Never miss a story

Get subscribed to our newsletter


×
संस्कृति

संकट मोचन हनुमान मंदिर: जहां हनुमान जी ने तुलसीदास जी को अपने दर्शन दिए थे।

कहा जाता है कि, इस मंदिर में हनुमान जी के दर्शन से सभी संकट दूर हो जाते हैं। कई समस्याओं का समाधान हो जाता है। इसलिए इस मंदिर को संकट मोचन कहा जाता है।

यह वही मंदिर है, जहां गोस्वामी तुलसीदास (Goswami Tulsidas) को भगवान हनुमान जी ने अपने दर्शन दिए थे। (Wikimedia Commons)

काशी (Kashi), वर्तमान वाराणसी शहर में स्थित एक पौराणिक नगरी है। यहां के घाट, मंदिर और गंगा विश्वभर में काशी की प्रसिद्धि का सबसे बड़ा प्रतीक हैं। आज हम वहीं के एक प्रसिद्ध मंदिर संकट मोचन हनुमान मंदिर के बारे में जानेंगे। यह काशी विश्वनाथ मंदिर के बाद सबसे अधिक देखा जाने वाला मंदिर है। कहा जाता है कि, इस मंदिर में हनुमान जी के दर्शन से सभी संकट दूर हो जाते हैं। कई समस्याओं का समाधान हो जाता है। इसलिए इस मंदिर को संकट मोचन कहा जाता है। 

काशी, वाराणसी (Varanasi) शहर के गंगा नदी के किनारे अस्सी घाट पर भगवान हनुमान जी का यह मंदिर आस्था और विश्वास का बहुत बड़ा धार्मिक स्थल माना जाता है। संकट मोचन नाम से प्रसिद्ध इस मंदिर का इतिहास 400 साल से भी अधिक पुराना है। आपको बता दें कि, यह वही मंदिर है, जहां गोस्वामी तुलसीदास (Goswami Tulsidas) को भगवान हनुमान जी ने अपने दर्शन दिए थे। जिस स्थान पर हनुमान जी ने अपने दर्शन दिए थे, उसी स्थान पर आज उनकी प्रतिमा भी स्थापित है।


मंदिर से जुड़ी पौराणिक कथा इस प्रकार है।

इस मंदिर की स्थापना 16 वीं शताब्दी में स्वयं तुलसीदास (Tulsidas) जी द्वारा की गई थी। पौराणिक कथा के अनुसार तुलसीदास, भगवान श्रीराम के अनन्य भक्तों में से एक थे। उनके द्वारा ही विश्वप्रसिद्ध महाकाव्य रामचरितमानस की रचना की गई थी। जिस दौरान तुलसीदास जी रामचरितमानस की रचना कर रहे थे, वह काशी में थे। प्रतिदिन स्नान – ध्यान के बाद वह नियम पूर्वक पीपल के वृक्ष पर जल चढ़ाया करते थे और आते – जाते श्रद्धालुओं को रामचरितमानस (Ramcharitmanas) का पाठ पढ़कर सुनाया करते थे। इसी क्रम में जब एक बार तुलसीदास जी वृक्ष पर जल चढ़ा रहे थे, तब उसी वृक्ष से एक प्रेत (मान्यता) प्रकट हुआ और उसने तुलसीदास से पूछा “क्या आप भगवान श्रीराम से मिलना चाहते हैं? मैं आपको उनसे मिला सकता हूं। लेकिन उससे पहले आपको हनुमान जी से मिलना होगा। तुलसीदास जी ने पूछा “लेकिन उनसे मिलवाएगा कौन? 

