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टेक्नोलॉजी

‘गेम ओवर’ : भारत ने पबजी समेत 118 और चीनी ऐप्स पर प्रतिबंध लगाया

यह कार्रवाई पूर्वी लद्दाख के पैंगॉन्ग त्सो में भारतीय क्षेत्र में चीनी घुसपैठ की ताजा कोशिशों के बाद हुई है।

भारत में सुरक्षा कारणों से पबजी पर प्रतिबन्ध लगा। (PUBG, Twitter)

चीनी ऐप्स पर एक और सर्जिकल स्ट्राइक करते हुए भारत सरकार ने बुधवार को 118 ऐप्स पर प्रतिबंध लगा दिया है। इस बार जिन चीनी ऐप पर प्रतिबंध लगाया गया है, उनमें बेहद लोकप्रिय गेम पबजी भी शामिल है। इसके अलावा भारत सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए लिविक, वीचैट वर्क और वीचैट रीडिंग, ऐपलॉक, कैरम फ्रेंड्स जैसे मोबाइल ऐप्स पर भी प्रतिबंध लगाया गया है। इससे पहले भारत ने लघु वीडियो शेयरिंग ऐप टिकटॉक समेत कई चीनी ऐप्स पर प्रतिबंध लगा दिया था।

यह कार्रवाई पूर्वी लद्दाख के पैंगॉन्ग त्सो में भारतीय क्षेत्र में चीनी घुसपैठ की ताजा कोशिशों के बाद हुई है।


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पबजी गेम फिलहाल वैश्विक स्तर पर 60 करोड़ से अधिक बार डाउनलोड किया जा चुका है। इस गेम को खेलने वाले पांच करोड़ सक्रिय (एक्टिव) यूजर्स हैं। इसमें चीन के यूजर्स शामिल नहीं हैं, जहां इस गेम के रीब्रांडेड वर्जन को ‘गेम फॉर पीस’ कहा जा रहा है।

भारत में पबजी खेलने वाले लाखों की संख्या में हैं, जिनमें अधिकतर यूजर्स युवा हैं।

भारत में पबजी खेलने वालों की संख्या लाखों में। (Pixabay)

पबजी पर प्रतिबंध उस समय लगा है, जब इसने अपने 1.0 वर्जन के साथ एक नए गेमिंग युग के आगमन की घोषणा की है।

इससे पहले लोकप्रिय टिकटॉक समेत चीन के कई ऐप पर प्रतिबंध लगाए जा चुका है। जून के आखिर में भारत ने टिकटॉक, हेलो समेत चीन के 59 मोबाइल ऐप्स पर प्रतिबंध लगाया था। बाद में जुलाई के आखिर में 47 और चीनी ऐप्स पर प्रतिबंध लगाया गया। अब बुधवार को 118 और चीनी ऐप्स पर प्रतिबंध की घोषणा की गई है।

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सरकार ने 29 जून को लद्दाख में सीमा विवाद के बीच टिकटॉक, वीचैट और यूसी ब्राउजर सहित 59 चीनी ऐप्स पर प्रतिबंध लगा दिया था। भारत और चीन की सेनाएं पिछले करीब चार महीनों से वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के कई हिस्सों में आमने-सामने हैं और सीमा पर दोनों देशों के बीच गतिरोध खत्म नहीं हो पा रहा है।

इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने भारत की संप्रभुता, अखंडता एवं निजी सुरक्षा का हवाला देते हुए, इन ऐप्स पर प्रतिबंध लगाया है।

मंत्रालय के अनुसार, इस कदम से करोड़ों भारतीय मोबाइल उपयोगकर्ताओं के हितों की रक्षा होगी।(आईएएनएस)

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भारत का खूबसूरत क्षेत्र कोडाईकनाल।(Unsplash)

