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राजनीति

नफरत वाली सामग्री में हेरफेर को लेकर फेसबुक की जांच करेगी आईटी संसदीय समिति

कांग्रेस सांसद के कार्यालय ने कहा कि समिति के अध्यक्ष ने कहा है, "हमारी संसदीय समिति, सामान्य तौर पर, नागरिकों की सुरक्षा के अधिकार विषय के तहत गवाही पर विचार करेगी और सामाजिक/ऑनलाइन समाचार मीडिया प्लेटफार्मो के दुरुपयोग को रोकेगी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदील्के साथ फ़ेसबूक के सीईओ मार्क जुकरबर्ग(Image: Narendra Modi, Twitter)

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक और व्हाट्सएप को लेकर विवाद के बीच, सूचना और प्रौद्योगिकी संबंधी संसदीय स्थायी समिति फेसबुक की जांच करेगी, ताकि नफरत फैलाने वाली सामग्री में हेरफेर की जानकारी मिल सके। समिति के अध्यक्ष शशि थरूर ने ट्वीट कर कहा, “प्रौद्योगिकी संबंधी संसदीय स्थायी समिति निश्चित रूप से इन रिपोर्टों के बारे में फेसबुक से सुनना चाहेगी और वे भारत में घृणा-भाषण के बारे में क्या करने का प्रस्ताव रखते हैं।”

कांग्रेस सांसद के कार्यालय ने कहा कि समिति के अध्यक्ष ने कहा है, “हमारी संसदीय समिति, सामान्य तौर पर, नागरिकों की सुरक्षा के अधिकार विषय के तहत गवाही पर विचार करेगी और सामाजिक/ऑनलाइन समाचार मीडिया प्लेटफार्मो के दुरुपयोग को रोकेगी। यह विषय आईटी समिति के मैन्डेट में है और पूर्व में पेसबुक को समन किया जा चुका है।”


फ़ेसबूक(Image: Pixabay)

कांग्रेस ने भाजपा और आरएसएस पर भारत में फेसबुक और व्हाट्सएप को नियंत्रित करने का आरोप लगाया है। कांग्रेस ने रविवार को आरोप लगाया कि दोनों ने देश में लोकतंत्र पर हमला किया और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और इसकी संदेश सेवा द्वारा कथित उल्लंघन की संयुक्त संसदीय समिति की जांच की मांग की।

यह भी पढ़ें: 5जी तकनीक के मामले में चीन दे रहा है दुनिया को बड़ी टक्कर

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने रविवार को ट्वीट किया, “भाजपा-आरएसएस भारत में फेसबुक और व्हाट्सएप का नियंत्रण करती हैं। इस माध्यम से ये झूठी खबरें व नफरत फैलाकर वोटरों को फुसलाते हैं। आखिरकार, अमेरिकी मीडिया ने फेसबुक का सच सामने लाया है।”

एक वर्चुअव प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए, कांग्रेस के प्रवक्ता और पूर्व केंद्रीय मंत्री अजय माकन ने रविवार को कहा, “व्हाट्सएप पर 40 करोड़ भारतीय हैं और फेसबुक पर 28 करोड़ से अधिक हैं। इसलिए, वाणिज्यिक लेनदेन, घृणास्पद सामग्री के प्रचार, और भाजपा के साथ फेसबुक और व्हाट्सएप कर्मचारियों के संबंध की जांच अवश्य होनी चाहिए।”

इस आरोप के लिए केंद्रीय मंत्री और सत्तारूढ़ भाजपा के वरिष्ठ नेता रविशंकर प्रसाद ने राहुल गांधी पर निशाना साधा था। प्रसाद ने ट्वीट किया, “हारने वाले जो लोग अपनी ही पार्टी में भी लोगों को प्रभावित नहीं कर सकते, वे इस बात का हवाला देते रहते हैं कि पूरी दुनिया भाजपा और आरएसएस द्वारा नियंत्रित है।”

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पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई ने स्लीपर सेल्स के ज़रिये दिल्ली में लगवाई आईईडी- रिपोर्ट (Wikimedia Commons)

एक सूत्र ने कहा कि आरडीएक्स-आधारित इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (IED), जो 14 जनवरी को पूर्वी दिल्ली के गाजीपुर फूल बाजार में पाया गया था और उसमें "एबीसीडी स्विच" और एक प्रोग्राम करने योग्य टाइमर डिवाइस होने का संदेह था।

कश्मीर और अफगानिस्तान में सक्रिय जिहादी आतंकवादियों द्वारा लगाए गए आईईडी में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किए जाने वाले इन स्विच का पाकिस्तान(Pakistan) सबसे बड़ा निर्माता है। सूत्र ने कहा कि इन फोर-वे स्विच और टाइमर का उपयोग करके विस्फोट का समय कुछ मिनटों से लेकर छह महीने तक के लिए सेट किया जा सकता है।

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राष्ट्रपति भवन (Wikimedia Commons)

दक्षिणी दिल्ली नगर निगम(South Delhi Municipal Corporation) में भाजपा के मुनिरका वार्ड से पार्षद भगत सिंह टोकस ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द(Ramnath Kovind) को एक पत्र लिखकर राष्ट्रपति भवन(Rashtrapati Bhavan) में स्थित मुगल गार्डन का नाम बदल कर पूर्व राष्ट्रपति मिसाइल मैन डाक्टर अब्दुल कलाम वाटिका(Abdul Kalam Vatika) के नाम पर रखने की मांग की है। निगम पार्षद भगत सिंह टोकस ने राष्ट्रपति को भेजे अपने पत्र में लिखा है, मुगल काल में मुगलों द्वारा पूरे भारत में जिस प्रकार से आक्रमण किए गए और देश को लूटा था। वहीं देशभर में मुगल आक्रांताओं के नाम से लोगों में रोष हैं। जिन्होंने भारत की संस्कृति को खत्म करने का प्रयास किया उनको प्रचारित न किया जाए।

rastrapati bhavan, mughal garden राष्ट्रपति भवन स्थित मुगल गार्डन (Wikimedia Commons)

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शोधकर्ताओं ने कोविड के खिलाफ लड़ने में कारगर हिमालयी पौधे की खोज। ( Pixabay )

कोविड के खिलाफ नियमित टीकाकरण के अलावा दुनिया भर में अन्य प्रकार की दवाईयों पर अनेक संस्थायें रिसर्च कर रही हैं जो मानव शरीर पर इस विषाणु के आक्रमण को रोक सकती है। इसी क्रम में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मंडी के शोधकर्ताओं को एक बड़ी सफलता मिली है। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मंडी के शोधकर्ताओं ने एक हिमालयी पौधे की पंखुड़ियों में फाइटोकेमिकल्स की खोज की है जो कोविड संक्रमण के इलाज में करगर साबित हो सकती है।

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मंडी में स्कूल ऑफ बेसिक साइंस के बायोएक्स सेंटर के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. श्याम कुमार मसाकापल्ली के तर्ज पर एक वक्तव्य में कहा की, अलग अलग तरह के चिकित्सीय एजेंटों में पौधों से प्राप्त रसायनों फाइटोकेमिकल्स को उनकी क्रियात्मक गतिविधि और कम विषाक्तता के कारण विशेष रूप से आशाजनक माना जाता है। टीम ने हिमालयी बुरांश पौधे की पंखुड़ियों में इन रसायनों का पता लगया है। पौधे का वैज्ञानिक नाम रोडोडेंड्रोन अर्बोरियम है जिसे वहाँ के स्थानीय लोग अलग अलग तरह की बीमारियों में इसका इस्तेमाल करते हैं।

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