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ओपिनियन

“संघी टाइप्स” यह उदारवादियों की किस तरह की मानसिकता को उजागर करता है?

इन तथाकथित लिबरलधारियों में हिन्दू धर्म के प्रति इतनी कुंठा किस प्रकार है? आखिर क्यों वह इस तरह की मानसिकता से पीड़ित हैं?

इस ऑडियो में एक स्पीकर ने अपनी असहिष्णुता का परिचय देते हुए “संघी” लगों को “हॉट” कहा है| (सांकेतिक चित्र, Pixabay)

9 जून को, सोशल मीडिया प्रभावितों के बीच क्लब हाउस की बातचीत का एक ऑडियो सामने आया है। जिसके बाद इस ऑडियो ने ट्विटर पर फिर एक बार लिबरलधारियों को एक्टिव कर दिया है। इस ऑडियो में एक स्पीकर ने अपनी असहिष्णुता का परिचय देते हुए “संघी” (Sanghi types) लगों को “हॉट” कहा और उनके साथ ‘हेट सेक्स’ यानी ऐसे यौन संबंध बनाने की बात कर रहे हैं, जिसमें विचारों के आधार पर आप एक दूसरे से नफ़रत करते हैं। लेकिन सेक्स करते हैं। इसे “जबरन सेक्स” के रूप में भी समझा जा सकता है। जो एक तरह का क्राइम भी माना जाता है। 

इस ऑडियो को टविटर पर शेयर करने वाले स्क्वीनॉन ने इसे “सेक्स जिहाद” बताया है और कमरे के सदस्यों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। 


पूरा मुद्दा क्या है? 

इस क्लब हाउस के एक रूम या ग्रुप का नाम है “सेक्स विद योर एक्स”। बातचीत के दौरान उनमें से ही किसी ने पूछा कि “Do You Only Date Hot People” (क्या आप केवल हॉट लोगों के साथ डेट करना पसंद करते हैं?) तो उसी रूम में मौजूद एक स्पीकर नीरज कदुंबर (Neeraj Kadamboor) से जब यह सवाल पूछा गया तो उनका जवाब था “वैसे तो मैं सभी के साथ डेट कर लेता हूं, पर डेटिंग ऐप्स पर मुझे कभी – कभी “संघी टाइप” (Sanghi Types) के लोगों ने साथ डेट करना पसंद है। नीरज ने आगे कहा कि यह “पेपर बैग सेक्स” (जहां साथी का चेहरा कवर कर दिया जाता है और फिर सेक्स किया जाता है) की तरह है।

“संघी टाइप” लोगों से आप क्या समझते हैं? असल में संघी कौन होते हैं? 

संघी मुख्य रूप से वह लोग होते हैं, जो किसी भी संघ या समूह से संबधित होते है। जैसे हम कांग्रेस संघी बोलते हैं या बीजेपी संघी बोलते हैं। क्योंकि वह व्यक्ति उस पार्टी से संबद्ध रखता है। आज कल इसका भी रूप बदल गया है। आज संघी उन लोगों को माना जाता है, जो हिन्दू धर्म (Hindu religion) और उसकी मान्यताओं के पक्ष में हो। जैसे: राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ। और संघी उन्हें भी कहा जाता है, जो भाजपा का समर्थन करता हो। संघी कोई भी हो सकता है चाहे महिला हो या पुरुष। 

हमारे समाज में खुद को लिबरल कहने वाले लोग ही असल में हिन्दू धर्म के सबसे बड़े विरोधी हैं। हिन्दू धर्म और उससे संबंधित लोगों से घृणा करते हैं। उसी सोच से पीड़ित ये तथाकथित लिबरल ‘हॉट संघीस’ को डेट करना, उनके साथ टाइम पास करना पसंद करते हैं। हालांकि जैसे ही इस ऑडियो ने ट्विटर पर अपना उफान मचाना शुरू किया तो कुछ लोग तुरंत मसीहा बन इस बात को सही ठहराने से बिल्कुल भी नहीं चुके।

ऐसी कई और भी मुद्दे हैं जिन्हें दबा दिया जाता है। जहां लोग “मजे” लेते हैं और एक आवाज तक नहीं उठती है। (Pexels)

