Never miss a story

Get subscribed to our newsletter


×
इतिहास

भारत की सबसे पहली स्वतंत्रता सेनानी: रानी अबक्का देवी!

यह वीर-भूमि भारत सदा से वीरों के गाथाओं को समेटती आ रही है। यह अमर गाथा है रानी अबक्का देवी जिन्होंने पुर्तगालियों के दाँत खट्टे कर दिए थे।

रानी अबक्का देवी ने पुर्तगालियों पीठ दिखाकर भागने पर मजबूर कर दिया था।(फाइल फोटो)

भारत एक ऐसा देश है जहाँ का हर एक छोर नई गाथा सुनाता है। यह वीर-भूमि भारत सदा से वीरों के गाथाओं को समेटती आ रही है। यहाँ हर पग पर किसी वीर ने अपने बचपन से लेकर जवानी तक सफर तय किया होगा, जिन पग पर आज हम आधुनिकरण के ढोंग की लकीर खींच उन्हें भुलाने की भरसक प्रयास कर रहे हैं। भारत देश न कभी दुर्बल था, है, और रहेगा। किन्तु धर्मनिरपेक्षता को अपनी ढाल बनाकर देश के ही इतिहासकारों ने इस देश के स्वर्णिम इतिहास को दबा दिया है और उन्हें युवाओं तक पहुँचने नही दिया।

आज उन्ही अतीत के दीवारों में से फिर एक वीर गाथा लेकर आया हूँ, जिसे पढ़कर आप भी सोच में पड़ जाएंगे कि हम सबसे कितना कुछ छुपाया गया है। यह गाथा है भारत की सबसे पहली महिला स्वतंत्रता सेनानी की जिन्होंने भारत में आए पुर्तगलियों के दांतों तले चने चबवा दिए थे। यह गाथा है रानी अबक्का देवी(Abbakka Chowta) की।


रानी अबक्का देवी(Abbakka Chowta) की रियासत आज के कर्नाटक क्षेत्र में फैला हुआ था। उनकी राजधानी थी उल्लाल(Ullal) जो कि वर्तमान में मंगलोर(Mangalore) के नाम से जाना जाता है। यह उस समय की बात है जब पुर्तगाली(Portuguese) गोवा(GOA) पर अधिग्रहण कर वहां के हिन्दू निवासियों पर अत्याचार कर रहे थे। और अब वह उल्लाल को अपने कब्ज़े में लेना चाहते थे। जिसके लिए उन्होंने पहला हमला मंगलोर(Mangalore) के तट पर किया और मंगलोर बंदरगाह को नष्ट कर दिया।

किन्तु पुर्तगालियों(Portuguese) को यह नहीं पता था कि वह किस शेरनी के मुँह में हाथ डाल रहे हैं। युद्धकौशल और रणनीति रचना में निपुण रानी अबक्का((Abbakka Chowta)) केवल पुर्तगालियों द्वारा आक्रमण के फ़िराक में थीं, क्योंकि गोवा में पुर्तगालियों(Portuguese) द्वारा किए बर्बरता को वह भूली नहीं थी। साथ ही रानी अबक्का के सेना में वह वीर तैनात थे जो अपने देश और जनता की सुरक्षा के लिए किसी भी खतरे को बे-हिचक मोल ले सकते थे। और इस युद्ध में उल्लाल का साथ दे रहे थे पड़ोसी राज्य के बंग राजवंश और अन्य स्थानीय शासक।

उल्लाली तलवारों ने पुर्तगालियों को झुकने पर मजबूर कर दिया था।(Unsplash)

पुर्तगालियों(Portuguese) ने इधर हमला किया और उधर भूखे शेरों की भांति उल्लाल(Ullal) के वीर, पुर्तगालियों पर टूट पड़े और उन्हें पीठ दिखाकर भागने पर मजबूर कर दिया। यह एक बार नहीं 6 बार हुआ। पुर्तगालियों(Portuguese) ने 1525 से लेकर 1569 तक छह बार उल्लाल पर हमला किया मगर कभी सफल नहीं पाए। जान बचाकर भागने के सिवा उनके पास और कोई चारा न बचा। हालांकि, इस बीच वर्ष 1568 में पुर्तगाली सेनापति जोआओ पेइकोतो के नेतृत्व में पुर्तगाली फ़ौज उल्लाल पर कब्ज़ा करने में सफल हो गई थी। जिसके पश्चात रानी अबक्का(Abbakka Chowta) ने एक मस्जिद में शरण ली थी।

