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राजनीति

राजद अपनी ‘लालटेन’ से एनडीए में आग भड़काने की जुगाड में!

चारा घोटाले में लंबे समय तक जेल में रहने के बाद लालू प्रसाद जमानत मिलने के बाद जेल से बाहर आ गए है, ऐसे में राजद कार्यकतार्ओं का भी उत्साह भी चरम पर है।

कोरोना काल में विपक्ष बिहार में तख्तापलट के जुगाड़ लगा रहा है।(Wikimedia Commons)

By : मनोज पाठक

बिहार में कोरोना संक्रमण की रफ्तार कम होते ही राज्य की सियासत में बयानबाजी की गति तेज हो गई है। विपक्ष जहां राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) में लगी आग को हवा देने की कोशिश में जुटा है, वहीं राजग के अंदर हो रही बयानबाजी ने सियासत की गर्मी को और बढा दिया है। विपक्ष में सबसे बड़ी पार्टी राष्ट्रीय जनता दल (राजद) इस मौके को हाथ से नहीं जाना देने चाह रही है। यही कारण है कि वह भी ”तख्तापलट” की रणनीति में जुटा नजर आ रहा है।


चारा घोटाले में लंबे समय तक जेल में रहने के बाद लालू प्रसाद जमानत मिलने के बाद जेल से बाहर आ गए है, ऐसे में राजद कार्यकतार्ओं का भी उत्साह भी चरम पर है। कहा जा रहा है कि कोरोना संक्रमण के कम होने तथा लॉकडाउन समाप्त होने के बाद लालू प्रसाद बिहार पहुंचेंगे, फिलहाल वे दिल्ली में हैें।

राजद के विधायक भाई वीरेंद्र दावा करते हुए कहते हैं, ” पार्टी के अध्यक्ष लालू प्रसाद की बिहार वापसी के बाद राज्य की सियासत बदलेगी। उन्होंने कहा कि लॉकडाउन खत्म होने का इंतजार किया जा रहा है। राजद अध्यक्ष के आते ही राज्य में राजनीतिक गतिविधियां बढ़ेंगी और बहुत जल्द बिहार में महागठबंधन की सरकार भी बनेगी।”

इधर, नीति आयोग की रिपोर्ट में बिहार के फिसड्डी आने के बाद जदयू के नेताओं ने विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग को फिर से उठाकर यह साफ संदेश दे दिया है कि इसके लिए केवल नीतीश कुमार पर ही ठीकरा फोड़ने नहीं दिया जाएगा। इधर, राजद ने इस मामले को लेकर भी हवा देने में जुटी है।

आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव एवं बिहार के मुख्यमंत्री नितीश कुमार।(Wikimedia Commons )

राजद इस मामले को लेकर नीतीश को साथ आने का न्योता तक दे दिया है। राजद के प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने कहा, ” कुर्सी का मोह छोड़कर लालू प्रसाद और तेजस्वी यादव विशेष दर्जे की लड़ाई लड़ते रहे हैं। नीतीश कुमार को वाकई बिहार की चिंता है तो वे हमारी लड़ाई को मजबूत करें। ”

उन्होंने कहा कि कि बिहार के लिए विषेष राज्य का दर्जा आवश्यक है।

इधर, सरकार में शामिल हिेंदुस्तानी अवाम मोर्चा के प्रमुख जीतन राम मांझी भी रह-रहकर अपनी सरकार को आंख दिखाने से नहीं चुक रहे हैं।

यह भी पढ़ें: दिल्ली कोरोना से ठप, केजरीवाल विज्ञापन में मस्त!

उल्लेखनीय है कि पिछले साल हुए विधानसभा चुनाव में राजग में ष्षामिल बडे दलों भाजपा और जदयू के साथ हिेंदुस्तानी अवाम मोर्चा और विकासषील इंसान पार्टी साथ में चुनाव मैदान में उतरी थी। राजग को सरकार बनाने लायक संख्या बड़ी मुश्किल से मिली है। दो बड़े घटक दलों को सरकार चलाने के लिए छोटे दलों की आवश्यकता है।

इधर, जदयू के निखिल मंडल कहते हैं, ” विपक्ष ख्याली पुलाव पका रही है, तो इस पर कुछ कहा नहीं जा सकता है। राजग एकजुट है और नीतीश कुमार बिहार में नेता हैं। विपक्षी दलों का बिहार में यह सपना पूरा नहीं होने वाला है, लेकिन सपने देखने से किसी को रोका भी नहीं जा सकता है। ”

बहरहाल, मौसम की गर्मी के साथ ही राज्य की सियासत गर्म है । लालू प्रसाद की बिहार वापसी के बाद तय है कि यह सियासत और गर्म होगी।(आईएएनएस-SHM)

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आईपीएल में रॉयल चेलेंजर्स बेंगलोर (आरसीबी) का एक मैच (wikimedia commons)

