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बांग्लादेश की झुग्गी बस्तियों में कोरोना संक्रमण की दर मात्र 6 फीसदी

झुग्गी-झोपड़ियों में रहने के बावजूद बांग्लादेश के श्रमिक नियमित रूप से बीमारी की निगरानी कर रहे हैं और संक्रमण को लेकर काफी सचेत हैं।

बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना। (WIkimedia Commons)

By- सुमी खान

बांग्लादेश में झोपड़पट्टियों (मलिन बस्ती) में रहने वाले लोगों में कोरोनावायरस संक्रमण की दर केवल छह प्रतिशत पाई गई है।


इंस्टीट्यूट ऑफ एपिडेमियोलॉजी डिजीज कंट्रोल एंड रिसर्च एंड इंटरनेशनल सेंटर फॉर डायरियाल डिजीज रिसर्च में पाया गया कि मलिन बस्तियों में संक्रमण की दर अपेक्षाकृत कम है, क्योंकि अधिकांश निवासी जो परिधान श्रमिक (गारमेंट वर्कर) हैं, वह नियमित रूप से बीमारी की निगरानी कर रहे हैं और संक्रमण को लेकर काफी सचेत हैं।

जब मार्च में पहली बार देश में महामारी ने दस्तक दी तो सबसे बड़ा खतरा ढाका में लाखों रेडीमेड गारमेंट (आरएमजी) श्रमिकों और झुग्गियों में रहने वालों को लेकर था।

अकेले ढाका की कोरेल बस्ती (स्लम) में लगभग 3.5 लाख लोग रहते हैं और यहां सैकड़ों लोगों के लिए केवल दो शौचालय हैं।

बांग्लादेश के झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वाले बच्चों की सांकेतिक तस्वीर। (Wikimedia Commons)

स्वास्थ्य विशेषज्ञ और शोधकर्ता लेलिन चौधरी ने शनिवार को आईएएनएस को बताया, “उनमें से कोई भी (झुग्गी में रहने वाले) मास्क नहीं पहनते हैं। लेकिन वे कम प्रभावित हुए हैं। इसीलिए ढाका में कोविड-19 को ‘अमीर लोगों की बीमारी’ का नाम दिया गया है।”

उन्होंने कहा, “जो लोग शर्ट और जूते नहीं पहनते हैं और धूप में अधिक समय बिताते हैं, वे प्रकृति के करीब हैं और उच्च प्रतिरक्षा (इम्युनिटी) रखते हैं। जो लोग वातानुकूलित कमरों में रहते हैं और धूप में नहीं रहते तथा अधिक संरक्षित खाद्य पदार्थ खाते हैं, उनकी प्रतिरोधक क्षमता कम होती है।”

यह भी पढ़ें- 2 साल के अंदर खत्म हो सकती है कोविड-19 महामारी : डब्ल्यूएचओ।

आईईडीसीआर के सलाहकार मुश्ताक हुसैन ने कहा, “जो लोग रोजाना कमाकर खाते हैं और आरएमजी क्षेत्र के श्रमिक बड़े पैमाने पर कोविड-19 से प्रभावित नहीं हुए हैं। यह अभी तक मालिकों व परिधान क्षेत्र प्रशासन द्वारा उठाए गए प्रभावी रोकथाम उपायों के कारण संभव हुआ है।”

गाजीपुर के सिविल सर्जन एम. डी. खैरुज्जमान ने आईएएनएस को बताया, “हम झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाले लोगों और आरएमजी श्रमिकों के बारे में बहुत चिंतित थे। इसके आधार पर, यह सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी कदम उठाए गए कि कारखाने थोड़े समय के भीतर स्वच्छता मानदंडों के अनुपालन में चलें।”

कोरोना वायरस से बचाव के लिए साफ-सफाई का ध्यान रखें। (Pexels)

उन्होंने कहा, “अधिकांश आरएमजी कारखानों ने उचित स्वच्छता मानदंडों का पालन किया है। यही कारण है कि इस क्षेत्र में श्रमिकों के बीच संक्रमण को थोड़े समय में नियंत्रण में लाया गया है। यदि ऐसा नहीं किया गया होता, तो शायद सभी की आशंकाएं सच हो जातीं।”

आईईडीसीआर की नवनियुक्त निदेशक, प्रोफेसर तहमीना शिरीन ने कहा, “आंकड़ों से, हम कह सकते हैं कि परिधान श्रमिकों और झुग्गी निवासियों के बीच संक्रमण दर अपेक्षाकृत कम है।”