यह भी पढ़ें: यह शौर्य गाथा है शहीद वीरांगना रानी अवंतीबाई की

पुर्तगाली आक्रमण के बाद उसी रात्रि को रानी ने अपने 200 विश्वसनीय और युद्धकौशल में पारंगत वीरों को एकत्र किया और पुनः उल्लाल को अपने अधीन ले लिया। यह ही नहीं पुर्तगाली एडमिरल मस्कारेन्हस को उसके अंजाम तक भी पहुंचा दिया गया। इस अचंभित कर देने वाले विजय के पश्चात रानी अबक्का(Abbakka Chowta) के शौर्य के किस्से दूर-दूर तक फैलने लगे। उल्लाल के वीरों के शौर्य का लोहा हर कहीं माना जाने लगा।

किन्तु छल के आगे न कभी किसी वीर की बुद्धिमता आगे बढ़ी है और न ही शौर्य का इस्तमाल हो पाया है। वर्ष 1569 में पुर्तगलियों ने फिर उल्लाल पर आक्रमण किया। इस बार रानी अबक्का का साथ दे रहे थे अहमद नगर और ज़मोरिन के सुल्तान। रानी अबक्का की सेना वह युद्ध जीतने के बिलकुल करीब थी किन्तु रानी के ही पति ने धोखा दिया और पुर्तगालियों से हाथ मिलाकर छल से रानी को कैद कर लिया। बंदीगृह से भी रानी ने आंदोलन को जारी रखा और अंत में वीरगति को हँसते-हँसते गले लगा लिया। यह वीर गाथा थी रानी अबक्का देवी की जो अंतिम साँस तक स्वतंत्रता के लिए लड़ती रहीं।

Popular

भारत में आधुनिक लिबरल संस्कृति ने, हिन्दुओं को कई गुटों में बाँट दिया है। कोई इस धर्म को पार्टी से जोड़ कर देखता है या किसी को यह धर्म ढोंग से भरा हुआ महसूस होता है। किन्तु सत्य क्या है, उससे यह सभी लिब्रलधारी कोसों दूर हैं। यह सभी उस भेड़चाल का हिस्सा बन चुके हैं जहाँ आसिफ की पिटाई का सिक्का देशभर में उछाला जाता है, किन्तु बांग्लादेश में हो रहे हिन्दुओं के नरसंहार को, उनके पुराने कर्मों का परिणाम बताकर अनदेखा कर दिया जाता है। यह वह लोग है जो इस्लामिक आतंकवादियों पर यह कहते हुए पल्ला झाड़ लेते हैं कि आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता, लेकिन जब आतंकी बुरहान वाणी को सुरक्षा बलों द्वारा ढेर किया जाता है तो यही लोग उसे शहीद और मासूम बताते हैं। ऐसे ही विषयों पर मुखर होकर अपनी बात कहने और लिखने वाली जर्मन लेखिका मारिया वर्थ(Maria Wirth) ने साल 2015 में लिखे अपने ब्लॉग में इस्लाम एवं ईसाई धर्म पर प्रश्न उठाते हुए लिखा था कि "OF COURSE HINDUS WON'T BE THROWN INTO HELL", और इसके पीछे कई रोचक कारण भी बताए थे जिनपर ध्यान केंद्रित करना आज महत्वपूर्ण है।

कुरान, गैर-इस्लामियों के विषय में क्या कहता है,

मारिया वर्थ, लम्बे समय से हिंदुत्व एवं सनातन धर्म से जुड़े तथ्यों को लिखती आई हैं, लेकिन 2015 में लिखे एक आलेख में उन्होंने ईसाई एवं इस्लाम से जुड़े कुछ ऐसे तथ्यों को उजागर किया जिसे जानना हम सबके के लिए आवश्यक है। इसी लेख में मारिया ने हिन्दुओं के साथ बौद्ध एवं अन्य धर्मों के लोगों को संयुक्त राष्ट्र में ईसाई एवं इस्लाम धर्म के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने की सलाह दी और इसके पीछे उन्होंने यह कारण बताया कि ईसाई एवं इस्लाम दोनों ही धर्मों के बुद्धिजीवी यह मानते हैं कि गैर-ईसाई या गैर-मुस्लिम नर्क की आग में जलेंगे। इसका प्रमाण देते गए उन्होंने क़ुरान की वह आयत साझा की जिसमें साफ-साफ लिखा गया है कि " जो काफिर होंगे, उनके लिये आग के कपड़े काटे जाएंगे, और उनके सिरों पर उबलता हुआ तेल डाला जाएगा। जिस से जो कुछ उनके पेट में है, और उनकी खाल दोनों एक साथ पिघल जाएंगे; और उन्हें लोहे की छड़ों से जकड़ा जाएगा।" (कुरान 22:19-22)