इंडिया टुडे की पूर्व पत्रकार सुब्रमण्यम कपिला (Aishwarya Subramanyam) जैसे अन्य लोग सोशल मीडिया प्रभावितों के साथ क्लब हाउस की बातचीत का हिस्सा थीं। उन्होंने उदारवादियों की इस तुच्छ मानसिकता को उचित ठहराते हुए कहा कि, नीरज की कल्पना में यह ठीक है, क्योंकि वह समलैंगिक (Gay) है और वह संघी ‘पुरुषों’ को बोल रहा था न कि ‘महिलाओं’ को। 

हमारे देश में करोड़ों लोग डेटिंग ऐप्स पर बातचीत करते हैं। सोशल मीडिया पर अपने विचार व्यक्त करते हैं। गंभीर मुद्दों पर भी अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हैं। और इन सब के बीच तुच्छ मानसिकता वाले लोग अपनी घृणित टिप्पणियाँ करने से, महिलाओं का मजाक उड़ाने से पीछे नहीं हटते हैं। स्पष्ट रूप से या अस्पष्ट रूप से दोनों ही तरीकों से मजाक बनाया जाता है। ऐसे में नीरज कदुंबर की बात को सिर्फ इसलिए दरकिनार कर दिया जाए की वह “संघी पुरुषों” की बात कर रहा था, संघी महिलाओं की नहीं। तो यह ग़लत है! 

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इस तरह की सोच ही समाज के लिए खतरनाक है। इसके अतिरिक्त इस “संघी टाइप्स” लोगों से एक और मानसिकता निकल कर सामने आती है। वह है “हिन्दू धर्म विरोधी” हम आपको पहले बता चुके हैं कि संघी कौन लोग होते हैं। इन तथाकथित लिबरलधारियों में हिन्दू धर्म के प्रति इतनी कुंठा किस प्रकार है? आखिर क्यों वह इस तरह की मानसिकता से पीड़ित हैं? बहरहाल ऐसी कई और भी मुद्दे हैं जिन्हें दबा दिया जाता है। जहां लोग “मजे” लेते हैं और एक आवाज तक नहीं उठती है। 

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मोदी ने अपने संबोधन में कहा, "जब भारत बढ़ता है, तो दुनिया बढ़ती है। (IANS)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा के समक्ष 22 मिनट के अपने संबोधन में 'अद्वितीय' पैमाने पर विज्ञान, प्रौद्योगिकी, संस्कृति और समस्या-समाधान क्षमता के संदर्भ में भारत की शक्ति के विचार को सामने रखा। पीएम मोदी ने जोर देकर कहा कि जब भारतीयों की प्रगति होती है तो विश्व के विकास को भी गति मिलती है। मोदी ने अपने संबोधन में कहा, "जब भारत बढ़ता है, तो दुनिया बढ़ती है। जब भारत में सुधार होता है, तो दुनिया बदल जाती है। भारत में हो रहे विज्ञान और प्रौद्योगिकी आधारित नवाचार दुनिया में एक बड़ा योगदान दे सकते हैं। हमारे तकनीकी समाधानों की मापनीयता और उनकी लागत-प्रभावशीलता दोनों अद्वितीय हैं।"

पेश हैं मोदी के भाषण की 10 खास बातें:

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लोकतंत्र: सबसे लंबे समय तक गुजरात का मुख्यमंत्री और फिर पिछले 7 साल से भारत के प्रधानमंत्री के तौर पर मुझे हेड ऑफ गवर्मेट की भूमिका में देशवासियों की सेवा करते हुए 20 साल हो रहे हैं। मैं अपने अनुभव से कह रहा हूं। हां, लोकतंत्र उद्धार कर सकता है। हां. लोकतंत्र ने उद्धार किया है।"

बैंकिंग: "बीते सात वर्षों में भारत में 43 करोड़ से ज्यादा लोगों को बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ा गया है, जो अब तक इससे वंचित थे। आज 36 करोड़ से अधिक ऐसे लोगों को भी बीमा सुरक्षा कवच मिला है, जो पहले इस बारे में सोच भी नहीं सकते थे।"