पौराणिक कथा के अनुसार तुलसीदास, भगवान श्रीराम के अनन्य भक्तों में से एक थे। उनके द्वारा ही विश्वप्रसिद्ध महाकाव्य रामचरितमानस की रचना की गई थी। (Wikimedia Commons)

तब उस प्रेत ने उन्हें बताया कि, उनकी रामकथा सुनने प्रतिदिन एक वृद्ध कुष्ठ रोगी भी आता है। वह और कोई नहीं, स्वयं हनुमान जी हैं। इसके बाद एक दिन जब तुलसीदास जी कथा सुना रहे थे तो, सदैव की भांति वह वृद्ध कुष्ठ रोगी सबसे आखिर में बैठा हुआ था। तुलसीदास जी का भी उन पर ध्यान गया। जब कथा समाप्त हुई तो तुलसीदास जी ने, उस वृद्ध को रोका और उनके पैरों को पकड़कर बोले “मुझे पता है प्रभु आप ही हनुमान हैं। कृपया अपने दर्शन दीजिए।” इसके बाद महावीर बजरंग बली ने तुलसीदास जी को अपने दर्शन दिए। और आज वहीं पर उनका यह संकट मोचन मंदिर स्थापित है। 

इस मंदिर पर जब हुआ था आतंकी हमला..

2006 में वाराणसी शहर में आतंकवादियों द्वारा 3 विस्फोट किए गए थे। यह तीन आतंकी विस्फोट रेलवे कैंट, दशाश्वमेघ घाट और संकट मोचन हनुमान मंदिर के अन्दर भी हुआ था। यह आतंकी हमला इस्लामी आतंकियों द्वारा किया गया था। जिस दौरान यह विस्फोट हुआ, उस समय मंदिर में आरती हो रही थी। भारी मात्रा में श्रद्धालु वहां उपस्थित थे। उस वक्त इस आतंकी हमले में 7 से 10 लोगों की जान चली गई थी और कई लोग घायल भी हुए थे। हालांकि इस घटना के बाद से मंदिर परिसर की सुरक्षा को बढ़ा दिया गया है। यह इस्लामिक (Islamic) कट्टरपंथी कितने भी प्रयास कर ले पर हिन्दुओं की आस्था और उनके आराध्य के दर्शन से उन्हें कभी नहीं रोक पाऐंगे। 

संकट मोचन हनुमान| (Wikimedia Commons)

क्या तुलसीदास जी को भगवान श्रीराम के दर्शन हुए थे? 

हनुमान जी से मिलने के पश्चात तुलसीदास जी ने उनसे भगवान राम के दर्शन कराने का अनुरोध किया था। तब हनुमान जी ने तुलसीदास जी से कहा, इसके लिए आपको चित्रकूट चलना पड़ेगा। तुलसीदास जी चित्रकूट आए। वहां एक मंदिर के निकट बैठ गए। हनुमान जी ने तुलसीदास जी से कहा ध्यान रखना इस मार्ग से आपको दो बड़े ही सुन्दर राजकुमार घोड़े और धनुष के साथ आते दिखाई देंगे। वहीं श्रीराम और लक्ष्मण हैं।

तुलसीदास जी उस मार्ग पर आंख लगाए बैठ रहे की उन्हें श्रीराम के दर्शन होंगे। जब उस मार्ग से दो सुंदर बालक गुजरे तो तुलसीदास जी उन्हें देख कर आकृषित तो हुए पर उन्हें पहचान नहीं पाए। 

यह भी पढ़ें :- क्यों भगवान राम और कृष्ण को नीले रंग में वर्णित किया गया है?

हनुमान जी ने उनसे कहा, चिंता मत करिए प्रातःकाल आपको फिर उनके दर्शन होंगे। इस बार ध्यान रखिएगा। प्रातःकाल तुलसीदास जी रामघाट पर अपना आसन लगाए बैठ गए और भगवान की प्रतीक्षा करने लगे। तभी फिर दो सुंदर बालक तुलसीदास जी के पास आए और उनसे कहा “बाबा क्या आप हमें चंदन का तिलक लगा देंगे।” तुलसीदास जी चंदन घिसने लगे। हनुमान जी ने जब देखा कि, तुलसीदास जी तो अब भी प्रभु को नहीं पहचान पा रहे हैं। तब उन्होंने एक तोते का रूप धारण किया और यह दोहा बोला:

