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देश

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने गोवा में लागू कॉमन सिविल कोड को बताया गौरव का विषय

यहां के लोगों ने, समान नागरिक संहिता को अपनाया है। ऐसा करने से, यहां की सांस्कृतिक विविधता को बढ़ावा मिला है: राष्ट्रपति कोविंद

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद।(PIB)

By: नवनीत मिश्र

पुर्तगालियों के चंगुल से गोवा को मुक्ति मिलने के 60 साल पूरे होने पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने यहां शनिवार को आयोजित गोवा लिबरेशन डे समारोह में हिस्सा लेते हुए राज्य में लागू समान नागरिक संहिता की सराहना करते हुए इसे गौरव का विषय बताया है। उन्होंने कहा कि यहां के लोगों ने, समान नागरिक संहिता को अपनाया है। ऐसा करने से, यहां की सांस्कृतिक विविधता को बढ़ावा मिला है। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का बयान ऐसे समय आया है, जब पूरे देश में कॉमन सिविल कोड लागू करने की मांग उठ रही है।


राष्ट्रपति ने गोवा मुक्ति की लड़ाई को लेकर कहा, “आज का दिन, गोवा के लिए ही नहीं बल्कि पूरे भारत के लिए विशेष रूप से स्मरणीय है। लगभग 450 वर्ष के औपनिवेशिक शासन के बाद 1961 में आज के ही दिन, गोवा को विदेशी शासन से मुक्त कराया गया था। आप सभी के पूर्वजों ने, आजादी की मशाल को बुझने नहीं दी। इसे जलाए रखने के लिए, अनेक स्वाधीनता सेनानियों ने अपना जीवन बलिदान कर दिया।”

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने गोवा के लोगों को मेहनती बताते हुए कहा, “आज, गोवा जब अपनी आजादी के 60वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है तो यह देखकर गर्व होता है कि प्रति व्यक्ति आय के मामले में यह राज्य पहले स्थान पर है। इसका श्रेय गोवा के मेहनती लोगों, जन-प्रतिनिधियों, जन-सेवकों तथा उद्योग क्षेत्र को जाता है।”

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने आत्मनिर्भर भारत की तर्ज पर गोवा में मुख्यमंत्री डॉ. प्रमोद सावंत की ओर से संचालित स्वयंपूर्ण गोवा पहल की सराहना की।”

गोवा के मुख्यमंत्री डॉ. प्रमोद सावंत।(PIB)

उन्होंने कहा, “डॉ. प्रमोद सावंत, अपने पूर्ववर्ती और आदर्श कर्मयोगी स्वर्गीय श्री मनोहर पर्रिकर की समृद्ध विरासत को सच्चे अर्थो में आगे बढ़ा रहे हैं। आज जब पूरा देश, ‘आत्मनिर्भर भारत’ के मंत्र पर चलते हुए स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए आगे बढ़ रहा है, तब गोवा ने मुख्यमंत्री डॉ. प्रमोद सावंत के गतिशील नेतृत्व में ‘आत्मनिर्भर भारत, स्वयंपूर्ण गोवा’ की सराहनीय पहल शुरू की है।”

यह भी पढ़ें: प्रधानमंत्री मोदी बोले, हौसला और उत्साह बढ़ाने वाले हैं आज के आर्थिक संकेतक

राष्ट्रपति ने गोवा को मुक्त कराने के लिए आरएसएस, आजाद गोमांतक दल, गोवा विमोचन समिति, गोवा मुक्ति सेना सहित सभी संगठनों की एकजुटता और राममनोहर लोहिया के प्रयासों को भी याद किया। उन्होंने गोवा के लोगों की अतिथि भावना की भी सराहना करते हुए कहा कि गोवा की 160 किलोमीटर लंबी तट-रेखा पर, दुनिया के कुछ सबसे खूबसूरत समुद्र-तट मौजूद हैं। गोवा की प्राकृतिक सुषमा अनूठी है और यहां के लोग ‘अतिथिदेवो भव’ की परंपरा के सच्चे प्रतिनिधि हैं।

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कोरोना काल में गोवा की सरकार के कार्यो की तारीफ करते हुए कहा कि राज्य वित्तपोषित स्वास्थ्य बीमा योजना और सार्वजनिक स्वास्थ्य के मजबूत बुनियादी ढांचे के कारण, महामारी के दौरान, गोवा की सरकार, लोगों की समुचित देखभाल करने में सक्षम रही है।(आईएएनएस)

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यूनेस्को को पूर्व पेंटागन अधिकारी, माइकल रुबिन की फटकार (Wikimedia Commons)

माइकल रुबिन, जो एक पूर्व पेंटागन सलाहकार रह चुके हैं, का मानना हैं कि यूनेस्को को न केवल अफगानिस्तान, बल्कि पाकिस्तान को भी अपने संस्था से बाहर कर देना चाहिए क्योंकि दोनों ही देश यूनेस्को की सहायता के योग्य नहीं है। उनका यह भी कहना है कि चीन भी इसी काबिल है। तीनों वर्तमान में यूनेस्को के कार्यपालक समिति में हैं, जबकि तीनों इसके बिल्कुल भी योग्य नहीं है। रुबिन, वाशिंगटन एक्जामिनर में लिखते हैं कि, "सांस्कृतिक विरासत की रक्षा करने के बजाय, यूनेस्को के भ्रष्टाचार ने इसे विनाश का उत्प्रेरक बना दिया है। अफगानिस्तान में, दुनिया को तालिबान को जिम्मेदार ठहराना चाहिए"।

