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संस्कृति

अयोध्या में भक्तों के लिए भगवान राम का लेज़र अवतार

अयोध्या में दीपोत्सव को भव्य स्वरूप देने के लिए, लेजर शो के माध्यम से भगवान श्रीराम के अयोध्या आगमन, नगरवासियों की प्रसन्नता और भगवान राम के स्वागत में किए गए आयोजन को दर्शाया जाएगा।

इस बार अयोध्या में 5 लाख से अधिक दीपक प्रज्‍जवलित होंगे। (Pixabay)

भगवान राम की नगरी अयोध्या में चतुर्थ दीपोत्सव को योगी आदित्यनाथ सरकार बेहद यादगार बना रही है। इस दौरान दीपोत्सव को भव्य स्वरूप देने के लिए आकर्षक लेजर शो आयोजित किया जाएगा। इसके माध्यम से ही भगवान राम के अयोध्या आगमन का चित्रण किया जाएगा। करीब पांच सौ वर्ष बाद अयोध्या में रामजन्मभूमि स्थल पर दीपावली की पूर्व संध्या पर दिवाली से भी बड़ा उत्सव होगा। सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि दीपोत्सव में अत्याधुनिक तकनीक पर आधारित इस लेजर शो के माध्यम से भगवान श्रीराम के अयोध्या आगमन का चित्रण किया जाएगा। भगवान श्रीराम के अयोध्या आगमन पर नगरवासियों द्वारा उनके स्वागत में प्रज्‍जवलित किए गए दीपों की जगमगाहट का चित्रण भी इस लेजर शो के माध्यम से देखने को मिलेगा।

उन्होंने बताया कि लेजर शो, भगवान श्रीराम के अयोध्या आगमन पर नगरवासियों की प्रसन्नता और उनके स्वागत में किए गए आयोजन को भी दर्शाएगा। इसमें शंख और घण्टियों की ध्वनि का समावेश होगा। भारत के विभिन्न क्षेत्रों में प्रचलित नृत्यों जैसे भरतनाट्यम, ओडिसी, मणिपुरी, कुचिपुड़ी और कथक नृत्य को भी लेजर शो के माध्यम से प्रदर्शित किया जाएगा।


यह भी पढ़ें – राम दरबार में जल्द ही वर्चुअल दीप जला पाएंगे श्रद्धालु

प्रवक्ता ने बताया कि इसके अंर्तगत भगवान श्रीराम की रावण पर विजय के बाद उनके अयोध्या आगमन के दृश्य को चित्रित करेगा। भगवान श्रीराम की स्तुति ‘श्रीराम चंद्र पालु भजमन’ भी पृष्ठभूमि में सुनने को मिलेगी। लेजर द्वारा वर्चुअल आतिशबाजी का कार्यक्रम दीपोत्सव का एक प्रमुख आकर्षण होगा।

ज्ञात हो कि योगी आदित्यनाथ सरकार का अयोध्या में यह चौथा दीपोत्सव है। बाकी आयोजनों की तरह इसमें भी 5.51 लाख दीपक प्रज्‍जवलित कर एक नया रिकर्ड बनाने की तैयारी है। इन दीपकों को जलाने में करीब आठ हजार स्वयंसेवकों (एनसीसी, एनएसएस, स्काउट और स्वयंसेवी संस्थाओं के लोगों) की मदद ली जाएगी। नगर के अलग-अलग वार्डो में दीपक जलाने और साज-सज्जा भी कराई जाएगी। (आईएएनएस)

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इंडियन स्कूल ऑफ हॉस्पिटैलिटी (ISH) [IANS]

