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दूसरी लहर ने दिखाया कि वायरस हमारे सामने किस तरह की चुनौतियां पेश कर सकता है : पीएम मोदी

प्रधानमंत्री ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कोविड-19 फ्रंटलाइन वर्कर्स के लिए अनुकूलित क्रैश कोर्स प्रोग्राम के शुभारंभ पर बात की।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी।(PIB)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को कहा कि कोरोना की दूसरी लहर में हम लोगों ने देखा कि इस वायरस का बार-बार बदलता स्वरूप हमारे सामने किस तरह की चुनौतियां पेश कर सकता है और देश को इन चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार रहना होगा।

प्रधानमंत्री ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कोविड-19 फ्रंटलाइन वर्कर्स के लिए अनुकूलित क्रैश कोर्स प्रोग्राम के शुभारंभ पर बात की। ये प्रशिक्षण कार्यक्रम 26 राज्यों में फैले 111 केंद्रों पर आयोजित किए जाएंगे। इस पहल के तहत लगभग एक लाख फ्रंटलाइन वर्कर्स को प्रशिक्षित किया जाएगा। इस अवसर पर केंद्रीय कौशल विकास और उद्यमिता मंत्री महेंद्र नाथ पांडे सहित कई अन्य केंद्रीय मंत्री, राज्य मंत्री, विशेषज्ञ और अन्य हितधारक भी उपस्थित थे। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि यह लॉन्च कोरोनावायरस के खिलाफ लड़ाई में उठाया गया एक अगला महत्वपूर्ण कदम था। उन्होंने आगाह किया कि वायरस मौजूद है और म्यूटेशन के होने की भी संभावना है।


हमें यह भी समझना होगा कि,लापरवाही की बजाय बुद्धि और संयम से काम लिया जाए। (Pixabay)

प्रधानमंत्री ने कहा, “महामारी की दूसरी लहर ने इस तरह की चुनौतियों को हमारे सामने पेश किया है, जो हमारे सामने आगे आ सकते हैं। देश को इन चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार रहने की जरूरत है और एक लाख से अधिक अग्रिम पंक्ति के योद्धाओं को प्रशिक्षण देना उस दिशा में एक कदम है।” उन्होंने सभी को याद दिलाया कि महामारी ने हर देश, संस्था, समाज, परिवार और व्यक्ति की ताकत की परीक्षा ली है। इसी के साथ इसने हमें विज्ञान, सरकार, समाज, संस्था या व्यक्तियों के रूप में अपनी क्षमताओं का विस्तार करने के लिए भी सचेत किया है। उन्होंने कहा कि भारत ने इस चुनौती को स्वीकार किया और पीपीई किट, टेस्टिंग, कोविड केयर और उपचार से संबंधित अन्य चिकित्सकीय बुनियादी ढांचे की स्थिति इन प्रयासों की गवाही देती है।

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प्रधानमंत्री ने कहा, “इन सभी प्रयासों में कुशल जनशक्ति की भूमिका अहम है। इसके लिए और मौजूदा कोरोना योद्धाओं की मदद के लिए एक लाख युवाओं को प्रशिक्षित किया जा रहा है। यह प्रशिक्षण दो-तीन महीने में समाप्त हो जाना चाहिए।” उन्होंने सूचित किया कि देश के शीर्ष विशेषज्ञों ने शुक्रवार को शुरू किए गए इन छह पाठ्यक्रमों को राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की मांगों के अनुरूप डिजाइन किया है। होम केयर सपोर्ट, बेसिक केयर सपोर्ट, एडवांस केयर सपोर्ट, इमरजेंसी केयर सपोर्ट, सैंपल कलेक्शन सपोर्ट और मेडिकल इक्विपमेंट सपोर्ट जैसी छह अनुकूलित भूमिकाओं के बारे में कोविड योद्धाओं को प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसमें फ्रेश स्किलिंग के साथ-साथ उन लोगों का अपस्किलिंग भी शामिल होगा, जिनके पास इस प्रकार के काम की पहले से कुछ जानकारी है। यह अभियान स्वास्थ्य क्षेत्र के फ्रंटलाइन फोर्स को नई ऊर्जा देगा और युवाओं को रोजगार के अवसर भी प्रदान करेगा।(आईएएनएस-SHM)

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बारे में बात करते हुए योगी ने तारीफ की (wikimedia commons )

हमारा देश भारत अनेकता में एकता वाला देश है । हमारे यंहा कई धर्म जाती के लोग एक साथ रहते है , जो इसे दुनिया में सबसे अलग श्रेणी में ला कर खड़ा करता है । योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं । उन्होंने एक बयान में कहा कि नई थ्योरी में पता चला है कि पूरे देश का डीएनए एक है। यहां आर्य-द्रविण का विवाद झूठा और बेबुनियाद रहा है। भारत का डीएनए एक है इसलिए भारत एक है। साथ ही उन्होंने कहा की दुनिया की तमाम जातियां अपने मूल में ही धीरे धीरे समाप्त होती जा रही हैं , जबकि हमारे भारत देश में फलफूल रही हैं। भारत ने ही पूरी दुनिया को वसुधैव कुटुंबकम का भाव दिया है इसलिए हमारा देश श्रेष्ठ है। आप को बता दे कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शनिवार को युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ की व राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ की पुण्यतिथि पर आयोजित एक श्रद्धांजलि समारोह का शुरुआत करने गये थे। आयोजन के पहले दिन मुख्यमंत्री ने कहा कि कोई भी ऐसा भारतीय नहीं होगा जिसे अपने पवित्र ग्रन्थों वेद, पुराण, उपनिषद, रामायण, महाभारत आदि की जानकारी न हो। हर भारतीय परम्परागत रूप से इन कथाओं ,कहनियोंको सुनते हुए, समझते हए और उनसे प्रेरित होते हुए आगे बढ़ता है।

