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देश

बारिश के बीच सिंघु बॉर्डर पर प्रदर्शनकारियों ने उठाया कबड्डी का लुत्फ

सर्दी के मौसम में बारिश बीच आंदोलनरत किसानों ने रविवार को बच्चों की कबड्डी का लुत्फ उठाया। रुक-रुक कर बारिश हो रही बारिश के बीच प्रदर्शन स्थल सिंघु बॉर्डर पर बच्चों की अलग-अलग टीमें बनाकर कबड्डी मैच का आयोजन किया गया था। किसानों के आंदोलन में बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं भी शामिल हैं। आंदोलन में

सर्दी के मौसम में बारिश बीच आंदोलनरत किसानों ने रविवार को बच्चों की कबड्डी का लुत्फ उठाया। रुक-रुक कर बारिश हो रही बारिश के बीच प्रदर्शन स्थल सिंघु बॉर्डर पर बच्चों की अलग-अलग टीमें बनाकर कबड्डी मैच का आयोजन किया गया था। किसानों के आंदोलन में बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं भी शामिल हैं। आंदोलन में शामिल बच्चों ने रविवार को यहां रुक रुक कर हो रही बारिश के बीच कबड्डी मैच खेलकर सर्दी का आनंद लिया और प्रदर्शनकारियों का मनोरंजन किया।

देश की राजधानी दिल्ली की सीमाओं पर स्थित सिंघु बॉर्डर, टिकरी बॉर्डर और गाजीपुर बॉर्डर पर चले रहे किसानों के धरना-प्रदर्शन का आज 39वां दिन है, लेकिन प्रदर्शन में शामिल किसानों के जज्बे में कोई कमी नहीं है। प्रदर्शनकारी किसान केंद्र सरकार द्वारा लागू तीन कृषि कानूनों को वापस लेने और न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर फसलों की खरीद की कानूनी गारंटी की मांग कर रहे हैं। उनकी दो अन्य मांगों को सरकार ने बीते सप्ताह बुधवार को मान ली है, लेकिन किसान नेताओं का कहना है कि उनकी जो प्रमुख दो मांगें हैं वो अभी पूरी नहीं हुई हैं और जब तक ये दोनों मांगें पूरी नहीं होंगी, उनका आंदोलन जारी रहेगा।


यह भी पढ़ें : गेहूं, सरसों समेत तमाम रबी फसलों को बारिश से होगा फायदा

बारिश सिंघु बॉर्डर प्रदर्शन स्थल पर डटे किसान नेता अमरजीत सिंह अदोवाली कहते हैं कि सर्दी के सितम और बारिश के बीच किसानों के जज्बे में कोई कमी नहीं है। पंजाब के किसान नेता और भारतीय किसान यूनियन (लाखोवाल) के जनरल सेक्रेटरी हरिंदर सिंह लाखोवाल ने भी बताया कि कड़ाके की ठंड और बारिश के बावजूद किसान प्रदर्शन स्थल को छोड़ने को तैयार नहीं हैं, बल्कि प्रदर्शन में शामिल होने के लिए पंजाब से लगातार किसानों के समूह पहुंच रहे हैं।

कबड्डी खेल । ( Social media )

किसान केंद्र सरकार द्वारा लागू कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) कानून 2020, कृषक (सशक्तीकरण एवं संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा करार कानून 2020 और आवश्यक वस्तु (संशोधन) कानून 2020 के विरोध में 26 नवंबर से दिल्ली की सीमाओं पर डेरा डाले हुए हैं।

इस दौरान सरकार के साथ उनकी कई दौर की वार्ताएं हो चुकी हैं। बीते साल 2020 के आखिर में 30 दिसंबर को केंद्रीय मंत्रियों के साथ किसान संगठनों के नेताओं की हुई वार्ता में उनकी चार मांगों में से दो मांगें सरकार ने मान लीं और सोमवार को होने वाली वार्ता में दो अन्य मांगों पर चर्चा होगी। (आईएएनएस)

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पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई ने स्लीपर सेल्स के ज़रिये दिल्ली में लगवाई आईईडी- रिपोर्ट (Wikimedia Commons)

एक सूत्र ने कहा कि आरडीएक्स-आधारित इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (IED), जो 14 जनवरी को पूर्वी दिल्ली के गाजीपुर फूल बाजार में पाया गया था और उसमें "एबीसीडी स्विच" और एक प्रोग्राम करने योग्य टाइमर डिवाइस होने का संदेह था।

कश्मीर और अफगानिस्तान में सक्रिय जिहादी आतंकवादियों द्वारा लगाए गए आईईडी में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किए जाने वाले इन स्विच का पाकिस्तान(Pakistan) सबसे बड़ा निर्माता है। सूत्र ने कहा कि इन फोर-वे स्विच और टाइमर का उपयोग करके विस्फोट का समय कुछ मिनटों से लेकर छह महीने तक के लिए सेट किया जा सकता है।