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भारत और भारतीय: "दुनिया का हर छठा व्यक्ति भारतीय है। जब भारतीय प्रगति करते हैं, तो दुनिया के विकास को भी गति मिलती है। जब भारत बढ़ता है, तो दुनिया बढ़ती है। जब भारत सुधार करता है, तो दुनिया बदल जाती है।"

विज्ञान और तकनीक: "भारत में हो रहे विज्ञान और प्रौद्योगिकी आधारित नवाचार दुनिया में एक बड़ा योगदान दे सकते हैं। हमारे तकनीकी समाधानों का स्केल और उनकी कम लागत, दोनों अतुलनीय है। भारत में यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (यूपीआई) के जरिए हर महीने 3.5 अरब से ज्यादा ट्रांजेक्शन हो रहे हैं।"

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वैक्सीन : "मैं यूएनजीए को ये जानकारी देना चाहता हूं कि भारत ने दुनिया की पहली डीएनए वैक्सीन विकसित कर ली है, जिसे 12 साल की आयु से ज्यादा के सभी लोगों को लगाया जा सकता है। एक और एमआरएनए टीका विकास के अंतिम चरण में है।" निवेश का अवसर: "मैं दुनिया भर के वैक्सीन निमार्ताओं को भी निमंत्रण देता हूं। आओ, भारत में वैक्सीन बनाएं।"

आतंकवाद: "प्रतिगामी सोच वाले देश आतंकवाद को एक राजनीतिक उपकरण के रूप में उपयोग कर रहे हैं। इन देशों को यह समझना चाहिए कि आतंकवाद उनके लिए भी उतना ही बड़ा खतरा है। साथ ही, यह सुनिश्चित करना नितांत आवश्यक है कि अफगानिस्तान के क्षेत्र का उपयोग आतंकवाद फैलाने या आतंकवादी हमलों के लिए न हो।"

आतंकवाद से निपटने पर जोर देते हुए पीएम मोदी ने आगे कहा, "हमें इस बात के लिए भी सतर्क रहना होगा कि वहां की नाजुक स्थितियों का कोई देश, अपने स्वार्थ के लिए, एक टूल की तरह इस्तेमाल करने की कोशिश ना करे। इस समय अफगानिस्तान की जनता को, वहां की महिलाओं और बच्चों को, वहां के अल्पसंख्यकों को मदद की जरूरत है और इसमें हमें उन्हें सहायता प्रदान करके अपना दायित्व निभाना ही होगा।" (आईएएनएस-SM)


पूर्वोत्तर सीमा क्षेत्र बहुत संवेदनशील हैं और उनके लिए तोड़फोड़ के ऐसे प्रयासों के बारे में जानना नितांत आवश्यक है। (Unsplash)

भारत चीन सीमा पर बसे हुए गांव चिंता का विषय हैं। हैग्लोबल काउंटर टेररिज्म काउंसिल के सलाहकार बोर्ड ने एक बड़ी सूचना देते हुए बड़ा खुलासा किया है कि चीन ने भारत के साथ अपनी सीमा पर 680 'जियाओकांग' (समृद्ध या संपन्न गांव) बनाए हैं। ये गांव भारतीय ग्रामीणों को बेहतरीन चीनी जीवन की और प्रभावित करने के लिए हैं।

कृष्ण वर्मा, ग्लोबल काउंटर टेररिज्म काउंसिल के सलाहकार बोर्ड के एक सदस्य ने आईएएनएस को बताया, " ये उनकी ओर से खुफिया मुहिम और सुरक्षा अभियान है। वे लोगों को भारत विरोधी बनाने की कोशिश कर रहे हैं। इसलिए हम अपने पुलिस कर्मियों को इन प्रयासों के बारे में अभ्यास दे रहे हैं और उन्हें उनकी हरकतों का मुकाबले का सामना करने के लिए सक्षम बना रहे हैं। चीनी सरकार के द्वारा लगभग 680 संपन्न गांव का निर्माण किया जा चुका है। जो चीन और भूटान की सीमाओं पर हैं। इस गांव में चीन के स्थानीय नागरिक भारतीयों को प्रभावित करते है कि चीनी सरकार बहुत अच्छी है। शुक्रवार को भारत सरकार के पूर्व विशेष सचिव वर्मा गुजरात के गांधीनगर में राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय (आरआरयू) में 16 परिवीक्षाधीन उप अधीक्षकों (डीवाईएसपी) के लिए 12 दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम के समापन के अवसर पर एक कार्यक्रम में थे।

