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संस्कृति

केदारनाथ धाम के लिए सादगी से निकली पंचमुखी डोली

बाबा केदारनाथ भगवान की पंचमुखी डोली श्री ओंकारेश्वर मंदिर उखीमठ से सादगीपूर्वक केदारनाथ धाम को प्रस्थान हुई। बाबा की यह पंचमुखी डोली केदारनाथ पहुंचेगी।

बाबा केदारनाथ की पंचमुखी डोली बेहद सादगी के साथ निकाली गई।

 देश भर में तेजी में तेजी से फैल रहे कोरोना संक्रमण के मद्देनजर बाबा केदारनाथ की पंचमुखी डोली शुक्रवार को बेहद सादगी के साथ निकाली गई।

बाबा केदारनाथ भगवान की पंचमुखी डोली शुक्रवार को श्री ओंकारेश्वर मंदिर उखीमठ से सादगीपूर्वक केदारनाथ धाम को प्रस्थान हुई। बाबा केदारनाथ भगवान की यह पंचमुखी डोली शनिवार को केदारनाथ पहुंचेगी।


श्री ओंकारेश्वर मंदिर उखीमठ से सादगीपूर्वक केदारनाथ धाम को प्रस्थान के दौरान केवल कुछ ही व्यक्ति मौजूद रहे। इस अवसर पर रावल भीमाशंकर लिंग, पुजारी बागेश लिंग, देवस्थानम बोर्ड के अपरमुख्य कार्यकारी अधिकारी बी.डी. सिंह , कार्याधिकारी एनपी जमलोकी, डोली प्रभारी यदुवीर पुष्पवान सहित प्रशासन के अधिकारी ही उपस्थित थे।

देवस्थानम बोर्ड के डा. हरीश गौड़ ने बताया कि पंचमुखी डोली शनिवार को केदारनाथ पहुंचेगी। 17 मई को प्रात पांच बजे श्री केदारनाथ धाम के कपाट खुलेंगे। चारधाम यात्रा स्थगित है। अत कोरोना महामारी को देखते हुए केवल मंदिरों के कपाट खुल रहे है। पूजापाठ से जुड़े कुछ ही लोगों को धामों में जाने की अनुमति दी गयी है।

केदारनाथ धाम में स्थानीय निवासी भी नहीं कर सकेंगे पूजा अर्चना।(Wikimedia Commons)

देवस्थानम बोर्ड ने बताया कि शुक्रवार को दिन में 12.15 बजे श्री यमुनोत्री धाम के कपाट खुलेंगे। जबकि शनिवार को 15 मई गंगोत्री धाम एवं 18 मई प्रात को श्री बदरीनाथ धाम के कपाट खुल रहे है।

कोविड के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए उतराखंड सरकार चारधाम यात्रा को स्थगित करने का फैसला कर चुकी है। हालांकि चारों धाम के कपाट निर्धारित समय पर खुलेंगे। तीर्थ-पुरोहित मंदिरों में नियमित रूप से पूजा-पाठ करेंगे लेकिन श्रद्धालुओं की सुरक्षा के मद्देनजर चारधाम यात्रा को स्थगित रखने का निर्णय लिया गया है।

यह भी पढ़ें: Badrinath Dham: बद्रीनाथ धाम बनेगा स्मार्ट आध्यात्मिक शहर

उत्तराखंड सरकार के मुताबिक चार धामों में केवल तीर्थ पुरोहितों को ही नियमित पूजा पाठ की अनुमति होगी। चारधाम यात्रा के लिए किसी को भी अनुमति नहीं होगी, केवल तीर्थ-पुरोहित ही पूजा करेंगे।

स्थानीय जिले के निवासी भी मंदिरों में पूजा-पाठ के लिए नहीं जा सकेंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा है कि नियमित समय पर ही चारधाम के पट खुलेंगे और तीर्थ-पुरोहित ही पूजा करेंगे बाकी देश के लोगों के लिए चारधाम यात्रा अभी बंद है। पूरे देश में इस समय कोरोना के मामले बढ़ रहे हैं। उत्तराखण्ड में भी लगातार कोविड के मामलों में बढ़ोतरी हो रही है। इसी क्रम में तय हुआ है कि अभी चारधाम यात्रा को स्थगित रखा जाए।(आईएएनएस-SHM)

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बारे में बात करते हुए योगी ने तारीफ की (wikimedia commons )