रुबिन आगे कहते हैं कि किस तरह अफगानिस्तान में तालिबान, अफगानिस्तान की सांस्कृतिक विरासत को मिटाने के लिए व्यवस्थित रूप से प्रयास कर रहा है। वे पाकिस्तानी अधिकारियों के इशारे पर ऐसा करते हैं, जो पश्तून राष्ट्रवाद से डरते हैं और विभिन्न अफगान राजवंशों की विरासत के साथ-साथ इसके इतिहास की गहराई को मिटाना चाहते हैं। अफगानी विरासत को खत्म करके, पाकिस्तान अपनी भविष्य की भूमि हथियाने को सही ठहरा सकता है ।

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एप्पल वॉच,सांकेतिक चित्र (Pixabay)

एक नए अध्ययन से जानकारी समाने आया है कि एप्पल वॉच सीरीज 6 'नियंत्रित परिस्थितियों में फेफड़ों की बीमारियों के रोगियों में हृदय गति और ऑक्सीजन संतृप्ति (एसपीओ2) प्राप्त करने का एक विश्वसनीय तरीका है।'

जर्नल साइंटिफिक रिपोर्ट में प्रकाशित अध्ययन ने 9टू5मैक की रिपोर्ट 'एप्पल वॉच डिवाइस कमर्शियल ऑक्सीमीटर के बीच मजबूत सकारात्मक सहसंबंध' देखा गया है।

ऐप्पल वॉच या वाणिज्यिक ऑक्सीमीटर उपकरणों में त्वचा के रंग, कलाई की परिधि, कलाई के बालों की उपस्थिति और एसपीओ 2 के लिए तामचीनी कील और हृदय गति माप के मूल्यांकन में कोई सांख्यिकीय अंतर नहीं था।

साओ पाउलो विश्वविद्यालय की ओर से अध्ययन एक आउट पेशेंट न्यूमोलॉजी क्लिनिक से क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज और इंटरस्टिशियल लंग डिजीज के 100 रोगियों के साथ किया गया।

इसने ऐप्पल वॉच सीरीज 6 के साथ एसपीओ 2 और हृदय गति डेटा एकत्र किया और उनकी तुलना दो वाणिज्यिक पल्स ऑक्सीमीटर से की।

परीक्षण स्वस्थ व्यक्तियों, इंटरस्टीशियल लंग डिजीज और क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज वाले लोगों के साथ किए गए थे।

oximeter, corona virus, covid 19 कोरोना काल में ऑक्सीमीटर का सबसे अधिक उपयोग किया गया है।(Pixabay)

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बिहार के मुख्यमंत्री नितीश कुमार। (Twitter, Nitish Kumar)

जातीय जनगणना को लेकर बिहार में सत्ताधारी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के दो बडे दल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और जनता दल (युनाइटेड) अब सीधे तौर पर आमने-सामने नजर आने लगे हैं। केंद्र की भाजपा नीत राजग सरकार जहां जाति आधारित जनगणना कराने से इंकार कर रही है वहीं जदयू के नेता नीतीश कुमार इस मामले को लेकर विपक्षी दल राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के साथ मुखर हैं। ऐसे में कयास लगाया जाने लगा है कि क्या फिर से बिहार की सियासी समीकण बदलेंगे। हालांकि इस मुद्दे को लेकर कोई भी नेता अब तक खुलकर बात नहीं कर रही है।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने दिल्ली में रविवार को स्पष्ट कर चुके हैं कि जाति जनगणना देश के लिए जरूरी है। उन्होंने दिल्ली में कहा कि केंद्र सरकार को जातिगत जनगणना करानी चाहिए। इसके कई फायदे हैं।

उन्होंने कहा कि आजादी के पहले जनगणना हुई थी, आजादी के बाद नहीं हुई। जातीय जनगणना होगी तभी लोगों के बारे में सही जानकारी होगी। तब पता चलेगा कि जो पीछे है, उसे आगे कैसे किया जाए। जातीय के साथ उपजातीय जनगणना भी कराई जाए। उन्होंने यह भी कहा कि इसको लेकर एक बार फिर राज्य में सभी दलों के साथ बैठक कर आगे का निर्णय लेंगे। नीतीश के इस बयान के बाद तय है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जातिगत जनगणना के मामले में पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। इधर, भाजपा के नेता इसमें व्यवहारिक दिक्कत बता रहे हैं।

बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री और सांसद सुशील कुमार मोदी कहते हैं कि तकनीकी और व्यवहारिक तौर पर केंद्र सरकार के लिए जातीय जनगणना कराना संभव नहीं है। इस बाबत केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा देकर अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार अगर चाहे तो वे जातीय जनगणना कराने के लिए स्वतंत्र है।


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