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8 जनवरी को चुनाव आयोग(Election Commission of India) द्वारा जारी के गए 5 राज्यों के विधान सभा चुनावों(Vidhan Sabha Election 2022) के तारिखों के ऐलान से चुनावी गहमा-गहमी चरम पर है। आपको बता दें कि वर्ष 2022 में 5 अहम राज्यों में विधान सभा चुनाव आयोजित होने जा रहे हैं। यह राज्य हैं उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखण्ड, गोवा एवं मणिपुर। साथ ही उत्तर प्रदेश(Uttar Pradesh) में होने जा रहे चुनाव को 7 चरणों में बांटा गया है, मणिपुर 2 चरणों में और गोवा, उत्तराखण्ड, पंजाब(Punjab) में चुनाव 1 चरण में आयोजित किया जाएगा। चुनाव तारीखों के घोषित होने बाद सभी राजनीतिक दल एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं और हर वह हथकंडा अपना रहे हैं जिससे मतदाता आकर्षित हों। साथ ही अब यह भी संभावना अधिक है कि इस बीच चुनावी जमाखोरी बढ़ जाएगी।

पिछले चुनाव में पार्टियों ने कितना खर्च किया था?

आपको जानकारी के लिए बता दें कि 2017 में हुए उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में करीब 5,500 करोड़ रूपये बड़ी पार्टियों द्वारा चुनाव अभियान में खर्च किए गए थे। साथ ही एक मीडिया रेपोर्ट के अनुसार 1000 करोड़ से अधिक पैसा मतदाताओं को पैसे से या शराब से लुभाने में खर्च किए गए थे। आपको यह भी बता दें कि 2017 में ही हुए 5 राज्यों में विधान सभा चुनाव में 1.89 अरब रूपये खर्च किए गए थे, जिसमें बाहरी खर्च कितना था इसका कोई हिसाब-किताब नहीं है।

इसके साथ विधानसभा में चुनाव आयोग ने निर्धारित की खर्च सीमा प्रति उम्मीदवार 30 लाख तय किया है, किन्तु यह सभी जानते हैं कि इसका पालन नहीं होता है। बल्कि बाहरी खर्च और वोट के लिए नोट का इस्तेमाल कर बेहिसाब पैसा बहाया जाता है। सभी पार्टियां, पार्टी चंदे को भी चुनाव में होने वाले खर्च के लिए इस्तेमाल करती हैं। साथ ही टिकट बिक्री को भी चुनावी जमाखोरी में गिना जा सकता है। हालही में आम आदमी पार्टी के खुदके विधायक ने अरविन्द केजरीवाल पर करोड़ों रुपयों के बदले टिकट बेचने का आरोप लगाया है।
जैसा की आपको पता है कि इस साल होने वाले 5 राज्यों में विधानसभा चुनाव सभी पार्टियों की नाक की बात बन गई है, जिस वजह से हर कोई अपने-अपने तरीके से लोगों को जुटाने में और चीजों को भुनाने में जुटा हुआ है। चाहे वह बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का नारा हो या 'मैं लड़की हूँ, लड़ सकती हूँ', किन्तु आज भी हम यह कह सकते हैं कि किसी भी प्रदेश ने महिलाओं की सुरक्षा का ठोस आश्वासन नहीं दिया है। इसी तरह भ्रष्टाचार और पैसों की जमाखोरी पर किसी भी सरकार को निर्दोष करार दे देना समझदारी का काम नहीं होगा। आपको बता दें कि एक समय ऐसा भी था जब समाजवादी पार्टी के पूर्व नेता और सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव के चाचा शिवपाल यादव ने यह स्वीकारा था कि समाजवादी पार्टी के सरकार में भ्रष्टाचार होता था।

यह भी पढ़ें: क्या चुनाव चिन्ह को हटा देना चाहिए ?

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राष्ट्रपति भवन (Wikimedia Commons)

दक्षिणी दिल्ली नगर निगम(South Delhi Municipal Corporation) में भाजपा के मुनिरका वार्ड से पार्षद भगत सिंह टोकस ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द(Ramnath Kovind) को एक पत्र लिखकर राष्ट्रपति भवन(Rashtrapati Bhavan) में स्थित मुगल गार्डन का नाम बदल कर पूर्व राष्ट्रपति मिसाइल मैन डाक्टर अब्दुल कलाम वाटिका(Abdul Kalam Vatika) के नाम पर रखने की मांग की है। निगम पार्षद भगत सिंह टोकस ने राष्ट्रपति को भेजे अपने पत्र में लिखा है, मुगल काल में मुगलों द्वारा पूरे भारत में जिस प्रकार से आक्रमण किए गए और देश को लूटा था। वहीं देशभर में मुगल आक्रांताओं के नाम से लोगों में रोष हैं। जिन्होंने भारत की संस्कृति को खत्म करने का प्रयास किया उनको प्रचारित न किया जाए।

rastrapati bhavan, mughal garden राष्ट्रपति भवन स्थित मुगल गार्डन (Wikimedia Commons)

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