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बड़े देशों के एक समूह ने 'नो न्यू कोल पावर कॉम्पेक्ट' की घोषणा की है।(Canva)

विदेशी कोयला बिजली वित्त को रोकने की चीन की घोषणा के बाद, श्रीलंका, चिली, डेनमार्क, फ्रांस, जर्मनी, मोंटेनेग्रो और यूके जैसे देशों के एक समूह ने 'नो न्यू कोल पावर कॉम्पेक्ट' की घोषणा की है। इसका उद्देश्य अन्य सभी देशों को नए कोयले से चलने वाले बिजली संयंत्रों के निर्माण को रोकने के लिए प्रोत्साहित करना है ताकि 1.5 डिग्री सेल्सियस के लक्ष्य तक पहुंचा जा सके। पहली बार, विकसित और विकासशील देशों का एक विविध समूह नए कोयले से चलने वाले बिजली उत्पादन को समाप्त करने के वैश्विक प्रयासों को गति देने के लिए एक साथ आया है। उनकी नई पहल के लिए हस्ताक्षरकर्ताओं को वर्ष के अंत तक कोयले से चलने वाली बिजली उत्पादन परियोजनाओं के नए निर्माण की अनुमति तुरंत बंद करने और समाप्त करने की आवश्यकता है।

ये देश अन्य सभी सरकारों से इन कदमों को उठाने और संयुक्त राष्ट्र जलवायु शिखर सम्मेलन सीओपी26 से पहले समझौते में शामिल होने का आह्वान कर रहे हैं ताकि शिखर सम्मेलन के महत्वाकांक्षी लक्ष्य को "इतिहास को कोयले की शक्ति सौंपने" में मदद मिल सके। नो न्यू कोल पावर कॉम्पेक्ट, संयुक्त राष्ट्र महासचिव के आह्वान का जवाब देता है कि इस साल नए कोयले से चलने वाली बिजली का निर्माण समाप्त करने के लिए, 1.5 डिग्री सेल्सियस लक्ष्य को पहुंच के भीतर रखने और जलवायु परिवर्तन के विनाशकारी प्रभावों से बचने के लिए पहला कदम है। साथ ही सस्ती और स्वच्छ ऊर्जा प्रदान करने के लिए सतत विकास लक्ष्य 7 को प्राप्त करना है।

एनर्जी कॉम्पैक्ट्स जीवित दस्तावेज हैं और अन्य देशों को इसमें शामिल होने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। समूह का लक्ष्य जल्द से जल्द नए हस्ताक्षरकर्ताओं की सबसे बड़ी संख्या को इकट्ठा करना है। ऊर्जा पर संयुक्त राष्ट्र उच्च स्तरीय वार्ता 40 वर्षो में पहली बार ऊर्जा पर चर्चा करने वाला एक महासचिव के नेतृत्व वाला शिखर सम्मेलन है। यह जलवायु लक्ष्यों को आगे बढ़ाने में ऊर्जा की महत्वपूर्ण भूमिका के साथ-साथ कोविड रिकवरी प्रक्रियाओं सहित विकास प्राथमिकताओं को पहचानता है। श्रीलंका और चिली ने हाल ही में नई कोयला परियोजनाओं को रद्द करने और राजनीतिक बयान देने में नेतृत्व दिखाया है कि वे अब नई कोयला शक्ति का पीछा नहीं करेंगे। डेनमार्क, फ्रांस, जर्मनी, मोंटेनेग्रो और यूके ने अपनी पिछली कोयला परियोजनाओं को पहले ही रद्द कर दिया है और अब वे अपने शेष कोयला बिजली उत्पादन की सेवानिवृत्ति में तेजी लाने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।

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