साथ ही मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे यंहा के कोई भी वेद पुराण हो या ग्रंथ हो इनमे कही भी नहीं कहा गया की हम बहार से आये थे । हमारे ऐतिहासिक ग्रन्थों में जो आर्य शब्द है वह श्रेष्ठ के लिए और अनार्य शब्द का प्रयोग दुराचारी के लिए कहा गया है। मुख्यमंत्री योगी ने रामायण का उदाहरण भी दिया योगी ने कहा कि रामायण में माता सीता ने प्रभु श्रीराम की आर्यपुत्र कहकर संबोधित किया है। लेकिन , कुटिल अंग्रेजों ने और कई वामपंथी इतिहासकारों के माध्यम से हमारे इतिहास की किताबो में यह लिखवाया गया कि आर्य बाहर से आए थे । ऐसे ज्ञान से नागरिकों को सच केसे मालूम चलेगा और ईसका परिणाम देश लंबे समय से भुगतता रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बारे में बात करते हुए योगी ने कहा कि , आज इसी वजह से मोदी जी को एक भारत-श्रेष्ठ भारत का आह्वान करना पड़ा। आज मोदी जी के विरोध के पीछे एक ही बात है। साथ ही वो विपक्ष पर जम के बरसे। उन्होंने मोदी जी के बारे में आगे कहा कि उनके नेतृत्व में अयोध्या में पांच सौ वर्ष पुराने विवाद का समाधान हुआ है। यह विवाद खत्म होने से जिनके खाने-कमाने का जरिया बंद हो गया है तो उन्हें अच्छा कैसे लगेगा।

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अल्जाइमर रोग एक मानसिक विकार है। (unsplash)

ऑस्ट्रेलिया के शोधकर्ताओं ने एक अभूतपूर्व अध्ययन में 'ब्लड-टू-ब्रेन पाथवे' की पहचान की है जो अल्जाइमर रोग का कारण बन सकता है। कर्टिन विश्वविद्यालय जो कि ऑस्ट्रेलिया के पर्थ शहर में है, वहाँ माउस मॉडल पर परीक्षण किया गया था, इससे पता चला कि अल्जाइमर रोग का एक संभावित कारण विषाक्त प्रोटीन को ले जाने वाले वसा वाले कणों के रक्त से मस्तिष्क में रिसाव था।

कर्टिन हेल्थ इनोवेशन रिसर्च इंस्टीट्यूट के निदेशक प्रमुख जांचकर्ता प्रोफेसर जॉन मामो ने कहा "जबकि हम पहले जानते थे कि अल्जाइमर रोग से पीड़ित लोगों की पहचान विशेषता बीटा-एमिलॉयड नामक मस्तिष्क के भीतर जहरीले प्रोटीन जमा का प्रगतिशील संचय था, शोधकर्ताओं को यह नहीं पता था कि एमिलॉयड कहां से उत्पन्न हुआ, या यह मस्तिष्क में क्यों जमा हुआ," शोध से पता चलता है कि अल्जाइमर रोग से पीड़ित लोगों के दिमाग में जहरीले प्रोटीन बनते हैं, जो रक्त में वसा ले जाने वाले कणों से मस्तिष्क में रिसाव की संभावना रखते हैं। इसे लिपोप्रोटीन कहा जाता है।

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Wikimedia Commons)

शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) सम्मेलन को संम्बोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चरमपंथ और कट्टरपंथ की चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए एससीओ द्वारा एक खाका विकसित करने का आह्वान किया। 21वीं बैठक को संम्बोधित करते हुए उन्होंने कहा कि मध्य एशिया में अमन के लिए सबसे बड़ी चुनौती है विश्वास की कमी।

इसके अलावा, पीएम मोदी ने विश्व के नेताओं से यह सुनिश्चित करने का आह्वान किया कि मानवीय सहायता अफगानिस्तान तक निर्बाध रूप से पहुंचे। मोदी ने कहा, "अगर हम इतिहास में पीछे मुड़कर देखें, तो हम पाएंगे कि मध्य एशिया उदारवादी, प्रगतिशील संस्कृतियों और मूल्यों का केंद्र रहा है।
"भारत इन देशों के साथ अपनी कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है और हम मानते हैं कि भूमि से घिरे मध्य एशियाई देश भारत के विशाल बाजार से जुड़कर अत्यधिक लाभ उठा सकते हैं"

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