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साइबर, अंतरिक्ष खतरों के लिए उन्नत तकनीकी प्रतिक्रियाओं की आवश्यकता है : राष्ट्रपति कोविंद

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने बुधवार को कहा कि साइबर जगत और अंतरिक्ष में उभरते खतरों के लिए अत्याधुनिक तकनीकी प्रतिक्रिया की जरूरत है।

अंतरिक्ष सेंटर स्पेस सांकेतिक (PIXABAY)

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने बुधवार को कहा कि साइबर जगत और अंतरिक्ष में उभरते खतरों के लिए अत्याधुनिक तकनीकी प्रतिक्रिया की जरूरत है। रक्षा सेवा स्टाफ कॉलेज, वेलिंगटन(तमिलनाडु) में अपने संबोधन के दौरान, राष्ट्रपति ने कहा, “नॉन-स्टेट एक्टर्स द्वारा उन्नत प्रौद्योगिकी का उपयोग भी उन्नत प्रतिक्रिया की मांग करता है।”

उन्होंने आगे कहा कि जलवायु परिवर्तन जैसे मुद्दों का सुरक्षा तैयारियों पर असर पड़ सकता है।


उन्होंने इस पाठ्यक्रम में भाग ले रहे अन्य देशों के 30 सहित युवा छात्र अधिकारियों से कहा, “ऐसे सभी मुद्दे राष्ट्र की सुरक्षा गणना को प्रभावित करते हैं। आपको उनके निहितार्थों को समझना होगा ताकि आप उनसे निपटने के लिए बेहतर तरीके से तैयार हों।”

उन्होंने कहा कि देश के उच्च रक्षा संगठन में महत्वपूर्ण बदलाव किए जा रहे हैं और रक्षा क्षेत्र में स्वदेशीकरण और आत्मनिर्भरता को भी प्रोत्साहन दिया जा रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा, “ये पहल सशस्त्र बलों के भविष्य को तैयार करने की दृष्टि से की गई है।”

उन्होंने युवा छात्र अधिकारियों से कहा कि जैसे-जैसे वे विकास की सीढ़ी पर चढ़ेंगे, उन्हें एकल सेवा दक्षताओं के स्तर से बहु-क्षेत्रीय चुनौतियों तक स्नातक करना होगा।

उन्होंने कहा, “इसके लिए संयुक्त और बहु-डोमेन संचालन की अधिक समझ की आवश्यकता है।”

उन्होंने भारतीय सशस्त्र बलों की भी प्रशंसा करते हुए कहा कि उन्होंने अथक प्रयासों और महान बलिदानों से नागरिकों का सम्मान अर्जित किया है।

राष्ट्रपति ने कहा, “उन्होंने युद्ध और शांति के समय में राष्ट्र के लिए अमूल्य सेवाएं प्रदान की हैं। उन्होंने आंतरिक और बाहरी सुरक्षा चुनौतियों का सामना करते हुए और प्राकृतिक आपदाओं के समय में समर्पण और साहस के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन किया है।”

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद । (Social media )

राष्ट्रपति ने सीमाओं पर स्थिति के साथ-साथ कोविड-19 महामारी से निपटने में सशस्त्र बलों के पुरुषों और महिलाओं द्वारा प्रदर्शित उत्कृष्ट धैर्य और ढृढ़ संकल्प की सराहना की।

उन्होंने कारगिल विजय दिवस पर कश्मीर घाटी की अपनी हालिया यात्रा के बारे में भी बात की जहां उन्होंने अधिकारियों और सैनिकों के साथ बातचीत की थी।

उन्होंने कहा, “उनके उच्च मनोबल और कर्तव्य के प्रति समर्पण को देखकर मुझे बहुत खुशी हुई। आप में से अधिकांश इन चुनौतियों से निपटने के लिए अग्रिम पंक्ति के योद्धाओं में से हैं।”

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कोविंद ने कहा कि भारत चुनौतीपूर्ण समय से गुजर रहा है, जो बदलावों से भरा है और राष्ट्रीय सुरक्षा और रक्षा की अवधारणाएं भी बदल रही हैं।

–(आईएएनएस-PS)

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बारे में बात करते हुए योगी ने तारीफ की (wikimedia commons )

हमारा देश भारत अनेकता में एकता वाला देश है । हमारे यंहा कई धर्म जाती के लोग एक साथ रहते है , जो इसे दुनिया में सबसे अलग श्रेणी में ला कर खड़ा करता है । योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं । उन्होंने एक बयान में कहा कि नई थ्योरी में पता चला है कि पूरे देश का डीएनए एक है। यहां आर्य-द्रविण का विवाद झूठा और बेबुनियाद रहा है। भारत का डीएनए एक है इसलिए भारत एक है। साथ ही उन्होंने कहा की दुनिया की तमाम जातियां अपने मूल में ही धीरे धीरे समाप्त होती जा रही हैं , जबकि हमारे भारत देश में फलफूल रही हैं। भारत ने ही पूरी दुनिया को वसुधैव कुटुंबकम का भाव दिया है इसलिए हमारा देश श्रेष्ठ है। आप को बता दे कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शनिवार को युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ की व राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ की पुण्यतिथि पर आयोजित एक श्रद्धांजलि समारोह का शुरुआत करने गये थे। आयोजन के पहले दिन मुख्यमंत्री ने कहा कि कोई भी ऐसा भारतीय नहीं होगा जिसे अपने पवित्र ग्रन्थों वेद, पुराण, उपनिषद, रामायण, महाभारत आदि की जानकारी न हो। हर भारतीय परम्परागत रूप से इन कथाओं ,कहनियोंको सुनते हुए, समझते हए और उनसे प्रेरित होते हुए आगे बढ़ता है।

