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संस्कृति

Parshuram Jayanti: भगवान परशुराम के जीवन से वह सीख जिसे आज हमें सीखना चाहिए!

आज भगवान परशुराम की जयंती है, जिन्होंने न्याय और पाप विनाश के लिए जन्म लिया। उन्हें भगवान विष्णु का छटा अवतार भी माना जाता है।

(NewsGram Hindi)

हर वर्ष हिन्दू पञ्चाङ्ग के अनुसार वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को परशुराम जयंती मनाई जाती है, इस दिन अक्षय तृतीया पर्व भी मनाया जाता। भगवान परशुराम विष्णु के छटे अवतार माने जाते हैं। उनका जन्म त्रेता युग में हुआ था। भगवान विष्णु के अवतरित होने के पीछे यह कारण दिया जाता है कि उनका जन्म राजाओं द्वारा किए जा रहे अन्याय के विनाश के लिए हुआ था।

भगवान परशुराम को भगवान विष्णु से रक्षक का गुण और भगवान शिव से संहारक का गुण प्राप्त हुआ था। वह महर्षि जमदाग्नि के चार पुत्रों में से सबसे छोटे पुत्र थे, जिनको सात चिरंजीवी पुरुषों में से एक माना जाता है। भक्तों में यह मान्यता है कि आज भी भगवान परशुराम जीवित हैं।


भगवान परशुराम (Wikimedia Commons)

भगवान परशुराम ने शिव की घोर तपस्या कर कई अस्त्र-शस्त्र प्राप्त किए। मान्यता यह है कि भार्गव(भगवान परशुराम के कई नामों में से एक) ने कई गावों को बसाया था और गुजरात से केरल राज्य तक अपने बाण से समुद्र को पीछे धकेल भूमि का निर्माण किया था।

भगवान परशुराम का नाम राम भी था। राम एक आदर्श पुत्र थे, उन्होंने सदैव अपने माता-पिता का सम्मान किया। किन्तु आम धारणाओं में यह कथा प्रसिद्ध है कि परशुराम ने अपनी माँ का वध कर दिया था। जिसके पीछे की कथा जानकर आप भी दंग रह जाएंगे। भगवान परशुराम को माँ का वध करने का आदेश उनके पिता महर्षि जमदाग्नि से मिला था। महर्षि जमदाग्नि ने अपने चारों पुत्रों को ऐसा करने का आदेश दिया। किन्तु, इसका पालन केवल परशुराम ने किया। जिसके पश्चात उनके पिता अति प्रसन्न हुए और कोई भी वर मांगने का आदेश दिया। इस पर अपनी बुद्धिमानी का परिचय देते हुए भगवान परशुराम ने अपनी माँ को पुनः जीवित करने का वर माँगा। जिस पर उनके पिता और अधिक प्रसन्न हुए और सभी ख्याति और ज्ञान उनको प्राप्त हो ऐसा वर दिया। किन्तु, परशुराम पर माँ के वध का पाप था जिससे मुक्त होने के लिए उन्होंने भगवन शिव की घोर तपस्या की और भगवान शिव द्वारा दिए गए वरदान से वह इस पाप से मुक्त हुए।

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भगवान परशुराम ने कभी दान करने की योग्यता को अपने से अलग होने नहीं दिया। इसके पीछे भी एक कथा है कि भगवान परशुराम ने अश्वमेघ यज्ञ से सम्पूर्ण सृष्टि को जीत लिया था। किन्तु उन सभी को दान कर दिया गया। उन्होंने न्याय को सर्वोपरि माना जिस वजह से उन्हें ‘न्याय देवता’ भी कहा जाता है।

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प्रमुख हिंदू नेता और श्री नारायण धर्म परिपालन योगम के महासचिव वेल्लापल्ली नतेसन (wikimedia commons)

हमारे देश में लव जिहाद के जब मामले आते है , तब इस मुद्दे पर चर्चा जोर पकड़ती है और देश कई नेता और जनता अपनी-अपनी राय को वयक्त करते है । एसे में एक प्रमुख हिंदू नेता और श्री नारायण धर्म परिपालन योगम के महासचिव वेल्लापल्ली नतेसन ने सोमवार को एक बयान दिया जिसमें उन्होनें कहा कि यह मुस्लिम समुदाय नहीं बल्कि ईसाई हैं जो देश में धर्मांतरण और लव जिहाद में सबसे आगे हैं।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार एनडीए के सहयोगी और भारत धर्म जन सेना के संरक्षक वेल्लापल्ली नतेसन नें एक कैथोलिक पादरी द्वारा लगाए गए आरोपों पर प्रतिक्रिया दी , जिसमे कहा गया था हिंदू पुरुषों द्वारा ईसाई धर्म महिलाओं को लालच दिया जा रहा है। नतेसन नें पाला बिशप जोसेफ कल्लारंगट की एक टिप्पणी जो कि विवादास्पद "लव जिहाद" और "मादक जिहाद" की भी जमकर आलोचना की और यह कहा कि इस मुद्दे पर "मुस्लिम समुदाय को निशाना बनाना सही नहीं है"।

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महंत नरेंद्र गिरि (Wikimedia Commons)

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि की सोमवार को संदिग्ध हालात में मौत हो गई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि को बाघंबरी मठ स्थित उनके आवास पर श्रद्धांजलि दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि दोषियों को जांच के बाद सजा दी जाएगी। उन्होंने कहा ''यह एक दुखद घटना है और इसी लिए अपने संत समाज की तरफ से, प्रदेश सरकार की ओर से उनके प्रति श्रद्धांजलि व्यक्त करने के लिए में स्वयं यहाँ उपस्थित हुआ हूँ। अखाड़ा परिषद और संत समाज की उन्होंने सेवा की है। नरेंद्र गिरि प्रयागराज के विकास को लेकर तत्पर रहते थे। साधु समाज, मठ-मंदिर की समस्याओं को लेकर उनका सहयोग प्राप्त होता था। उनके संकल्पों को पूरा करने की शक्ति उनके अनुयायियों को मिले''

योगी आदित्यनाथ ने कहा '' कुंभ के सफल आयोजन में नरेंद्र गिरि का बड़ा योगदान था। एक-एक घटना के पर्दाफाश होगा और दोषी अवश्य सजा पाएगा। मेरी अपील है सभी लोगों से की इस समय अनावश्यक बयानबाजी से बचे। जांच एजेंसी को निष्पक्ष रूप से कार्यक्रम को आगे बढ़ाने दे। और जो भी इसके लिए जिम्मेदार होगा उसको कानून की तहत कड़ी से कड़ी सजा भी दिलवाई जाएगी।

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By: कम्मी ठाकुर, स्वतंत्र पत्रकार एवं स्तम्भकार, हरियाणा

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