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मनोरंजन

अगर आप छोटे शहर से हैं तो बॉलीवुड में जगह बनाना मुश्किल होता है: रूही सिंह

एक्ट्रेस और इंफ्लुएंसर रूही सिंह का कहना है कि एक बाहरी व्यक्ति को अगर बॉलीवुड में काम करना है, तो उसका मानसिक रूप से मजबूत होना बहुत जरूरी है।

एक्ट्रेस रूही सिंह।(Facebook, Ruhi Singh)

एक्ट्रेस और इंफ्लुएंसर रूही सिंह का कहना है कि अगर आपके पास राइट बैक नहीं है,तो बॉलीवुड में अपनी पहचान बनाना मुश्किल है। रूही ‘कैलेंडर गर्ल्स’ और ‘इश्क फॉरएवर’ जैसा फिल्मों के साथ ही ‘स्पॉटलाइट’, ‘बैंग बैंग’ और ‘चक्रव्यूह’ जैसी वेब सीरीज में भी काम कर चुकी है, उनका कहना है कि एक बाहरी व्यक्ति को अगर बॉलीवुड में काम करना है, तो उसका मानसिक रूप से मजबूत होना बहुत जरूरी है। जयपुर की रहने वाली रूही ने आईएएनएस से कहा, “बॉलीवुड में अपने लिए जगह बनाना बहुत कठिन है, खासकर तब, जब आप मेरे जैसे छोटे शहर से आते हैं। और आप एक सेल्फमेड पर्सन होने के साथ ही अपनी शर्तों पर काम करते है। रूही खुद को वन वोमन आर्मी कहती है”

उन्होंने कहा, “मैं इसे सरल रखने में विश्वास करता हूं, मैं ऑडिशन के दौरान अपना बेस्ट शॉट देती हूं और आशा करती हूं कि कोई मुझमें स्पार्क देखे और मुझ पर विश्वास करे। यह कहना काफी आसान होता है कि बस हो गया, लेकिन यहां आपको मानसिक रूप से मजबूत होना पड़ता है। मुझे पता है कि मैं परफेक्ट नहीं हूं और मैं लगातार कड़ी मेहनत कर रही हूं। मुझे लगता है कि अगर आपके पास प्रतिभा और कौशल है, तो आपको अवसर जरूर मिलेगा।


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अपनी आने वाली वेब सीरीज ‘रनवे लुगाई’ के बारे में बात करते हुए, रूही कहती है, मैं अभी ‘रनवे लुगाई’ के बारे में बात नहीं कर सकती हूं । क्योंकि मुझे इसकी परमिशन नहीं है, लेकिन मैं इतना कह सकती हूं कि यह बहुत ही एंटरटेनिंग सीरीज होगी। और मुझे खुद इसमे काम करने में बहुत मजा आया। वह कहती है कि मैंने पहले कभी ऐसी सीरीज में काम नहीं किया और मैं इसे पब्लिक डोमेन में देखने का और इंतजार नहीं कर सकती।”(आईएएनएस-PK)

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एक सूत्र ने कहा कि आरडीएक्स-आधारित इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (IED), जो 14 जनवरी को पूर्वी दिल्ली के गाजीपुर फूल बाजार में पाया गया था और उसमें "एबीसीडी स्विच" और एक प्रोग्राम करने योग्य टाइमर डिवाइस होने का संदेह था।

कश्मीर और अफगानिस्तान में सक्रिय जिहादी आतंकवादियों द्वारा लगाए गए आईईडी में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किए जाने वाले इन स्विच का पाकिस्तान(Pakistan) सबसे बड़ा निर्माता है। सूत्र ने कहा कि इन फोर-वे स्विच और टाइमर का उपयोग करके विस्फोट का समय कुछ मिनटों से लेकर छह महीने तक के लिए सेट किया जा सकता है।

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दक्षिणी दिल्ली नगर निगम(South Delhi Municipal Corporation) में भाजपा के मुनिरका वार्ड से पार्षद भगत सिंह टोकस ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द(Ramnath Kovind) को एक पत्र लिखकर राष्ट्रपति भवन(Rashtrapati Bhavan) में स्थित मुगल गार्डन का नाम बदल कर पूर्व राष्ट्रपति मिसाइल मैन डाक्टर अब्दुल कलाम वाटिका(Abdul Kalam Vatika) के नाम पर रखने की मांग की है। निगम पार्षद भगत सिंह टोकस ने राष्ट्रपति को भेजे अपने पत्र में लिखा है, मुगल काल में मुगलों द्वारा पूरे भारत में जिस प्रकार से आक्रमण किए गए और देश को लूटा था। वहीं देशभर में मुगल आक्रांताओं के नाम से लोगों में रोष हैं। जिन्होंने भारत की संस्कृति को खत्म करने का प्रयास किया उनको प्रचारित न किया जाए।

rastrapati bhavan, mughal garden राष्ट्रपति भवन स्थित मुगल गार्डन (Wikimedia Commons)

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कोविड के खिलाफ नियमित टीकाकरण के अलावा दुनिया भर में अन्य प्रकार की दवाईयों पर अनेक संस्थायें रिसर्च कर रही हैं जो मानव शरीर पर इस विषाणु के आक्रमण को रोक सकती है। इसी क्रम में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मंडी के शोधकर्ताओं को एक बड़ी सफलता मिली है। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मंडी के शोधकर्ताओं ने एक हिमालयी पौधे की पंखुड़ियों में फाइटोकेमिकल्स की खोज की है जो कोविड संक्रमण के इलाज में करगर साबित हो सकती है।

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मंडी में स्कूल ऑफ बेसिक साइंस के बायोएक्स सेंटर के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. श्याम कुमार मसाकापल्ली के तर्ज पर एक वक्तव्य में कहा की, अलग अलग तरह के चिकित्सीय एजेंटों में पौधों से प्राप्त रसायनों फाइटोकेमिकल्स को उनकी क्रियात्मक गतिविधि और कम विषाक्तता के कारण विशेष रूप से आशाजनक माना जाता है। टीम ने हिमालयी बुरांश पौधे की पंखुड़ियों में इन रसायनों का पता लगया है। पौधे का वैज्ञानिक नाम रोडोडेंड्रोन अर्बोरियम है जिसे वहाँ के स्थानीय लोग अलग अलग तरह की बीमारियों में इसका इस्तेमाल करते हैं।

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