हमारा देश भारत अनेकता में एकता वाला देश है । हमारे यंहा कई धर्म जाती के लोग एक साथ रहते है , जो इसे दुनिया में सबसे अलग श्रेणी में ला कर खड़ा करता है । योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं । उन्होंने एक बयान में कहा कि नई थ्योरी में पता चला है कि पूरे देश का डीएनए एक है। यहां आर्य-द्रविण का विवाद झूठा और बेबुनियाद रहा है। भारत का डीएनए एक है इसलिए भारत एक है। साथ ही उन्होंने कहा की दुनिया की तमाम जातियां अपने मूल में ही धीरे धीरे समाप्त होती जा रही हैं , जबकि हमारे भारत देश में फलफूल रही हैं। भारत ने ही पूरी दुनिया को वसुधैव कुटुंबकम का भाव दिया है इसलिए हमारा देश श्रेष्ठ है। आप को बता दे कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शनिवार को युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ की व राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ की पुण्यतिथि पर आयोजित एक श्रद्धांजलि समारोह का शुरुआत करने गये थे। आयोजन के पहले दिन मुख्यमंत्री ने कहा कि कोई भी ऐसा भारतीय नहीं होगा जिसे अपने पवित्र ग्रन्थों वेद, पुराण, उपनिषद, रामायण, महाभारत आदि की जानकारी न हो। हर भारतीय परम्परागत रूप से इन कथाओं ,कहनियोंको सुनते हुए, समझते हए और उनसे प्रेरित होते हुए आगे बढ़ता है।

साथ ही मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे यंहा के कोई भी वेद पुराण हो या ग्रंथ हो इनमे कही भी नहीं कहा गया की हम बहार से आये थे । हमारे ऐतिहासिक ग्रन्थों में जो आर्य शब्द है वह श्रेष्ठ के लिए और अनार्य शब्द का प्रयोग दुराचारी के लिए कहा गया है। मुख्यमंत्री योगी ने रामायण का उदाहरण भी दिया योगी ने कहा कि रामायण में माता सीता ने प्रभु श्रीराम की आर्यपुत्र कहकर संबोधित किया है। लेकिन , कुटिल अंग्रेजों ने और कई वामपंथी इतिहासकारों के माध्यम से हमारे इतिहास की किताबो में यह लिखवाया गया कि आर्य बाहर से आए थे । ऐसे ज्ञान से नागरिकों को सच केसे मालूम चलेगा और ईसका परिणाम देश लंबे समय से भुगतता रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बारे में बात करते हुए योगी ने कहा कि , आज इसी वजह से मोदी जी को एक भारत-श्रेष्ठ भारत का आह्वान करना पड़ा। आज मोदी जी के विरोध के पीछे एक ही बात है। साथ ही वो विपक्ष पर जम के बरसे। उन्होंने मोदी जी के बारे में आगे कहा कि उनके नेतृत्व में अयोध्या में पांच सौ वर्ष पुराने विवाद का समाधान हुआ है। यह विवाद खत्म होने से जिनके खाने-कमाने का जरिया बंद हो गया है तो उन्हें अच्छा कैसे लगेगा।

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अल्जाइमर रोग एक मानसिक विकार है। (unsplash)

ऑस्ट्रेलिया के शोधकर्ताओं ने एक अभूतपूर्व अध्ययन में 'ब्लड-टू-ब्रेन पाथवे' की पहचान की है जो अल्जाइमर रोग का कारण बन सकता है। कर्टिन विश्वविद्यालय जो कि ऑस्ट्रेलिया के पर्थ शहर में है, वहाँ माउस मॉडल पर परीक्षण किया गया था, इससे पता चला कि अल्जाइमर रोग का एक संभावित कारण विषाक्त प्रोटीन को ले जाने वाले वसा वाले कणों के रक्त से मस्तिष्क में रिसाव था।

कर्टिन हेल्थ इनोवेशन रिसर्च इंस्टीट्यूट के निदेशक प्रमुख जांचकर्ता प्रोफेसर जॉन मामो ने कहा "जबकि हम पहले जानते थे कि अल्जाइमर रोग से पीड़ित लोगों की पहचान विशेषता बीटा-एमिलॉयड नामक मस्तिष्क के भीतर जहरीले प्रोटीन जमा का प्रगतिशील संचय था, शोधकर्ताओं को यह नहीं पता था कि एमिलॉयड कहां से उत्पन्न हुआ, या यह मस्तिष्क में क्यों जमा हुआ," शोध से पता चलता है कि अल्जाइमर रोग से पीड़ित लोगों के दिमाग में जहरीले प्रोटीन बनते हैं, जो रक्त में वसा ले जाने वाले कणों से मस्तिष्क में रिसाव की संभावना रखते हैं। इसे लिपोप्रोटीन कहा जाता है।

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Wikimedia Commons)

शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) सम्मेलन को संम्बोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चरमपंथ और कट्टरपंथ की चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए एससीओ द्वारा एक खाका विकसित करने का आह्वान किया। 21वीं बैठक को संम्बोधित करते हुए उन्होंने कहा कि मध्य एशिया में अमन के लिए सबसे बड़ी चुनौती है विश्वास की कमी।

इसके अलावा, पीएम मोदी ने विश्व के नेताओं से यह सुनिश्चित करने का आह्वान किया कि मानवीय सहायता अफगानिस्तान तक निर्बाध रूप से पहुंचे। मोदी ने कहा, "अगर हम इतिहास में पीछे मुड़कर देखें, तो हम पाएंगे कि मध्य एशिया उदारवादी, प्रगतिशील संस्कृतियों और मूल्यों का केंद्र रहा है।
"भारत इन देशों के साथ अपनी कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है और हम मानते हैं कि भूमि से घिरे मध्य एशियाई देश भारत के विशाल बाजार से जुड़कर अत्यधिक लाभ उठा सकते हैं"

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