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थोड़ा हट के

दिल्ली के छात्रों की मदद के लिए आगे आए लोग, छोटे बच्चों ने तोड़ी गुल्लक

ऐसे छात्र जिनके माता-पिता बोर्ड परीक्षाओं की 24 सौ रुपये परीक्षा शुल्क (एग्जाम फी) भरने में सक्षम नहीं है, उनके लिए क्राउड फंडिंग की जा रही है।

ऑल इंडिया पेरेंट्स एसोसिएशन बच्चों की मदद के लिए आगे आया है। (IANS , Twitter)

दिल्ली के छात्रों की मदद के लिए अब अन्य छात्र, अभिभावक एवं अभिभावक संघ आगे आने लगे हैं। ऐसे छात्र जिनके माता-पिता बोर्ड परीक्षाओं की 24 सौ रुपये परीक्षा शुल्क (एग्जाम फी) भरने में सक्षम नहीं है, उनके लिए क्राउड फंडिंग की जा रही है। ऑल इंडिया पेरेंट्स एसोसिएशन की तरफ से ऐसी ही एक पहल की गई है, जिसके तहत करीब 4.50 लाख रुपये एकत्र किए गए हैं। वहीं दूसरी ओर तीसरी, चौथी, पांचवीं में पढ़ने वाले कई छोटे बच्चों ने अपनी गुल्लक में जमा पैसे, बोर्ड परीक्षा में शामिल होने वाले छात्रों को भेंट कर दिए हैं।

तीसरी कक्षा में पढ़ने वाले आठ वर्षीय अधिराज ने अपनी गुल्लक के पूरे पैसे इस क्राउड फंडिंग में दे दिए। अधिराज की शुरुआत के बाद कई और छोटे बड़े बच्चे इस अभियान में शामिल हुए हैं, जिससे अभी तक कई छात्रों की एग्जाम फीस भरी जा चुकी है।


दिल्ली की केजरीवाल सरकार ने ऐलान किया था कि वह 12वीं के छात्रों की सीबीएसई बोर्ड एग्जाम का रजिस्ट्रेशन फीस भरेगी। बीते वर्ष सरकार ने ऐसा किया भी, लेकिन इस साल कोरोना के कारण आई आर्थिक तंगी के बाद सरकार ने इससे हाथ पीछे खींच लिए।

दक्षिणी दिल्ली के बेगमपुर नवजीवन सर्वोदय कन्या विद्यालय की 90 छात्राएं इस बार 12वीं के परिवार की आर्थिक तंगी की समस्या अपनी एक टीचर मीनाक्षी सिंह के सामने रखी। मीनाक्षी ने अपने घर पर इसका जिक्र किया।

मीनाक्षी के बेटे अधिराज ने बिना किसी देरी अपनी छोटी सी गुल्लक अपनी मां को दे दी और कहा कि इन पैसों से फीस भर दो।

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अधिराज की गुल्लक में करीब साढ़े 12 हजार रुपये थे। अधिराज द्वारा की गई इस पहल के बाद कई और लोग उनके साथ जुड़े। इस अभियान के तहत अभी तक 1.50 लाख रुपये जुटाए जा चुके हैं।

वहीं ऑल इंडिया पेरेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अशोक अग्रवाल ने कहा, “काफी संख्या में उन्हें ऐसे बच्चों की जानकारी मिली जिनके माता-पिता की नौकरी छूट गई है और वह फीस भरने में असमर्थ हैं।”

ऐसे में एसोसिएशन ने छात्रों के लिए क्राउड फंडिंग शुरू की है। अशोक अग्रवाल ने कहा, “अच्छी बात यह रही कि बड़ी संख्या में लोग मदद के लिए आ रहे हैं। मोती नगर स्कूल के प्रिंसिपल ने भी हमारी इस पहल का स्वागत किया है। 10वीं और 12वीं के लगभग 190 छात्रों की फीस अभी तक जमा की जा चुकी है। नानकपुरा के सर्वोदय सह शिक्षा उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में दसवीं और बारहवीं के छात्रों की मदद के लिए भी लोग सामने आ रहे हैं।” (आईएएनएस)

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इंडियन स्कूल ऑफ हॉस्पिटैलिटी (ISH) [IANS]

