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थोड़ा हट के

बक्सवाहा के जंगल को बचाने संत भी आगे आए

बुंदेलखंड के बक्स्वाहा में हीरा खनन के लिए जंगल को काटे जाने की चल रही प्रक्रिया के विरोध का दौर जारी है। जंगल को बचाने संत समाज भी आगे आने लगा है।

बुंदेलखंड के बक्स्वाहा में जंगल को बचाने संत समाज भी आगे आने लगा है।(Pixabay)

बुंदेलखंड के बक्स्वाहा में हीरा खनन के लिए जंगल को काटे जाने की चल रही प्रक्रिया के विरोध का दौर जारी है। जंगल को बचाने संत समाज भी आगे आने लगा है। चित्रकूट प्रमुख द्वार के महंत स्वामी मदन गोपाल दास ने बक्स्वाहा के बम्हौरी गांव में पर्यावरण चौपाल लगाई और वृक्ष कटाई को रोकने पर जोर दिया। साथ ही वृक्षों से लिपटकर उन्हें बचाने का संकल्प लिया। बम्होरी में लगाई गई चौपाल में महंत स्वामी मदन गोपाल दास ने कहा कि वर्तमान समय में कोविड-19 के दौरान पेड़ का महत्व समझ में आ गया है। इसलिए जरुरी है कि बक्स्वाहा जंगल को बचाया जाए। इस संभावित कटाई को हर हाल में रोकना होगा। इस लड़ाई में जब तक स्थानीय निवासी आगे नहीं आएंगे तब तक यह लड़ाई अधूरी मानी जाएगी।


पर्यावरण प्रेमी रामबाबू तिवारी ने कहा कि यह पर्यावरण बचाओ अभियान लगातार गांव स्तर में चलाया जाएगा। बक्स्वाहा के जंगल की कटाई स्थानीय मुद्दा नहीं है यह राष्ट्रीय मुद्दा है, इसमें स्थानीय लोगों के साथ ही राष्ट्रीय स्तर के सभी पर्यावरण प्रेमी जन मानस को आगे आना होगा तभी सरकार बैकफुट में जाएगी। जिस प्रकार से सोशल मीडिया के माध्यम से इस लड़ाई को एक गति दी गई है, इसी प्रकार से गांव गांव में पर्यावरण बचाने को लेकर अन्नदान मुहिम चलाई जाएगी। स्थानीय निवासी दीपक बलेरा ने कहा कि वर्तमान समय में कंपनी के द्वारा यहां के स्थानीय लोगों को लालच दिया जाता है रोजगार-विकास के नाम को लेकर, इसलिए यहां के स्थानीय लोगों के बीच जागरुकता अभियान चलाया जाना जरुरी है।

कार्यक्रम का संचालन करते मयंक जैन ने बताया कि जिस प्रकार से सोशल मीडिया में लड़ाई लड़ी गई है, उसी प्रकार से यह लड़ाई रणनीति बनाकर लड़ना होगी, जिससे वृक्षों को बचाया जा सके। कार्यक्रम में प्रमुख रूप से रोहित बलेरा राकेश लोधी, राजेश कुमार, संतराम दशरथ लाला आदि मौजूद रहे। इस चैपाल से पहले जंगल में पेड़ों को बचाने के लिए चिपको आंदोलन चलाया गया। सभी ने पेड़ों से लिपटकर उन्हें बचाने का संकल्प लिया। इससे पहले नर्मदा नदी के संरक्षण की लड़ाई लड़ने वाले समर्थ भैया जी भी इस क्षेत्र का दौरा कर चुके हैं।

यह भी पढ़ें: बक्सवाहा की जंगल बचाओ मुहिम को सेलिब्रिटी का साथ

ज्ञात हो कि बक्स्वाहा के जंगल में हीरे का भंडार पाए जाने के बाद खनन का काम एक कंपनी को सौंपा जाने की तैयारी है। इस कंपनी को लगभग 382 हेक्टेयर वन क्षेत्र लीज पर दिया जाने वाला है। यह घना और समृद्ध जंगल तो है ही साथ में यहां से लोगों की आजीविका चलती है। इससे संस्कृति भी जुड़ी हुई है। यही कारण है कि सरकार की कोशिशों का विरोध शुरू हो गया है। बक्सवाहा के जंगल हीरा खनन के लिए निजी कंपनी को सौंपे जाने की प्रक्रिया के खिलाफ मामला एनजीटी में भी पहुंच गया है। जहां इस पर सुनवाई होनी है।(आईएएनएस-SHM)

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बारे में बात करते हुए योगी ने तारीफ की (wikimedia commons )