चित्रकूट के घाट पर, भइ सन्तन की भीर।

तुलसीदास चन्दन घिसें, तिलक देत रघुबीर॥

तुलसीदास जी यह वाणी सुनते ही चौंके और प्रभु श्रीराम को पहचान गए। उनकी छवि को निहारते हुए उन्होंने प्रभु श्रीराम को चंदन का तिलक लगाया। भगवान ने उन्हें दर्शन दिए, तुलसीदास जी को चंदन का तिलक किया और उसके पश्चात अन्तर्ध्यान हो गए। 

Popular

मोदी ने अपने संबोधन में कहा, "जब भारत बढ़ता है, तो दुनिया बढ़ती है। (IANS)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा के समक्ष 22 मिनट के अपने संबोधन में 'अद्वितीय' पैमाने पर विज्ञान, प्रौद्योगिकी, संस्कृति और समस्या-समाधान क्षमता के संदर्भ में भारत की शक्ति के विचार को सामने रखा। पीएम मोदी ने जोर देकर कहा कि जब भारतीयों की प्रगति होती है तो विश्व के विकास को भी गति मिलती है। मोदी ने अपने संबोधन में कहा, "जब भारत बढ़ता है, तो दुनिया बढ़ती है। जब भारत में सुधार होता है, तो दुनिया बदल जाती है। भारत में हो रहे विज्ञान और प्रौद्योगिकी आधारित नवाचार दुनिया में एक बड़ा योगदान दे सकते हैं। हमारे तकनीकी समाधानों की मापनीयता और उनकी लागत-प्रभावशीलता दोनों अद्वितीय हैं।"

पेश हैं मोदी के भाषण की 10 खास बातें:

आकांक्षा: "ये भारत के लोकतंत्र की ताकत है कि एक छोटा बच्चा जो कभी एक रेलवे स्टेशन के टी-स्टॉल पर अपने पिता की मदद करता था, वो आज चौथी बार, भारत के प्रधानमंत्री के तौर पर यूएनजीए को संबोधित कर रहा है।

लोकतंत्र: सबसे लंबे समय तक गुजरात का मुख्यमंत्री और फिर पिछले 7 साल से भारत के प्रधानमंत्री के तौर पर मुझे हेड ऑफ गवर्मेट की भूमिका में देशवासियों की सेवा करते हुए 20 साल हो रहे हैं। मैं अपने अनुभव से कह रहा हूं। हां, लोकतंत्र उद्धार कर सकता है। हां. लोकतंत्र ने उद्धार किया है।"

बैंकिंग: "बीते सात वर्षों में भारत में 43 करोड़ से ज्यादा लोगों को बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ा गया है, जो अब तक इससे वंचित थे। आज 36 करोड़ से अधिक ऐसे लोगों को भी बीमा सुरक्षा कवच मिला है, जो पहले इस बारे में सोच भी नहीं सकते थे।"

स्वास्थ्य देखभाल: "50 करोड़ से ज्यादा लोगों को मुफ्त इलाज की सुविधा देकर, भारत ने उन्हें क्वालिटी हेल्थ सर्विस से जोड़ा है। भारत ने 3 करोड़ पक्के घर बनाकर, बेघर परिवारों को घर का मालिक बनाया है।"

जलापूर्ति: "प्रदूषित पानी, भारत ही नहीं पूरे विश्व और खासकर गरीब और विकासशील देशों की बहुत बड़ी समस्या है। भारत में इस चुनौती से निपटने के लिए हम 17 करोड़ से अधिक घरों तक, पाइप से साफ पानी पहुंचाने का बहुत बड़ा अभियान चला रहे हैं।"

भारत और भारतीय: "दुनिया का हर छठा व्यक्ति भारतीय है। जब भारतीय प्रगति करते हैं, तो दुनिया के विकास को भी गति मिलती है। जब भारत बढ़ता है, तो दुनिया बढ़ती है। जब भारत सुधार करता है, तो दुनिया बदल जाती है।"

