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थोड़ा हट के

क्या आप किसी ऐसे इंसान को डेट करेंगे जिस ने कोविड-19 का टीका नहीं लिया हो?

ऑनलाइन डेटिंग क्वैकक्वैक के नेतृत्व में किए गए सर्वेक्षण के परिणामों से पता चला है कि लोग एंटी-वैक्सएक्सर्स की तुलना में प्रो-वैक्सीन पर बात करने की ज्यादा संभावना रखते हैं।

बिना कोविद टीके के नहीं मिल पाएगा प्यार।(Pixabay)

भारत में कोरोनावायरस की दूसरी और ज्यादा घातक लहर के बीच ज्यादातर लोग केवल उन्हें डेट करना पसंद करते हैं जिन्होंने कोविड टीकाकरण करा लिया हो। इसकी जानकारी एक सर्वेक्षण से पता चली है। ऑनलाइन डेटिंग क्वैकक्वैक के नेतृत्व में किए गए सर्वेक्षण के परिणामों से पता चला है कि लोग एंटी-वैक्सएक्सर्स की तुलना में प्रो-वैक्सीन पर बात करने की ज्यादा संभावना रखते हैं।

18-30-आयु वर्ग के लगभग 70 प्रतिशत लोग टीके लगने के बाद ही अपनी डेट को पूरा करने पर विचार करेंगे और 31 वर्ष या उससे अधिक उम्र के 10 में से 8 लोगों को लगता है कि टीकाकरण उनकी डेट के लिए एक शर्त है।


दूसरी ओर, आयु वर्ग 18-30 में 30 प्रतिशत लोग टीकाकरण पर विचार नहीं करेंगे और डेट करते समय अन्य सुरक्षा सावधानी बरतेंगे।

लगभग 80 फीसदी महिलाएं और 70 फीसदी पुरुष चाहते हैं कि वह ऐसे इंसान को डेट करें जिसने अपना टीकाकरण करवा लिया हो । अगर कोई जिसने टीका नहीं लगवाया है, तो उसके प्रस्ताव खारिज होने की संभावना ज्यादा है। केवल 25 प्रतिशत पुरुषों और महिलाओं को एंटी-वेक्सीनेटर से मिलने के विचार के लिए खुला पाया गया।

प्यार चाहते हैं तो कोरोना टीका जरूर लगवाएं।(Pixabay)

क्वैकक्वैक के संस्थापक और सीईओ रवि मित्तल ने बुधवार को एक बयान में कहा कि “सर्वेक्षण ने हमें कुछ महत्वपूर्ण जानकारी दी है कि कैसे लोग मौजूदा संकट के बारे में लापरवाही नहीं बरत रहे हैं और हर किसी की भलाई के लिए जारी किए गए स्वास्थ्य प्रोटोकॉल का कड़ाई से पालन कर रहे हैं। दूसरी लहर को लेकर लोग डरे हुए और अब बातचीत ‘लॉकडाउन’, ‘कोविड’, ‘मास्क’ ‘वैक्सीनेशन’, ‘असामयिक दूरियां’ में तब्दील हो गई है।

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“यह खुलासा करने के लिए आवश्यक हो गया है कि आपको टीका लगाया गया हो क्योंकि एक मैच खोजने की बहुत संभावना है। इसलिए, टीकाकरण एक व्यक्ति को पसंद और चुने जाने के लिए एक अतिरिक्त गुण बन गया है।”

मित्तल ने कहा, “इसके अलावा, जैसा कि हमने अपने उपयोगकतार्ओं की सुरक्षा को किसी भी चीज में डाल दिया है। हमने अपनी वेबसाइट पर हमारे उपयोगकतार्ओं को एक सामूहिक पृष्ठ के लिंक दिए हैं। इसलिए, हम यह सुनिश्चित करने के लिए अपना काम कर रहे हैं कि हमारे उपयोगकर्ता सुरक्षित हैं जबकि वे प्यार की तलाश में हैं।”(आईएएनएस-SHM)

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डब्ल्यूएचओ यानीं विश्व स्वास्थ्य संगठन का मुख्यालय (wikimedia commons)

पूरी दुनिया एक बार फिर कोरोना वायरस अपना पांव पसार रहा है । डब्ल्यूएचओ यानीं विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा है कि कोरोना वायरस का जो डेल्टा कोविड वैरिएंट संक्रामक वायरस का वर्तमान में प्रमुख प्रकार है, अब यह दुनिया भर में इसका फैलाव हो चूका है । इसकी मौजूदगी 185 देशों में दर्ज की गई है। मंगलवार को अपने साप्ताहिक महामारी विज्ञान अपडेट में वैश्विक स्वास्थ्य एजेंसी ने कहा, डेल्टा वैरिएंट में अब सेम्पल इकट्ठा करने की डेट जो कि 15 जून -15 सितंबर, 2021 के बीच रहेंगीं । जीआईएसएआईडी, जो एवियन इन्फ्लुएंजा डेटा साझा करने पर वैश्विक पहल के लिए है, एक ओपन-एक्सेस डेटाबेस है।

