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देश

पीएम मोदी के कारण मां अन्नपूर्णा फिर काशी को मिलने वाली हैं : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि 1913 में काशी में मां अन्नपूर्णा की एक मूर्ति चोरी हुई थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कारण काशी की मां अन्नपूर्णा एक बार फिर से काशीवासियों को मिलने वाली हैं।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी । ( Wikiemdia commons )

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि 1913 में काशी में मां अन्नपूर्णा की एक मूर्ति चोरी हुई थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कारण काशी की मां अन्नपूर्णा एक बार फिर से काशीवासियों को मिलने वाली हैं। आखिर एक सौ आठ वर्षो तक किसी अन्य सरकार की नजर उधर क्यों नहीं पड़ी? उन्होंने पूर्व में रही सरकारों से सवाल किया कि क्यों सौ वर्षो तक हम भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत पर मौन रहे? मुख्यमंत्री आज वाराणसी के संत रविदास घाट पर देव दीपोत्सव के मौके पर संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि, “मां गंगा की अविरलता और निर्मलता किसी से छिपी नहीं है। आज से छह वर्ष पहले तक इसी गंगा मैया में डुबकी लगाने से हिचकते थे, अगर दो दिन लगातार डुबकी लगा दिए, तो लाल चकत्ते निकल पड़ते थे। गंगे डॉल्फिन के नाम पर विख्यात डॉल्फिन लुप्त हो चुका था। आज पीएम मोदी के कारण गंगा स्नान ही नहीं, आचमन करने लायक बनी है। उन्होंने काशी में आते ही कहा था कि मुझे मां गंगा ने बुलाया है। प्रधानमंत्री का संकल्प था, नमामि गंगे परियोजना के सफलतम क्रियान्वयन के माध्यम से मात्र छह वर्ष में गंगा की निर्मलता हम सबके सामने है और आज गंगा के तट पर यह कार्यक्रम जहां एक नई ऊंचाइयों को छू रहा है।”

उन्होंने कहा कि, “संत रविदास और मां गंगा का अनन्य संबंध था। जब काशी में मां गंगा आईं, तो भैरवनाथ जी ने रोकने का प्रयास किया था। मां गंगा ने उस समय आश्वासन दिया था कि मैं काशी में कोई विघ्न, अड़चन नहीं डालूंगी, लेकिन मां गंगा को वास्तव में भगवान विश्वनाथ के चरणों में स्थान देने का कार्य विश्वनाथ धाम देने के माध्यम से अगर किसी ने इस परिकल्पना को साकार किया है, तो प्रधानमंत्री मोदी ने किया है।

अयोध्या और काशी की परंपरा

योगी ने कहा कि, “हजारों वर्षो की कुंभ की विरासत को अव्यवस्था में तब्दील कर दिया था। भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को यूनेस्को ने मानवता की मूर्ति सांस्कृतिक धरोहर के रूप में मान्यता दी। साथ ही दुनिया के दो सौ राजदूतों को प्रयागराज की धरती पर आमंत्रित करवाकर वैश्विक मंच पर कुंभ की इस परंपरा को स्थापित कर भारत की सांस्कृतिक मान्यता को एक नई ऊंचाई देने का कार्य किया।”

यह भी पढ़े : “हमारे लिए विरासत का मतलब है देश की धरोहर”

मुख्यमंत्री ने कहा कि, “इस देश की पांच सौ वर्षो की एक ऐसी समस्या जो अन्यों के लिए जटिल थी, कठिन थी, वह चाहते ही नहीं थे इस समस्या का समाधान हो, लेकिन अपने नाम के अनुरूप उस नामुमकिन को भी मुमकिन बनाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अयोध्या में भगवान श्रीराम के भव्य मंदिर निर्माण कार्य का शुभारंभ कराया।”

योगी ने कहा कि, “प्रधानमंत्री का काशी को वैश्विक मंच पर स्थापित करने का कार्यक्रम हो या काशी के भौतिक विकास आध्यात्मिक और सांस्कृतिक परंपरा को बनाए रखते हुए वैश्विक पटल पर रखने का कार्य हो या योग को वैश्विक मंच पर मान्यता देने का। आज दुनिया के दो सौ से अधिक देश भारत की योग परंपरा के साथ जुड़ते हुए दिखाई देते हैं, तो भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक ताकत को पूरी दुनिया मानती है।” (आईएएनएस)

