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देश

दिल्ली में प्रदूषण से निपटने के लिए दीर्घकालीन कार्य योजना!

दिल्ली के सभी हॉट स्पॉट की नियमित रूप से निगरानी करने और निर्माण कार्य से संबंधित एजेंसियों को जागरूक करने का निर्देश दिया गया है।

दिल्ली सरकार दिल्ली (Delhi) में प्रदूषण से निपटने के लिए दीर्घकालीन कार्य योजना बनाने जा रही है। इसके लिए 12 और 13 अप्रैल को पर्यावरण (Environment) विशेषज्ञों, विभिन्न संगठनों और संबंधित विभागों के साथ राउंड टेबल कॉन्फ्रेंस आयोजित की जाएगी। इस दौरान विशेषज्ञों से मिले सुझावों के आधार पर सरकार दीर्घकालीन कार्य योजना बनाएगी। संबंधित विभागीय अधिकारियों को दिल्ली के सभी हॉट स्पॉट (HotSpot) की नियमित रूप से निगरानी करने और निर्माण कार्य से संबंधित एजेंसियों को जागरूक करने का निर्देश दिया गया है। दिल्ली के पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने दिल्ली के प्रदूषण को कम करने के लिए पर्यावरण विभाग और डीपीसीसी के अधिकारियों के साथ गुरुवार को हुई समीक्षा बैठक के दौरान यह बातें कहीं।


दिल्ली के अंदर मौजूदा प्रदूषण (Pollution) को लेकर जो रिपोर्ट आ रही है, उस पर गोपाल राय (Gopal rai) ने अधिकारियों को तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दिए। साथ ही, भविष्य के लिए एक दीर्घकालीन कार्य योजना विकसित करने के लिए निर्देशित किया।

दिल्ली के अंदर धूल के प्रदूषण को कम करने को लेकर, खासतौर पर पिछले साल हमने कई जगह कार्रवाई की। (Pexel)

उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार दिल्ली में प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए एक दीर्घकालीन कार्य योजना बनाने जा रही है। इसके लिए 12 और 13 अप्रैल को पर्यावरण विशेषज्ञों, विभिन्न संगठनों और संबंधित विभागों के साथ दिल्ली सचिवालय में राउंड टेबल कॉन्फ्रेंस आयोजित की जाएगी। उन्होंने कहा कि ग्रीन वार रूम में जिस भी विभाग की शिकायत आ रही है, उस पर तय समय सीमा पर कार्रवाई की जाए।

गोपाल राय ने कहा कि विभाग के अधिकारी निर्माण कार्य से संबंधित एजेंसियों (Agencies) को जागरूक करते रहें, ताकि प्रदूषण से संबंधित सभी पहलुओं की जानकारी उनको हो सके और वे सभी प्रकार की सावधानियां बरत सकें। इस दौरान उन्होंने निर्माण कार्य से संबंधित सभी एजेंसियों को निर्देशित किया है कि वे प्रदूषण से संबंधित सभी दिशा-निर्देशों का पालन करें। गोपाल राय ने कहा कि समीक्षा बैठक में दूसरे महत्वपूर्ण बिंदू धूल के प्रदूषण पर विचार-विमर्श भी किया गया।

पूरी खबर पढ़ें :- दिल्ली विश्व स्तर पर सबसे प्रदूषित राजधानी : रिपोर्ट

उन्होंने कहा कि दिल्ली के अंदर धूल के प्रदूषण (Pollution) को कम करने को लेकर, खासतौर पर पिछले साल हमने कई जगह कार्रवाई की। पीडब्लूडी (PWD) और एमसीडी (MCD) को भी निर्देश दिया जा चुका है कि वे सड़कों पर लगातार पानी का छिड़काव करते रहें। (आईएएनएस-SM)

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पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई ने स्लीपर सेल्स के ज़रिये दिल्ली में लगवाई आईईडी- रिपोर्ट (Wikimedia Commons)

एक सूत्र ने कहा कि आरडीएक्स-आधारित इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (IED), जो 14 जनवरी को पूर्वी दिल्ली के गाजीपुर फूल बाजार में पाया गया था और उसमें "एबीसीडी स्विच" और एक प्रोग्राम करने योग्य टाइमर डिवाइस होने का संदेह था।

कश्मीर और अफगानिस्तान में सक्रिय जिहादी आतंकवादियों द्वारा लगाए गए आईईडी में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किए जाने वाले इन स्विच का पाकिस्तान(Pakistan) सबसे बड़ा निर्माता है। सूत्र ने कहा कि इन फोर-वे स्विच और टाइमर का उपयोग करके विस्फोट का समय कुछ मिनटों से लेकर छह महीने तक के लिए सेट किया जा सकता है।

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राष्ट्रपति भवन (Wikimedia Commons)

दक्षिणी दिल्ली नगर निगम(South Delhi Municipal Corporation) में भाजपा के मुनिरका वार्ड से पार्षद भगत सिंह टोकस ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द(Ramnath Kovind) को एक पत्र लिखकर राष्ट्रपति भवन(Rashtrapati Bhavan) में स्थित मुगल गार्डन का नाम बदल कर पूर्व राष्ट्रपति मिसाइल मैन डाक्टर अब्दुल कलाम वाटिका(Abdul Kalam Vatika) के नाम पर रखने की मांग की है। निगम पार्षद भगत सिंह टोकस ने राष्ट्रपति को भेजे अपने पत्र में लिखा है, मुगल काल में मुगलों द्वारा पूरे भारत में जिस प्रकार से आक्रमण किए गए और देश को लूटा था। वहीं देशभर में मुगल आक्रांताओं के नाम से लोगों में रोष हैं। जिन्होंने भारत की संस्कृति को खत्म करने का प्रयास किया उनको प्रचारित न किया जाए।

rastrapati bhavan, mughal garden राष्ट्रपति भवन स्थित मुगल गार्डन (Wikimedia Commons)

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कोविड के खिलाफ नियमित टीकाकरण के अलावा दुनिया भर में अन्य प्रकार की दवाईयों पर अनेक संस्थायें रिसर्च कर रही हैं जो मानव शरीर पर इस विषाणु के आक्रमण को रोक सकती है। इसी क्रम में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मंडी के शोधकर्ताओं को एक बड़ी सफलता मिली है। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मंडी के शोधकर्ताओं ने एक हिमालयी पौधे की पंखुड़ियों में फाइटोकेमिकल्स की खोज की है जो कोविड संक्रमण के इलाज में करगर साबित हो सकती है।

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मंडी में स्कूल ऑफ बेसिक साइंस के बायोएक्स सेंटर के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. श्याम कुमार मसाकापल्ली के तर्ज पर एक वक्तव्य में कहा की, अलग अलग तरह के चिकित्सीय एजेंटों में पौधों से प्राप्त रसायनों फाइटोकेमिकल्स को उनकी क्रियात्मक गतिविधि और कम विषाक्तता के कारण विशेष रूप से आशाजनक माना जाता है। टीम ने हिमालयी बुरांश पौधे की पंखुड़ियों में इन रसायनों का पता लगया है। पौधे का वैज्ञानिक नाम रोडोडेंड्रोन अर्बोरियम है जिसे वहाँ के स्थानीय लोग अलग अलग तरह की बीमारियों में इसका इस्तेमाल करते हैं।

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