Never miss a story

Get subscribed to our newsletter


×
टेक्नोलॉजी

शोधकर्ताओं ने चंद्रमा पर 1,09,000 से अधिक प्रभावी क्रेटर्स की पहचान की

चांग-1 और चांग-2 चंद्र जांच द्वारा एकत्र किए गए आंकड़ों के संयोजन से शोधकर्ताओं ने 109,956 नए प्रभावी क्रेटर्स की पहचान की , जिनकी पहले पहचान नहीं की गई थी।

चंद्रमा पर 1,09,000 से ज़्यादा प्रभावी क्रेटर्स है । (Pinterest )

शोधकर्ताओं के एक अंतर्राष्ट्रीय दल ने मशीन लर्निग तरीकों का उपयोग कर चंद्रमा पर 109,000 प्रभावी क्रेटर्स की पहचान की है, जिनकी पहले पहचान नहीं की गई थी। जिलिन विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं के नेतृत्व में किए गए इस अध्ययन के बारे में नेचर कम्युनिकेशंस पत्रिका में प्रकाशित किया गया था। प्रभावी क्रेटर्स चंद्र सतह की सबसे प्रमुख विशेषता है और चंद्रमा की सतह के अधिकांश भाग पर इनका कब्जा रहता है।

पारंपरिक ऑटोमेटिक आइडेंटिफिकेशन तरीके के साथ आमतौर पर अनियमित और गंभीर रूप से डीग्रेडेड प्रभाव वाले क्रेटर्स का पता लगाना मुश्किल होता है। समाचार एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, क्रेटर्स की पहचान करने और उनकी उम्र का अनुमान लगाने के लिए, शोधकर्ताओं ने एक स्थानांतरण शिक्षण पद्धति लागू की और पहले से पहचाने गए क्रेटर्स के आंकड़ों के साथ गहरे न्यूरल नेटवर्क को प्रशिक्षित किया।


पूरा चंद्रमा । (Pinterest)

चीन के चांग-1 और चांग-2 चंद्र जांच द्वारा एकत्र किए गए आंकड़ों के संयोजन से शोधकर्ताओं ने 109,956 नए प्रभावी क्रेटर्स की पहचान की। उन्होंने 18,996 नए खोजे गए क्रेटरों की उम्र का भी अनुमान लगाया, जिनका व्यास 8 किलोमीटर से ज्यादा है। शोधकर्ताओं में से एक जिलिन यूनिवर्सिटी के यांग चेन ने कहा कि चंद्रमा पर वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए चांद क्रेटर डेटाबेस का बहुत महत्व है।

यह भी पढ़ें : आईआईटी दिल्ली ने किया शाकाहारी अंडे का आविष्कार

यांग ने कहा, “अपनाई गई रणनीति को गड्ढा अध्ययन में सहायता के लिए लागू किया जा सकता है, जो ग्रह अनुसंधान के लिए विश्वसनीय सुझाव देता है।” यांग ने कहा कि इस अनुसंधान मॉडल को चांग-5 जांच स्थल पर छोटे प्रभाव वाले गड्ढों की पहचान के लिए लागू किया गया है। (आईएएनएस)

Popular

गामी पांच राज्यों में होने वाले चुनाव का बिगुल बज गया है और अब भाजपा जीत के लिए वापस से उनके मोदी नामक "ट्रम्प कार्ड" का इस्तेमाल करेगी। (Wikimedia Commons)

अगले साल फरवरी-मार्च में होने वाले चुनावों का बिगुल बज चूका है। पाँचों राज्यों में चुनाव जीतने के लिए राजनितिक पार्टियां रणनीति बनाने में लगी। इन पांचों राज्यों में सबसे बड़ी नज़र भाजपा(Bhajpa) पर होगी क्योंकि पांच राज्यों में से तीन राज्यों में उसकी सत्ता है। पांच राज्यों में से उत्तराखंड(Uttarakhand) में भी चुनाव होने हैं जहां भाजपा ने इस साल 3 मुख्यमंत्री बदल दिए हैं। वर्तमान में मुख्यमंत्री पुष्कर धामी(Pushkar Dhami) हैं जिन्हे आए हुए कुछ ही महीने हुए हैं ऐसे में भाजपा के लिए उत्तराखंड का पूरा चुनाव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर आ गया है।

