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थोड़ा हट के

सतपुड़ा की वादियों और आदिवासियों की जिंदगी से रुबरु कराएगी ‘क्वीन्स ऑन द ट्रेल’

सतपुड़ा की वादियां लुभाती हैं, अपनी गौरव गाथा कहती हैं तो इन इलाकों में बसी जनजातियों की जिंदगी से कम ही लोग वाकिफ हैं।

सतपुड़ा की वादियां लुभाती हैं, अपनी गौरव गाथा कहती हैं तो इन इलाकों में बसी जनजातियों की जिंदगी से कम ही लोग वाकिफ हैं, इन्हें करीब से न केवल देख सकें बल्कि यहां को जान भी सकें इस मकसद से महिलाओं के लिए मध्य प्रदेश का पर्यटन विभाग ‘क्वीन्स ऑन द ट्रेल’ का आयोजन करने जा रहा है। बताया गया है कि सतपुड़ा की पर्वत श्रृंखला से महिलाओं को अवगत करने के लिए क्वीन्स ऑन द ट्रेल का यह आयोजन तीन दिन का 13 से 15 मार्च तक का होगा। यह आयोजन मध्य प्रदेश पर्यटन बोर्ड द्वारा जयपुर की संस्था मोस्टेच एस्केपस के सहयोग से विश्व प्रसिद्ध ट्रैकिंग रूट ‘फोरसिथ ट्रेल’ में किया जा रहा हैं। इस ट्रैकिंग एवं कैम्पिंग में देश और प्रदेश की 15 महिलाएं हिस्सा लेंगी और इनका नेतृत्व म.प्र. पर्यटन बोर्ड की अपर प्रबंध संचालक सोनिया मीणा द्वारा किया जाएगा। यह आयोजन चार दिवस तीन रात्रि का होगा, जिसमें कुल 30 कि.मी. की ट्रैकिंग की जाएगी।


फोरसिथ ट्रेल सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के मध्य में स्थित ट्रैकिंग रूट है, जिसे 150 वर्ष पूर्व एक अंग्रेज यात्री कैप्टन जेम्स फोरसिथ द्वारा खोजा गया था। इसलिए इस ट्रैक का नाम फोरसिथ ट्रेल है। इस ट्रैक में प्रदेश की भारिया जनजाति के रहन-सहन, संस्कृति, खान-पान का अवलोकन किया जा सकता है। ट्रैक के रूट में कई जंगली जीव जैसे-गौर, चीतल, नीलगाय, सांभर, जंगली उल्लू, जंगली बिल्ली और भालू पाये जाते हैं।

महिलाओं द्वारा ट्रैकिंग के दौरान यहां के वन्यजीव, सतपुड़ा के जंगल, लाल और बैगनी रंग के रंगीन पत्थर, झरने, पनार पानी पचमढ़ी स्थित कैंप साइट का अनुभव किया जाएगा। ट्रेल जिप्सी कैंप पचमढ़ी से प्रारंभ होकर डेहलिया , पचमढ़ी नाका, कांजीघाट नदी किनारा, देनवा नदी होते हुए पनार पानी पचमढ़ी में समाप्त होगा।

महिलाऐं उठाएंगी जंगल सफारी का मज़ा।(Pixabay)

म.प्र. पर्यटन विभाग के प्रमुख सचिव और टूरिज्म बोर्ड के प्रबंध संचालक शिव शेखर शुक्ला ने बताया है कि क्वीन्स ऑन द ट्रेल आयोजन के माध्यम से सभी 15 महिलाएं सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के बफर जोन में ट्रैवल के अंतर्गत ट्रैकिंग और कैम्पिंग के माध्यम से न केवल साहसिक पर्यटन को बढ़ावा देंगी, साथ ही अन्य महिलाओं व सोलो ट्रैवलर को भी ट्रैकिंग के लिए प्रेरित करेंगी। इस आयोजन के माध्यम से विश्व स्तर के साहसिक पर्यटन प्रेमी (एडवेंचर लवर्स) पर्यटकों को मध्यप्रदेश के जंगल में एडवेंचर एवं ट्रैकिंग का अनुभव लेने का अवसर प्राप्त होगा।

यह भी पढ़ें: बुंदेलखंड की हवा में है इतिहास बनाना- महिलाओं ने दिलाया गांव को पानी की समस्या से निजात 

मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड की अपर प्रबन्ध संचालक सोनिया मीणा ने बताया है कि, “15 महिला ट्रैकर्स सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के बफर जोन में ट्रैकिंग और कैंपिंग करके ट्रैक के ज्ञात स्थानों और अज्ञात ट्रैक भी खोजने के साथ ही प्रकृति की सुंदरता का भी अनुभव करेंगी।”

मीणा ने कहा कि मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड प्रत्येक ट्रैवलर विशेषकर महिलाओं और सोलो ट्रैवलर की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठा रहा है, जिससे प्रत्येक ट्रैवलर अपनी इस साहसिक पर्यटन यात्रा को यादगार बना सके। यहां दोबारा आने के लिए प्रेरित हो और अन्य ट्रेवलर्स को भी प्रोत्साहित कर सकें।(आईएएनएस-SHM)

