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खेल

रियो ओलंपिक की तुलना में भारतीय हॉकी टीम की तैयारी बेहतर : रघुनाथ

भारतीय हॉकी टीम के पूर्व ड्रैग फ्लिकर वीआर रघुनाथ का मानना है कि मौजूदा भारतीय टीम की तैयारी 2016 रियो ओलंपिक की तुलना में बेहतर है।

इंडियन हॉकी टीम अबकी बार अच्छी स्थिति में।(आईएएनएस)

भारतीय हॉकी टीम के पूर्व ड्रैग फ्लिकर वीआर रघुनाथ का मानना है कि मौजूदा भारतीय टीम की तैयारी 2016 रियो ओलंपिक की तुलना में बेहतर है। रघुनाथ ने कहा, “मेरा मानना है कि मौजूदा भारतीय हॉकी बेहतर तरीके से ओलंपिक की तैयारी कर रही है। एक ही बैच के खिलाड़ी सात-आठ साल से हैं और यूरोपियन खिलाड़ियों के साथ संपर्क में है। उम्मीद है कि टीम रियो के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन करेगी।”

उन्होंने कहा, “ओलंपिक में जरूरी है कि आप किस तरह लय हासिल कर रहे हैं। मैंने देखा है कि टीम सामान्य तरीके से फ्री माइंड होकर खेलती है। मैंने खिलाड़ियों से कहा कि अवसर के बारे में बहुत अधिक नहीं सोचें।”


रघुनाथ ने कहा, “खिलाड़ी लगभग एक ही आयु वर्ग के हैं और लंबे समय से क्वारंटीन में एक साथ रह रहे हैं जिस कारण वे एक दूसरे को जानने लगे हैं। रूपिंदर और मनप्रीत जैसे खिलाड़ी पिछले सीजन में भी थे।”

रघुनाथ ने टीम के मौजूदा उपकप्तान हरमनप्रीत सिंह की सराहना की।

यह भी पढ़ें: ‘भारत के खिलाफ खेलना अपने बॉस के खिलाफ गोल्फ खेलने जैसा’

उन्होंने कहा, “अंडर-21 विश्व कप जीतने के बाद हरमनप्रीत तुरंत टीम में आए। कोच ने कहा था कि इसे टीम में रखना है और कम से कम 30-40 मैच तक संभालना है जिससे इन्हें इस बात का अंदाजा हो कि अंतरराष्ट्रीय हॉकी क्या है। हमने हरमनप्रीत का मार्गदर्शन किया और उन्हें जल्द ही चीजों को समझा।”

रघुनाथ ने कहा, “हमें तीन-चार महीनों में नतीजे देखने को मिले और उन्होंने स्कोर करना शुरू कर दिया। रूपिंदर और मैं हरमनप्रीत को खिलाड़ी नहीं बल्कि भाई की तरह देखते थे। हमारे कोच भी इस तरह रहते थे जिससे जूनियर खिलाड़ी सीनियर खिलाड़ी के साथ आराम से रहे। मेरा मानना है कि हरमनप्रीत अभी आठ से 10 साल तक अंतरराष्ट्रीय हॉकी खेल सकते हैं।”(आईएएनएस-SHM)

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शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) सम्मेलन को संम्बोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चरमपंथ और कट्टरपंथ की चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए एससीओ द्वारा एक खाका विकसित करने का आह्वान किया। 21वीं बैठक को संम्बोधित करते हुए उन्होंने कहा कि मध्य एशिया में अमन के लिए सबसे बड़ी चुनौती है विश्वास की कमी।

इसके अलावा, पीएम मोदी ने विश्व के नेताओं से यह सुनिश्चित करने का आह्वान किया कि मानवीय सहायता अफगानिस्तान तक निर्बाध रूप से पहुंचे। मोदी ने कहा, "अगर हम इतिहास में पीछे मुड़कर देखें, तो हम पाएंगे कि मध्य एशिया उदारवादी, प्रगतिशील संस्कृतियों और मूल्यों का केंद्र रहा है।
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केबीसी यानि कोन बनेगा करोड़पति भारतीय टेलिविज़न का एक लोकप्रिय धारावाहिक है । यहा पर अक्सर ही कई सेलिब्रिटीज आते रहते है । इसी बीच केबीसी के मंच पर भारत की हॉकी टीम के गोलकीपर पीआर श्रीजेश पहुंचे । केबीसी 13' पर मेजबान अमिताभ बच्चन के साथ बातचीत करते हुए, भारत के गोलकीपर पीआर श्रीजेश 41 साल बाद हॉकी में ओलंपिक पदक जीतने को लेकर बात की। श्रीजेश ने साझा किया कि "हम इस पदक के लिए 41 साल से इंतजार कर रहे थे। साथ उन्होंने ये भी कहा की वो व्यक्तिगत रूप से, मैं 21 साल से हॉकी खेल रहे है। आगे श्रीजेश बोले मैंने साल 2000 में हॉकी खेलना शुरू किया था और तब से, मैं यह सुनकर बड़ा हुआ हूं कि हॉकी में बड़ा मुकाम हासिल किया, हॉकी में 8 गोल्ड मेडल मिले। इसलिए, हमने खेल के पीछे के इतिहास के कारण खेलना शुरू किया था। उसके बाद हॉकी एस्ट्रो टर्फ पर खेली गई, खेल बदल दिया गया और फिर हमारा पतन शुरू हो गया।"

जब अभिनेता अमिताभ बच्चन ने एस्ट्रो टर्फ के बारे में अधिक पूछा, तो उन्होंने खुल के बताया।"इस पर अमिताभ बच्चन ने एस्ट्रो टर्फ पर खेलते समय कठिनाई के स्तर को समझने की कोशिश की। इसे समझाते हुए श्रीजेश कहते हैं कि "हां, बहुत कुछ, क्योंकि एस्ट्रो टर्फ एक कृत्रिम घास है जिसमें हम पानी डालते हैं और खेलते हैं। प्राकृतिक घास पर खेलना खेल शैली से बिल्कुल अलग है। "

इस घास के बारे में आगे कहते हुए श्रीजेश ने यह भी कहा कि "पहले सभी खिलाड़ी केवल घास के मैदान पर खेलते थे, उस पर प्रशिक्षण लेते थे और यहां तक कि घास के मैदान पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी खेलते थे। आजकल यह हो गया है कि बच्चे घास के मैदान पर खेलना शुरू करते हैं और बाद में एस्ट्रो टर्फ पर हॉकी खेलनी पड़ती है। जिसके कारण बहुत समय लगता है। यहा पर एस्ट्रो टर्फ पर खेलने के लिए एक अलग तरह का प्रशिक्षण होता है, साथ ही इस्तेमाल की जाने वाली हॉकी स्टिक भी अलग होती है।" सब कुछ बदल जाता है ।

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