Never miss a story

Get subscribed to our newsletter


×
देश

शिक्षक दिवस: पीएम मोदी ने शिक्षकों का जताया आभार, डॉ. राधाकृष्णन को किया याद

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शिक्षकों से अपील करते हुए कहा था कि देश में राष्ट्रीय शिक्षा नीति के जरिए एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है, जिसका लाभ वे छात्रों तक पहुंचाएं।

पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन (Wikimedia Commons)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 5 सितंबर को शिक्षक दिवस पर परिश्रमी शिक्षकों का आभार जताते हुए पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन को श्रद्धांजलि दी है। देश में 1962 से हर साल पांच सितंबर को शिक्षक दिवस मनाकर शिक्षकों के योगदान को याद किया जाता है। यह दिवस, देश के पूर्व राष्ट्रपति, प्रथम उपराष्ट्रपति और जाने-माने शिक्षाविद रहे डॉ. राधाकृष्णन की जन्मदिन पर मनाया जाता है।

यह भी पढ़ें: वेबिनार के जरिए देश के विभिन्न सांस्कृतिक पहलुओं को जान सकेंगे छात्र


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “हमारे राष्ट्र के निर्माण में योगदान देने वाले परिश्रमी शिक्षकों के हम आभारी रहेंगे। शिक्षक दिवस पर, हम अपने शिक्षकों का उनके उल्लेखनीय प्रयासों के लिए आभार व्यक्त करते हैं। हम डॉ. एस राधाकृष्णन को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।” पीएम मोदी ने ट्वीट में एक हैशटैग का भी इस्तेमाल किया, जिसका अर्थ रहा- हमारे शिक्षक, हमारे हीरो।

प्रधानमंत्री मोदी ने पिछले दिनों जारी हुए ‘मन की बात’ का एक अंश ट्विटर पर शेयर करते हुए कहा, “हमारे राष्ट्र के गौरवशाली इतिहास से हमारा जुड़ाव गहरा करने के लिए हमारे जानकार शिक्षकों से बेहतर कौन है? हाल ही में मन की बात के दौरान, मैंने छात्रों को हमारे महान स्वतंत्रता संघर्ष के कम ज्ञात पहलुओं के बारे में शिक्षकों से एक विचार साझा किया था।”

यह भी पढ़ें- लोकल को ग्लोबल से जोड़ता है आत्मनिर्भर भारत : पीएम मोदी

दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले रविवार को मन की बात के दौरान कहा था कि कोरोना काल के संकट काल में शिक्षकों ने चुनौती को अवसर में बदला। शिक्षा में तकनीक का उपयोग किया। शिक्षक और छात्र मिलकर कुछ नया कर रहे हैं। उन्होंने शिक्षकों से अपील करते हुए कहा था कि देश में राष्ट्रीय शिक्षा नीति के जरिए एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है, जिसका लाभ वे छात्रों तक पहुंचाएं।

शिक्षक दिवस की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा था कि वर्ष 2022 में आजादी के 75 वर्ष पूरे हो जाएंगे। यह बहुत आवश्यक है कि हमारी आज की पीढ़ी, आजादी की जंग, देश के नायकों से परिचित हों। ऐसे में अपने जिले में आजादी के आंदोलन में क्या हुआ, कौन शहीद हुआ, कौन जेल में रहा। यह बातें विद्यार्थी जानेंगे तो उनके व्यक्तित्व में बदलाव होगा। वहां जो घटनाएं हुईं, उन पर विद्यार्थियों से रिसर्च कराई जा सकती है। हस्तलिखित बुक तैयार की जा सकती है। शिक्षक अपने विद्यार्थियों को स्वतंत्रता से जुड़े स्थानों पर ले जा सकते हैं। आजादी के 75 वर्ष पर 75 नायकों पर विद्यार्थियों से कविताएं लिखवाईं जा सकतीं हैं।(आईएएनएस)

Popular

डब्ल्यूएचओ यानीं विश्व स्वास्थ्य संगठन का मुख्यालय (wikimedia commons)

पूरी दुनिया एक बार फिर कोरोना वायरस अपना पांव पसार रहा है । डब्ल्यूएचओ यानीं विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा है कि कोरोना वायरस का जो डेल्टा कोविड वैरिएंट संक्रामक वायरस का वर्तमान में प्रमुख प्रकार है, अब यह दुनिया भर में इसका फैलाव हो चूका है । इसकी मौजूदगी 185 देशों में दर्ज की गई है। मंगलवार को अपने साप्ताहिक महामारी विज्ञान अपडेट में वैश्विक स्वास्थ्य एजेंसी ने कहा, डेल्टा वैरिएंट में अब सेम्पल इकट्ठा करने की डेट जो कि 15 जून -15 सितंबर, 2021 के बीच रहेंगीं । जीआईएसएआईडी, जो एवियन इन्फ्लुएंजा डेटा साझा करने पर वैश्विक पहल के लिए है, एक ओपन-एक्सेस डेटाबेस है।

