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पीएमईजीपी के तहत उत्पादन गतिविधियों से फल-फूल रहा कारगिल और लेह

कारगिल और लेह का शांत एवं अनूठा हिमालयी इलाका सरकार के प्रमुख प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) ( PMEGP ) के तहत बनाए गए स्व-टिकाऊ रोजगार के परिणामस्वरूप उत्पादन गतिविधियों से फल-फूल रहा है।

By : शशि भूषण

कारगिल और लेह का शांत एवं अनूठा हिमालयी इलाका सरकार के प्रमुख प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम ( PMEGP )  (पीएमईजीपी) के तहत बनाए गए स्व-टिकाऊ रोजगार के परिणामस्वरूप उत्पादन गतिविधियों से फल-फूल रहा है।


2017-18 के बाद से लगभग 1000 विभिन्न छोटी और मध्यम विनिर्माण इकाइयों ने स्थानीय युवाओं के लिए 8200 से अधिक रोजगार के अवसर पैदा किए हैं।

2017-18 से 2020 तक पीएमईजीपी योजना के लिए नोडल कार्यान्वयन एजेंसी खादी और ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी) ने कारगिल में 802 परियोजनाएं और लेह क्षेत्र में 191 परियोजनाएं स्थापित करने के साथ ही कारगिल में 6781 नौकरियां और लेह में 1421 नौकरियां पैदा की हैं। केवीआईसी ने इन परियोजनाओं के लिए कारगिल में मार्जिन मनी के रूप में 26.67 करोड़ रुपये और इस अवधि के दौरान लेह क्षेत्र में 5.68 करोड़ रुपये संवितरित किए।

सीमेंट ब्लॉक से लेकर लोहे और स्टील के सामान, ऑटोमोबाइल रिपेयर वर्कशॉप, टेलरिंग यूनिट्स, वुडन फर्नीचर मैन्युफैक्च रिंग यूनिट्स, वुड कार्विग यूनिट्स, साइबर कैफे, ब्यूटी पार्लर और गोल्ड ज्वेलरी बनाने जैसी कुछ पहलें हैं, जो पीएमईजीपी के तहत समर्थित हैं। इनके जरिए स्थानीय लोगों को सम्मानजनक आजीविका कमाने का मौका मिला है।

यहां तक कि 2020-21 के पहले छह महीनों के दौरान, जब कोविड-19 महामारी के कारण लॉकडाउन लगाया गया था, केवीआईसी ने स्थानीय लोगों को कारगिल में 26 और विभिन्न क्षेत्रों में लेह में 24 नई परियोजनाएं स्थापित करने में मदद की, जिससे दोनों क्षेत्रों में 350 नौकरियां पैदा हुईं।

केवीआईसी के चेयरमैन विनय कुमार सक्सेना ने कारगिल और लेह में रोजगार के इन अवसरों के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पर्यावरणीय दृष्टि से चुनौतीपूर्ण लेह-लद्दाख क्षेत्र के सर्वांगीण विकास के लिए जिम्मेदार बताया।
 

स्थानीय महिलाओं को नियमित रूप से स्वरोजगार अपनाने के लिए प्रेरित किया है । ( आईएएनएस ) 

 

सक्सेना ने कहा, “कारगिल और लेह ने विभिन्न विनिर्माण गतिविधियों को बनाए रखने की अपार क्षमता दिखाई है। लेह और कारगिल देश के बाकी हिस्सों से लगभग छह महीने तक कट जाते हैं। हालांकि, ये उत्पादन इकाइयां पूरे वर्ष इन क्षेत्रों में वस्तुओं की स्थानीय उपलब्धता सुनिश्चित करेंगी।” 

यह भी पढ़ें : रविशंकर प्रसाद ने पूछा- जब एक मंत्री का टारगेट 100 करोड़ है तो बाकियों का क्या होगा ?


कारगिल और लेह में लाभार्थियों ने खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें उत्पादन इकाइयों के शुरू होने के बाद नौकरियों की तलाश में दूसरे राज्यों में पलायन नहीं करना पड़ा। इससे न केवल उनके लिए स्वरोजगार पैदा हुआ, बल्कि इस क्षेत्र के कई अन्य बेरोजगार युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा हुए।

कारगिल के मिनजी गांव के रहने वाले मोहम्मद बाकिर, जिन्होंने 10 लाख रुपये के शुरुआती ऋण के साथ सीमेंट ब्लॉक उत्पादन इकाई शुरू की थी, अब 52 लाख रुपये का सालाना कारोबार कर रहे हैं। उन्होंने अपनी निर्माण इकाई में आठ व्यक्तियों को नियुक्त किया है।

इसी तरह, लोहा और इस्पात की वस्तुओं के उत्पादन में लगे इस्माइल नासिरी ने कारगिल के पोयेन गांव में 25 लाख के साथ अपनी इकाई शुरू की। उन्होंने अब 10 व्यक्तियों को नियुक्त किया है और 76 लाख रुपये का सालाना कारोबार कर रहे हैं।

इसने स्थानीय महिलाओं को नियमित रूप से स्वरोजगार अपनाने के लिए प्रेरित किया है, जो बाहर जाने और स्वतंत्र रूप से काम करने को लेकर अनिच्छुक थीं। केवीआईसी द्वारा समर्थित कई महिला उद्यमी सफलतापूर्वक इन जिलों में कटाई, सिलाई इकाइयां और ब्यूटी पार्लर संचालित कर रही हैं और मुनाफा कमा रही हैं।
(AK आईएएनएस ) 
 

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