साथ ही मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे यंहा के कोई भी वेद पुराण हो या ग्रंथ हो इनमे कही भी नहीं कहा गया की हम बहार से आये थे । हमारे ऐतिहासिक ग्रन्थों में जो आर्य शब्द है वह श्रेष्ठ के लिए और अनार्य शब्द का प्रयोग दुराचारी के लिए कहा गया है। मुख्यमंत्री योगी ने रामायण का उदाहरण भी दिया योगी ने कहा कि रामायण में माता सीता ने प्रभु श्रीराम की आर्यपुत्र कहकर संबोधित किया है। लेकिन , कुटिल अंग्रेजों ने और कई वामपंथी इतिहासकारों के माध्यम से हमारे इतिहास की किताबो में यह लिखवाया गया कि आर्य बाहर से आए थे । ऐसे ज्ञान से नागरिकों को सच केसे मालूम चलेगा और ईसका परिणाम देश लंबे समय से भुगतता रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बारे में बात करते हुए योगी ने कहा कि , आज इसी वजह से मोदी जी को एक भारत-श्रेष्ठ भारत का आह्वान करना पड़ा। आज मोदी जी के विरोध के पीछे एक ही बात है। साथ ही वो विपक्ष पर जम के बरसे। उन्होंने मोदी जी के बारे में आगे कहा कि उनके नेतृत्व में अयोध्या में पांच सौ वर्ष पुराने विवाद का समाधान हुआ है। यह विवाद खत्म होने से जिनके खाने-कमाने का जरिया बंद हो गया है तो उन्हें अच्छा कैसे लगेगा।

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अल्जाइमर रोग एक मानसिक विकार है। (unsplash)

ऑस्ट्रेलिया के शोधकर्ताओं ने एक अभूतपूर्व अध्ययन में 'ब्लड-टू-ब्रेन पाथवे' की पहचान की है जो अल्जाइमर रोग का कारण बन सकता है। कर्टिन विश्वविद्यालय जो कि ऑस्ट्रेलिया के पर्थ शहर में है, वहाँ माउस मॉडल पर परीक्षण किया गया था, इससे पता चला कि अल्जाइमर रोग का एक संभावित कारण विषाक्त प्रोटीन को ले जाने वाले वसा वाले कणों के रक्त से मस्तिष्क में रिसाव था।

कर्टिन हेल्थ इनोवेशन रिसर्च इंस्टीट्यूट के निदेशक प्रमुख जांचकर्ता प्रोफेसर जॉन मामो ने कहा "जबकि हम पहले जानते थे कि अल्जाइमर रोग से पीड़ित लोगों की पहचान विशेषता बीटा-एमिलॉयड नामक मस्तिष्क के भीतर जहरीले प्रोटीन जमा का प्रगतिशील संचय था, शोधकर्ताओं को यह नहीं पता था कि एमिलॉयड कहां से उत्पन्न हुआ, या यह मस्तिष्क में क्यों जमा हुआ," शोध से पता चलता है कि अल्जाइमर रोग से पीड़ित लोगों के दिमाग में जहरीले प्रोटीन बनते हैं, जो रक्त में वसा ले जाने वाले कणों से मस्तिष्क में रिसाव की संभावना रखते हैं। इसे लिपोप्रोटीन कहा जाता है।

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Wikimedia Commons)

शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) सम्मेलन को संम्बोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चरमपंथ और कट्टरपंथ की चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए एससीओ द्वारा एक खाका विकसित करने का आह्वान किया। 21वीं बैठक को संम्बोधित करते हुए उन्होंने कहा कि मध्य एशिया में अमन के लिए सबसे बड़ी चुनौती है विश्वास की कमी।

इसके अलावा, पीएम मोदी ने विश्व के नेताओं से यह सुनिश्चित करने का आह्वान किया कि मानवीय सहायता अफगानिस्तान तक निर्बाध रूप से पहुंचे। मोदी ने कहा, "अगर हम इतिहास में पीछे मुड़कर देखें, तो हम पाएंगे कि मध्य एशिया उदारवादी, प्रगतिशील संस्कृतियों और मूल्यों का केंद्र रहा है।
"भारत इन देशों के साथ अपनी कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है और हम मानते हैं कि भूमि से घिरे मध्य एशियाई देश भारत के विशाल बाजार से जुड़कर अत्यधिक लाभ उठा सकते हैं"

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