Keep Reading Show less

(NewsGram Hindi)

देश में धर्मांतरण का मुद्दा नया नहीं है, लेकिन जिन-जिन जगहों पर हाल के कुछ समय में धर्मांतरण बढ़े हैं वह क्षेत्र नए हैं। आपको बता दें की पंजाब प्रान्त में धर्मांतरण या धर्म-परिवर्तन का काला खेल रफ्तार पकड़ चुका है और अपने राज्य में इस रफ्तार पर लगाम लगाने वाली सरकार भी धर्मांतरणकारियों का साथ देती दिखाई दे रही है। आपको यह जानकर हैरानी होगी, कि पंजाब में धर्मांतरण दुगनी या तिगुनी रफ्तार पर नहीं बल्कि चौगनी रफ्तार पर चल रही है। जिस वजह से पंजाब में हो रहे अंधाधुंध धर्म-परिवर्तन पर चिंता होना स्वाभाविक हो गया है।

गत वर्ष 2020 में कांग्रेस नेता और पंजाब में कई समय से सुर्खियों में रहे नवजोत सिंह सिद्धु ने दिसम्बर महीने में हुए एक ईसाई कार्यक्रम में, यहाँ तक कह दिया था कि 'जो आपकी(ईसाईयों) तरफ आँख उठाकर देखेगा उसकी हम ऑंखें निकाल लेंगे' जो इस बात पर इंगित करता है कि कैसे सत्ता में बैठी राजनीतिक पार्टी पंजाब में हो रहे धर्म परिवर्तन को रोकने के बजाय उसे राजनीतिक शह दे रही है। आपको यह भी बता दें कि 3.5 करोड़ की आबादी वाले पंजाब राज्य में लगभग 33 लाख लोग ईसाई धर्म को मानने वाले रह रहे हैं। पंजाब के कई क्षेत्रों में छोटे-छोटे चर्च का निर्माण हो रहा है और कई जगह ऐसे चर्च मौजूद भी हैं।

Keep Reading Show less

(NewsGram Hindi)

अगले वर्ष भारत एक बार फिर सबसे बड़े राजनीतिक धमाचौकड़ी का साक्षी बनने जा रहा है। जिसकी तैयारी में अभी से राजनीतिक दल अपना खून पसीना एक कर रहे हैं। यह चुनावी बिगुल फूंका गया है राजनीति का गढ़ कहे जाने वाले राज्य उत्तर प्रदेश में, जहाँ जातीय समीकरण, विकास और धर्म पर खूब हो-हल्ला मचा हुआ है। उत्तर प्रदेश चुनाव में जहाँ एक तरफ भाजपा हिन्दुओं को अपने पाले करने में जुटी वहीं विपक्ष ब्राह्मणों को अपनी तरफ करने के प्रयास में एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं। आने वाला उत्तर प्रदेश चुनाव क्या मोड़ लेगा इसका उत्तर तो समय बताएगा, किन्तु ब्राह्मणों को अपने पाले में खींचने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।

आपको बता दें कि वर्ष 2017 में हुए उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव में सभी पार्टियों ने खूब खून-पसीना बहाया था, किन्तु सफलता का परचम भारतीय जनता पार्टी ने 312 सीटों को जीत कर लहराया था। वहीं अन्य पार्टियाँ 50 का आंकड़ा भी पार नहीं कर पाई। भाजपा की इस जादुई जीत का श्रेय प्रधानमंत्री मोदी के धुआँधार रैली और मुख्यमंत्री चेहरे को जाहिर न करने को गया। किन्तु उत्तर-प्रदेश 2022 का आगामी चुनाव सत्ता पक्ष के चुनौतियों से भरा हो सकता है। वह इसलिए क्योंकि सभी राजनीतिक पार्टी अब धर्म एवं जाति की राजनीति के अखाड़े में कूद गए हैं। इसमें सबसे आगे हैं यूपी में राजनीतिक बसेरा ढूंढ रहे एआईएमआईएम के अध्यक्ष असदुद्दीन औवेसी! जो खुलकर रैलियों में और टीवी पर यह कहते हुए सुनाई दे जाते हैं कि वह प्रदेश के मुसलमानों को अपनी ओर खींचने के लिए उत्तर प्रदेश आए हैं।

Keep reading... Show less