भारत के क्रिकेट टीम के कप्तान और दिग्गज बल्लेबाज विराट कोहली ने एक के बाद टीम से अपनी कप्तानी छोड़ने का जैसे ऐलान किया वैसे हि , उनके चाहने वाले , प्रशंसकों और साथी खिलाडियों ने अपनीं प्रतिक्रिया देना शुरू कर दी । इसी बीच दक्षिण अफ्रीका के पूर्व तेज गेंदबाज डेल स्टेन का कहना है कि आईपीएल की टीम का नेतृत्व करने का दबाव और युवा परिवार का होना रॉयल चेलेंजर्स बेंगलोर (आरसीबी) के कप्तान विराट कोहली के इस आईपीएल के बाद टीम की कप्तानी छोड़ने के फैसले का कारण हो सकता है। आरसीबी की टीम की और से रविवार की देर रात यह घोषणा की गई , कि विराट कोहली आईपीएल 2021 सीजन के बाद टीम की कप्तानी छोड़ देंगे । इस के पहले कोहली ने कुछ दिन पहले ही टी20 विश्व कप के बाद भारतीय टीम के टी20 प्रारूप की कप्तानी छोड़ने का भी फैसला किया था।


डेल स्टेन ने आगे कहा कि, " विराट कोहली आरसीबी टीम के साथ शुरू से जुड़े हैं। मुझे नहीं पता, जैसे-जैसे जीवन आगे बढ़ता है आप चीजों को प्राथमिकता देने लगते हैं। कोहली का नया यूवा परिवार है । उन्हें अपनी पर्शनल लाइफ भी देखना है ।
डेल ने यह भी कहा कि , "हो सकता है, उस जिम्मेदारी (कप्तानी) से थोड़ा सा त्याग करना और सिर्फ अपनी बल्लेबाजी पर ध्यान केंद्रित करने में सक्षम होना उनके करियर के लिए इस समय एक अच्छा निर्णय है।"

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दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी में शुमार अमेजन को लेकर एक बहुत बड़ी खबर सामने आई है । द मॉर्निग कॉन्टेक्स्ट की रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया के सबसे बड़े ऑनलाइन रिटेलर अमेजन ने भारत में अपने कानूनी प्रतिनिधियों के आचरण की जांच शुरू कर दी है। एक व्हिसलब्लोअर शिकायत के आधार पर यह जांच हुई है जिसमें आरोप लगाया गया है कि अमेजन द्वारा कानूनी शुल्क में भुगतान किए गए कुछ पैसे को उसके एक या अधिक कानूनी प्रतिनिधियों द्वारा घूस में बदल दिया गया है।

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कई सवालों के एक विस्तृत सेट के जवाब में, अमेजन के प्रवक्ता ने कहा, "भ्रष्टाचार के लिए हमारे पास शून्य सहनशीलता है। हम अनुचित कार्यो के आरोपों को गंभीरता से लेते हैं, उनकी पूरी जांच करते हैं, और उचित कार्रवाई करते हैं। हम विशिष्ट आरोपों या किसी की स्थिति पर इस समय जांच या टिप्पणी नहीं कर रहे हैं इस समय जांच।"

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भारतीय जनता पार्टी भाजपा का चुनावी चिन्ह (wikimedia commons)

अभी-अभी भारत के पंजाब राज्य में एक बड़ी राजनेतिक घटना घटी जब वंहा का मुख्यमंत्री ने इस्तीफा दिया और सत्ता दल पार्टी ने राज्य ने नया मुख्यमंत्री बनाया । पंजाब में एक दलित को मुख्यमंत्री बना कर कांग्रेस ने एक बड़ी सियासी चाल खेल दी है। अब कांग्रेस इसका फायदा अगले साल होने जा रहे राज्यों के विधानसभा चुनाव में उठाने की रणनीति पर भी काम करने जा रही है । उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के सियासी पारे को गरम कर दिया है कांग्रेस की इस मंशा ने।

कांग्रेस नेता हरीश रावत जो कि पंजाब में दलित सीएम के नाम का ऐलान करने वाले वो उत्तराखंड से ही आते हैं, अतीत में प्रदेश के मुख्यमंत्री रह चुके हैं और आगे भविष्य में भी सीएम पद के दावेदार हैं, इसलिए बात पहले इस पहाड़ी राज्य के सियासी तापमान की करते हैं। साढ़े चार साल के कार्यकाल में भाजपा राज्य में अपने दो मुख्यमंत्री को हटा चुकी है और अब तीसरे मुख्यमंत्री के सहारे राज्य में चुनाव जीतकर दोबारा सरकार बनाना चाहती है। इसलिए भाजपा इस बात को बखूबी समझती है कि हरीश रावत उत्तराखंड में तो इस मुद्दें को भुनाएंगे ही।

बात करे उत्तराखंड राज्य कि तो यहा पर आमतौर पर ठाकुर और ब्राह्मण जाति ही सत्ता के केंद्र में रहती है, लेकिन अब समय बदल रहा है राजनीतिक दल भी दलितों को लुभाने का विशेष प्रयास कर रहे हैं। दरअसल, उत्तराखंड राज्य में 70 विधानसभा सीट आती है , जिसमें 13 सीट अनुसूचित जाति और 2 सीट अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित है। मसला सिर्फ 13 आरक्षित सीट भर का ही नहीं है। उत्तराखंड राज्य के 17 प्रतिशत से अधिक दलित मतदाता 22 विधानसभा सीटों पर जीत-हार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और इसके साथ ही कुल 36 सीटों पर जीत हासिल करने वाली पार्टी राज्य में सरकार बना लेती है।

brahmin in uttrakhand उत्तराखंड राज्य में 70 विधानसभा सीट आती है (wikimedia commons)

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