फ्लुएंजा डेटा साझा करने पर वैश्विक पहल के लिए है, एक ओपन-एक्सेस डेटाबेस है।

मारिया वान केरखोव जो विश्व स्वास्थ्य संगठन में कोविड-19 पर तकनीकी के नेतृत्व प्रभारी हैं , उन्होंने डब्ल्यूएचओ सोशल मीडिया लाइव से बातचीत करते हुए कहा कि , वर्तमान में कोरोना के अलग अलग टाइप अल्फा, बीटा और गामा का प्रतिशत एक से भी कम चल रहा है। इसका मतलब यह है कि वास्तव में अब दुनिया भर में कोरोना का डेल्टा वैरिएंट ही चल रहा है।

\u0915\u094b\u0930\u094b\u0928\u093e \u0935\u093e\u092f\u0930\u0938 कोरोना का डेल्टा वैरिएंट हाल के दिनों में दुनियाभर में कहर बरपाया है (pixabay)

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ऑस्ट्रेलिया का नक्शा (Wikimedia Commons)

ऑस्ट्रेलिया की शार्क प्रजातियों पर एक खतरा आ गया है। वहाँ 10 प्रतिशत से अधिक शार्क प्रजाति विलुप्त होने ही वाली है। समाचार एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रीय पर्यावरण विज्ञान कार्यक्रम (एनईएसपी) समुद्री जैव विविधता हब ने सभी ऑस्ट्रेलियाई शार्क, किरणों और घोस्ट शार्क (चिमेरा) के विलुप्त होने का मूल्यांकन प्रकाशित किया है।


ऑस्ट्रेलिया दुनिया की कार्टिलाजिनस मछली प्रजातियों के एक चौथाई से अधिक का घर है, इसमें 182 शार्क, 132 किरणें और 14 चिमेरे ऑस्ट्रेलियाई जलमार्ग में हैं। पीटर काइन जो चार्ल्स डार्विन विश्वविद्यालय (सीडीयू) के एक वरिष्ठ शोधकर्ता है और रिपोर्ट के प्रमुख लेखक है उन्होंने कहा कि तुरंत कार्रवाई की जरूरत है। पीटर काइन कहा, "ऑस्ट्रेलिया का जोखिम 37 प्रतिशत के वैश्विक स्तर से काफी कम है। यह उन 39 ऑस्ट्रेलियाई प्रजातियों के लिए चिंता का विषय है, जिनके विलुप्त होने का खतरा बढ़ गया है।"

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ब्रिटेन में पढ़ने के लिए राज्य छात्रवृत्ति मिली 6 आदिवासी छात्रों को।(Unsplash)

भारत के झारखंड राज्य में कुछ छात्रों का भविष्य उज्व्वल होने जा रहा है । क्योंकि झारखंड राज्य में छह छात्रों को राज्य के छात्रवृत्ति कार्यक्रम के तहत विदेश में मुफ्त उच्च शिक्षा मिलने जा रही है। राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और कल्याण मंत्री चंपई सोरेन राजधानी रांची में गुरुवार कोआयोजित होने वाले एक कार्यक्रम में छात्रवृत्ति योजना मारंग गोमके जयपाल सिंह मुंडा के तहत लाभार्थियों छात्रोंऔर उनके अभिभावकों को सम्मानित करने जा रहे है।

आप को बता दे की यह योजना राज्य सरकार द्वारा यूके और आयरलैंड में उच्च अध्ययन करने हेतु अनुसूचित जनजातियों के छात्रों के लिए शुरू की गई है। छात्रवृत्ति के पुरस्कार प्राप्त करने वाले छात्रों को विविध खर्चो के साथ-साथ ट्यूशन फीस भी पूरी तरह मिलेगी । इस योजना के अनुसार झारखंड राज्य में हर साल अनुसूचित जनजाति से 10 छात्रों का चयन किया जाएगा।

सितंबर में ब्रिटेन के 5 विभिन्न विश्वविद्यालयों में अपना अध्ययन कार्यक्रम शुरू करंगे 6 छात्र जिनको को चुना गया हैं।

अगर बात करे चयनित छात्रों की सूचि के बारे में तो इसमें से हरक्यूलिस सिंह मुंडा जो कि "यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन " के "स्कूल ऑफ ओरिएंटल एंड अफ्रीकन स्टडीज" से एमए करने जा रहे हैं। "मुर्मू यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ लंदन" से छात्र अजितेश आर्किटेक्चर में एमए करने जा रहे हैं। और वंहीआकांक्षा मेरी "लॉफबोरो विश्वविद्यालय" में जलवायु परिवर्तन, विज्ञान और प्रबंधन में एमएससी करेंगी, जबकि दिनेश भगत ससेक्स विश्वविद्यालय में जलवायु परिवर्तन, विकास और नीति में एमएससी करेंगे।

\u0938\u094d\u091f\u0942\u0921\u0947\u0902\u091f विश्वविद्यालय में पढ़ते हुए छात्र (pixabay)

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