Saturday, August 15, 2020
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राजस्थान में गिर सकती है गहलोत सरकार? सचिन पायलट का विद्रोह बदल सकता है राजस्थान का राजनीतिक हिसाब

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और उप मुख्यमंत्री व प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सचिन पायलट के बीच तनातनी इतनी बढ़ गयी है की अब राजस्थान की सरकार की गिरने की नौबत आ गयी है। जानकारी के मुताबिक, सचिन पायलट अपने 25 समर्थक विधायकों के साथ दिल्ली पहुँच गए हैं। खबर है की उन्हे गुड़गाँव के आईटीसी ग्रैंड होटल में रखा गया है। इसी बीच आज सचिन पायलट, काँग्रेस की अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाक़ात कर सकते हैं। 

इससे पहले जयपुर में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपने मंत्रियों की बैठक बुलाई थी, जिसमें सचिन पायलट नहीं पहुंचे थे। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का आरोप है कि भाजपा लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई सरकार को उखाड़ने की कोशिश कर रही है और काँग्रेसी विधायकों को 25-25 करोड़ का लालच दिया जा रहा है। राजस्थान पुलिस ने इस पर कार्रवाई करते हुए बीते दिनों दो लोगों को गिरफ्तार भी किया था।

गहलोत ने अपने राजनीतिक कौशल से पूर्व सीएम स्व.हरिदेव जोशी,स्व.शिवचरण माथुर,दिग्गज जाट नेता पारसराम मदेरणा,चंदन माल बैद और पंडित नवल किशोर शर्मा को दरकिनार कर पहले भी दो बार मुख्यमंत्री पद की कुर्सी संभाल चुके हैं। प्रदेश में जातिगत आधार होने के बावजूद ये नेता गहलोत के राजनीतिक कौशल से मात खा गए तो वहीं राजस्थान काँग्रेस में गहलोत का राज कायम रहा। 

2018 में तीसरी बार मुख्यमंत्री पद की कुर्सी संभालने वाले गहलोत को सचिन पायलट से शुरू से ही चुनौती मिल रही थी। राजस्थान में चुनाव जीतने के बाद भी काँग्रेस कई दिनों तक मुख्यमंत्री का चुनाव नहीं कर सकी थी, वजह था, सचिन पायलट और अशोक गहलोत के बीच चलने वाला सत्ता संघर्ष।

आखिर में अशोक गहलोत को राजस्थान का मुख्यमंत्री और सचिन पायलट को उप मुख्यमंत्री चुना गया था। वैसे तो गहलोत कुर्सी पर बैठने में कामयाब हो गए, लेकिन 18 माह के कार्यकाल में उन्हे सचिन पायलट के विद्रोह का डर भी सताता रहा। 

दबी आवाज़ में उठते रहे विद्रोह के सुर- 

  • राजस्थान में राज्यसभा टिकट तय होने के बाद पायलट का कहना था कि ऐसे नेता को राज्यसभा में भेजा जाना चाहिए, जिसकी दलित वर्ग में पकड़ हो और उसका पार्टी को आगामी समय में लाभ मिल सके।
  • कई अवसर ऐसे आए जब पायलट ने अपनी ही सरकार को घेरा था। चाहे कोटा में बच्चों की मौत का मामला हो या फिर बाड़मेर,नागौर में दलितों के साथ मार पीट का प्रकरण हो,पायलट, सरकार को घेरने में पीछे नहीं हटे। 
  • विधायकों एवं कांग्रेस कार्यकर्ताओं की सरकार में सुनवाई नहीं होने के मुद्दे को लेकर भी पायलट ने सार्वजनिक रूप से आलोचना की थी।
  • गहलोत-पायलट के बीच की खींचतान प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में राजीव गांधी की 75वीं जयंती के मौके पर भी दिखी थी। पायलट ने कहा कि राजीव गांधी भी प्रधानमंत्री होते हुए संगठन को तवज्जो देते थे, उसी तरह से हमें भी संगठन को तवज्जो देनी चाहिए।
  • राज्य विधानसभा में डिप्टी सीएम पायलट ने अपने 40 मिनट लंबे भाषण के दौरान एक बार भी मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का नाम नहीं लिया था। 
  • पायलट एकमात्र प्रदेश के ऐसे नेता है,जिन्होंने पिछले तीन दशक में गहलोत को चुनौती दी है। पिछले कुछ समय से सरकार से जुड़े विभिन्न फ़ैसलों में खुद को दरकिनार किए जाने से पायलट नाराज़ चल रहे हैं। वे अपनी नाराज़गी कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और राहुल गांधी तक पहुंचा चुके हैं।