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बांके बिहारी मंदिर में होली

कहा जाता है कि अगर किसी इंसान को सुकून चाहिए होता है तो उसे वृंदावन या मथुरा की गलियों में जाना चाहिए, क्योंकि इन्ही गलियों में खेलते हुए कृष्ण जी का बचपन बीता हैं। वृंदावन हो या मथुरा यहां हर दूसरा व्यक्ति कृष्ण भक्ति में लीन नज़र आता है। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता की वह हिंदुस्तानी है या कहीं और से आया है। हर कोई कृष्ण की महिमा में डूबा हुआ होता है। वैसे तो वृंदावन में कई मंदिर है जहां हर रोज हज़ारों की संख्या में भक्त आते हैं और अपनी हाजिरी लगवाते हैं, लेकिन बांके बिहारी मंदिर की बात अलग है। यहां भी भक्तों का मेला लगा रहता है, पर हर किसी को कुछ बातें मालूम नहीं है। ऐसे ही कुछ तथ्यों के बारे में इस आर्टिकल में बताया गया है।

1) बांके बिहारी मंदिर की स्थापना स्वामी श्री हरिदास जी ने की थी। वह श्री कृष्ण के भक्त थे और महान गायक तानसेन के गुरु थे। वह अपने गीत से श्री कृष्ण को प्रसन्न करने की कोशिश किया करते थे। ऐसा कहा जाता है कि श्री हरिदास जी की भक्ति से प्रसन्न हो श्री कृष्ण ने दर्शन दिए थे।

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(instagram , virat kohali)

भारतीय क्रिकेट टीमके कप्तान विराट कोहली और अनुष्का

भारतीय क्रिकेट टीमके कप्तान विराट कोहली और उनके फाउंडेशन ने यहां मड, मलाड में आवारा पशुओं के लिए एक ट्रॉमा और रिहेब सेंटर का उद्घाटन किया है। इसके पहले इस साल की शुरूआत में, भारतीय कप्तान कोहली ने कहा था कि वह मुंबई में दो पशु देखभाल सुविधाएं स्थापित कर रहे हैं।
कोहली ने अपनी पत्नी अनुष्का शर्मा को शहर में आवारा जानवरों के सामने आने वाली कठिनाइयों को देखने का श्रेय दिया।

अभिनेत्री अनुष्का ने कई मौकों पर जानवरों के कल्याण और उनके अधिकारों के प्रति अपना समर्थन दिया है। अनुष्का के जानवरों के प्रति दीवानगी से प्रेरित होकर कोहली अपने फाउंडेशन के जरिए आवारा जानवरों की मदद करने के मौके तलाश रहे हैं।

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भीड़ में चलते लोग।

मौजूदा समय में विश्व की जनसंख्या 7 अरब से भी ज्यादा है। इस जनसंख्या को यहां तक पहुंचने में कई सदियां लग गई है। समस्त विश्व को 1 अरब से 2 अरब तक की आबादी होने में 100 सालों का समय लगा था। लेकिन 2 अरब से 3 अरब होने में मात्र 30 साल लगे, वहीं 3 से 4 अरब होने में 15 साल लगे थे। उसके बाद से यह अंतर और कम हो गया। औद्योगिक क्रांति के बाद अठारहवीं शताब्दी में विश्व जनसंख्या में विस्फोट हुआ था। तकनिकी प्रगति की वजह से मृत्यु दर में गिरावट आई जो कि जनसंख्या विस्फोट का एक बहुत बड़ा कारण बना। भारत में भी जनसंख्या विस्फोट देखा गया था।

1951 में भारत की जनसंख्या मात्र 36.1 करोड़ थी जो 2011 की जनगणना में 121.02 करोड़ हो गई। और अब यह लगभग 135 करोड़ के ऊपर है। अगर किसी क्षेत्र की जनसंख्या बढ़ती है तो उसका मतलब है कि वहाँ का मृत्यु दर कम है और जन्म दर ज्यादा। यह दर्शाता है कि उस जगह पर चिकित्सकीय सुविधाएं अच्छी है। लेकिन बढ़ती जनसंख्या देश के लिए मुसीबत का सबब भी बन सकती है, क्योंकि जनसंख्या में वृद्धि हुई है किन्तु साधनों में नहीं। भारत के साथ भी यही समस्या है। लगातार जनसंख्या बढ़ने से कई जगहों पर साधनों की कमी महसूस होने लगी है।

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