दुनिया की अग्रणी हॉस्पिटैलिटी और पाक कला शिक्षा दिग्गजों में से एक, सॉमेट एजुकेशन (Sommet Education) ने हाल ही में देश के प्रीमियम हॉस्पिटैलिटी संस्थान, इंडियन स्कूल ऑफ हॉस्पिटैलिटी (ISH) के साथ हाथ मिलाया है। इसके साथ सॉमेट एजुकेशन की अब आईएसएच (ISH) में 51 प्रतिशत हिस्सेदारी है, जो पूर्व के विशाल वैश्विक नेटवर्क में एक महत्वपूर्ण एडिशन है। रणनीतिक साझेदारी सॉमेट एजुकेशन को भारत में अपने दो प्रतिष्ठित संस्थानों को स्थापित करने की अनुमति देती है। इनमें इकोले डुकासे शामिल है, जो पाक और पेस्ट्री कला में एक विश्वव्यापी शिक्षा संदर्भ के साथ है। दूसरा लेस रोचेस है, जो दुनिया के अग्रणी हॉस्पिटैलिटी बिजनेस स्कूलों में से एक है।

इस अकादमिक गठबंधन के साथ, इकोले डुकासे का अब भारत में अपना पहला परिसर आईएसएच (ISH) में होगा, और लेस रोचेस देश में अपने स्नातक और स्नातकोत्तर आतिथ्य प्रबंधन कार्यक्रम शुरू करेगा।

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Credit- Wikimedia Commons

भारतीय रेलवे (Wikimedia Commons)

पूर्व मध्य रेल ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के निर्देशों के बाद इसके अनुपालन में उल्लेखनीय प्रगति हासिल की है। इको स्मार्ट स्टेशन के रूप में विकसित करने के लिए पूर्व मध्य रेल के 52 चिन्हित स्टेशनों पर रेलवे बोर्ड द्वारा सुझाए गए 24 इंडिकेटर (पैरामीटर) लागू किए हैं। सभी 52 स्टेशनों ने पर्यावरण प्रबंधन के लिए एक प्रमाणन आईएसओ-14001:2015 प्राप्त किया है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल द्वारा निर्धारित पूर्व मध्य रेल के 52 नामांकित स्टेशनों में से 45 का संबंधित राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोडरें के लिए सहमति-से-स्थापित (सीटीई) प्रस्तावों की ऑनलाइन प्रस्तुतियां सुनिश्चित कीं।

पूर्व मध्य रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी राजेष कुमार ने बताया कि पूर्व मध्य रेल के सभी 45 स्टेशनों के लिए स्थापना की सहमति के लिए एनओसी प्राप्त कर ली गई है और 32 स्टेशनों को कंसेंट-टू-ऑपरेट (सीटीओ) दी गई है। उन्होंने बताया कि इस प्रमाणीकरण ने पूर्व मध्य रेलवे को राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोडरें द्वारा निर्धारित पानी, वायु प्रदूषण नियंत्रण और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन मानदंडों की आवश्यकता को सुव्यवस्थित करने में मदद की है।

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वायरस जनित बीमारियों की विश्व स्तरीय जांच अब गोरखपुर में भी हो सकेगा। [IANS]

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में इंसेफेलाइटिस समेत अन्य वायरस जनित बीमारियों की विश्व स्तरीय जांच शुरू हो गई है। गोरखपुर (Gorakhpur) में यह इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR)की क्षेत्रीय इकाई रीजनल मेडिकल रिसर्च सेंटर (RMRC) के जरिए संभव हुआ है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) के प्रयास से शुरू इस आरएमआरसी में नौ अत्याधुनिक लैब्स बनकर तैयार हैं। बता दें कि मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) इसका उद्घाटन करेंगे।

राज्य सरकार की ओर से मिली जानकारी के अनुसार आरएमआरसी (RMRC) की इन लैब्स के जरिये न केवल बीमारियों के वायरस की पहचान होगी बल्कि बीमारी के कारण, इलाज और रोकथाम को लेकर व्यापक स्तर पर वल्र्ड क्लास अनुसंधान भी हो सकेगा। सबसे खास बात यह भी है कि अब गोरखपुर (Gorakhpur) में ही आने वाले समय में कोरोनाकाल के वर्तमान दौर की सबसे चर्चित और सबसे डिमांडिंग जीनोम सिक्वेंसिंग (Genome Sequencing) भी हो सकेगी। यह पता चल सकेगा कि कोरोना का कौन सा वेरिएंट (Covid variant) अधिक प्रभावित कर रहा है।

Narendra Modi , PM of India, ICMR मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस RMRC का उद्घाटन करेंगे। [Wikimedia Commons]

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