सैन्य बाहुल्य राज्य उत्तराखंड में पिछले पांच सालों में नरेंद्र मोदी(Narendra Modi) की ऐसी छवि बन चुकी जिसे विपक्ष के लिए फिलहाल तोडना ना मुमकिन है। पिछले चुनाव में कांग्रेस में हुई बगावत और मोदी का जादू ही वो वजह था जिसने राज्य की 70 सीटों में से 57 सीटें भाजपा की झोली में दाल दी थी।

Keep Reading Show less

देश में अब तक ओमीक्रोन से संक्रमित दो मरीज मिल चुके हैं। [pixabay]

दुनिया में तेजी से फैल रहे कोरोना के नए वेरिएंट ओमीक्रोन ने अब भारत में भी दस्तक दे दी है। मामले की गंभीरता आप इस बात से समझ सकते हैं कि देश के टॉप साइंटिस्ट ने शुक्रवार को यह चेतावनी तक दे दी है कि यह वेरिएंट देश में तीसरी लहर ला सकता है। बता दें कि देश में अब तक ओमीक्रोन से संक्रमित दो मरीज मिल चुके हैं। ये दोनों मरीज कर्नाटक से हैं। इनमे से एक शख्स 66 साल का विदेशी है जो 20 नवंबर को बैंगलुरु आया था। कोरोना टेस्ट पॉजिटिव आने के बाद इसे प्राइवेट होटल में आइसोलेट कर दिया गया, जिसके बाद 27 नवंबर को ये शख्स दुबई लौट गया। वहीं 46 साल का जो दूसरा शख्स ओमिक्रॉन वेरिएंट से प्रभावित है, वो स्थानीय है और 22 नवंबर को ये पॉजिटिव पाया गया था। फिलहाल इनके संपर्क में आए लोगों के सैंपल जीनोम सिक्वेंसिंग (Genome Sequencing) के लिए भेजे गए हैं। अब आइये जानते हैं कि क्या होती है जीनोम सिक्वेंसिंग।

जीनोम सिक्वेंसिंग क्या है ?

Keep Reading Show less

हेल्थ स्टार्टअप्स ने भारत के सेकेंडरी केयर सर्जरी मार्केट का लाभ उठाया। [IANS]

हेल्थकेयर स्टार्टअप्स (Healthcare Startups) ने भारत में स्वास्थ्य देखभाल की सुविधाओं पर विशेष ध्यान देने के साथ देश में सेकेंडरी केयर सर्जरी बाजार में तेजी ला दी है। सर्जरी स्वास्थ्य देखभाल खर्च और सेकेंडरी केयर सर्जरी के साथ बढ़ते बाजार का सबसे बड़ा हिस्सा है।

प्रिस्टिन केयर, प्रैक्टो और मिरास्केयर जैसे हेल्थकेयर स्टार्टअप्स ने ऐसे तकनीकी प्लेटफॉर्म तैयार किए हैं, जो सस्ते दामों पर डॉक्टरों, ग्राहकों और अस्पतालों को जोड़ते हैं।

ये स्टार्टअप (Healthcare Startups) ऑनलाइन चिकित्सा सलाह प्रदान करते हैं और उसके बाद यदि आवश्यक हो तो देशभर के छोटे अस्पतालों में हर्निया, बवासीर, पित्त पथरी आदि जैसी बीमारियों के लिए गैर-महत्वपूर्ण न्यूनतम इनवेसिव सर्जरी की जरूरत होती है, जो महानगरों के बड़े अस्पतालों की तुलना में कम क्षमता पर चलते हैं।

प्रिस्टिन केयर (Pristyn Care), जो जनवरी 2021 से लगभग पांच गुना बढ़ चुका है, इस क्षेत्र में अग्रणी है। इसमें 80 से अधिक क्लीनिकों, 400 से अधिक साझेदार अस्पतालों और 140 से अधिक इन-हाउस सुपर स्पेशियलिटी सर्जनों का एक पारिस्थितिकी तंत्र है। यह देशभर के 22 से अधिक शहरों में काम करता है।

हाल ही में आए मिरास्केयर क्लीनिक एंड सेंटर भी उन्नत सामान्य, लेप्रोस्कोपिक सर्जरी और प्रोक्टोलॉजी में उपचार की एक सीरीज प्रदान करता है।

Memorial Hospital Central, hopitals in india, online health facilities पूरे भारत में 2,000 बड़े आकार के अस्पतालों में पहले से ही ऐसी सुविधाएं हैं। [Wikimedia Commons]

Keep reading... Show less