दुनिया की अग्रणी हॉस्पिटैलिटी और पाक कला शिक्षा दिग्गजों में से एक, सॉमेट एजुकेशन (Sommet Education) ने हाल ही में देश के प्रीमियम हॉस्पिटैलिटी संस्थान, इंडियन स्कूल ऑफ हॉस्पिटैलिटी (ISH) के साथ हाथ मिलाया है। इसके साथ सॉमेट एजुकेशन की अब आईएसएच (ISH) में 51 प्रतिशत हिस्सेदारी है, जो पूर्व के विशाल वैश्विक नेटवर्क में एक महत्वपूर्ण एडिशन है। रणनीतिक साझेदारी सॉमेट एजुकेशन को भारत में अपने दो प्रतिष्ठित संस्थानों को स्थापित करने की अनुमति देती है। इनमें इकोले डुकासे शामिल है, जो पाक और पेस्ट्री कला में एक विश्वव्यापी शिक्षा संदर्भ के साथ है। दूसरा लेस रोचेस है, जो दुनिया के अग्रणी हॉस्पिटैलिटी बिजनेस स्कूलों में से एक है।

इस अकादमिक गठबंधन के साथ, इकोले डुकासे का अब भारत में अपना पहला परिसर आईएसएच (ISH) में होगा, और लेस रोचेस देश में अपने स्नातक और स्नातकोत्तर आतिथ्य प्रबंधन कार्यक्रम शुरू करेगा।

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Credit- Wikimedia Commons

भारतीय रेलवे (Wikimedia Commons)

पूर्व मध्य रेल ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के निर्देशों के बाद इसके अनुपालन में उल्लेखनीय प्रगति हासिल की है। इको स्मार्ट स्टेशन के रूप में विकसित करने के लिए पूर्व मध्य रेल के 52 चिन्हित स्टेशनों पर रेलवे बोर्ड द्वारा सुझाए गए 24 इंडिकेटर (पैरामीटर) लागू किए हैं। सभी 52 स्टेशनों ने पर्यावरण प्रबंधन के लिए एक प्रमाणन आईएसओ-14001:2015 प्राप्त किया है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल द्वारा निर्धारित पूर्व मध्य रेल के 52 नामांकित स्टेशनों में से 45 का संबंधित राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोडरें के लिए सहमति-से-स्थापित (सीटीई) प्रस्तावों की ऑनलाइन प्रस्तुतियां सुनिश्चित कीं।

पूर्व मध्य रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी राजेष कुमार ने बताया कि पूर्व मध्य रेल के सभी 45 स्टेशनों के लिए स्थापना की सहमति के लिए एनओसी प्राप्त कर ली गई है और 32 स्टेशनों को कंसेंट-टू-ऑपरेट (सीटीओ) दी गई है। उन्होंने बताया कि इस प्रमाणीकरण ने पूर्व मध्य रेलवे को राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोडरें द्वारा निर्धारित पानी, वायु प्रदूषण नियंत्रण और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन मानदंडों की आवश्यकता को सुव्यवस्थित करने में मदद की है।

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वायरस जनित बीमारियों की विश्व स्तरीय जांच अब गोरखपुर में भी हो सकेगा। [IANS]

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में इंसेफेलाइटिस समेत अन्य वायरस जनित बीमारियों की विश्व स्तरीय जांच शुरू हो गई है। गोरखपुर (Gorakhpur) में यह इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR)की क्षेत्रीय इकाई रीजनल मेडिकल रिसर्च सेंटर (RMRC) के जरिए संभव हुआ है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) के प्रयास से शुरू इस आरएमआरसी में नौ अत्याधुनिक लैब्स बनकर तैयार हैं। बता दें कि मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) इसका उद्घाटन करेंगे।

राज्य सरकार की ओर से मिली जानकारी के अनुसार आरएमआरसी (RMRC) की इन लैब्स के जरिये न केवल बीमारियों के वायरस की पहचान होगी बल्कि बीमारी के कारण, इलाज और रोकथाम को लेकर व्यापक स्तर पर वल्र्ड क्लास अनुसंधान भी हो सकेगा। सबसे खास बात यह भी है कि अब गोरखपुर (Gorakhpur) में ही आने वाले समय में कोरोनाकाल के वर्तमान दौर की सबसे चर्चित और सबसे डिमांडिंग जीनोम सिक्वेंसिंग (Genome Sequencing) भी हो सकेगी। यह पता चल सकेगा कि कोरोना का कौन सा वेरिएंट (Covid variant) अधिक प्रभावित कर रहा है।

Narendra Modi , PM of India, ICMR मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस RMRC का उद्घाटन करेंगे। [Wikimedia Commons]

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