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देश

47 शिक्षक राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित

ऑनलाइन शिक्षा प्रणाली ने अभिभावकों के लिए शिक्षकों के साथ जुड़ना और बच्चों को सीखने के नए क्षेत्रों में रुचि जगाना अनिवार्य बना दिया है- राष्ट्रपति कोविंद

राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द ने ऑनलाइन कॉन्फ्रेंस के ज़रिये राष्ट्रिय पुरस्कार का वितरण किया(PIB)

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने शिक्षक दिवस के मौके पर पहली बार वर्चुअल तरीके से आयोजित पुरस्कार समारोह में देशभर के 47 शिक्षकों को राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया। राष्ट्रीय पुरस्कार विजेताओं में लगभग 40 प्रतिशत महिलाएं हैं। राष्ट्रपति ने शिक्षक के रूप में महिलाओं की निभाई गई भूमिका की सराहना की। राष्ट्रपति ने पुरस्कार विजेताओं को बधाई दी। पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एस. राधाकृष्णन को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए राष्ट्रपति कोविंद ने कहा, “वह एक दूरदर्शी, राजनेता और इससे भी बढ़कर एक असाधारण शिक्षक थे। शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाने वाला उनका जन्मोत्सव राष्ट्र के विकास में उनके योगदान का महज प्रतीक है और पूरे शिक्षक समुदाय के लिए सम्मान की निशानी भी है।”

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उन्होंने आगे कहा कि, “शिक्षक राष्ट्र के सच्चे निर्माता हैं, जो बच्चों के चरित्र और ज्ञान के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।”

राष्ट्रपति कोविंद ने कोविड महामारी के चुनौतीपूर्ण समय में डिजिटल प्रौद्योगिकी के महत्व पर जोर देते हुए कहा, “हमारे शिक्षक इस तकनीक का सहारा बच्चों तक अपनी पहुंच बनाने में ले रहे हैं। सभी शिक्षकों के लिए यह महत्वपूर्ण है कि वे डिजिटल तकनीक के क्षेत्र में अपने कौशल को बढ़ाएं और इसे अपडेट करें ताकि शिक्षा को और अधिक प्रभावी बनाया जा सके और छात्रों को भी नई तकनीक में निपुण बनाया जा सके।”

राष्ट्रपति कोविंद ने कहा, “ऑनलाइन शिक्षा प्रणाली ने अभिभावकों के लिए शिक्षकों के साथ जुड़ना और बच्चों को सीखने के नए क्षेत्रों में रुचि जगाना अनिवार्य बना दिया है। समाज में डिजिटल सुविधा की गैर-बराबरी की ओर इशारा करते हुए उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि इस दिशा में ठोस कदम उठाए जाने चाहिए ताकि आदिवासी और दूर-दराज के क्षेत्रों के बच्चे भी लाभान्वित हो सकें।”

राष्ट्रपति कोविंद ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के बारे में बात करते हुए कहा, “शुरू की गई नई शिक्षा नीति हमारे बच्चों को भविष्य की जरूरतों के लिए तैयार करने का एक प्रयास है और इसे विभिन्न हितधारकों की राय पर विचार-विमर्श के बाद तैयार किया गया है। अब इस शिक्षा नीति को सफल और फलदायी बनाने की केंद्रीय भूमिका में शिक्षक ही हैं।”

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राष्ट्रपति कोविंद ने कहा कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लागू करने के लिए शिक्षकों को सक्षम बनाने हेतु सभी प्रयास किए जा रहे हैं और शिक्षा क्षेत्र के लिए अब केवल सबसे अधिक सक्षम लोगों को ही चुना जाएगा। इस अवसर पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक भी मौजूद रहे।(आईएएनएस)

