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ग्लोबल इनोवेशन रैंकिंग में दुनिया के टॉप 50 देशों में पहुंचा भारत : मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से नेशनल मेट्रोलॉजी कॉन्क्लेव का उद्धाटन करते हुए जहां नेशनल अटॉमिक टाइमस्केल और भारतीय निर्देशक देश को समर्पित किया, वहीं नेशनल एनवायरनमेंटल स्टैंटर्डस लेबोरेट्री की आधारशिला भी रखी। इस मौके पर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आज भारत ग्लोबल इनोवेशन रैंकिंग में दुनिया के टॉप

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से नेशनल मेट्रोलॉजी कॉन्क्लेव का उद्धाटन करते हुए जहां नेशनल अटॉमिक टाइमस्केल और भारतीय निर्देशक देश को समर्पित किया, वहीं नेशनल एनवायरनमेंटल स्टैंटर्डस लेबोरेट्री की आधारशिला भी रखी। इस मौके पर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आज भारत ग्लोबल इनोवेशन रैंकिंग में दुनिया के टॉप 50 देशों में पहुंच गया है। देश में आज बेसिक रिसर्च पर भी जोर दिया जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन के दौरान कहा, हमारे देश में सर्विसेज की क्वालिटी हो, चाहे सरकारी सेक्टर हो या प्राइवेट। प्रोटक्ट्स की क्वालिटी हो, चाहे सरकारी सेक्टर में हो या प्राइवेट। हमारे क्वालिटी स्टैंडर्ड ये तय करेंगे कि दुनिया में भारत और भारत के प्रोडक्ट्स की ताकत कितनी बढ़े।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि देश 2022 में अपनी स्वतंत्रता के 75 वर्ष पूरे कर रहा है, 2047 में हमारी आजादी के 100 वर्ष पूर्ण होंगे। हमें आत्मनिर्भर भारत के नए संकल्पों को ध्यान में रखते हुए, नए मानकों, नए पैमानों, नई स्टैंडर्डस और न्यू बेंचमार्कस स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ना ही है।


प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आज भारत दुनिया के उन देशों में है जिनके पास अपने नेविगेशन सिस्टम है। आज इसी ओर एक और कदम बढ़ा है। आज जिस भारतीय निर्देशक का लोकार्पण किया गया है। ये हमारे उद्योग जगत को क्वालिटी प्रोडक्ट्स बनाने के लिए प्रोत्साहित करेगा।

यह भी पढ़ें: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि आज के स्टार्टअप्स, कल के मल्टीनेशनल्स हैं

प्रधानमंत्री मोदी ने सरकार की उपलब्धियां बताते हुए कहा, आज का भारत पर्यावरण की दिशा में दुनिया का नेतृत्व करने की दिशा में बढ़ा रहा है। लेकिन एयर क्वालिटी और इमिशन की मापने की तकनीक से लेकर टूल्स तक हम दूसरों पर निर्भर रहे हैं। आज इसमें भी आत्मनिर्भरता के लिए हमने बड़ा कदम उठाया है।(आईएएनएस)

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इसमें तीन व्यक्ति शामिल थे जिन्होंने वायसराय की कार्यकारी परिषद के सदस्य के रूप में कार्य किया। इनमें जो लोग शामिल थे उनमें नलिनी रंजन सरकार, देशबंधु चित्तरंजन दास की अनुचर और 1933 फिक्की(FICCI) की अध्यक्ष, आईसीएस अधिकारी से टाटा स्टील के कार्यकारी अधिकारी बने अर्देशिर दलाल, जो भारत के विभाजन के अपने कट्टर विरोध के लिए बेहतर जाने जाते हैं, और सर जोगेंद्र सिंह, एक संपादक, लेखक और पटियाला के पूर्व प्रधान मंत्री, जिन्होंने पंजाब में मशीनीकृत खेती की शुरूआत की।

बॉम्बे प्लान के लेखक, भारत के आर्थिक विकास के लिए विजन दस्तावेज उद्योगपति जे.आर.डी. टाटा(JRD Tata), जीडी बिड़ला(GD Birla) और सर पुरुषोत्तमदास ठाकुरदास(Sir Purushottamdas Thakurdas), सर अर्देशिर(Sir Ardeshir), वायसराय की कार्यकारी परिषद के योजना और विकास के सदस्य के रूप में, अमेरिकी सरकार को भारतीय वैज्ञानिकों को डॉक्टरेट फेलोशिप की पेशकश करने के लिए राजी किया ताकि वे नए स्थापित वैज्ञानिक परिषद और औद्योगिक अनुसंधान (सीएसआईआर) का नेतृत्व करने के लिए पर्याप्त योग्यता प्राप्त कर सकें।

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