सार्वजनिक जगहों पर अशोक गहलोत द्वारा जताई गयी आपत्ति

  • गहलोत ने पायलट का नाम लिए बिना शनिवार को कटाक्ष करते हुए कहा था कि जब एक बार मुख्यमंत्री बन गया, तो बाकी लोगों को शांत हो जाना चाहिए और काम करना चाहिए ।
  • 30 नवंबर 2019  को केंद्र सरकार के खिलाफ विभिन्न मुद्दों को लेकर जयपुर में हुए प्रदर्शन के बाद गहलोत, खुद का भाषण पायलट से पहले कराने को लेकर नाखुश थे। उस वक़्त अशोक गहलोत, अपना भाषण खत्म करते ही मंच से रवाना हो गए थे। वे सचिन पायलट के भाषण तक भी नहीं रुके थे। 
  • आपको बता दें की राजनीतिक भाषण के दौरान मंच पर बैठने वाले सबसे शक्तिशाली नेता का भाषण सबसे आख़िरी में करवाया जाता है। और सचिन पायलट से पहले भाषण देना अशोक गहलोत के ल्ये अपमानजनक रहा होगा। 
  • नागरिकता संशोधन बिल के खिलाफ जयपुर में दिए गए धरने में भी गहलोत ने अपना भाषण पायलट से पहले दिया था, जिसके बाद वह मुंबई जाने की बात कह कर रवाना हो गए थे।
  • मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा था कि काँग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट को उनके बेटे वैभव गहलोत की जोधपुर से हार की भी ज़िम्मेदारी लेनी चाहिए। 
  • गहलोत समर्थक, सचिन पायलट को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाने को लेकर काफी समय से प्रयास कर रहे हैं।

सचिन पायलट का प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में सफल कार्यकाल

  • राजस्थान के उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट ने राज्य के इतिहास में प्रदेश कांग्रेस कमेटी का सबसे लंबे समय तक अध्यक्ष बने रहने का रिकॉर्ड कायम किया है।
  • साल, 2013 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की करारी हार के बाद केंद्रीय नेतृत्व ने सचिन पायलट को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर 21 जनवरी, 2014 को राजस्थान में भेजा था।
  • उस समय 200 सदस्यीय विधानसभा में कांग्रेस के मात्र 20 विधायक निर्वाचित हुए थे। उसके बाद पायलट के नेतृत्व में 2014 के लोकसभा चुनाव हुए, जिसमें कांग्रेस सभी सीटें हार गईं।
  • उस हार के बाद पायलट के नेतृत्व में कोटा और धौलपुर उपचुनाव छोड़कर, पायलट के नेतृत्व में हर उपचुनाव में कांग्रेस ने जीत दर्ज की। अजमेर, अलवर लोकसभा और मांडलगढ़ विधानसभा उपचुनाव में भी कांग्रेस ने भाजपा से तीनों सीटें छीन ली थी।
  • 2018 का चुनाव भी सचिन पायलट के ही अध्यक्षता में लड़ा गया था, जिसके बाद काँग्रेस ने राजस्थान में सरकार बनाई थी, लेकिन मुख्यमंत्री का पद अशोक गहलोत को दे दिया गया था।

सचिन पायलट फिलहाल दिल्ली में मौजूद हैं। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का कहना है की भारतीय जनता पार्टी उनके विधायकों को खरीदने का प्रयास कर रही है। अशोक गहलोत खेमे से ये भी आवाज़ आ रही है की, सचिन पायलट भाजपा के संपर्क में हैं। मध्य प्रदेश में ज्योतिरादित्य सिंधिया के विद्रोह की तरह क्या राजस्थान की सरकार भी सचिन पायलट के गुस्से का शिकार हो जाएगी?  ये तो समय ही बताएगा। 

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