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बांके बिहारी मंदिर में होली

कहा जाता है कि अगर किसी इंसान को सुकून चाहिए होता है तो उसे वृंदावन या मथुरा की गलियों में जाना चाहिए, क्योंकि इन्ही गलियों में खेलते हुए कृष्ण जी का बचपन बीता हैं। वृंदावन हो या मथुरा यहां हर दूसरा व्यक्ति कृष्ण भक्ति में लीन नज़र आता है। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता की वह हिंदुस्तानी है या कहीं और से आया है। हर कोई कृष्ण की महिमा में डूबा हुआ होता है। वैसे तो वृंदावन में कई मंदिर है जहां हर रोज हज़ारों की संख्या में भक्त आते हैं और अपनी हाजिरी लगवाते हैं, लेकिन बांके बिहारी मंदिर की बात अलग है। यहां भी भक्तों का मेला लगा रहता है, पर हर किसी को कुछ बातें मालूम नहीं है। ऐसे ही कुछ तथ्यों के बारे में इस आर्टिकल में बताया गया है।

1) बांके बिहारी मंदिर की स्थापना स्वामी श्री हरिदास जी ने की थी। वह श्री कृष्ण के भक्त थे और महान गायक तानसेन के गुरु थे। वह अपने गीत से श्री कृष्ण को प्रसन्न करने की कोशिश किया करते थे। ऐसा कहा जाता है कि श्री हरिदास जी की भक्ति से प्रसन्न हो श्री कृष्ण ने दर्शन दिए थे।

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(instagram , virat kohali)

भारतीय क्रिकेट टीमके कप्तान विराट कोहली और अनुष्का

भारतीय क्रिकेट टीमके कप्तान विराट कोहली और उनके फाउंडेशन ने यहां मड, मलाड में आवारा पशुओं के लिए एक ट्रॉमा और रिहेब सेंटर का उद्घाटन किया है। इसके पहले इस साल की शुरूआत में, भारतीय कप्तान कोहली ने कहा था कि वह मुंबई में दो पशु देखभाल सुविधाएं स्थापित कर रहे हैं।
कोहली ने अपनी पत्नी अनुष्का शर्मा को शहर में आवारा जानवरों के सामने आने वाली कठिनाइयों को देखने का श्रेय दिया।

अभिनेत्री अनुष्का ने कई मौकों पर जानवरों के कल्याण और उनके अधिकारों के प्रति अपना समर्थन दिया है। अनुष्का के जानवरों के प्रति दीवानगी से प्रेरित होकर कोहली अपने फाउंडेशन के जरिए आवारा जानवरों की मदद करने के मौके तलाश रहे हैं।

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भीड़ में चलते लोग।

मौजूदा समय में विश्व की जनसंख्या 7 अरब से भी ज्यादा है। इस जनसंख्या को यहां तक पहुंचने में कई सदियां लग गई है। समस्त विश्व को 1 अरब से 2 अरब तक की आबादी होने में 100 सालों का समय लगा था। लेकिन 2 अरब से 3 अरब होने में मात्र 30 साल लगे, वहीं 3 से 4 अरब होने में 15 साल लगे थे। उसके बाद से यह अंतर और कम हो गया। औद्योगिक क्रांति के बाद अठारहवीं शताब्दी में विश्व जनसंख्या में विस्फोट हुआ था। तकनिकी प्रगति की वजह से मृत्यु दर में गिरावट आई जो कि जनसंख्या विस्फोट का एक बहुत बड़ा कारण बना। भारत में भी जनसंख्या विस्फोट देखा गया था।

1951 में भारत की जनसंख्या मात्र 36.1 करोड़ थी जो 2011 की जनगणना में 121.02 करोड़ हो गई। और अब यह लगभग 135 करोड़ के ऊपर है। अगर किसी क्षेत्र की जनसंख्या बढ़ती है तो उसका मतलब है कि वहाँ का मृत्यु दर कम है और जन्म दर ज्यादा। यह दर्शाता है कि उस जगह पर चिकित्सकीय सुविधाएं अच्छी है। लेकिन बढ़ती जनसंख्या देश के लिए मुसीबत का सबब भी बन सकती है, क्योंकि जनसंख्या में वृद्धि हुई है किन्तु साधनों में नहीं। भारत के साथ भी यही समस्या है। लगातार जनसंख्या बढ़ने से कई जगहों पर साधनों की कमी महसूस होने लगी है।

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