विशेषज्ञों का कहना है कि दक्षिण एशियाई पृष्ठभूमि के लोगों में गोरे लोगों की तुलना में एंटी-बॉडी की प्रतिशतता अधिक होती है।(IANS)

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स्टेशन पर चाय बेचने वाले का बेटा चौथी बार संयुक्त राष्ट्र को संबोधित कर रहा है: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (IANS)

शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यूनाइटेड नेशन जनरल असेंबली में 76 सत्र मे संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करते हुए एक सकारात्मक और प्रेरक भाषण दिया।

यूएनजीए में भाषणों के सप्ताहांत चरण की शुरुआत के कुछ ही क्षणों के भीतर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, "लोकतंत्र उद्धार कर सकता है, लोकतंत्र ने करके दिखाया है"। अपनी बात को आगे कहते हुए उन्होंने गहरी संवेदना से भरी, खुद के बारे में व्यक्तिगत टिप्पणी करते हुए कहा, "स्टेशन पर चाय बेचने वाले का बेटा चौथी बार संयुक्त राष्ट्र को संबोधित कर रहा है।

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मोदी ने अपने संबोधन में कहा, "जब भारत बढ़ता है, तो दुनिया बढ़ती है। (IANS)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा के समक्ष 22 मिनट के अपने संबोधन में 'अद्वितीय' पैमाने पर विज्ञान, प्रौद्योगिकी, संस्कृति और समस्या-समाधान क्षमता के संदर्भ में भारत की शक्ति के विचार को सामने रखा। पीएम मोदी ने जोर देकर कहा कि जब भारतीयों की प्रगति होती है तो विश्व के विकास को भी गति मिलती है। मोदी ने अपने संबोधन में कहा, "जब भारत बढ़ता है, तो दुनिया बढ़ती है। जब भारत में सुधार होता है, तो दुनिया बदल जाती है। भारत में हो रहे विज्ञान और प्रौद्योगिकी आधारित नवाचार दुनिया में एक बड़ा योगदान दे सकते हैं। हमारे तकनीकी समाधानों की मापनीयता और उनकी लागत-प्रभावशीलता दोनों अद्वितीय हैं।"

पेश हैं मोदी के भाषण की 10 खास बातें:

आकांक्षा: "ये भारत के लोकतंत्र की ताकत है कि एक छोटा बच्चा जो कभी एक रेलवे स्टेशन के टी-स्टॉल पर अपने पिता की मदद करता था, वो आज चौथी बार, भारत के प्रधानमंत्री के तौर पर यूएनजीए को संबोधित कर रहा है।

लोकतंत्र: सबसे लंबे समय तक गुजरात का मुख्यमंत्री और फिर पिछले 7 साल से भारत के प्रधानमंत्री के तौर पर मुझे हेड ऑफ गवर्मेट की भूमिका में देशवासियों की सेवा करते हुए 20 साल हो रहे हैं। मैं अपने अनुभव से कह रहा हूं। हां, लोकतंत्र उद्धार कर सकता है। हां. लोकतंत्र ने उद्धार किया है।"

बैंकिंग: "बीते सात वर्षों में भारत में 43 करोड़ से ज्यादा लोगों को बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ा गया है, जो अब तक इससे वंचित थे। आज 36 करोड़ से अधिक ऐसे लोगों को भी बीमा सुरक्षा कवच मिला है, जो पहले इस बारे में सोच भी नहीं सकते थे।"

स्वास्थ्य देखभाल: "50 करोड़ से ज्यादा लोगों को मुफ्त इलाज की सुविधा देकर, भारत ने उन्हें क्वालिटी हेल्थ सर्विस से जोड़ा है। भारत ने 3 करोड़ पक्के घर बनाकर, बेघर परिवारों को घर का मालिक बनाया है।"

जलापूर्ति: "प्रदूषित पानी, भारत ही नहीं पूरे विश्व और खासकर गरीब और विकासशील देशों की बहुत बड़ी समस्या है। भारत में इस चुनौती से निपटने के लिए हम 17 करोड़ से अधिक घरों तक, पाइप से साफ पानी पहुंचाने का बहुत बड़ा अभियान चला रहे हैं।"