विज्ञान और तकनीक: "भारत में हो रहे विज्ञान और प्रौद्योगिकी आधारित नवाचार दुनिया में एक बड़ा योगदान दे सकते हैं। हमारे तकनीकी समाधानों का स्केल और उनकी कम लागत, दोनों अतुलनीय है। भारत में यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (यूपीआई) के जरिए हर महीने 3.5 अरब से ज्यादा ट्रांजेक्शन हो रहे हैं।"

यह भी पढ़ें :- खान को भारत का जवाब : पाकिस्तान 'आतंकवादियों का समर्थक, अल्पसंख्यकों का दमन करने वाला'

वैक्सीन : "मैं यूएनजीए को ये जानकारी देना चाहता हूं कि भारत ने दुनिया की पहली डीएनए वैक्सीन विकसित कर ली है, जिसे 12 साल की आयु से ज्यादा के सभी लोगों को लगाया जा सकता है। एक और एमआरएनए टीका विकास के अंतिम चरण में है।" निवेश का अवसर: "मैं दुनिया भर के वैक्सीन निमार्ताओं को भी निमंत्रण देता हूं। आओ, भारत में वैक्सीन बनाएं।"

आतंकवाद: "प्रतिगामी सोच वाले देश आतंकवाद को एक राजनीतिक उपकरण के रूप में उपयोग कर रहे हैं। इन देशों को यह समझना चाहिए कि आतंकवाद उनके लिए भी उतना ही बड़ा खतरा है। साथ ही, यह सुनिश्चित करना नितांत आवश्यक है कि अफगानिस्तान के क्षेत्र का उपयोग आतंकवाद फैलाने या आतंकवादी हमलों के लिए न हो।"

आतंकवाद से निपटने पर जोर देते हुए पीएम मोदी ने आगे कहा, "हमें इस बात के लिए भी सतर्क रहना होगा कि वहां की नाजुक स्थितियों का कोई देश, अपने स्वार्थ के लिए, एक टूल की तरह इस्तेमाल करने की कोशिश ना करे। इस समय अफगानिस्तान की जनता को, वहां की महिलाओं और बच्चों को, वहां के अल्पसंख्यकों को मदद की जरूरत है और इसमें हमें उन्हें सहायता प्रदान करके अपना दायित्व निभाना ही होगा।" (आईएएनएस-SM)


पूर्वोत्तर सीमा क्षेत्र बहुत संवेदनशील हैं और उनके लिए तोड़फोड़ के ऐसे प्रयासों के बारे में जानना नितांत आवश्यक है। (Unsplash)

भारत चीन सीमा पर बसे हुए गांव चिंता का विषय हैं। हैग्लोबल काउंटर टेररिज्म काउंसिल के सलाहकार बोर्ड ने एक बड़ी सूचना देते हुए बड़ा खुलासा किया है कि चीन ने भारत के साथ अपनी सीमा पर 680 'जियाओकांग' (समृद्ध या संपन्न गांव) बनाए हैं। ये गांव भारतीय ग्रामीणों को बेहतरीन चीनी जीवन की और प्रभावित करने के लिए हैं।

कृष्ण वर्मा, ग्लोबल काउंटर टेररिज्म काउंसिल के सलाहकार बोर्ड के एक सदस्य ने आईएएनएस को बताया, " ये उनकी ओर से खुफिया मुहिम और सुरक्षा अभियान है। वे लोगों को भारत विरोधी बनाने की कोशिश कर रहे हैं। इसलिए हम अपने पुलिस कर्मियों को इन प्रयासों के बारे में अभ्यास दे रहे हैं और उन्हें उनकी हरकतों का मुकाबले का सामना करने के लिए सक्षम बना रहे हैं। चीनी सरकार के द्वारा लगभग 680 संपन्न गांव का निर्माण किया जा चुका है। जो चीन और भूटान की सीमाओं पर हैं। इस गांव में चीन के स्थानीय नागरिक भारतीयों को प्रभावित करते है कि चीनी सरकार बहुत अच्छी है। शुक्रवार को भारत सरकार के पूर्व विशेष सचिव वर्मा गुजरात के गांधीनगर में राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय (आरआरयू) में 16 परिवीक्षाधीन उप अधीक्षकों (डीवाईएसपी) के लिए 12 दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम के समापन के अवसर पर एक कार्यक्रम में थे।