मारिया वान केरखोव जो विश्व स्वास्थ्य संगठन में कोविड-19 पर तकनीकी के नेतृत्व प्रभारी हैं , उन्होंने डब्ल्यूएचओ सोशल मीडिया लाइव से बातचीत करते हुए कहा कि , वर्तमान में कोरोना के अलग अलग टाइप अल्फा, बीटा और गामा का प्रतिशत एक से भी कम चल रहा है। इसका मतलब यह है कि वास्तव में अब दुनिया भर में कोरोना का डेल्टा वैरिएंट ही चल रहा है।

\u0915\u094b\u0930\u094b\u0928\u093e \u0935\u093e\u092f\u0930\u0938 कोरोना का डेल्टा वैरिएंट हाल के दिनों में दुनियाभर में कहर बरपाया है (pixabay)

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ऑस्ट्रेलिया का नक्शा (Wikimedia Commons)

ऑस्ट्रेलिया की शार्क प्रजातियों पर एक खतरा आ गया है। वहाँ 10 प्रतिशत से अधिक शार्क प्रजाति विलुप्त होने ही वाली है। समाचार एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रीय पर्यावरण विज्ञान कार्यक्रम (एनईएसपी) समुद्री जैव विविधता हब ने सभी ऑस्ट्रेलियाई शार्क, किरणों और घोस्ट शार्क (चिमेरा) के विलुप्त होने का मूल्यांकन प्रकाशित किया है।


ऑस्ट्रेलिया दुनिया की कार्टिलाजिनस मछली प्रजातियों के एक चौथाई से अधिक का घर है, इसमें 182 शार्क, 132 किरणें और 14 चिमेरे ऑस्ट्रेलियाई जलमार्ग में हैं। पीटर काइन जो चार्ल्स डार्विन विश्वविद्यालय (सीडीयू) के एक वरिष्ठ शोधकर्ता है और रिपोर्ट के प्रमुख लेखक है उन्होंने कहा कि तुरंत कार्रवाई की जरूरत है। पीटर काइन कहा, "ऑस्ट्रेलिया का जोखिम 37 प्रतिशत के वैश्विक स्तर से काफी कम है। यह उन 39 ऑस्ट्रेलियाई प्रजातियों के लिए चिंता का विषय है, जिनके विलुप्त होने का खतरा बढ़ गया है।"

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ब्रिटेन में पढ़ने के लिए राज्य छात्रवृत्ति मिली 6 आदिवासी छात्रों को।(Unsplash)

भारत के झारखंड राज्य में कुछ छात्रों का भविष्य उज्व्वल होने जा रहा है । क्योंकि झारखंड राज्य में छह छात्रों को राज्य के छात्रवृत्ति कार्यक्रम के तहत विदेश में मुफ्त उच्च शिक्षा मिलने जा रही है। राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और कल्याण मंत्री चंपई सोरेन राजधानी रांची में गुरुवार कोआयोजित होने वाले एक कार्यक्रम में छात्रवृत्ति योजना मारंग गोमके जयपाल सिंह मुंडा के तहत लाभार्थियों छात्रोंऔर उनके अभिभावकों को सम्मानित करने जा रहे है।

आप को बता दे की यह योजना राज्य सरकार द्वारा यूके और आयरलैंड में उच्च अध्ययन करने हेतु अनुसूचित जनजातियों के छात्रों के लिए शुरू की गई है। छात्रवृत्ति के पुरस्कार प्राप्त करने वाले छात्रों को विविध खर्चो के साथ-साथ ट्यूशन फीस भी पूरी तरह मिलेगी । इस योजना के अनुसार झारखंड राज्य में हर साल अनुसूचित जनजाति से 10 छात्रों का चयन किया जाएगा।

सितंबर में ब्रिटेन के 5 विभिन्न विश्वविद्यालयों में अपना अध्ययन कार्यक्रम शुरू करंगे 6 छात्र जिनको को चुना गया हैं।

अगर बात करे चयनित छात्रों की सूचि के बारे में तो इसमें से हरक्यूलिस सिंह मुंडा जो कि "यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन " के "स्कूल ऑफ ओरिएंटल एंड अफ्रीकन स्टडीज" से एमए करने जा रहे हैं। "मुर्मू यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ लंदन" से छात्र अजितेश आर्किटेक्चर में एमए करने जा रहे हैं। और वंहीआकांक्षा मेरी "लॉफबोरो विश्वविद्यालय" में जलवायु परिवर्तन, विज्ञान और प्रबंधन में एमएससी करेंगी, जबकि दिनेश भगत ससेक्स विश्वविद्यालय में जलवायु परिवर्तन, विकास और नीति में एमएससी करेंगे।

\u0938\u094d\u091f\u0942\u0921\u0947\u0902\u091f विश्वविद्यालय में पढ़ते हुए छात्र (pixabay)

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