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देश से उखाड़ फेकनी है विषमता, हमारे आचरण में आए संविधान की प्रस्तावना : मोहन भागवत

देश में सामाजिक समरसता के लिए चल रहे अभियान को लेकर कहा कि क्रांति से परिवर्तन नहीं आता, परिवर्तन लाने के लिए संक्रांति चाहिए।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत। (फाइल फोटो)

By: नवनीत मिश्र

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने देश की जनता से समाज में फैली विषमता को उखाड़ फेकने की अहम अपील की है। उन्होंने लोगों से संविधान की प्रस्तावना के अनुरूप आचरण पर जोर दिया है। देश में सामाजिक समरसता के लिए चल रहे अभियान को लेकर कहा कि क्रांति से परिवर्तन नहीं आता, परिवर्तन लाने के लिए संक्रांति चाहिए।


संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने बुधवार को दत्तोपंत ठेंगड़ी स्मृति व्याख्यान को संबोधित करते हुए कहा, “राजनीतिक उल्लू सीधा करने के लिए कुछ लोग समाज के दोषों को आधार बनाकर समाज में दूरियां बढ़ाने और झगड़े लगाने का काम कर रहे हैं। ऐसे लोग भ्रम का जाल उत्पन्न करते हैं। इनसे सावधान रहना होगा। सामाजिक समरसता का काम करने वालों की जिम्मेदारी है कि देश का समाज दोष मुक्त हो कर एक बने। संविधान की प्रस्तावना सब लोगों के आचरण में आए। सामाजिक समरसता का काम करने वालों की यह परीक्षा है।”

सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा, “हमारे यहां कम से कम पानी, मंदिर और श्मशान में कोई भेद नहीं होता। इसको लेकर हमको पूछने की जरूरत ही नहीं है। संघ ने इस दिशा में एक बड़ी लाइन खींचने का काम किया है। सामाजिक विषमता नहीं रहेगी, यह राष्ट्रीय लक्ष्य है। सबको इस दिशा में प्रयास करना होगा। विषमता हटनी चाहिए, यह सब चाहते हैं।”

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मोहन भागवत ने कहा, “हम सब एक हैं। अपने स्वार्थ के कारण एक दूसरे को ऊंच-नीच कर दूर रखा गया। हमें उस कलंक को हटाना है। हम एक हैं, हमको एक होना है। विषमता बहुत दिनों की बीमारी है, बुद्धि से जाएगी। विषमता धर्म नहीं हो सकती।”

संघ के सरसंघचालक ने समाज में द्वेष फैलाने वालों से सावधान रहने की अपील की। उन्होंने कहा, “सारा समाज अपना है। सारी विविधताओं को साथ लेते हुए एक माता के पुत्र के नाते, एक राष्ट्र के राष्ट्रीय घटक के नाते हमें राष्ट्र के लिए एक साथ खड़े होना है। ऐसा नहीं करेंगे तो फिर से यह स्वातं˜य चला जाएगा। बाबा साहब की मशाल हाथ में लेकर हमें काम करना चाहिए।”(आईएएनएस)

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रिपोर्ट के अनुसार, एप्पल छोटी और लंबी दूरी के वायरलेस चाजिर्ंग उपकरणों पर काम कर रहा है। (Pixabay)

एप्पल (Apple) कथित तौर पर एक ऐसे चार्जर पर काम कर रहा है जो एक साथ कई डिवाइस, एक आईफोन, एयरपोड्स और वॉच को पावर दे सकता है।

मैकरियूमर्स की रिपोर्ट के अनुसार, 'पावर ऑन' न्यूजलेटर के लेटेस्ट एडीशन में मार्क गुरमन ने कंपनी की भविष्य की वायरलेस चाजिर्ंग तकनीक के बारे में कुछ दिलचस्प जानकारी का खुलासा किया।

उन्होंने लिखा, "मेरा यह भी मानना है कि एप्पल (Apple) छोटी और लंबी दूरी के वायरलेस चाजिर्ंग उपकरणों पर काम कर रहा है और यह एक ऐसे भविष्य की कल्पना करता है जहां एप्पल के सभी प्रमुख उपकरण एक-दूसरे को चार्ज कर सकते हैं। कल्पना कीजिए कि एक आईपैड एक आईफोन चार्ज कर रहा है और फिर वह आईफोन एयरपोड्स या एक एप्पल घड़ी चार्ज कर रहा है।"

apple , wireless charger, Iphone, iPod Chargers एप्पल कथित तौर पर एक ऐसे चार्जर पर काम कर रहा है जो एक साथ कई डिवाइस को पावर दे सकता है। [Wikimedia Commons]

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झारखंड के नोआमुंडी में खदान की कमान महिलाओं के हाथ में सौंपेगी टाटा स्टील कंपनी। [Wikimedia Commons]

टाटा स्टील (Tata Steel) कंपनी झारखंड में लौह अयस्क की एक खदान की कमान पूरी तरह महिलाओं के हाथ में होगी। फावड़ा से लेकर ड्रिलिंग तक और डंपर चलाने से लेकर डोजर-शॉवेल जैसी हेवी मशीनों का संचालन कुशल महिला कामगारों के द्वारा किया जाएगा। नये साल यानी 2022 में पश्चिम सिंहभूम जिले की नोआमुंडी आयरन ओर माइन्स को पूरी तरह महिलाओं के हाथ में सौंपने की तैयारी पूरी कर ली गयी है। ऐसा प्रयोग देश में पहली बार हो रहा है।

टाटा स्टील (Tata Steel) के आयरन ओर एंड क्वेरीज डिविजन के महाप्रबंधक ए. के. भटनागर ने पत्रकारों को बताया कि नोआमुंडी स्थित कंपनी की आयरन ओर माइन्स में सभी शिफ्टों के लिए 30 सदस्यों वाली महिलाओं की टीम की तैनाती की जा रही है। खदान को स्वतंत्र रूप से महिलाओं के हाथों संचालित करने का यह टास्क कंपनी ने महिला सशक्तीकरण की परियोजना तेजस्विनी-2.0 के तहत लिया था और अब इसे सफलतापूर्वक लागू करने की तैयारियां पूरी कर ली गयी हैं।

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इस साल देश में हिरासत में कुल 151 मौतें हुई हैं। (सांकेतिक चित्र, File Photo )

इस साल देश में हिरासत(police custody)में कुल 151 मौतें हुई हैं। केंद्र ने लोकसभा(Loksabha) में मंगलवार को यह जानकारी दी। बीजेपी सांसद वरुण गांधी के सवाल का जवाब देते हुए गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय(Nityanand Rai)ने कहा कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के मुताबिक 15 नवंबर तक पुलिस हिरासत में मौत के 151 मामले दर्ज किए गए हैं।

महाराष्ट्र में पुलिस हिरासत(police custody) में सबसे अधिक (26) मौतें हुईं हैं, उसके बाद गुजरात (21) और बिहार (18) का स्थान रहा है। उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में पुलिस हिरासत में 11-11 लोगों की मौत की खबर है।

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