Keep Reading Show less

बड़े देशों के एक समूह ने 'नो न्यू कोल पावर कॉम्पेक्ट' की घोषणा की है।(Canva)

विदेशी कोयला बिजली वित्त को रोकने की चीन की घोषणा के बाद, श्रीलंका, चिली, डेनमार्क, फ्रांस, जर्मनी, मोंटेनेग्रो और यूके जैसे देशों के एक समूह ने 'नो न्यू कोल पावर कॉम्पेक्ट' की घोषणा की है। इसका उद्देश्य अन्य सभी देशों को नए कोयले से चलने वाले बिजली संयंत्रों के निर्माण को रोकने के लिए प्रोत्साहित करना है ताकि 1.5 डिग्री सेल्सियस के लक्ष्य तक पहुंचा जा सके। पहली बार, विकसित और विकासशील देशों का एक विविध समूह नए कोयले से चलने वाले बिजली उत्पादन को समाप्त करने के वैश्विक प्रयासों को गति देने के लिए एक साथ आया है। उनकी नई पहल के लिए हस्ताक्षरकर्ताओं को वर्ष के अंत तक कोयले से चलने वाली बिजली उत्पादन परियोजनाओं के नए निर्माण की अनुमति तुरंत बंद करने और समाप्त करने की आवश्यकता है।

ये देश अन्य सभी सरकारों से इन कदमों को उठाने और संयुक्त राष्ट्र जलवायु शिखर सम्मेलन सीओपी26 से पहले समझौते में शामिल होने का आह्वान कर रहे हैं ताकि शिखर सम्मेलन के महत्वाकांक्षी लक्ष्य को "इतिहास को कोयले की शक्ति सौंपने" में मदद मिल सके। नो न्यू कोल पावर कॉम्पेक्ट, संयुक्त राष्ट्र महासचिव के आह्वान का जवाब देता है कि इस साल नए कोयले से चलने वाली बिजली का निर्माण समाप्त करने के लिए, 1.5 डिग्री सेल्सियस लक्ष्य को पहुंच के भीतर रखने और जलवायु परिवर्तन के विनाशकारी प्रभावों से बचने के लिए पहला कदम है। साथ ही सस्ती और स्वच्छ ऊर्जा प्रदान करने के लिए सतत विकास लक्ष्य 7 को प्राप्त करना है।

एनर्जी कॉम्पैक्ट्स जीवित दस्तावेज हैं और अन्य देशों को इसमें शामिल होने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। समूह का लक्ष्य जल्द से जल्द नए हस्ताक्षरकर्ताओं की सबसे बड़ी संख्या को इकट्ठा करना है। ऊर्जा पर संयुक्त राष्ट्र उच्च स्तरीय वार्ता 40 वर्षो में पहली बार ऊर्जा पर चर्चा करने वाला एक महासचिव के नेतृत्व वाला शिखर सम्मेलन है। यह जलवायु लक्ष्यों को आगे बढ़ाने में ऊर्जा की महत्वपूर्ण भूमिका के साथ-साथ कोविड रिकवरी प्रक्रियाओं सहित विकास प्राथमिकताओं को पहचानता है। श्रीलंका और चिली ने हाल ही में नई कोयला परियोजनाओं को रद्द करने और राजनीतिक बयान देने में नेतृत्व दिखाया है कि वे अब नई कोयला शक्ति का पीछा नहीं करेंगे। डेनमार्क, फ्रांस, जर्मनी, मोंटेनेग्रो और यूके ने अपनी पिछली कोयला परियोजनाओं को पहले ही रद्द कर दिया है और अब वे अपने शेष कोयला बिजली उत्पादन की सेवानिवृत्ति में तेजी लाने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।

Keep reading... Show less