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इंडियन स्कूल ऑफ हॉस्पिटैलिटी (ISH) [IANS]

दुनिया की अग्रणी हॉस्पिटैलिटी और पाक कला शिक्षा दिग्गजों में से एक, सॉमेट एजुकेशन (Sommet Education) ने हाल ही में देश के प्रीमियम हॉस्पिटैलिटी संस्थान, इंडियन स्कूल ऑफ हॉस्पिटैलिटी (ISH) के साथ हाथ मिलाया है। इसके साथ सॉमेट एजुकेशन की अब आईएसएच (ISH) में 51 प्रतिशत हिस्सेदारी है, जो पूर्व के विशाल वैश्विक नेटवर्क में एक महत्वपूर्ण एडिशन है। रणनीतिक साझेदारी सॉमेट एजुकेशन को भारत में अपने दो प्रतिष्ठित संस्थानों को स्थापित करने की अनुमति देती है। इनमें इकोले डुकासे शामिल है, जो पाक और पेस्ट्री कला में एक विश्वव्यापी शिक्षा संदर्भ के साथ है। दूसरा लेस रोचेस है, जो दुनिया के अग्रणी हॉस्पिटैलिटी बिजनेस स्कूलों में से एक है।

इस अकादमिक गठबंधन के साथ, इकोले डुकासे का अब भारत में अपना पहला परिसर आईएसएच (ISH) में होगा, और लेस रोचेस देश में अपने स्नातक और स्नातकोत्तर आतिथ्य प्रबंधन कार्यक्रम शुरू करेगा।

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Credit- Wikimedia Commons

भारतीय रेलवे (Wikimedia Commons)

पूर्व मध्य रेल ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के निर्देशों के बाद इसके अनुपालन में उल्लेखनीय प्रगति हासिल की है। इको स्मार्ट स्टेशन के रूप में विकसित करने के लिए पूर्व मध्य रेल के 52 चिन्हित स्टेशनों पर रेलवे बोर्ड द्वारा सुझाए गए 24 इंडिकेटर (पैरामीटर) लागू किए हैं। सभी 52 स्टेशनों ने पर्यावरण प्रबंधन के लिए एक प्रमाणन आईएसओ-14001:2015 प्राप्त किया है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल द्वारा निर्धारित पूर्व मध्य रेल के 52 नामांकित स्टेशनों में से 45 का संबंधित राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोडरें के लिए सहमति-से-स्थापित (सीटीई) प्रस्तावों की ऑनलाइन प्रस्तुतियां सुनिश्चित कीं।

पूर्व मध्य रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी राजेष कुमार ने बताया कि पूर्व मध्य रेल के सभी 45 स्टेशनों के लिए स्थापना की सहमति के लिए एनओसी प्राप्त कर ली गई है और 32 स्टेशनों को कंसेंट-टू-ऑपरेट (सीटीओ) दी गई है। उन्होंने बताया कि इस प्रमाणीकरण ने पूर्व मध्य रेलवे को राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोडरें द्वारा निर्धारित पानी, वायु प्रदूषण नियंत्रण और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन मानदंडों की आवश्यकता को सुव्यवस्थित करने में मदद की है।

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वायरस जनित बीमारियों की विश्व स्तरीय जांच अब गोरखपुर में भी हो सकेगा। [IANS]

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में इंसेफेलाइटिस समेत अन्य वायरस जनित बीमारियों की विश्व स्तरीय जांच शुरू हो गई है। गोरखपुर (Gorakhpur) में यह इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR)की क्षेत्रीय इकाई रीजनल मेडिकल रिसर्च सेंटर (RMRC) के जरिए संभव हुआ है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) के प्रयास से शुरू इस आरएमआरसी में नौ अत्याधुनिक लैब्स बनकर तैयार हैं। बता दें कि मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) इसका उद्घाटन करेंगे।

राज्य सरकार की ओर से मिली जानकारी के अनुसार आरएमआरसी (RMRC) की इन लैब्स के जरिये न केवल बीमारियों के वायरस की पहचान होगी बल्कि बीमारी के कारण, इलाज और रोकथाम को लेकर व्यापक स्तर पर वल्र्ड क्लास अनुसंधान भी हो सकेगा। सबसे खास बात यह भी है कि अब गोरखपुर (Gorakhpur) में ही आने वाले समय में कोरोनाकाल के वर्तमान दौर की सबसे चर्चित और सबसे डिमांडिंग जीनोम सिक्वेंसिंग (Genome Sequencing) भी हो सकेगी। यह पता चल सकेगा कि कोरोना का कौन सा वेरिएंट (Covid variant) अधिक प्रभावित कर रहा है।

Narendra Modi , PM of India, ICMR मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस RMRC का उद्घाटन करेंगे। [Wikimedia Commons]

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