
गरुड़ पुराण क्या कहता है
गरुड़ पुराण (Garun Puran) में मौत के बाद की सज़ा बहुत साफ़ लिखी गई है। जब इंसान मरता है तो यमदूत उसकी आत्मा को ले जाते हैं। वहाँ यमराज (Yamraj) के दरबार में चित्रगुप्त (Chitragupta) सब कर्मों का हिसाब खोलते हैं।
जिसने अच्छे काम किए हों, वह स्वर्ग (Swarga) जाता है। जिसने बुरे काम किए हों, वह नरक (Nark) में जाता है। नरक में आत्मा को अलग-अलग तरीकों से सज़ा दी जाती है। किसी को गर्म तेल में तला जाता है, किसी को नदी के गंदे खून जैसे पानी को पार करना पढता है, किसी को आग में फेंका जाता है।
कर्मो का फल
इन सज़ाओं का मतलब है कि हर काम का फल मिलता है। अगर हम झूठ बोलेंगे, लालच करेंगे या दूसरों को दुख पहुंचाएंगे तो बाद में हमें ही दुख झेलना पड़ेगा। अगर हम दया करेंगे, सच बोलेंगे और मदद करेंगे तो हम खुश रहेंगे और हमे सुख की प्राप्ति होगी।
गरुड़ पुराण में मौत के बाद की सज़ा हमें यह सिखाती है कि भगवान गुस्सा नहीं करते। यह सब केवल हमारे कर्म का नतीजा है।
दूसरे धर्मों में भी इसका ज़िकर है
सिर्फ हिंदू धर्म (Hindu Dharma) ही नहीं, और भी धर्म यह मानते है की मौत के बाद सज़ा मिलती है। ईसाई धर्म में नर्क (Hell) की आग है। इस्लाम (Islam) में जहन्नु है, जहाँ प्यास और जलन होती है। बौद्ध (Buddha) धर्म में नरक लोक है, जहाँ बुरे कर्मो की सज़ा मिलता है।
इससे पता चलता है कि पूरी दुनिया में लोग मानते हैं, अच्छे काम का अच्छा फल और बुरे काम की बुरी सज़ा।
सच या तुलना?
आजकल कई लोग मानते हैं कि ये सब तुलना हैं, असली सज़ा नहीं। जैसे,
गरम तेल में जलना मतलब अंदर से पछतावा होना।
गंदी नदी पार करना मतलब अपने पापों का बोझ उठाना।
कीड़े काटना मतलब मन का चैन छिन जाना।
इस तरह गरुड़ पुराण में मौत के बाद की सज़ा हमें ये बताती है कि अगर समाज हमें माफ भी कर दे, हमारी आत्मा खुद हमें सज़ा देती है।
डरावनी कहानी जैसा
सोचिए, यमदूत आत्मा को जंजीरों में बाँधकर घसीटते हैं। वह चिल्लाती है लेकिन कोई सुनता नहीं। फिर उसे खौलते तेल में डाल दिया जाता है। उसके बाद उसे गंदे खून से भरी नदी में धकेल दिया जाता है, जहाँ डरावने जीव काटते हैं।
गरुड़ पुराण (Garun Puran) में मौत के बाद की सज़ा ऐसे ही लिखी है। यह सुनकर डर लगता है, लेकिन इसका मकसद साफ है, बुरा मत करो, वरना बुरा ही मिलेगा।
निष्कर्ष
तो क्या सच में मौत के बाद सज़ा मिलती है? यह नज़रिए पर है। आस्तिक लोग इसे सच्चाई मानते हैं। कुछ लोग इसे कर्म का सबक मानते हैं। कुछ इसे कहानी समझते हैं।
लेकिन एक बात साफ है, कर्म ही भविष्य बनाते हैं। गरुड़ पुराण (Garun Puran) में मौत के बाद की सज़ा हमें यही सिखाती है कि हमारा किया हुआ कभी बेकार नहीं जाता। अच्छे कर्म सुख देंगे, बुरे कर्म दुख देंगे। (Rh/Eth/BA)