भारत के तमिलनाडु राज्य में स्थित कोडाईकनाल एक पर्वतीय नगर है। यह समुद्र तल 2133 मी. की ऊंचाई पर पिलानी नामक पहाड़ पे बसा हैं। ये अपनी प्राकृतिक सुंदरता और शांत वातावरण से सब को मनमोहित कर देता है । खूबसूरत प्राकृतिक दृश्य के कारण इसे भारत का स्विट्जरलैंड भी कहा जाता हैं। यहां पर घूमने का मजा तब बढ़ जाता है, जब मानसून दस्तक देता है, क्योंकि इस समय यहां के झरने वादियां और भी खूबसूरत हो जाते हैं। यहां कुरिंजी नामक एक फूल है जो कि 12 वर्षों में खिलता है, जिससे यहां की पहाड़ियों में सुंदरता और निखरती है और इसकी महक मदहोश कर देने वाली होती है। कोडाईकनाल में प्रकृति की सुंदरता अपने तमाम रूपों में नजर आती है। विशाल चट्टान , शांत झील ,फलों के बगीचे और यहां के हरे भरे दृश्य अपनी सुंदरता की कहानियां व्यक्त करते हैं। मानसून में यह जगह जन्नत सी नजर आती है। यहां पर लोग पिकनिक मनाने , घूमने फिरने , या हनीमून के लिए आते हैं।

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देश भर से जमा की गई 2 लाख से अधिक ईंटें। (IANS)

राम भक्तों द्वारा दी गई और विश्व हिंदू परिषद (विहिप) (Vishwa Hindu Parishad) द्वारा तीन दशक लंबे मंदिर आंदोलन के दौरान देश भर से जमा की गई 2 लाख से अधिक ईंटों का इस्तेमाल अब राम जन्मभूमि स्थल पर भव्य मंदिर का निर्माण के लिए किया जाएगा।

मंदिर ट्रस्ट के सदस्य अनिल मिश्रा ने कहा, "1989 के 'शिलान्यास' के दौरान कारसेवकों द्वारा राम जन्मभूमि पर एक लाख पत्थर रखे गए थे। कम से कम, 2 लाख पुरानी कार्यशाला में रह गए हैं, जिन्हें अब निर्माण स्थल पर स्थानांतरित कर दिया जाएगा। ईंटों पर भगवान राम का नाम लिखा है और यह करोड़ों भारतीयों की आस्था का प्रमाण है।

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कर्नाटक राज्य में मंदिर विध्वंस अभियान पर विराम लगा दिया है। (wikimedia commons)

हिंदू संगठनों की ओर से आलोचना झेल रही कर्नाटक की भाजपा सरकार नें कर्नाटक में मंदिर विध्वंस के मुद्दे पर फिलहाल राज्य विधानसभा में एक कानून पारित कर पुरे कर्नाटक राज्य में मंदिर विध्वंस अभियान पर विराम लगा दिया है। सत्ताधारी पार्टी भाजपा और विपक्षी दल कांग्रेस इन दोनों के बीच मंगलवार को तीखी बहस के बीच प्रस्तावित कर्नाटक धार्मिक संरचना (संरक्षण) विधेयक 2021 को पारित कर दिया गया।

यह प्रस्तावित अधिनियम जिसका नाम 'कर्नाटक धार्मिक संरचना (संरक्षण) विधेयक-2021' है, इसका मुख्य उद्देश्य सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार राज्य में धार्मिक संरचनाओं के विध्वंस को रोकना है।

यह अधिनियम में कहा गया है कि 'कर्नाटक धार्मिक संरचना संरक्षण अधिनियम -2021' के लागू होने की तारीख से, कानूनों के कानूनी प्रावधान और अदालतों, न्यायशास्त्र और अधिकारियों के आदेशों या दिशानिदेशरें के बावजूद, सरकार धार्मिक केंद्रों की रक्षा करेगी।

सार्वजनिक संपत्तियों पर बने धार्मिक केंद्रों को खाली करने, स्थानांतरित करने और ध्वस्त करने की प्रक्रिया को रोक दिया जाएगा। इस अधिनियम के लागू होने और विधान परिषद में पारित होने के बाद से ही ।

इसी बीच विपक्ष के नेता सिद्धारमैया ने कर्नाटक सरकार पर आरोप लगाया कि हिंदू जागरण वेदिक और हिंदू महासभा की आलोचना का सामना करने के बाद भाजपा यह कानून लाई है। मैसूर में मंदिर तोड़े जाने के बाद बीजेपी पुनर्निर्माण के लिए नया कानून ला रही है, यह भी आरोप लगायें हैं उन्होंने भाजपा पार्टी के खिलाफ । इसके बाद कांग्रेस के एक और विधायक और पूर्व मंत्री औरयू.टी. खादर ने बीजेपी पर हमला बोलते हुए कहा कि छात्र पाठ्यपुस्तकों में पढ़ने जा रहे हैं कि भाजपा ने भारत में आक्रमणकारियों की तरह मंदिरों को ध्वस्त कर दिया।

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