भारत और भारतीय: "दुनिया का हर छठा व्यक्ति भारतीय है। जब भारतीय प्रगति करते हैं, तो दुनिया के विकास को भी गति मिलती है। जब भारत बढ़ता है, तो दुनिया बढ़ती है। जब भारत सुधार करता है, तो दुनिया बदल जाती है।"

विज्ञान और तकनीक: "भारत में हो रहे विज्ञान और प्रौद्योगिकी आधारित नवाचार दुनिया में एक बड़ा योगदान दे सकते हैं। हमारे तकनीकी समाधानों का स्केल और उनकी कम लागत, दोनों अतुलनीय है। भारत में यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (यूपीआई) के जरिए हर महीने 3.5 अरब से ज्यादा ट्रांजेक्शन हो रहे हैं।"

यह भी पढ़ें :- खान को भारत का जवाब : पाकिस्तान 'आतंकवादियों का समर्थक, अल्पसंख्यकों का दमन करने वाला'

वैक्सीन : "मैं यूएनजीए को ये जानकारी देना चाहता हूं कि भारत ने दुनिया की पहली डीएनए वैक्सीन विकसित कर ली है, जिसे 12 साल की आयु से ज्यादा के सभी लोगों को लगाया जा सकता है। एक और एमआरएनए टीका विकास के अंतिम चरण में है।" निवेश का अवसर: "मैं दुनिया भर के वैक्सीन निमार्ताओं को भी निमंत्रण देता हूं। आओ, भारत में वैक्सीन बनाएं।"

आतंकवाद: "प्रतिगामी सोच वाले देश आतंकवाद को एक राजनीतिक उपकरण के रूप में उपयोग कर रहे हैं। इन देशों को यह समझना चाहिए कि आतंकवाद उनके लिए भी उतना ही बड़ा खतरा है। साथ ही, यह सुनिश्चित करना नितांत आवश्यक है कि अफगानिस्तान के क्षेत्र का उपयोग आतंकवाद फैलाने या आतंकवादी हमलों के लिए न हो।"

आतंकवाद से निपटने पर जोर देते हुए पीएम मोदी ने आगे कहा, "हमें इस बात के लिए भी सतर्क रहना होगा कि वहां की नाजुक स्थितियों का कोई देश, अपने स्वार्थ के लिए, एक टूल की तरह इस्तेमाल करने की कोशिश ना करे। इस समय अफगानिस्तान की जनता को, वहां की महिलाओं और बच्चों को, वहां के अल्पसंख्यकों को मदद की जरूरत है और इसमें हमें उन्हें सहायता प्रदान करके अपना दायित्व निभाना ही होगा।" (आईएएनएस-SM)


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भारत चीन सीमा पर बसे हुए गांव चिंता का विषय हैं। हैग्लोबल काउंटर टेररिज्म काउंसिल के सलाहकार बोर्ड ने एक बड़ी सूचना देते हुए बड़ा खुलासा किया है कि चीन ने भारत के साथ अपनी सीमा पर 680 'जियाओकांग' (समृद्ध या संपन्न गांव) बनाए हैं। ये गांव भारतीय ग्रामीणों को बेहतरीन चीनी जीवन की और प्रभावित करने के लिए हैं।

कृष्ण वर्मा, ग्लोबल काउंटर टेररिज्म काउंसिल के सलाहकार बोर्ड के एक सदस्य ने आईएएनएस को बताया, " ये उनकी ओर से खुफिया मुहिम और सुरक्षा अभियान है। वे लोगों को भारत विरोधी बनाने की कोशिश कर रहे हैं। इसलिए हम अपने पुलिस कर्मियों को इन प्रयासों के बारे में अभ्यास दे रहे हैं और उन्हें उनकी हरकतों का मुकाबले का सामना करने के लिए सक्षम बना रहे हैं। चीनी सरकार के द्वारा लगभग 680 संपन्न गांव का निर्माण किया जा चुका है। जो चीन और भूटान की सीमाओं पर हैं। इस गांव में चीन के स्थानीय नागरिक भारतीयों को प्रभावित करते है कि चीनी सरकार बहुत अच्छी है। शुक्रवार को भारत सरकार के पूर्व विशेष सचिव वर्मा गुजरात के गांधीनगर में राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय (आरआरयू) में 16 परिवीक्षाधीन उप अधीक्षकों (डीवाईएसपी) के लिए 12 दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम के समापन के अवसर पर एक कार्यक्रम में थे।

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