मारिया वान केरखोव जो विश्व स्वास्थ्य संगठन में कोविड-19 पर तकनीकी के नेतृत्व प्रभारी हैं , उन्होंने डब्ल्यूएचओ सोशल मीडिया लाइव से बातचीत करते हुए कहा कि , वर्तमान में कोरोना के अलग अलग टाइप अल्फा, बीटा और गामा का प्रतिशत एक से भी कम चल रहा है। इसका मतलब यह है कि वास्तव में अब दुनिया भर में कोरोना का डेल्टा वैरिएंट ही चल रहा है।

\u0915\u094b\u0930\u094b\u0928\u093e \u0935\u093e\u092f\u0930\u0938 कोरोना का डेल्टा वैरिएंट हाल के दिनों में दुनियाभर में कहर बरपाया है (pixabay)

Keep Reading Show less

ऑस्ट्रेलिया का नक्शा (Wikimedia Commons)

ऑस्ट्रेलिया की शार्क प्रजातियों पर एक खतरा आ गया है। वहाँ 10 प्रतिशत से अधिक शार्क प्रजाति विलुप्त होने ही वाली है। समाचार एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रीय पर्यावरण विज्ञान कार्यक्रम (एनईएसपी) समुद्री जैव विविधता हब ने सभी ऑस्ट्रेलियाई शार्क, किरणों और घोस्ट शार्क (चिमेरा) के विलुप्त होने का मूल्यांकन प्रकाशित किया है।


ऑस्ट्रेलिया दुनिया की कार्टिलाजिनस मछली प्रजातियों के एक चौथाई से अधिक का घर है, इसमें 182 शार्क, 132 किरणें और 14 चिमेरे ऑस्ट्रेलियाई जलमार्ग में हैं। पीटर काइन जो चार्ल्स डार्विन विश्वविद्यालय (सीडीयू) के एक वरिष्ठ शोधकर्ता है और रिपोर्ट के प्रमुख लेखक है उन्होंने कहा कि तुरंत कार्रवाई की जरूरत है। पीटर काइन कहा, "ऑस्ट्रेलिया का जोखिम 37 प्रतिशत के वैश्विक स्तर से काफी कम है। यह उन 39 ऑस्ट्रेलियाई प्रजातियों के लिए चिंता का विषय है, जिनके विलुप्त होने का खतरा बढ़ गया है।"

Keep Reading Show less

ब्रिटेन में पढ़ने के लिए राज्य छात्रवृत्ति मिली 6 आदिवासी छात्रों को।(Unsplash)

भारत के झारखंड राज्य में कुछ छात्रों का भविष्य उज्व्वल होने जा रहा है । क्योंकि झारखंड राज्य में छह छात्रों को राज्य के छात्रवृत्ति कार्यक्रम के तहत विदेश में मुफ्त उच्च शिक्षा मिलने जा रही है। राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और कल्याण मंत्री चंपई सोरेन राजधानी रांची में गुरुवार कोआयोजित होने वाले एक कार्यक्रम में छात्रवृत्ति योजना मारंग गोमके जयपाल सिंह मुंडा के तहत लाभार्थियों छात्रोंऔर उनके अभिभावकों को सम्मानित करने जा रहे है।

आप को बता दे की यह योजना राज्य सरकार द्वारा यूके और आयरलैंड में उच्च अध्ययन करने हेतु अनुसूचित जनजातियों के छात्रों के लिए शुरू की गई है। छात्रवृत्ति के पुरस्कार प्राप्त करने वाले छात्रों को विविध खर्चो के साथ-साथ ट्यूशन फीस भी पूरी तरह मिलेगी । इस योजना के अनुसार झारखंड राज्य में हर साल अनुसूचित जनजाति से 10 छात्रों का चयन किया जाएगा।

सितंबर में ब्रिटेन के 5 विभिन्न विश्वविद्यालयों में अपना अध्ययन कार्यक्रम शुरू करंगे 6 छात्र जिनको को चुना गया हैं।

अगर बात करे चयनित छात्रों की सूचि के बारे में तो इसमें से हरक्यूलिस सिंह मुंडा जो कि "यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन " के "स्कूल ऑफ ओरिएंटल एंड अफ्रीकन स्टडीज" से एमए करने जा रहे हैं। "मुर्मू यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ लंदन" से छात्र अजितेश आर्किटेक्चर में एमए करने जा रहे हैं। और वंहीआकांक्षा मेरी "लॉफबोरो विश्वविद्यालय" में जलवायु परिवर्तन, विज्ञान और प्रबंधन में एमएससी करेंगी, जबकि दिनेश भगत ससेक्स विश्वविद्यालय में जलवायु परिवर्तन, विकास और नीति में एमएससी करेंगे।

\u0938\u094d\u091f\u0942\u0921\u0947\u0902\u091f विश्वविद्यालय में पढ़ते हुए छात्र (pixabay)

Keep reading... Show less