हमारा देश भारत अनेकता में एकता वाला देश है । हमारे यंहा कई धर्म जाती के लोग एक साथ रहते है , जो इसे दुनिया में सबसे अलग श्रेणी में ला कर खड़ा करता है । योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं । उन्होंने एक बयान में कहा कि नई थ्योरी में पता चला है कि पूरे देश का डीएनए एक है। यहां आर्य-द्रविण का विवाद झूठा और बेबुनियाद रहा है। भारत का डीएनए एक है इसलिए भारत एक है। साथ ही उन्होंने कहा की दुनिया की तमाम जातियां अपने मूल में ही धीरे धीरे समाप्त होती जा रही हैं , जबकि हमारे भारत देश में फलफूल रही हैं। भारत ने ही पूरी दुनिया को वसुधैव कुटुंबकम का भाव दिया है इसलिए हमारा देश श्रेष्ठ है। आप को बता दे कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शनिवार को युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ की व राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ की पुण्यतिथि पर आयोजित एक श्रद्धांजलि समारोह का शुरुआत करने गये थे। आयोजन के पहले दिन मुख्यमंत्री ने कहा कि कोई भी ऐसा भारतीय नहीं होगा जिसे अपने पवित्र ग्रन्थों वेद, पुराण, उपनिषद, रामायण, महाभारत आदि की जानकारी न हो। हर भारतीय परम्परागत रूप से इन कथाओं ,कहनियोंको सुनते हुए, समझते हए और उनसे प्रेरित होते हुए आगे बढ़ता है।

साथ ही मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे यंहा के कोई भी वेद पुराण हो या ग्रंथ हो इनमे कही भी नहीं कहा गया की हम बहार से आये थे । हमारे ऐतिहासिक ग्रन्थों में जो आर्य शब्द है वह श्रेष्ठ के लिए और अनार्य शब्द का प्रयोग दुराचारी के लिए कहा गया है। मुख्यमंत्री योगी ने रामायण का उदाहरण भी दिया योगी ने कहा कि रामायण में माता सीता ने प्रभु श्रीराम की आर्यपुत्र कहकर संबोधित किया है। लेकिन , कुटिल अंग्रेजों ने और कई वामपंथी इतिहासकारों के माध्यम से हमारे इतिहास की किताबो में यह लिखवाया गया कि आर्य बाहर से आए थे । ऐसे ज्ञान से नागरिकों को सच केसे मालूम चलेगा और ईसका परिणाम देश लंबे समय से भुगतता रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बारे में बात करते हुए योगी ने कहा कि , आज इसी वजह से मोदी जी को एक भारत-श्रेष्ठ भारत का आह्वान करना पड़ा। आज मोदी जी के विरोध के पीछे एक ही बात है। साथ ही वो विपक्ष पर जम के बरसे। उन्होंने मोदी जी के बारे में आगे कहा कि उनके नेतृत्व में अयोध्या में पांच सौ वर्ष पुराने विवाद का समाधान हुआ है। यह विवाद खत्म होने से जिनके खाने-कमाने का जरिया बंद हो गया है तो उन्हें अच्छा कैसे लगेगा।

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अल्जाइमर रोग एक मानसिक विकार है। (unsplash)

ऑस्ट्रेलिया के शोधकर्ताओं ने एक अभूतपूर्व अध्ययन में 'ब्लड-टू-ब्रेन पाथवे' की पहचान की है जो अल्जाइमर रोग का कारण बन सकता है। कर्टिन विश्वविद्यालय जो कि ऑस्ट्रेलिया के पर्थ शहर में है, वहाँ माउस मॉडल पर परीक्षण किया गया था, इससे पता चला कि अल्जाइमर रोग का एक संभावित कारण विषाक्त प्रोटीन को ले जाने वाले वसा वाले कणों के रक्त से मस्तिष्क में रिसाव था।

कर्टिन हेल्थ इनोवेशन रिसर्च इंस्टीट्यूट के निदेशक प्रमुख जांचकर्ता प्रोफेसर जॉन मामो ने कहा "जबकि हम पहले जानते थे कि अल्जाइमर रोग से पीड़ित लोगों की पहचान विशेषता बीटा-एमिलॉयड नामक मस्तिष्क के भीतर जहरीले प्रोटीन जमा का प्रगतिशील संचय था, शोधकर्ताओं को यह नहीं पता था कि एमिलॉयड कहां से उत्पन्न हुआ, या यह मस्तिष्क में क्यों जमा हुआ," शोध से पता चलता है कि अल्जाइमर रोग से पीड़ित लोगों के दिमाग में जहरीले प्रोटीन बनते हैं, जो रक्त में वसा ले जाने वाले कणों से मस्तिष्क में रिसाव की संभावना रखते हैं। इसे लिपोप्रोटीन कहा जाता है।

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Wikimedia Commons)

शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) सम्मेलन को संम्बोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चरमपंथ और कट्टरपंथ की चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए एससीओ द्वारा एक खाका विकसित करने का आह्वान किया। 21वीं बैठक को संम्बोधित करते हुए उन्होंने कहा कि मध्य एशिया में अमन के लिए सबसे बड़ी चुनौती है विश्वास की कमी।

इसके अलावा, पीएम मोदी ने विश्व के नेताओं से यह सुनिश्चित करने का आह्वान किया कि मानवीय सहायता अफगानिस्तान तक निर्बाध रूप से पहुंचे। मोदी ने कहा, "अगर हम इतिहास में पीछे मुड़कर देखें, तो हम पाएंगे कि मध्य एशिया उदारवादी, प्रगतिशील संस्कृतियों और मूल्यों का केंद्र रहा है।
"भारत इन देशों के साथ अपनी कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है और हम मानते हैं कि भूमि से घिरे मध्य एशियाई देश भारत के विशाल बाजार से जुड़कर अत्यधिक लाभ उठा सकते हैं"

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